भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना के उद्देश्य | भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना


 भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना

वित्तीय बाजार और संस्थाएं- भारतीय रिजर्व बैंक

 Reserve Bank of India

पृष्ठभूमि RBI Bank History

  • भारत में केन्द्रीय बैंकिग की आवश्यकता 18वीं शताब्दी में महसूस की गई जब बंगाल के गर्वनर ने बंगाल और बिहार में केन्द्रीय बैंकिग व्यवस्था के तहत केन्द्रीय बैंक स्थापित करने का सुझाव दिया था। इस क्रम में 1773 में बैंक स्थापित किया गया लेकिन कुछ ही समय बाद बाद बंद कर दिया गया। 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में सन् 1913 ई. में चेम्बरलेन आयोग ने भारत के लिए केन्द्रीय बैंक की स्थापना का सुझाव दिया। चैम्बरलेन आयोग के सुझाव के बाद सन् 1921 में तीन प्रेसीडेंसी बैकों का एकीकरण कर सन् 1921 में इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गई। इस बैंक को वाणिज्य बैंक के कार्यों के साथ-साथ केन्द्रीय बैंक के कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई। इम्पीरियल केन्द्रीय बैंको के कार्यों को करने के बावजूद भी भारत में केन्द्रीय बैंक की कमी को पूरा नहीं पाया।
  • 1926 में हिल्टन यंग कमीशन ने भारत के एक स्वतंत्र केन्द्रीय बैंक स्थापित करने की सिफारिश की जो भारतीय रिजर्व बैंक के रूप में भारत में बैंकिग सुविधाओं का विस्तार कर सके। 1930 ई में केन्द्रीय जॉच समिति ने तथा 1933 में गोलमेज सम्मेलन में केन्द्रीय बैंक स्थापित करने की जोरदार शब्दों में सिफारिश की गई। तत्पश्चात 1934 में विधानसभा में भारतीय रिजर्व बैंक बिल प्रस्तुत किया गया। जो सन् 1934 में एक एक्ट के रूप में पारित हुआ। इसी एक्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई और इसने 1 अप्रैल 1935 से अपना कार्य प्रारंभ कर दिया।

रिजर्व बैंक क्या है ? What is RBI 

  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत का केन्द्रीय बैंक है। केन्द्रीय बैंक किसी देश की मौद्रिक प्रणाली की सर्वोच्च संस्था होती है। जिसका प्रत्यक्ष तथा परोक्ष नियंत्रण देय की मौद्रिक नीति तथा वित्तीय प्रणाली पर रहता है। मौद्रिक प्रणाली की सर्वोच्च संस्था होने के कारण देश में मौद्रिक एवं वित्तीय प्रणाली का संचालन, पथ प्रदर्शन और नियंत्रण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक के उद्देश्य  Objective of Reserve Bank of India

  • सन् 1934 ई. में एक्ट रूप में पारित हुए बिल अनुसार 1 अप्रैल 1935 से भारत का रिजर्व बैंक निरंतर निम्नांकित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कार्य कर रहा है।
  • सरकार के बैंकर के रूप में कार्य करना (सरकार की ओर से भुगतान करना, लेना तथा विदेशी विनिमय का लेन-देन के साथ-साथ उक्त विषयों पर सरकार को सलाह देना)
  • भारतीय रूपये के आंतरिक व बाह्य मूल्य में स्थिरता लाना।
  • देश में मुद्रा तथा साख को मांग के अनुरूप बनाये रखने के साथ-साथ नियंत्रित करना।
  • देश की मुद्रा, तथा बैंकिग व्यवसाय से संबंधित विविध विषयों पर आंकड़े इकट्ठा कर इन्हें प्रकाशित करना।
  • बैकों से नगद कोष प्राप्त कर दृढ़ केन्द्रीय कोष का निर्माण करना जिससे मुद्रा बाजार में लोच पैदा हो, बैकिंग संकट रोका जा सके तथा बैकिंग व्यवसाय पर नियंत्रण रहे।
  • बैकिंग व्यवसाय के उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखना तथा उपभोक्ताओं के शिकायतों एवं विवादों को निपटाना।
  • कृषि के विस्तार व विकास के लिए कृषि साख संबंधी विभिन्न विषयों का अध्ययन करना, प्रत्यक्ष सहायता की व्यवस्था करना तथा आवश्यक हो तो सरकार को सलाह देना।
  • विदेशों में मौद्रिक संबंध स्थापित करना।

भारतीय रिजर्व बैंक पर किसका स्वामित्व है ?

