चर्चित व्यक्ति फरवरी 2021 | January 2021 Ke Charchit Vyakti

चर्चित व्यक्ति फरवरी 2021
January 2021 Ke Charchit Vyakti 

चर्चित व्यक्ति फरवरी 2021 January 2021 Ke Charchit Vyakti

भव्या लाल कौन है 

  • भारतीय मूल की भव्या लाल को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया गया है। इस संबंध में जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, भव्या लाल के पास इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यापक अनुभव है। अंतरिक्ष क्षेत्र में उनके योगदान के लिये उन्हें अंतर्राष्ट्रीय वैमानिकी अकादमी का सदस्य भी चुना गया है। नासा ने एक बयान में कहा कि भव्या लाल वर्ष 2005 से वर्ष 2020 तक इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस एनालिसिस (IDA) के साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (STPI) में अनुसंधान सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से परमाणु इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की है, इसके अलावा उनके पास प्रौद्योगिकी और नीति विषय में भी एक मास्टर डिग्री है। नासा (NASA) संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार की कार्यकारी शाखा की एक स्वतंत्र एजेंसी है जो नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ-साथ वैमानिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिये उत्तरदायी है। इसे वर्ष 1958 में स्थापित किया गया था। नासा का मुख्यालय वॉशिंगटन, डीसी (अमेरिका) में स्थित है। नासा ने वर्ष 1961 की शुरुआत में ही मनुष्य को अंतरिक्ष में ले जाने की कोशिश शुरू कर दी थी। आठ वर्ष बाद 20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग अपोलो 11 मिशन के तहत चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले मानव बने।

 

अशोक डिंडा कौन हैं 

  • भारतीय तेज़ गेंदबाज़ अशोक डिंडा ने हाल ही में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। 25 मार्च, 1984 को कलकत्ता में जन्मे अशोक डिंडा ने वर्ष 2009 में भारत की ओर से खेलते हुए श्रीलंका के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय T20 क्रिकेट से अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। जून 2010 में उन्हें ज़िम्बाब्वे के विरुद्ध एकदिवसीय मैच के लिये राष्ट्रीय टीम में चुना गया, जिसके बाद वर्ष 2010 में उन्हें एशिया कप के लिये भी चुना गया। अशोक डिंडा ने अपने संपूर्ण कॅरियर में कुल 116 प्रथम श्रेणी मैच खेले और इस दौरान उन्होंने कुल 420 विकेट लिये। इसके अलावा डिंडा ने भारत के लिये 13 एकदिवसीय और 9 T20 मैच भी खेले, जिनमें उन्होंने क्रमशः 12 और 17 विकेट प्राप्त किये।

 

पंडित भीमसेन जोशी जयंती

  • 04 फरवरी को महान गायक पंडित भीमसेन जोशी की जयंती मनाई गई। पंडित भीमसेन जोशी का जन्म शताब्दी वर्ष समारोह आज से शुरू हो रहा है। भारत के तानसेन के रूप में सफल, पंडित भीमसेन जोशी, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को आम आदमी के करीब लाए। उन्होंने वर्ष 2008 में भारत रत्न प्राप्त किया। पंडित भीमसेन जोशी (4 फरवरी, 1922 - 24 जनवरी, 2011) कर्नाटक से संबंधित थे। उनके पहले गुरु कुर्तकोट के चन्नप्पा थे; बाद में उन्होंने पंडित श्यामाचार्य जोशी से प्रशिक्षण लिया। वर्ष 1936 में उन्होंने सवाई गंधर्व से शिक्षा ग्रहण की। पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने से संबंधित थे। पंडित भीमसेन जोशी ने केवल 19 वर्ष की आयु में पहली बार प्रस्तुति दी। पंडित भीमसेन जोशी को उनके प्रसिद्ध रागों के लिये याद किया जाता है जिनमें शुद्धि कल्याण, मियाँ की टोडी, पुरिया धनश्री, मुल्तानी, भीमपलासी, दरबारी, मालकौंस, यमन, असारी तोडी, मियाँ की मल्हार और अन्य शामिल हैं।

