विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस |WORLD CONSUMER RIGHTS DAY 15 March

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 March 
WORLD CONSUMER RIGHTS DAY 15 March 

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस |WORLD CONSUMER RIGHTS DAY 15 March



विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस कब मनाया जाता है  ?

  • विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस’(WORLD CONSUMER RIGHTS DAY) है। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस, उपभोक्ता अंतर्राष्ट्रीय (Consumer International-CI) के द्वारा अपने सदस्य संगठनों के माध्यम से पूरी दुनिया में प्रति वर्ष 15 मार्च को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य उपभोक्ताओं की शक्ति, उपभोक्ताओं के लिए उचित अधिकार और सभी के लिए सुरक्षित और स्थायी बाजार की वकालत करना है।

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की थीम 

  • वर्ष 2021 की विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवसकी थीम ‘Tackling Plastic Pollution’ है।

 

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का इतिहास 

  • आपको बता दे इस तारीख का ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि यह वही दिन है जब 1962 में अमेरिकी संसद कांग्रेस में उपभोक्ता अधिकार विधेयक पेश किया गया था। अपने भाषण में राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने कहा था, “ यदि उपभोक्ता को घटिया सामान दिया जाता है, यदि कीमतें बहुत अधिक है, यदि दवाएं असुरक्षित और बेकार हैं, यदि उपभोक्ता सूचना के आधार पर उत्पाद चुनने में असमर्थ है तो उसका डालर बर्बाद चला जाता है, उसकी सेहत और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है एवं इससे राष्ट्रीय हित का भी नुकसान होता है। राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने अपने व्यक्तव्य में निम्न उपभोक्ता अधिकार की चर्चा की थी: "सुरक्षा का अधिकार, सूचित करने का अधिकार, चुनने का अधिकार और सुने जाने का अधिकार।"


  • उपभोक्ता अंतर्राष्ट्रीय (Consumer International-CI), जो पहले अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता यूनियन संगठन (आईओसीयू) के नाम से जाना जाता था, ने अमेरिकी विधेयक में संलग्न उपभोक्ता अधिकार के घोषणापत्र के तत्वों को बढा क़र आठ कर दिया जो इस प्रकार है- 1.मूल जरूरत 2.सुरक्षा, 3. सूचना, 4. विकल्प-पसंद 5. अभ्यावेदन 6. निवारण 7. उपभोक्ता शिक्षण और 8. अच्छा माहौल।


  • आपको बता दे सीआई, उपभोक्ता अधिकारों में काम करने वाला एक बहुत बड़ा संगठन है और इससे 100 से अधिक देशों के 240 संगठन जुड़े हुए हैं।


  • इस घोषणापत्र का सार्वभौमिक महत्व है क्योंकि यह गरीबों और सुविधाहीनों की आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसके आधार पर संयुक्त राष्ट्र ने अप्रैल, 1985 को उपभोक्ता संरक्षण के लिए दिशानिर्देश से संबंधी एक प्रस्ताव पारित किया था।


विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस वर्ष 2021 की थीम ‘Tackling Plastic Pollution’ से जुड़े तथ्य:

  • वर्तमान में हम एक वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण संकट का सामना कर रहे हैं। यद्यपि प्लास्टिक रोजमर्रा की जिंदगी में एक अत्यधिक उपयोगी सामग्री हो सकती है लेकिन वर्तमान में प्लास्टिक की हमारी खपत और उत्पादन अत्यधिक अस्थिर हो गया है।
  • अगस्त 2020 में जारी प्यू चैरिटेबल ट्रस्ट्स एंड सिस्टमआईक्यू (Pew Charitable Trusts & SYSTEMIQ), की रिपोर्ट ‘Breaking the Plastic Wave’ के अनुसार यदि जल्द ही नवाचारों, नीतिगत स्तर और व्यवहार में परिवर्तन नहीं होता है तो समुद्र में प्लास्टिक की सामग्रियों का प्रवाह 2040 तक तिगुना हो जाएगा।
  • अब प्लास्टिक प्रदूषण को उजागर करके उसे हल करने और इससे निपटने का बहुत ही निर्णायक समय आ गया है क्योंकि कोविड-19 महामारी के कारण फेस मास्क, दस्ताने और खाद्य पैकेजिंग सहित एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग में बड़ी मात्रा में वृद्धि हुई है।


