अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस : थीम (विषय) इतिहास उद्देश्य महत्व | International Day of Rural Women Day 2022 in Hindi

अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस  : थीम (विषय) इतिहास उद्देश्य महत्व 

अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस  : थीम (विषय) इतिहास उद्देश्य महत्व |  International Day of Rural Women Day 2022 in Hindi



अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 15 अक्तूबर

  • ग्रामीण क्षेत्रों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 15 अक्तूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस’ का आयोजन किया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस दिवस का उद्देश्य कृषि एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना, खाद्य सुरक्षा में सुधार करना और ग्रामीण गरीबी उन्मूलन में स्वदेशी महिलाओं सहित ग्रामीण महिलाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका एवं योगदान को मान्यता देना है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर, 2007 को अपने संकल्प 62/136 में इस दिवस की स्थापना को मंज़ूरी दी थी। 
  • संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील देशों में कुल कृषि श्रम शक्ति में 40% महिलाएँ शामिल हैं। दक्षिण अमेरिकी देशों में यह आँकड़ा लगभग 20% है, जबकि एशिया और अफ्रीका में कृषि श्रम शक्ति में महिलाओं का आँकड़ा 50% से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों की उपयुक्त संसाधनों एवं संपत्तियों, सार्वजनिक सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और बुनियादी अवसंरचना, जिसमें जल एवं स्वच्छता भी शामिल है, तक समान पहुँच नहीं है।


अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 2022 थीम (विषय )


  • Rural Women Cultivating Good Food for All”



महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए सविंधान उपबंध और सरकार द्वारा किये गए प्रयासों निम्न है-

महिलाओं के लिए संवैधानिक प्रधान-

संविधान के अनुच्छेद 14 में कानूनी समानता,

अनुच्छेद 15 (3) में जाति, धर्म, लिंग एवं जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव न करना

अनुच्छेद 16 (1) में लोक सेवाओं में बिना भेदभाव के अवसर की समानता,

अनुच्छेद 19 (1) में समान रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,

अनुच्छेद 21 में स्त्री एवं पुरुष दोनों को प्राण एवं दैहिक स्वाधीनता से वंचित न करना,

अनुच्छेद 23-24 में शोषण के विरुद्ध अधिकार समान रूप से प्राप्त,

अनुच्छेद 25-28 में धार्मिक स्वतंत्रता दोनों को समान रूप से प्रदत्त,

अनुच्छेद 29-30 में शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार,

अनुच्छेद 32 में संवैधानिक उपचारों का अधिकार,

अनुच्छेद 33 (क) में प्रस्तावित 84वें संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था,

अनुच्छेद 39 (घ) में पुरुषों एवं स्त्रियों दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार,

अनुच्छेद 40 में पंचायती राज्य संस्थाओं में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से आरक्षण की व्यवस्था,

अनुच्छेद 41 में बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और अन्य अनर्ह अभाव की दशाओं में सहायता पाने का अधिकार,

अनुच्छेद 42 में महिलाओं हेतु प्रसूति सहायता प्राप्ति की व्यवस्था,

अनुच्छेद 47 में पोषाहार, जीवन स्तर एवं लोक स्वास्थ्य में सुधार करना सरकार का दायित्व है,

अनुच्छेद 51 (क) (ड) में भारत के सभी लोग ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हों,

अनुच्छेद 332 (क) में प्रस्तावित 84वें संविधान संशोधन के जरिए राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण


महिलाओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण कानून -

  • अश्लील कार्य गाने: भारतीय दंड संहिता में महिलाओं के प्रति अश्लील गाने तथा कार्य करना दोनों दंडनीय अपराध
  • स्त्री की लज्जा हेतु भारतीय दंड संहिता में प्रावधान: आईएपीसी धारा 354
  • आईएपीसी धारा 376- इसके तहत बलात्कार अत्यंत जघन्य अपराध
  • दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961और 1986:
  • आईपीसी धारा 494: पति या पत्नी के जीवित होते हुए विवाह करना दंडनीय अपराध
  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अंतर्गत दूसरे विवाह को प्रतिबंधित किया गया है
  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005
  • महिला आरोपी की दंड प्रक्रिया संहिता 1973
  • गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971
  • भ्रूण लिंग चयन निषेध अधिनियम 1994
  • अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956
  • कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा के लिए वर्कप्लेस बिल, 2012


भारत में महिलाओं के विकास के लिए मुख्य संस्थागत ढाँचा-

  • महिला और बाल कल्याण मंत्रालय: 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अंग के रूप में महिला तथा बाल विकास विभाग की स्थापना की गई थी। महिला तथा बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए 30 जनवरी 2006 से इस विभाग को मंत्रालय का दर्जा दे दिया गया है।
  • इस मंत्रालय के क्रियाकलाप के लिए कई स्वायत्त संगठन हैं, जो इस प्रकार हैं:
  • राष्ट्रीय सार्वजनिक सहयोग तथा बाल विकास संस्थान (NIPCCD
  • राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग (NCPCR)
  • केंद्रीय सामाजिक कल्याण बोर्ड (CSWB)
  • राष्ट्रीय महिला कोष (RMK)


