पूर्वाग्रह एवं विभेद को कम करने की विधियाँ |Methods to reduce Prejudice and discrimination in Hindi

पूर्वाग्रह एवं विभेद को कम करने की विधियाँ 

पूर्वाग्रह एवं विभेद को कम करने की विधियाँ |Methods to reduce Prejudice and discrimination in Hindi



पूर्वाग्रह एक ऐसी मनोवृत्ति है जिसका सामाजिक कुप्रभाव स्पष्ट रूप से हमें देखने को मिलता है। पूर्वाग्रह के कारण अन्तरवैयक्तिक संघर्ष (Interpersonal conflict) जातीय दंगे आदि प्राय: देखने को मिलते हैं अतः समाज मनोवैज्ञानिकों ने  कुछ वैसी विधियों एवं तरीकों का भी वर्णन किया है जिसके द्वारा पूर्वाग्रह और उससे उत्पन्न भेदभाव को आसानी से कम किया जा सकता है -


 1. व्यक्तित्व परिवर्तन प्रविधियाँ (personality change techniques)

  • सैम्पसन एवं स्मिथ (Sampson & Smith 1957) के अनुसार पूर्वाग्रह को कम करने के लिए एक संतुलितपरिपक्व एवं खुला विचार रखने वाले व्यक्ति का होना अनिवार्य है।


  • समाज मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तित्व में परिवर्तन मनोचिकित्सा की विभिन्न विधियों एवं विवेचन द्वारा करके उनमें व्याप्त पूर्वाग्रह को कम करने पर बल डाला है। इन प्रविधियों द्वारा जब व्यक्ति के व्यक्तित्व में परिवर्तन आ जाते हैं तब वह अन्य जाति धर्म एवं प्रजाति के व्यक्तियों के बारे में इस ढंग से सोचना प्रारम्भ कर देता है जिससे उसमें चली आ रही गलतफहमियाँ अपने आप दूर हो जाती हैं। फलतः उसके पूर्वाग्रह में अपने आप कमी आ जाती है। 


  • एक्सलाइन (Axline 1948) ने एक अध्ययन किया है जिनमें खेल चिकित्सा (play therapy) द्वारा बच्चों के व्यक्तित्व में परिवर्तन लाकर उनके प्रजातीय पूर्वाग्रह में कमी होते दिखलायी गयी है।

 


 

2. सामाजिक विधान (Social legislation) 

  • पूर्वाग्रह को कम करने में तरह तरह के सामाजिक विधान की भूमिका भी सराहनीय है। जब सरकार पूर्वाग्रह नियंत्रण सम्बन्धी कोई विशेष विधान या कानून बनाती है तो इससे सामाजिक वातावरण में कुछ ऐसा परिवर्तन आता हैजिससे पूर्वाग्रह में कमी आ जाती है। भारत में दलितों से सम्बन्धित अनेकों तरह के पूर्वाग्रह मौजूद थेजिनमें एक प्रमुख पूर्वाग्रह छुआछूत था। भारत सरकार ने सामाजिक विधान बनाकर छुआछूत को गैर-कानूनी घोषित किया। इसके परिणामस्वरूप दलितों से छुआछूत सम्बन्धी पूर्वाग्रह अब करीब-करीब समाप्त हो गया है।

 

  • इसी तरह के जातीय पूर्वाग्रह को कम करने के लिए भारत सरकार ने अन्तर जातीय विवाह (Intercaste Marriage ) को कानूनी घोषित किया है और इस विधान को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए अन्तरजातीय विवाह करने वाले व्यक्ति को आर्थिक प्रोत्साहन के अलावा सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की बात भी सरकार की नजर में है। इसी प्रकार महिलाओं तथा विकलांगों के प्रति पूर्वाग्रह को कम करने के लिए भारत सरकार ने कई तरह के सामाजिक विधान बनाये हैं एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण देकर उनका सामाजिक आर्थिक स्तर ऊँचा करने का प्रयास किया है।

 

3. पूर्वाग्रह विरोधी प्रचार (Antiprejudice Propaganda) 

  • पूर्वाग्रह के विरोध में रेडियोटेलीविजनसिनेमा आदि से किया गया प्रचार पूर्वाग्रह को कम करने में काफी सहायक हुआ है। मेयर्स (Myers 1988) ने अपने अध्ययन में पाया कि प्रजातीय पूर्वाग्रह को कम करने के ख्याल से बनाई गई फिल्मों को देखने से पूर्वाग्रही व्यक्तियों की ऐसी पूर्वाग्रहों में करीब 60% तक की कमी होती पायी गयी।

 