प्लास्टिक प्रदुषण से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्य निम्न है-

  • सम्पूर्ण विश्व में प्लास्टिक की प्रतिवर्ष खपत में अमेरिका सम्पूर्ण विश्व मे प्रथम स्थान पर है। अमेरिका 109 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष का प्लास्टिक उपभोग करता है। वहीं यूरोप 65 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष तथा चीन 35 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष का उपभोग करता है।
  • अनियोजित प्लास्टिक कचरे में चीन का योगदान 25%, इंडोनेशिया 11% तथा भारत का 4.8% है।
  • प्रतिवर्ष वैश्विक स्तर पर लगभग 30 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है। यह लगभग पृथ्वी पर मनुष्यो के कुल भार के बराबर है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार देश में प्रतिवर्ष 56 लाख टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। जिसमे 690 टन अकेले दिल्ली से अपशिष्ट प्राप्त होता है। इस अपशिष्ट का 60 % रिसाइकल होकर पुनः प्रयोज्य होता है परन्तु शेष पुनः प्रयोग नहीं किये जा सकते।
  • प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने हेतु अपशिष्ट प्रबंधन का 7R मॉडल (7 Rs Model of Waste Management)
  • 2019 में एक वैश्विक अध्ययन में पाया गया कि अध्ययन में शामिल 82% लोग प्लास्टिक कचरे के बारे में जानते हैं और पहले से ही प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए व्यावहारिक कदम उठा रहे हैं। वैश्विक उपभोक्ता आंदोलन के रूप में हमें उपभोक्ताओं को समर्थन देना होगा जिससे वह सरकारों, नागरिक समाज और व्यवसाय को प्लास्टिक प्दूषण की समस्या और सतत उपभोग को बढ़ावा देने के लिए लामबंद कर सके।


कंजूमर इंटरनेशनल द्वारा उपभोक्ता दिवस के इस वर्ष के थीम के माध्यम से दुनिया को यह दिखाना है कि किस प्रकार उपभोक्ता सरकारों और व्यवसायों से बदलाव की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में व्याप्त प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने का कोई एक तरीका कारगर नहीं है एवं हमें इस मुद्दे के समाधान हेतु कई तरीकों के साथ कार्य करना होगा। इसके लिए कंजूमर इंटरनेशनल के द्वारा प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने हेतु अपशिष्ट प्रबंधन का 7R मॉडल (7 Rs Model of Waste Management) प्रस्तुत किया गया है।


7R मॉडल के प्रमुख तथ्य निम्न है

रिप्लेस (Replace):सिंगल यूज वाले प्लास्टिक पदार्थों का अन्य पुनः प्रयोग वाले पदार्थों से प्रतिस्थापित करना


रिफ्यूज (Refuse): प्लास्टिक के डिस्पोजल सामानों के प्रयोग को मना करना एवं इसकी जगह अपने कप, मग इत्यादि जैसे सामानों का प्रयोग करना


रिड्यूस(Reduce):अपने द्वारा उपयोग किए जा रहे प्लास्टिक फुटप्रिंट (Plastic Footprint) को कम करना इसके जगह पुन: प्रयोग में लाने वाले वस्तुओं का इस्तेमाल करना


रीसायकल( Recycle): अपशिष्ट अवसंरचना और संग्रहण के उन्नत सेवाओं की मांग करना


रीयूज(Reuse): प्लास्टिक के पदार्थों उनके जीवनकाल के अनुसार वर्गीकृत करते हुए पुनः प्रयोग करना


रिपेयर (Repair): टूटे-फूटे एवं नष्ट हुए पदार्थों की रिपेयर/ मरम्मत करना जिससे अपशिष्ट की मात्रा को कम किया जा सके


