जबलपुर जिले का इतिहास एवं वर्तमान | जबलपुर जिले के बारे में जानकारी


 जबलपुर जिले के बारे में जानकारी

जबलपुर जिले का नामकरण

जबलपुर को मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। जाबालि ऋषि की तपोभूमि के नाम पर जिले का नाम जबलपुर पड़ा। यह जिला देश के मध्य में स्थित है।संत विनोबा भावे ने जिले को संस्कारधानी की संज्ञा से नवाजा था।


जबलपुर, जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। ऐतिहासिक रूप से, कलचुरी और गोंड राजवंशों का एक केंद्र, शहर ने एक सांस्कृतिक संस्कृति विकसित की जो मुगल और मराठा शासन से प्रभावित थी। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय, पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्यालय और पांच राज्यों (एमपी, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार और झारखंड) के सेना मुख्यालय यहां स्थित हैं।


जबलपुर जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • कलचुरी काल (ईसा की दसवी-ग्यारहवीं सदी) में कला तथा संस्कृति का केन्द्र जबलपुर शहर अपने संपूर्ण वैभव पर था। सोलहवीं शताब्दी में महान गोंड साम्राज्ञी महारानी दुर्गावती ने जबलपुर को नई गरिमा दी। अंग्रेजों विरूद्ध आजादी की लड़ाई में हृदयशाह और शंकरशाह के बलिदानों ने नई चेतना दी। 
  • शिक्षा, पत्रकारिता और संस्कृति के इस गौरवशाली नगर को संत विनोबा भावे ने संस्कारधानी की संज्ञा से नवाजा था। जबलपुर जिला स्वतंत्रता संग्राम के वीरों का क्षे है। रानी दुर्गावती और उनके पूर्वजों से शुरू हुई स्वतंत्रता की परम्परा को गोंड शासक शंकरशाह और उनके पुत्र रघुनााि शाह ने आगे बढ़ाया। 
  • महात्मा गांधी का पॉच बार जबलपुर आगमन हुआ। नेताजी सुभाषचंद्र बोस दो बार जबलपुर के केन्द्रीय जेल में रहे। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रसिद्ध झंडा सत्याग्रह जबलपुर से प्रारंभ हुआ।
  • पुराणों और किंवदंतियों के अनुसार जबलपुर का संबंध जाबालि ऋषि से है। जिनके बारे में कहा जाता है कि वह यहीं निवास करते थे।
  • 1781 के बाद ही मराठों के मुख्यालय के रूप में चुने जाने पर इस नगर की सत्ता बढ़ी, बाद में यह सागर और नर्मदा क्षेत्रों के ब्रिटिश कमीशन का मुख्यालय बन गया। यहाँ 1864 में नगरपालिका का गठन हुआ था।
  • एक पहाड़ी पर मदन महल स्थित है, जो लगभग 1100 ई. में राजा मदन सिंह द्वारा बनवाया गया एक पुराना गोंड महल है। इसके ठीक पश्चिम में गढ़ है, जो 14वीं शताब्दी के चार स्वतंत्र गोंड राज्यों का प्रमुख नगर था।
  • भेड़ाघाट, ग्वारीघाट और जबलपुर से प्राप्त जीवाश्मों से संकेत मिलता है कि यह प्रागैतिहासिक काल के पुरापाषाण युग के मनुष्य का निवास स्थान था। मदन महल, नगर में स्थित कई ताल और गोंड राजाओं द्वारा बनवाए गए कई मंदिर इस स्थान की प्राचीन महिमा की जानकारी देते हैं। इस क्षेत्र में कई बौद्ध, हिन्दू और जैन भग्नावशेष भी हैं।