  • रिजर्व बैंक की स्थापना किये जाने के निर्णय के साथ ही इसके विवाद भी उत्पन्न हो गया। विवाद यह था कि रिजर्व बैंक का स्वामित्व अंशधारियों के पास होगा या इस पर राज्य का स्वामित्व होगा। दोनों विचारों के पक्ष-विपक्ष में अनेकों तर्क दिये गये लेकिन अंततः भारतीय रिजर्व बैंक का स्वामित्व का अधिकार अंशधारियों को दिया गया। रिजर्व बैंक की स्थापना ब्रिटिश सरकार ने अंशधारियों कके बैंक के रूप में की थी। इसकी अधिकृत पूंजी 5 करोड़ रूपये थी जिसे 100 रूपये मूल्य के अंशों  में विभाजित किया गया  था।
  • भारत के स्वतंत्र होने के बाद स्थितियों में बदलाव आया। जनमत रिजर्व बैंक के राष्ट्रीयकरण के प्रश्न में हो रहा था साथ ही बैंक ऑफ इंग्लैण्ड, बैंक ऑफ फ्रांस तथा यूरोप के अन्य देशों में केन्द्रीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जा चुका था। भारतीय संसद ने जनमत को देखते हुए सितम्बर 1948 में एक कानून पारित किया जिसके अनुसार 1 जनवरी 1949 से रिजर्व बैंक पर सरकार का अधिकार हो गया।

रिजर्व बैंक के राष्ट्रीयकरण की आवश्यकता Need of Nationalization of RBI

  • देश के केन्द्रीय बैंक के कार्योें को निष्पक्षता, सफलता तथा देश के हित में करने के लिए इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि रिजर्व बैंक का स्वामित्व अंशधारियों के हाथों में होने के बजाय सरकार के हाथों में होना चाहिए। निम्नाकित कारणों से रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण आवश्यक था।
  • आर्थिक संकट से उबरने एवं युद्धोत्तर काल में आर्थिक पुननिर्मणा की योजनाओं की सफलता के लिए केन्द्रीय बैंक का स्वामित्व सरकार के पास होना चाहिए तथा सरकारी नीति के अनुरूप कार्य किया जा सके।
  • सरकारी बैंकर होने के नाते सभी सरकारी लेन-देन, ऋण लेना, विदेशी विनिमय हेतु सरकार का नियंत्रण एवं स्वामित्व आवश्यक था।
  • सरकार की मौद्रिक नीति तथा वित्तीण् प्रणाली के निष्पक्ष तथा सफल संचालन एवं नियंत्रण के लिए यह आवश्यक है।
  • सरकार की आर्थिक नीति के संचालन में केन्द्रीय बैंक के सलाह तथा सहयोग की आवश्यकता थी।
  • विदेशों से मौद्रिक संपर्क स्थापित करने, आर्थिक सहयोग एवं आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण आवश्यक समझा गया।
  • विश्व के महत्वपूर्ण केन्द्रीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो चुका था।

