देवनागरी लिपि के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी | Devnagri Lipi Summary in Hindi

 देवनागरी लिपि के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी

देवनागरी लिपि के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी | Devnagri Lipi Summary in Hindi


देवनागरी लिपि के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी

  • हिन्दी की लिपि देवनागरी है। देवनागरी लिपि, वस्तुतः हिन्दी की मौलिक लिपि न होकर भारत की प्राचीन और देवभाषा के रूप में मान्य संस्कृत भाषा की लिपि रही है। अतः संस्कृत की संतान और उत्तराधिकारी के रूप में हिन्दी ने अपनी जननी (संस्कृत) की जो अतिसंख्य थाती अपनाई, उनमें एक प्रमुख लिपि देवनागरी भी है। हिन्दी की वर्तमान देवनागरी लिपि सूक्ष्म से सूक्ष्म भावों की अभिव्यक्ति में पूर्ण रूप से सक्षम है, क्योंकि इसकी वर्णमालामें वर्णों की पर्याप्तता, क्रमिकता एवं एक ध्वनि हेतु एक वर्ण आदि ऐसी अन्यान्य विशेषताएँ हैं, जिनके कारण विश्व की अन्य विकसित एवं समृद्ध भाषाओं की लिपियों के समान इसे वैज्ञानिक लिपि मानने में किसी भी प्रकार के संशय के लिए कोई अवकाश नहीं है।

 

  • यद्यपि प्रत्येक भाषा का उद्देश्य एक ही होता है, मगर उसकी अपनी कुछ मौलिक विशेषताएँ या गुण होते हैं। यही बात लिपियों में भी लागू होती है। लिपि की प्रासंगिकता भाषायी अभिव्यक्ति को सरल से सरल, पूर्ण एवं स्पष्ट बनानी होती है। इसलिए प्रत्येक लिपि की अपनी कुछ मौलिक विशेषताएँ या गुण होते हैं। हिन्दी की देवनागरी लिपि लिपिगत विशेषता का अपवाद नहीं है। यदि देवनागरी लिपि को एक नज़र में आँकने की कोशिश की जाए, तो दो प्रमुख तथ्यों पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करना होगा।

 

  • 1. देवनागरी की उत्पत्ति या विकास-यात्रा 
  • 2. देवनागरी की वर्णमाला

 

देवनागरी की उत्पत्ति या विकास यात्रा 

यह सर्वविदित है कि हिन्दी ने इस लिपि को संस्कृत से ग्रहण किया है। चूंकि संस्कृत इस देश की प्राचीन भाषा रही है और काल की दृष्टि से हजारों साल की ऐतिहासिकता से इसकी संबद्धता रही है, अतः संस्कृत से हिन्दी के विकास में हजारों साल का काल-क्रम अंतर्निहित है। इस अवधि में अनेक भाषाओं का विकास हुआ, मगर वर्तमान में वे इतिहास के गर्त में समा चुकी हैं जैसे- प्राकृत, पालि आदि। इसका अर्थ यह नहीं है कि भाषायी विवरण में इन विलुप्त भाषाओं की कोई प्रासंगिकता या महत्ता नहीं है। संस्कृत से देवनागरी की यात्रा हिन्दी तक पहुँचने में, वस्तुतः इन भाषाओं की महत्ता निर्विवाद है। इसे सही, स्पष्ट एवं पूर्ण रूप से समझने हेतु सारणीबद्ध प्रस्तुतीकरण ही सर्वोत्तम उपाय है, तो आइये इनका अवलोकन करें।

 

देवनागरी की उत्पत्ति या विकास यात्रा

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