  • पूर्वाग्रह विरोधी प्रचार पूर्वाग्रह को कम करने में शिक्षा से भी अधिक प्रभावकारी (effective) होता है क्योंकि इस तरह का प्रचार-प्रसार प्रायः अप्रत्यक्ष ढंग से व्यक्ति  को पूर्वाग्रह कम करने के लिए प्रेरित करता है।

4. अन्तरसमूह सम्पर्क (Intergroup contact ) 

आलपोर्ट (Alport 1954) सबसे पहले समाज मनोवैज्ञानिक थेजिन्होंने पूर्वाग्रही व्यक्ति (Prejudical person) तथा पूर्वाग्रह के लक्ष्य व्यक्ति (target person) के बीच उचित सम्पर्क द्वारा पूर्वाग्रह को कम करने की विधि पर बल डाला है। जब पूर्वाग्रही व्यक्ति तथा लक्ष्य व्यक्ति जो पूर्वाग्रह का निशाना बनता हैएक-दूसरे के निकट सम्पर्क में आते हैंतो पूर्वाग्रही व्यक्ति को उनके बारे में समझने का अधिक मौका मिलता है। फलस्वरूपलक्ष्य व्यक्ति के बारे में बहुत सारी गलतफहमियाँ अपने आप दूर हो जाती हैं और व्यक्ति में पूर्वाग्रह (prejudice) कम हो जाते हैं।

 

1. पूर्वाग्रह को कम करने के लिए अन्तर समूह सम्पर्क विधि तभी प्रभावकारी होगी जब दोनों समूहों के बीच सम्पर्क सतही (Surfical) न होकर वास्तविक एवं घनिष्ठ (intimate) हो ।

 

  • वास्तविक एवं घनिष्ठ संबंध होने से व्यक्ति नापसंद समूह के सदस्यों को एक व्यक्ति के रूप में अधिक और रूढ़िवृत्तियाँ (stereotypes) के रूप में कम देखता है। फलस्वरूप पूर्वाग्रह में कमी आती है। इस तथ्य का समर्थन ब्लेक तथा मोटन (Black & Mouton 1979) एवं कुक (Cook 1969) ने अपने-अपने अध्ययनों से किया है। 


  • अन्तर समूह संपर्क उस परिस्थिति में पूर्वाग्रह कम करने में अधिक प्रभावकारी होता हैजब दोनों समूहों की सफलता पारस्परिक क्रियाओं पर निर्भर करती है। दूसरे शब्दों में जब लक्ष्य (goal) ऐसा होता है। जिसकी प्राप्ति दोनों समूहों की संयुक्त क्रियाओं पर निर्भर करती है तो ऐसी परिस्थिति में इस ढंग के सम्पर्क से पूर्वाग्रह में कमी तेजी से आती है।

 

  • कुक (Cook 1969) ने एक ऐसा प्रयोग गोरी पूर्वाग्रही महिलाओं पर किया है जिसमें उपर्युक्त तीन कसौटियों को पूरा किया गया। प्रयोग प्रारंभ होने के पहले तथा प्रयोग की समाप्ति के बाद अधिकतर महिलाओं की पूर्वाग्रह की माप की गयी। परिणाम में देखा गया कि प्रयोग में भाग लेने के बाद अधिकतर महिलाओं में पूर्वाग्रह की मात्रा कम हो गयी।

 

II. पूर्वाग्रह कम करने में अन्तर समूह सम्पर्क उस परिस्थिति में प्रभावकारी होता हैजहाँ दोनों समूह के सदस्यों को समान स्तर (equal status) प्राप्त होता है। इसका समर्थन अमीर (Amir 1976) नारवेल तथा वारकेल (Norvell & Warchel 1981) ने अपने अपने अध्ययनों से किया है।

 

5. असंगत भूमिका (Incongruent role)

  • कुछ समाज मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब व्यक्ति को ऐसी भूमिका करने के लिए कहा जाता है जो उसके पूर्वाग्रह से मेल-जोल न खाकर उसके ठीक विपरीत होती है तो कुछ समय तक ऐसी भूमिका के बाद व्यक्ति की मनोवृत्ति बदल जाती है और उसके पूर्वाग्रह में कमी आ जाती है।


  • उदाहरणार्थ यदि उच्च जाति के एक ऐसे व्यक्ति को जो दलितों के प्रति पूर्वाग्रही हैकल्याण मंत्री या मुख्यमंत्री बना दिया जायतो कुछ ही समय के बाद उस व्यक्ति की मनोवृत्ति दलितों के प्रति बदल जायेगी और उसमें पूर्वाग्रह की मात्रा काफी कम हो जायेगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कल्याण मंत्री या मुख्यमंत्री होकर उसके लिए भेदभाव करना गैर-कानूनी होगा और अशोभनीय भी। अतः दलितों के प्रति समानता व्यक्त करने के लिए वह अपनी नकारात्मक मनोवृत्ति बदल देगा। इस तरह असंगत भूमिका द्वारा व्यक्ति के पूर्वाग्रह में कमी आती है।