रिजर्व बैंक का प्रबंधन Management of RBI

  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना सन् 1934 में पारित एक एक्ट के द्वारा 1 अप्रैल 1935 को हुई। प्रारंभ में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का स्वामित्व अंशधारियों के हाथो में था। जिसकी अधिकृत पूंजी 5 करोड़ रूपये थी जो 100 रूपए वाले 5 लाख अशों में विभाजित थी। लगभग सभी शेयर निजी लोगों के पास थे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का केन्द्रीय बैंक के रूप में महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन को देखते हुए भारत के स्वतंत्र होने के बाद 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
  • रिजर्व बैंक के कार्यों का संचालन केन्द्रीय संचालक मंडल द्वारा किया जाता है। कुशल प्रशासन तथा विकेन्द्रीयकरण की दृष्टि से संपूर्ण भारत को चार भागों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र के लिए पॉच सदस्यों का स्थानीय बोर्ड होता है। केन्द्रीय बोर्ड में कुल बीस सदस्य होते हैं। इनमें से एक गर्वनर तथा चार उपगर्वनर होते हैं। गवर्नर बैंक का सर्व प्रशासनिक अधिकारी होता है।
  • गर्वनर तथा उपगर्वनरों की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा पांच वर्षों के लिए की जाती है। रिजर्व बैंक के चार स्थानीय बोर्ड दिल्ली, कोलकत्ता, मुबई, चेन्नई में स्थित हैं तथा चार संचालक, चारों स्थानीय बोर्डों से केन्द्रीय सरकार द्वारा मनोनित किये जाते हैं। इनका कार्यकाल भी पॉच वर्ष का होता है। केन्द्रीय संचालक मंडल में दस अन्य संचालक जिनका चुनाव केन्द्र सरकार द्वारा चार वर्षों के लिए किया जाता है होते हैं। चार वर्षों के कार्यकाल के लिए नियुक्त किए गये संचालक उद्योग व्यापार, आर्थिकी तथा सहकारिता आदि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं।
  • स्थानीय बोर्ड केन्द्रीय बोर्ड के आदेशानुसार कार्य करते हैं तथा उनकों आवंटित की गई जिम्मेदारियों एवं कार्यों पर केन्द्रीय बोर्ड सलाह देता है। भारत सरकार द्वारा मनोनीति स्थानीय बोर्डों के सदस्य विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनका कार्यकाल चार वर्ष का होता है।

रिजर्व बैंक का प्रधान कार्यालय मुंबई में स्थित है। मुंबई के अतिरिक्त दिल्ली, चेन्नई एवं कोलकत्ता में स्थानीय प्रधान कार्यालय हैं। रिजर्व बैंक का केन्द्रीय प्रधान कार्यालय 10 भागों में विभक्त है-
  • सेक्रेटरी कार्यालय
  • चीफ एकाउण्टेण्ट  का कर्यालय
  • निरीक्षण विभाग
  • कानूनी विभाग
  • बैंकिंग विकास विभाग
  • कृषि साख विभाग
  •  औद्योगिक वित्त विभाग
  • विनिमय नियंत्रण विभाग
  • अनुसंधान एवं साख्यिकीय विभाग

केन्द्रीय/प्रधान कार्यालय के अतिरिक्त अन्य कार्यलयों को संगठन के तौर पर दो भागों में बांटा जाता है। (अ) नोट निर्गमन विभाग (ब) बैंकिग विभाग।
नोट निर्गमन विभाग को पुनः दो भागों में विभाजित किया गया है पहला सामान्य विभाग दूसरा नकदी विभाग। 
बैकिंग विभाग सरकार की तरफ से बैकिंग के सभी कार्य करता है। यह चार भागों में विभाजित होता है।

बैंक विभाग
  1. जमा खाता विभाग
  2. प्रतिभूति विभाग
  3. सरकारी खात विभाग
  4. सरकारी ऋण विभाग


वित्तीय निरीक्षण

  • रिजर्व बैंक वित्तीय निरीक्षण के कार्य को वित्तीय निरीक्षण बोर्ड के मार्गदर्शन में पूरा करता है। इस बोर्ड का गठन नवंबर 1994 ई में रिजर्व बैंक के केन्द्रीय बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की समिति के रूप में किया गया। इस बोर्ड का मुखिया गवर्नर होता है। तथा केन्द्रीय बोर्ड के चार संचालकों को 2 साल के लिए नियुक्त किया जाता है। एक उप गवर्नर को बोर्ड ऑफ फाइनेशियर सुपरविजन उप चेयरमेन नामित किया जाता है।

रिजर्व बैंक का संगठन

रिजर्व बैंक का प्रबंधन

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