जबलपुर जिले की वर्तमान में प्रशासनिक व्यवस्था

 
jabalpur map
Jabalpur District Map



जबलपुर जनसांख्यिकी

जानकारी
संख्या
क्षेत्रफल
5,211 वर्ग किलोमीटर
राजस्व संभाग कि संख्या
7
तालुका कि संख्या
10
राजस्व मंडल कि संख्या
64 (62 ग्रामीण + 2 शहरी )
मंडल प्रजा परिषद् कि संख्या
62
ग्राम पंचायत कि संख्या
542
नगर निगम कि संख्या
1
नगरपालिका कि संख्या
2
नगरपरिषद कि संख्या
6
गाँव कि संख्या
1508
सेन्सस कि संख्या
14


जबलपुर जिले की तहसील


सरल क्रमांक
तहसील का नाम
1.
जबलपुर
2.
कुंडम
3.
मझोली
4.
पाटन
5.
पनागर
6.
सिहोरा
7.
शाहपुरा
8.
अधारताल
9.
रांझी
10.
गोरखपुर

जबलपुर जिले के गांव और पंचायत

खंड
क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)
गांव की संख्या
ग्राम पंचायत
सिहोरा
492.68
160
60
मझोली
604.84
225
84
पाटन
607.33
226
78
शाहपुरा
815.49
231
84
पनागर
464.58
220
80
जबलपुर
1170.22
249
88
कुंडम
1042.43
197
68
कुल
5197.57
1508
542

 जबलपुर जिले के बारे में सामान्य जानकारी 

  • महात्मा गांधी सामुदायिक विकास प्रशिक्षण केन्द्र है।
  • देश का प्रथम विकलांग पुनर्वास केन्द्र है।
  • मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय यहीं पर है।
  • प्रदेश का एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय यहीं पर हैं
  • मदनमहल, चौसठ योगिनियों का मंदिर, भेड़ाघाट, पिसनहारी की मढि़या, जैन तीर्थ आदि यहां के पर्यटन केन्द्र हैं।
  • पोस्ट एण्ड टेलीग्राफ वर्कशॉप है।
  • त्रिपुरी ऐतिहासिक नगरी यहीं है जो कल्चुरियों की राजधानी रही है।
  • रूपनाथ में अशोक का अभिलेख मिला है।
  • जाबालि ऋषि की तपोभूमि के नाम पर जिले का नाम जबलपुर पड़ा बरेला के पास रानी दुर्गावती की समाधि है।
  • मदनगिरि पहाड़ी पर स्थित मदन महल का किला प्राचीन वास्तुकला का अनुपम नमूना है। रूपनाथ में सम्राट अशोक का एक लघु शिलालेख स्थित है।
  • जबलपुर नगर में पिसनहारी की मढि़या और भेड़ाघाट में चौसठ योगिनी मंदिर अन्य दर्शनीय स्थल है। कलचुरी कला (ईशा की दसवीं- ग्याहरवीं सदी) में कला तथा संस्कृति का केन्द्र जबलपुर शहर अपने संपूर्ण वैभव पर था।
  • सोलहवीं शताब्दी में महान गोंड रानी दुर्गावती ने जबलपुर को नई गरिमा दी। अंग्रेजों के विरूद्ध आजादी की लड़ाई में हिरदेन शाह और शंकरशाह के बलिदानों ने नई चेतना दी।
  • जिले में उच्च न्यायालय गन कैरिज फैक्ट्री, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, वन अनुसांधन केन्द्र राष्ट्रीय खरपतवार नियंत्रण केन्द्र आदि महत्वपूर्ण संस्थाएँ स्थित हैं। देश की आजादी के आंदोलन के रास बिहारी, दादा साहब खापर्डे, शैलन्द्र नाथ घोष, प्र्रकुल्ल कुमार घोष, मदन मोहन मालवीय, सेठ गोविन्द दास, विष्णु दत्त शुक्ल, महात्मा गाँधी, सुभाष चंद्र बोस, हकीम अजमल खाँ, पं. जवाहरलाल नेहरू, खान अब्दुल गफ्फार खाँ, मौलाना अबुल कलाम, जयप्रकाश नारायण, सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसी महान विभूतियों को योदान सर्वज्ञात है।
  • महात्मा गाँधी का पाँच बार आगमन हुआ। नेताजी सुभाष चंद्र बोस दो बार यहाँ केन्द्रीय जेल में रहे।
  • भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रसिद्ध झंडा सत्याग्रह जबलपुर से प्रारंभ हुआ। जबलपुर से अनेक उत्कृष्ट दर्जे के अखबार चेतना जाग्रत करने में लगे हैं।
  • यहाँ की पत्रकारिता को माधव राव सप्रे, माखनलाल चतुर्वेदी, नर्मदा प्रसाद द्विवेदी, नरसिंह दास अग्रवाल, द्वारका प्रसाद मिश्र मनोहर कृष्ण गोलवलकर, लक्ष्मण सिंह चौहान, मायाराम सुरजन, गजानन माधव मुक्तिबोध, रामेश्वर प्रसाद गुरू जैसे अनेक मनीषियों का सानिध्य मिला।
 जबलपुर जिले के दर्शनीय स्थल 