डॉ. ज़ाकिर हुसैन

  • 08 फरवरी, 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ.जाकिर हुसैन की जयंती पर उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत के तीसरे राष्ट्रपति जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक डॉ. ज़ाकिर हुसैन एक उत्साही शिक्षक और कुशल राजनीतिज्ञ थे। 8 फरवरी, 1897 को हैदराबाद में जन्मे डॉ. जाकिर हुसैन देश के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति भी थे। ज़ाकिर हुसैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इटावा के इस्लामिया हाईस्कूल से पूरी की, जिसके बाद वे आगे की पढाई के लिये अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय चले गए। वर्ष 1918 में उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की, जिसके बाद उन्होंने मास्टर कोर्स में दाखिला लिया, हालाँकि इसे उन्होंने बीच में छोड़ दिया। उन्होंने प्लेटो की पुस्तक रिपब्लिकऔर एडविन कैनन द्वारा रचित एलिमेंट्री पोलिटिकल इकॉनमीका उर्दू में अनुवाद भी किया। वर्ष 1920 में 23 वर्ष की आयु में ज़ाकिर हुसैन ने अलीगढ़ में राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना की, इस राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालय को वर्ष 1925 में नई दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया और वर्ष 1935 में इसका नाम बदलकर जामिया मिलिया इस्लामिया कर दिया गया। उन्होंने तकरीबन 21 वर्ष तक जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रमुख के रूप में कार्य किया। वर्ष 1962 में उन्होंने भारत के दूसरे उप-राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और वर्ष 1967 में भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति बने। देश के लिये उनकी सेवाओं के मद्देनज़र उन्हें वर्ष 1954 में पद्म विभूषण और वर्ष 1963 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय

  • 11 फरवरी, 2021 को उपराष्ट्रपति ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उनका स्मरण किया। दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को मथुरा ज़िले के नगला चंद्रभान गाँव में हुआ था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक दार्शनिक, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री एवं राजनीतिज्ञ थे। इनके द्वारा प्रस्तुत दर्शन को एकात्म मानववादकहा जाता है जिसका उद्देश्य एक ऐसा स्वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडलप्रस्तुत करना था, जिसके विकास के केंद्र में मानव हो। वर्ष 1942 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में एक पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता (संघ प्रचारक) के रूप में शामिल हुए। इसके पश्चात् उन्होंने वर्ष 1940 के दशक में लखनऊ से राष्ट्र धर्मनामक एक मासिक पत्रिका के प्रकाशन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हिंदुत्व राष्ट्रवाद की विचारधारा का प्रसार करना था। इसके बाद उन्होंने पांचजन्यऔर स्वदेशजैसी पत्रिकाओं की भी शुरुआत की। वर्ष 1967 में जनसंघ के अध्यक्ष चुने जाने के एक वर्ष बाद 11 फरवरी, 1968 को पटना में एक ट्रेन यात्रा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

स्वामी दयानंद सरस्वती

  • 12 फरवरी, 2021 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दयानंद सरस्वती एक महान विचारक और एक सुविख्यात समाज सुधारक थे। स्वामी दयानंद सरस्वती न केवल भारत के जाने-माने धार्मिक नेता थे, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव भी डाला। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की, जिसने भारतीयों की धार्मिक धारणा में प्रमुखता से बदलाव किया। उन्होंने मूर्तिपूजा और कर्मकांड के विरुद्ध आवाज़ उठाई, साथ ही इसका पुरज़ोर विरोध भी किया। दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को टंकारा, गुजरात में हुआ था। स्वामी दयानंद सरस्वती को पुनर्जागरण युग का हिंदू मार्टिन लूथर कहा जाता है। उनके द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाशऔर स्थापित आर्य समाजसंदेश देते हैं कि वेदों की और लौटो तथा भारत की प्रभुता को समझो। उन्होंने व्यक्तिगत उत्थान के स्थान पर सामूहिक उत्थान को अधिक महत्त्व दिया। 7 अप्रैल, 1875 को दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे में आर्य समाज का गठन किया। आर्य समाज का प्राथमिक उद्देश्य ज्ञान के स्रोत के रूप में वेदों की स्थापना करना और हिंदू धर्म को काल्पनिक मान्यताओं से दूर ले जाना है। स्वामी दयानंद सरस्वती का मानना था कि ज्ञान की कमी ही हिंदू धर्म में फैले अंधविश्वास का मूल कारण है। इसलिये उन्होंने अपने अनुयायियों को शिक्षित करने के लिये कई गुरुकुलों की स्थापना की। उनके विरुद्ध रचे गए एक षड्यंत्र के कारण 30 अक्तूबर, 1883 को दयानंद सरस्वती की मृत्यु हो गई।