 

6. शिक्षा (Education) 

  • पूर्वाग्रह को कम करने के लिए समाज मनोवैज्ञानिकों ने उचित शिक्षा देने की भी सिफारिश की है। इन लोगों का कहना है कि शिक्षा औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ढंग से दी जानी चाहिएअनौपचारिक शिक्षा माता-पितापरिवार के अन्य सदस्यों एवं पास-पड़ोस द्वारा बच्चों को दी जाती है। इन लोगों को चाहिए कि बच्चों के सामने ऐसी बातें नहीं करें जिससे वे किसी समूह या वर्ग के लोगों के प्रति पूर्वाग्रही हो जाएँ। औपचारिक शिक्षा का संबंध स्कूलकॉलेजमदरसा में दी जाने वाली शिक्षा से है। ऐसा पाठ्यक्रम बनाना चाहिए जिनको पढ़ने से बच्चों में अच्छा मानसिक स्वास्थ्य विकसित हो एवं किसी प्रकार के पूर्वाग्रह इनके मस्तिष्क में जल्दी न विकसित हो। 


  • कुछ मनोवैज्ञानिकों जैसे ट्रियानडिस (Triandis 1972) फाईडलर एवं सहयोगियों (Fiedlertal 1979) ने अपने-अपने अध्ययनों में पाया है कि शिक्षा का स्तर ऊँचा होने से व्यक्ति में पूर्वाग्रह की मात्रा कम हो जाती है। क्योंकि शिक्षा से व्यक्ति में उदारता बढ़ती है। इधर हाल में प्रजातीय पूर्वाग्रह को कम करने के लिए कुछ समाज मनोवैज्ञानिकों ने सांस्कृतिक ऐसीमीलेटर विधि” का प्रतिपादन किया। इस विधि में पूर्वाग्रही व्यक्तियों के एक समूह को एक प्रशिक्षक दूसरी प्रजाति के लोगों के सामाजिक मानक तथा उनके जीवन शैली के बारे में बतलाता है। ताकि उस प्रजाति विशेष के व्यवहारों एवं अन्तर क्रियाओं की पूर्वाग्रही व्यक्ति द्वारा ठीक ढंग से व्याख्या की जा सके तथा इनके मन में उस प्रजाति से संबंधित किसी प्रकार की दकियानूसी विचारों हटाया जा सके।

 

7. अलगाव विरोधी नीति (Anti-segregation policy)

  • सरकार एवं समाजसेवी संस्थाओं को चाहिए कि समाज में अलगाव विरोधी नीति का अधिक से अधिक क्रियान्वयन किया जाय ताकि समाज में व्याप्त भिन्न-भिन्न तरह के पूर्वाग्रहों में काफी कमी आ जाय। हमारे समाज में आज भी अलगाव की नीति काफी प्रचलित है जिससे कुछ पूर्वाग्रहों का सम्पोषण हो रहा है। जैसे-आज भी देखा जा रहा है कि दलितों के लिए अलग आवासीय योजना चलायी जा रही है। 


  • दलितों के प्रति पहले से चले आ रहे पूर्वाग्रह और भी मजबूत हो जाएंगे। अतः सरकार एवं समाजसेवी संस्थानों को चाहिए। कि इस ढंग की पृथक-गृह परियोजना की जगह पर समाकलित-गृह परियोजना चलायी जाए। उदाहरणार्थ- अमेरिका में स्कूल अवर्ण भेदन प्रोग्राम के परिणाम में पाया गया कि इससे गोरे बच्चों में विभिन्न प्रजाति के प्रति धनात्मक मनोवृत्ति नहीं विकसित हुई। 


उदाहरण : 

अवर्ण भेदन स्कूल में पढ़ने के बावजूद भीजैसा कि स्टीफन (Stephan 1978) ने बतलाया हैनीग्रो बच्चों के प्रति गोरे बच्चों की पूर्वधारणा में कमी नहीं आती है। फैल्डमैन के शब्दों में सबूतों को तौलने के बादस्टीफन (Stephan 1978) इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि अवर्ण भेदन (desegrigation) से सामान्यतः काले बच्चों के प्रति गोरे बच्चों के पूर्वाग्रह में कोई कमी नहीं आती है।


No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.