मदन महल किला

जबलपुर, मध्य प्रदेश में मदन महल किला उन शासकों के जीवन की गवाही के रूप में खड़ा है, जिन्होंने 11 वीं शताब्दी ईस्वी में अच्छी संख्या में जबलपुर पर शासन किया था। शहर से कुछ किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित मदन महल किला राजा मदन सिंह द्वारा बनवाया गया था। किले का संबंध राजा की माता रानी दुर्गावती से भी है, जो उस समय के एक बहादुर गोंड शासक थे। यह किला, जो वर्तमान में खंडहर है, रानी दुर्गावती की आभा और उनके पूर्ण सुसज्जित प्रशासन और सेना के बारे में बताता है। शाही परिवार के मुख्य सुख कक्ष, वॉर रूम, छोटे जलाशय और स्थिर घूमने लायक हैं। यह किला उस युग के लोगों के जीवन की मात्रा को बयां करता है, और यह उस समय की बेमिसाल रॉयल्टी में मदद करता है। मदन महल किला निश्चित रूप से भारत के प्राचीन प्राचीन स्मारकों में से एक है और जबलपुर की यात्रा पर अत्यधिक अनुशंसित है।
मदन महल किला

डुमना नेचर रिजर्व पार्क

डुमना नेचर रिज़र्व पार्क, मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित जनता के लिए खुला एक इकोटूरिज्म साइट है। इसमें 1058 हेक्टेयर क्षेत्र में एक बांध, वन और वन्यजीव शामिल हैं। चीतल, जंगली सूअर, साही, सियार और कई प्रजातियों के पक्षी सहित जंगली जानवर पार्क में रहते हैं। पार्क के भीतर और आसपास तेंदुओं की साइटिंग की भी सूचना मिली है। मगरमच्छों की उपस्थिति के कारण स्नान या तैराकी सहित पानी में गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं।

बैलेंसिंग रॉक

जबलपुर प्राकृतिक चमत्कार बैलेंसिंग रॉक के लिए प्रसिद्ध है। यह पर्यटक स्थल मदन महल किले के आधार पर, देओतल में शैलपर्णा नामक स्थान पर स्थित है। बैलेंसिंग रॉक विस्फोटित ज्वालामुखी रॉक संरचनाओं का उदाहरण है। चट्टान केवल थोड़ा सा स्पर्श करके विशाल आधार चट्टान पर संतुलन बनाती है। फिर भी यह आश्चर्यजनक है कि 6.5 की तीव्रता के भूकंप में भी बैलेंसिंग रॉक बच गया। कहा जाता है कि इस चट्टान के संतुलन को बिगाड़ना असंभव है।