महिलाओं की देखभाल, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण योजनायें-

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: 

  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी, 2015 को पानीपत में की। सभी 640 जिलों को कवर करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 8 मार्च, 2018 को राजस्थान के झुंझुनू में इसका विस्तारित किया

प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना:

  • 22.1.2015 को योजना का शुभारंभ।
  • बालिका कल्याण को बढ़ावा देने और उनके लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए एक छोटी जमा बचत योजना।


पोषण- राष्ट्रीय पोषण मिशन: 

  • प्रधानमंत्री ने देश भर में नवजात शिशुओं को सर्वोत्तम पोषण उपलब्ध कराने के लिए 08.03.2018 को झुंझुनू में राष्ट्रीय पोषण मिशन-2022 (पोषण अभियान) की शुरूआत की।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: 

  • प्रधानमंत्री ने इस योजना का उद्घाटन दिनांक 01.05.2016 को बलिया, उत्तर प्रदेश से किया। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे लोगो को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन देना

महिला शक्ति केंद्र: 

  • गांवों में आंगनवाड़ी केंद्रों को महिलाओं के सशक्तिकरण के केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना है।

महिला ई- हाट: 

  • मार्च, 2016 में योजना का शुभारंभ। महिला उद्यमियों के लिए एक ऑनलाइन डिजिटल विपणन मंच बनाने के लिए एसएचजी, एनजीओ और महिलाओं को अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाजारों तक सीधी पहुंच की व्यवस्था।

6 माह का मातृत्व अवकाश: 

  • बच्चों की समुचित देखभाल के लिए कामकाजी महिलाओं को कम से कम 6 महीने के लिए भुगतान सहित अवकाश की सुविधा।

प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना (पीएमएमवीवाई): 

  • महिला एवं बाल कल्याण मंत्री द्वारा 01.09.2017 को औपचारिक शुरूआत। नकद प्रोत्साहन के मामले में मजदूरी के नुकसान के एवज में आंशिक मुआवजा प्रदान करने की व्यवस्था की गई है ताकि महिला पहले बच्चे के जन्म से पहले और बाद में पर्याप्त आराम कर सके। प्रदान किए गए नकद प्रोत्साहन से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान: 

  • नवंबर 2016 में अभियान का शुभारंभ। हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की निश्चित, समावेशी, और गुणवत्ता पूर्ण प्रसवपूर्व नि: शुल्क जांच और देखभाल की सुविधा प्रदान करना

स्टैंरड-अप इंडिया: 

  • प्रधानमंत्री द्वारा अप्रैल 2016 में शुभारंभ। इसका लक्ष्यख अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
  • एक स्थान पर केंद्रित योजना-सखी: मार्च 2015 में शुरूआत। हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए एक स्थान पर चिकित्सा, पुलिस, कानूनी और मानसिक-सामाजिक परामर्श प्रदान करना इसका लक्ष्यल है।
  • मोबाइल फोन में पैनिक बटन: सभी मोबाइल फोन में 2017 से पैनिक बटन लागाने के आदेश

महिला हेल्प लाइन (181) का सार्वभौमिकीकरण:

विधवा आश्रय गृह: 

  • परिवार की सहायता से वंचित विधवाओं को सम्मायनित जीवन जीने में सक्षम बनाना, अब तक के सबसे बड़े विधवा आश्रय गृह का वृंदावन में निर्माण।

स्वाधार गृह: 

  • स्वाधार गृह योजना कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं को लक्षित करती है और इन महिलाओं के लिए आश्रय, भोजन, कपड़े और स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर विचार करती है।

महिलाओं का कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण: 

  • कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम-2013 लागू किया गया है। ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए शी-बॉक्स शुरू किया गया है।


पंचायतों के लिए निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण:

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना: (MKSP) 

  • को कृषि से जुड़ी महिलाओं की वर्तमान स्थिति मे सुधार करने और उन्हें सशक्त बनाना

महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम(STEP): 

  • यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 1986-87 में शुरू किया गया था| इस कार्यक्रम के अंतर्गत 16 वर्ष और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को कौशल विकास द्वारा स्व-रोजगार के योग्य बनाना है|

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना: 

  • इस योजना की शुरुआत 2004 में हुई| इसके अंतर्गत उन पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को साक्षर बनाना है जहाँ की शिक्षा दर राष्ट्रीय महिला शिक्षा दर से कम हो|

किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गाँधी योजना (सबला): 

  • यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 1 अप्रैल 2011 को शुरू किया गया| इस कार्यक्रम के अंतगर्त 11 से 18 वर्ष की किशोरियों को पौष्टिक आहार और आयरन की गोलियां सहित अन्य कई चिकित्सा दिए जाते हैं|

इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना: 

  • यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 28 अक्तूबर 2010 को शुरू किया गया| इस योजना के अंतर्गत 19 साल और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को पहले दो बच्चों के जन्म के समय वित्तीय सहायता दी जाती है|

सुपोषित मां’ अभियान: 

  • किशोरियों व गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से कोटा(राजस्थान) में शुरुआत 

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