व्यापार एवं बौद्धिक संपदा |TRIPS या व्यापार से संबंधित बौद्धिक

व्यापार एवं बौद्धिक संपदा

व्यापार एवं बौद्धिक संपदा |TRIPS या व्यापार से संबंधित बौद्धिक


 

व्यापार एवं बौद्धिक संपदा

  • WTO शासन के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकारों (TRIPS या व्यापार से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकारों) के मामलों को सम्मिलित करने के लिए व्यापार से संबंधित बातों को कुछ विस्तृत कर दिया गया है। 


  • TRIPS के अंतर्गत सभी सदस्य देशों को एक समान बौद्धिक संपदा (IP) संरक्षण कानून बनाने की आवश्यकता होती है। पेटेंट अधिकारों की अनुमति उत्पादों के लिए दी जानी चाहिएकेवल प्रक्रियाओं के लिए। नहीं।


  • WTO से पूर्व की आवश्यकता के अंतर्गत भारतीय IT कानून केवल प्रक्रियाओं का संरक्षण करता थाउत्पादों का नहीं। परिणामस्वरूप औषधि निर्माता कंपनियों ने उन उत्पादों के विपरीत अभियंत्री (reverse engineer) के लिए विभिन्न प्रक्रियाएँ विकसित कीजो प्रारंभ में विकसित देशों में बनायी गयी थीं। यह जानते हुए कि एक उत्पाद जैसे स्टैटिन (statin) (फाइज़र द्वारा लिपिटर (Lipitor) के रूप में विकसित एवं बिक्री किया जाने वाला उत्पाद में कोलेस्ट्रॉल को कम करने का लक्षण होता है। भारतीय फर्म ने फाइज़र (Pfizer) द्वारा उपभोग की गयी प्रक्रिया से भिन्न प्रक्रिया का उपयोग करने स्टैटिन के उत्पादन का विपरीत कार्य किया। इसके परिणामस्वरूप प्राप्त औषधि रैनबैक्सी द्वारा Storvas' के रूप में बहुत सस्ती बेची जाती है।

 

विपरीत इंजीनियरिंग विधियों (reverse engineering methods) का अर्थ 

  • इन विपरीत इंजीनियरिंग विधियों (reverse engineering methods) का उपयोग करके भारतीय कंपनियों ने पेटेंट-युक्त औषधियों के प्रजातीय रूप (Generic versions ) विकसित किये। इन प्रजातीय रूपों ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में औषधियों की कीमतों को कम कर दिया। HIV AIDS का इलाज करने के लिए retroviral drugs उदाहरण के रूप में थे। इन औषधियों की प्रति मरीज़ प्रतिमाह लागत $100 से अधिक होती है। स्वभावतः अफ्रीका के निर्धन देशवासी (AIDS) इलाज कराने के लिए इन मँहगी औषधियों का व्यय वहन नहीं कर सकते थे। भारतीय कंपनियों ने प्रजातीय रूपों की पूर्ति प्रति व्यक्ति प्रतिमाह $100 से कम पर किया WTO में एक लंबे वाद-विवाद के पश्चात् जनस्वास्थ्य के हित में सस्ती प्रजातीय रूपों के निर्यात के अधिकार के पक्ष में नियम बनाया गया।

 

  • भारतीय औषधि निर्माता कंपनियों ने अपने अपेक्षाकृत सस्ते प्रजातीय रूपों के माध्यम से औषधि में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एक बहुत बड़ा परिवर्तन उत्पन्न कर दिया। किंतु TRIPS के साथ ही केवल प्रक्रियाओं को ही नहीं बल्कि उत्पादों को भी पेटेंट संरक्षण प्रदान करने के लिए भारत में IP कानून में परिवर्तन कर दिया गया। वास्तव मेंअब भी प्रजातीय औषधियाँ तब क्रियाशील होती हैं जब कि औषधियों के पेटेंट समाप्त हो जाते हैं। भारतीय औषधि कंपनियों को नई औषधि खोज के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए भी बाध्य किया गया है। किंतु यह महँगा एवं समय लेने वाला क्षेत्र है जिसके लिए अत्यधिक वित्तीय सुदृढ़ता की आवश्यकता होती है। 'विपरीत इंजीनियरिंग reverse engineering) से ऊपर की ओर नवीन औषधि खोज में प्रवेश करने के प्रयास ( में कुछ भारतीय कंपनियों को बड़ी अंतर्राष्ट्रीय औषधि कंपनियों के साथ सहयोग करना पड़ा जैसे-जापान की कंपनी दाइची के साथ रैनबैक्सी।

 

  • आगे बढ़ने से पूर्व हमें इस प्रश्न का अवलोकन चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के संबंधों में बौद्धिक संपदा अधिकार क्यों प्रमुख हो गये हैंजैसा कि हमने पहले खंड में देखा है कि उत्पादन में कार्यों का विभाजन हुआ है। विकसित देशों की फर्मे डिजाइनब्राँड निर्माण एवं विपणन पर ध्यान केंद्रित करती है जबकि विनिर्माण का प्रमुख रूप से एशिया की फर्मों से बहिस्रतीकरण करती हैं। उत्पादन के इस श्रम विभाजन के अंतर्गत अतिरेक लाभ या लगान डिज़ाइन एवं विपणन कार्य में केंद्रित होते हैं जबकि विनिर्माण कार्य में मात्र स्वाभाविक या सामान्य लाभ प्राप्त होता है।

 

  • इस श्रृंखला में आय के इस प्रकार के वितरण का कारण यह है कि डिज़ाइन अवस्था में एकाधिकार की स्थिति होती है क्योंकि यह कानून द्वारा संरक्षित बौद्धिक संपदा होती है। दूसरी ओर विनिर्माण कार्य एशिया में कितनी भी संख्या में फर्मों द्वारा किया जा सकता है। इस विनिर्माण कार्य में प्रतिस्पर्धा के कारण लाभ कम होकर अपने सामान्य स्तर पर आ जाते हैं।

 

  • विकसित देश की फर्मों द्वारा डिज़ाइन एवं विकासशील देश की फर्मों द्वारा विनिर्माण के रूप में उत्पादन में यह श्रम विभाजन वह महत्त्वपूर्ण कारण है जो इस बात की व्याख्या करता है कि विकसित देश अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण पर क्यों इतने अड़े हुए हैं। एशिया एवं लैटिन अमेरिका दोनों में पर्याप्त विपरीत इंजीनियरिंग क्षमताएँ ( Reverse Engnineering Capabilities) होने के कारण बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण के बिना विकसित देश की फर्मों के लगान या अतिरेक लाभ शीघ्र ही कम होने लगेंगे।

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