खमीरीकरण क्या होता है | खमीरीकरण के लाभ | What is Fermentation Method and Benefits

खमीरीकरण क्या होता है खमीरीकरण के लाभ 

खमीरीकरण क्या होता है खमीरीकरण के लाभ | What is Fermentation Method and Benefits




खमीरीकरण क्या होता है (What is Fermentation)

 

खमीरीकरण मेंजीवाणुओं (micro-organisms) अथवा एन्जाइम की उपस्थिति में जटिल कार्बनिक पदार्थ को धीरे-धीरे सरलतम पदार्थ में बदलना होता हैखमीरीकरण की क्रिया द्वारा पौष्टिक तत्वों की मात्रा में बहुत वृद्धि होती है साथ ही स्वाद में नवीनता आ जाती है। खमीरीकरण की क्रिया में यीस्ट (yeast), लाभदायक अणु जीवी ( fermentative organism or bacteria) एवं एन्जाइम की अनगिनत वृद्धि होती है।

 
खमीरीकरण के लिए निम्न बातों का ध्यान होना आवश्यक है

 

तापमान (Temperature)- 

खमीरीकरण के लिए एक उचित तापमान की आवश्यकता पड़ती है। फ्रिज (Refrigerator) में रखी हुई वस्तुओं का खमीरीकरण नहीं होता है और न ही उबलते हुए पानी में। खमीरीकरण के लिए उचित तापमान 28°C से 35°C के बीच होना चहिए। 28°C से नीचे तापमान पर यीस्ट की वृद्धि बहुत कम हो जाती है तथा 50°C पर यीस्ट नष्ट हो लगता है।

 

आर्द्रता (Moisture)- 

च्छे खमीरीकरण के लिए थोड़ी नमी की भी आवश्यकता होती है।

 

खमीरीकरण के लाभ

 

पोषक तत्वों के जैविक मूल्य (biological value) में वृद्धि - 

खमीरीकरण के द्वारा आवश्यक अमीनो अम्ल की उपलब्धता बढ़ जाती है। विशेषकर दालों व फलियों का खमीरीकरण से प्रोटीन का पोषण मूल्य बढ़ जाता है। यीस्ट विटामिन बी कॉम्पलेक्स का बहुत अच्छा स्रोत होता है। खमीरीकरण के बाद मुख्यतः राइबोफ्लेविन नायसिनथायमिन की बढ़ जाती है।

 

भोज्य पदार्थों का सुपाच्य हो जाना- 

खमीरीकरण के उपरान्त भोज्य पदार्थ बहुत ही नर्म जाते हैं एवं उनका वजन भी हल्का हो जाता है साथ ही पाचन भी बहुत आसान हो जाता है।

 

भोज्य पदार्थ को रुचिकर एवं स्वादिष्ट बनाना - 

खमीरीकरण से भोज्य पदार्थों की अम्लीयता बढ़ जाती है जिससे उसमे विशेष प्रकार का खट्टा स्वाद आ जाता है और भोजन अधिक स्वादिष्ट हो जाता है।

 

भोज्य पदार्थ के आयतन में वृद्धि - 

खमीरीकरण से उत्पन्न गैसें भोज्य पदार्थों का आय बढ़ा देती हैं। गैस का निर्माण जितना अधिक होगा आयतन में वृद्धि भी उतनी अधिक होगी।

 

भोज्य पदार्थों का संरक्षण- 

खमीरीकरण की क्रिया के उपरान्त बचे हुये रासायनिक पदार्थ (जैसे लैक्टिक अम्ल व एल्कोहल) से भोजन में हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि रुक जाती है जिससे भोज्य पदार्थ खराब होने से बच जाता है।


विटामिन बनाने

विटामिन बनाने की फैक्ट्रियों में खमीरीकरण की क्रिया के बाद भोज्य पदार्थों में विटामिन 'बीकॉम्पलेक्स की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इस गुण को विटामिन बनाने वाली फैक्ट्रियाँ उपयोग में लाती हैं।

 

भोजन में विविधता - 

खमीरीकरण की विधि के द्वारा विभिन्न व्यंजन जैसे इडलीढोकलाडोसाडबलरोटी आदि बनाये जाते हैं। यह न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं बल्कि पौष्टिक व सुपाच्य भी होते हैं।


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