रिथिंक(Rethink): प्लास्टिक की पैकेजिंग वाले सामानों एवं अन्य वस्तुओं की खरीदारी में प्लास्टिक के पदार्थों का प्रयोग नहीं करना।


भारत में उपभोक्ता संरक्षण कानून

  • संयुक्त राष्ट्र ने अप्रैल, 1985 को उपभोक्ता संरक्षण के लिए दिशानिर्देश से संबंधी एक प्रस्ताव पारित किया था। भारत ने इस प्रस्ताव के हस्ताक्षरकर्ता देश के तौर पर इसके दायित्व को पूरा करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 बनाया।
  • संसद ने दिसंबर, 1986 को यह कानून बनाया जो 15 अप्रैल, 1987 से लागू हो गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना था। इसके तहत उपभोक्ता विवादों के निवारण के लिए उपभोक्ता परिषदों और अन्य प्राधिकरणों की स्थापना का प्रावधान था।
  • पिछले वर्ष सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को प्रतिस्थापित करते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 को पारित किया जोकि भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों का शीर्ष कानून है।


उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की निम्न विशेषता है-

1. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना-

  • उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन और संस्थान की शिकायतों की जांच करना
  • असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं को वापस लेना
  • अनुचित व्यापार और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना
  • भ्रामक विज्ञापनों के निर्माता / समर्थक/ प्रकाशक पर जुर्माना लगाना

2. सरलीकृत विवाद समाधान प्रक्रिया

i) आर्थिक क्षेत्राधिकार को बढ़ाया गया है- 

जिला आयोग -1 करोड़ रुपये तक

राज्य आयोग- 1 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये तक

राष्ट्रीय आयोग -10 करोड़ रुपये से अधिक

ii) दाखिल करने के 21 दिनों के बाद शिकायत की स्वत: स्वीकार्यता

iii) उपभोक्ता आयोग द्वारा अपने आदेशों को लागू कराने का अधिकार

iv) दूसरे चरण के बाद केवल कानून के सवाल पर अपील का अधिकार

v) आयोग से उपभोक्ता द्वारा संपर्क की आसान प्रक्रिया

 

निवास स्थान से फाइलिंग की सुविधा

  • ई फाइलिंग
  • सुनवाई के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा


3. मध्यस्थता

  • एक वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र
  • उपभोक्ता फोरम द्वारा मध्यस्थता का विकल्प देना जहां भी शुरु में ही समाधान की गुंजाइश है और दोनों पक्ष इसके लिए सहमत हैं।
  • मध्यस्थता केंद्रों को उपभोक्ता फोरम से जोड़ा जाना
  • मध्यस्थता के माध्यम से होने वाले समाधान में अपील की सुविधा नहीं

4. उत्पाद की जिम्मेदारी

  • यदि कोई उत्पाद या सेवा में दोष पाया जाता हैं तो उत्पाद निर्माता/विक्रेता या सेवा प्रदाता को क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार माना जाएगा

दोषपूर्ण उत्पाद का आधार:

  • निर्माण में खराबी
  • डिजाइन में दोष
  • वास्तविक उत्पाद, उत्पाद की घोषित विशेषताओं से अलग है
  • प्रदान की जाने वाली सेवाएँ दोषपूर्ण हैं


नये विधेयक- उपभोक्ताओं को लाभ

  • इससे पहले न्याय के लिए उपभोक्ता के पास एक ही विकल्प था, जिसमें काफी समय लगता है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के माध्यम से त्वरित न्याय की व्यवस्था की गई है।
  • भ्रामक विज्ञापनों और उत्पादों में मिलावट की रोकथाम के लिए कठोर सजा का प्रावधान
  • दोषपूर्ण उत्पादों या सेवाओं को रोकने के लिए निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं पर जिम्मेदारी का प्रावधान
  • उपभोक्ता आयोग से संपर्क करने में आसानी और प्रक्रिया का सरलीकरण
  • मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के शीघ्र निपटान की गुंजाइश
  • नए युग के उपभोक्ता मुद्दों- ई कॉमर्स और सीधी बिक्री के लिए नियमों का प्रावधान

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