बैलेंसिंग रॉक


कचनार सिटी

कचनार सिटी कि प्रसिद्धी यहाँ पर बहुत ऊँची शिव प्रीतिमा के कारण देश विदेश में है | यह मूर्ति सन 2004 में बनकर 15 फ़रवरी 2006 में जन दर्शन व पूजा के लिए तैयार कि गयी | इस मूर्ति कि ऊंचाई 73 फीट / 23 मीटर है एवं यह एक गुफा के उपर स्थापित है , इस गुफा में 12 ज्योतिर्लिंग है जो कि देश के भिन्न-भिन्न शिव धार्मिक स्थल से लायें गए हैं |

बरगी डेम

जबलपुर का बरगी डेम नर्मदा नदी पर बने 30 डेमों में एक महत्वपूर्ण डेम है। इस डेम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में जल आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है। बरगी डाइवर्शन प्रोजेक्ट और रानी अवंतीबाई लोधी सागर प्रोजेक्ट इस डेम पर विकसित की गई दो महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है। समय के साथ-साथ बरगी डेम जबलपुर के एक महत्वपूर्ण पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार ने भी इस दिशा में काफी पहल की है। सरकार ने यहां एक रिसॉर्ट भी खोला है, जिसके आगे का हिस्सा डेम की ओर है। इस रिसॉर्ट से डेम और जलाशय का असाधारण नजारा देखने को मिलता है। यहां बोट राइड, फिशिंग, वाटर स्कूटर आदि की सुविधा भी है, जिससे बरगी डेम की यात्रा और भी मनोरंजक बन जाती है। इतना ही नहीं, डेम के आसपास के क्षेत्रों में मैना, तोता, सारस, कबूतर और स्थानीय काली गौरेया सहित अनेक पक्षियों को भी देखा जा सकता है।

धुआंधार जलप्रपात जबलपुर 

धुआंधार जलप्रपात जबलपुर ही नहींबल्कि पूरे मध्यप्रदेश का एक महत्मपूर्ण पर्यटन स्थल है। 10 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाले इस प्रपात की छटा अनुपम है। इसकी उत्पत्ति नर्मदा नदी से होती है। यह सुरम्य प्रपात प्रसिद्ध संगमरमर की चट्टानों से निकलता है। यह प्रपात जब बड़ी धारा के साथ गिरती है तो पानी के गिरने की आवाज काफी दूर से सुनाई देती है। इस प्रपात के गिरने से उस स्थान पर कुहासा या धुंआ सा बन जाता है। इसलिए इसे धुआंधार जलप्रपात कहा जाता है। सुंदरता के लिहाज से धुआंधार जलप्रपात एक असाधारण स्थल हैजिससे पूरे साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। यह जगह अपने दोस्तों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए भी काफी आदर्श है। जलप्रपात के सामने काफी बड़ा खुला स्थान है। जबलपुर शहर से 25 किमी दूर स्थित यह जलप्रापत अपनी मनमोहक सुंदरता के कारण एक चर्चित पर्यटन स्थल है। 

भेड़ाघाट

जबलपुर के भेड़ाघाट स्थित संगमरमरी चट्टान अन्य किसी भी पर्यटन स्थलों में सर्वाधिक घूमा जाने वाला जगह है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जबलपुर और संगमरमरी चट्टान एक दूसरे के पर्यायवाची हो गए हैं। संगमरमरी चट्टान नर्मदा नदी के दोनों ओर करीब 100 फीट ऊंची है। भेड़ाघाट का वातावरण भी बेहद शांत रहता है। जब सूरज की रोशनी सफेद और मटमैले रंग के संगमरमर चट्टान पर पड़ती है, तो नदी में बनने वाला इसका प्रतिबिंब अद्भुत होता है। भेड़ाघाट और यहां की संगमरमर चट्टान की खूबसूतरी उस समय चरम पर होती है जब चांद की रोशनी चट्टान और नदी पर एक साथ पड़ती है। इस माहौल में अगर आप बोट राइड करेंगें तो इस अनुभव को जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। जबलपुर की संगमरमर चट्टान एक ऐसा पर्यटन स्थल है.

भेड़ाघाट

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