पूर्वाग्रह एवं विभेद | Prejudice and Discrimination

 

पूर्वाग्रह एवं विभेद क्या हैं  Prejudice and Discrimination

पूर्वाग्रह एवं विभेद  | Prejudice and Discrimination


 

पूर्वाग्रह क्या होता है 

  • पूर्वाग्रह किसी विशिष्ट समूह के प्रति अभिवृत्ति है, जो अनेक स्थितियों के विशिष्ट समूह के संबंध में रूढ़ धारणा एवं नकारात्मक होती है। 
  • समाज मनोविज्ञान में पूर्वाग्रह को सामान्यतः किसी प्रजातीय, मानवजातीय, धार्मिक समूह के सदस्य के प्रति एक नकारात्मक अभिवृत्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है। एक रूढ़ धारणा किसी विशिष्ट समूह की विशेषताओं के संबंध में विचारों का एक पुंज होता है।
  • प्रायः रूढ़ धारणाएँ तथ्य समूह के बारे में अवांछित विशेषताओं से युक्त होती हैं और ये विशिष्ट समूह के सदस्यों के बारे में एक नकारात्मक अभिवृत्ति या पूर्वाग्रह को जन्म देती है। 
  • पूर्वाग्रह की रूढ़ धारणा घटक के साथ प्रायः नापसंद, घृणा का भाव जुड़ा होता है।


पूर्वाग्रह विभेद के रूप में व्यवहारात्मक घटक रूपांतरित या अनूदित हो सकता है जब लोग एक विशिष्ट लक्ष्य समूह के प्रति उस समूह की तुलना में जिसे वे पसंद करते हैं, कम सकारात्मक तरीके से व्यवहार करने लगते हैं।

  • इतिहास में जाति, लिंग, प्रजाति, नस्लवाद, सामाजिक वर्ग आधारित विभेद के असंख्य उदाहरण है। जर्मनी में नाजियों के द्वारा यहूदियों के विरुद्ध किया गया प्रजाति संहार पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा का एक उदाहरण है जो यह प्रदर्शित करता है कि कैसे पूर्वाग्रह घृणा, भेदभाव, निर्दोष लोगों को सामूहिक संहार की ओर ले जाता है। 
  • भारतीय संदर्भ में जाति व्यवस्था जिसमें सवर्ण लोगों के द्वारा दलित, भिन्न वर्गों को संस्तरण में निम्न स्थान पर रखा जाता है, सवर्ण लोगों का पूर्वाग्रह है कि दलित, निम्नवर्ग का कर्म जो घृणाकृत करते हैं, अतः इन्हें निम्न स्थान देना चाहिए। पूर्वाग्रह के कारण ही विभेद का जन्म होता रहता है। 


  • वैसे पूर्वाग्रह बिना भेदभाव के रूप में प्रदर्शित होता है, साथ साथ बिना पूर्वाग्रह के भी भेदभाव प्रदर्शित होता रहता है। भेदभाव प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रकट अप्रकट रूप में किया जाता है। 
  • वैसे पूर्वाग्रह व विभेद दोनों प्रायः साथ-साथ ही चलते हैं जहाँ भी पूर्वाग्रह एवं भेदभाव रहता है, वहाँ एक ही समाज के समूहों में अंतर्द्वद्व उत्पन्न होने की संभावना बहुत प्रबल होती है। 
  • भारतीय समाज ने लिंग, धर्म समुदाय, जाति, शारीरिक विकलांगता, बीमारियाँ (एड्स, कैंसर) पर अधारित पूर्वाग्रहयुक्त या पूर्वाग्रहरहित भेदभाव को अनेक खेदजनक या दुःखद घटनाओं को देखा है 
  • जबकि भारतीय संविधान द्वारा इस प्रकार के पूर्वाग्रह के विभेद को कानूनी रूप से रोकने के लिए अथक प्रयास किया गया है किंतु दुःख की बात है कि उसके बाद भी पूर्वाग्रह एवं विभेद भारतीय समाज में विद्यमान है। 

  • इस पूर्वाग्रह एवं विभेद के साधारण एवं भावनात्मक घटकों को परिवर्तित करना बहुत कठिन है। जैसे आज भी भारतीय समाज के हरिजनों एवं पिछड़ी जाति के प्रति कथित सवर्ण लोगों में नकारात्मक अभिवृत्ति होती है। ये प्राय: इन लोगों को हीन दृष्टि से देखते है तथा उनके प्रति भेदभाव दिखलाते हैं।

 

उदाहरणार्थ, 

एक हिन्दू अपने घर में मुस्लिम किराएदार रखने के प्रति पूर्वाग्रहित नहीं हो सकता है फिर भी वह मोहल्लेवासियों के डर से अपना घर उसे किराए पर देने से इंकार कर सकता है। यहाँ विभेद तो हो रहा है परन्तु उसके पीछे कोई पूर्वाग्रह नहीं है।

 

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