मल्लिकार्जुन खड़गे

  • काॅन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में गुलाम नबी आज़ाद का स्थान लेंगे। ध्यातव्य है कि 15 फरवरी, 2021 को गुलाम नबी आज़ाद के सेवानिवृत्त होने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद खाली हो गया था। कर्नाटक से आने वाले काॅन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक लोकसभा में काॅन्ग्रेस के नेता रहे। भारत के सबसे पुराने दलों में से एक  काॅन्ग्रेस को पिछली और वर्तमान लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद नहीं मिल सका था, क्योंकि निचले सदन में उसका प्रतिनिधित्त्व 10 प्रतिशत से कम था। मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से राज्यसभा में दूसरे विपक्ष के नेता होंगे, कर्नाटक से राज्यसभा में विपक्ष के पहले नेता एम.एस. गुरुपादस्वामी थे।

एन्गोज़ी ओकोंजो-इवेला

  • नाइजीरिया की एन्गोज़ी ओकोंजो-इवेला को हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) की महानिदेशक नियुक्त किया गया है, जिसके साथ ही वे विश्व व्यापार संगठन की पहली महिला और पहली अफ्रीकी प्रमुख बन गई हैं। उनके चार वर्षीय कार्यकाल की शुरुआत 01 मार्च, 2021 से होगी। एन्गोज़ी ओकोंजो-इवेला एक नाइजीरियाई अर्थशास्त्री हैं, जिन्हें वित्त और आर्थिक विषयों में लगभग चार दशक लंबा अनुभव है। इससे पूर्व ओकोंजो-इवेला नाइजीरिया की वित्त मंत्री के तौर पर भी काम कर चुकी हैं, वे इस पद पर पहुँचने वाली देश की पहली महिला थीं। इवेला को विश्व बैंक के साथ तकरीबन 20 से अधिक वर्ष तक काम करने का अनुभव है, जहाँ उन्होंने संगठन की प्रबंध निदेशक के पद पर कार्य किया था। इवेला ने ऐसे समय में संगठन का पदभार संभाला है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ महामारी का मुकाबला कर रही हैं और जल्द-से-जल्द रिकवरी का प्रयास कर रही हैं। इसके अलावा वे ऐसे समय में संगठन का नेतृत्त्व करेंगी, जब विश्व व्यापार संगठन (WTO) अपने अस्तित्व को लेकर चुनौती का सामना कर रहा है। वर्ष 1995 में गठित विश्व व्यापार संगठन, विश्व में व्यापार संबंधी अवरोधों को दूर कर वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है।

मारियो द्रागी

  • हाल ही में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के पूर्व प्रमुख मारियो द्रागी ने इटली के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। मारियो द्रागी को इटली की सिविल सेवाओं और बैंकिंग क्षेत्र दोनों का ही लंबा अनुभव है। उन्होंने 2010 के दशक में उत्पन्न ऋण संकट से निपटने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। ध्यातव्य है कि इससे पूर्व जनवरी माह में कोरोना वायरस महामारी से निपटने को लेकर हुई आलोचना के चलते इटली के प्रधानमंत्री गुईसेपे कोंटे ने इस्तीफा दे दिया, जिससे इटली में प्रधानमंत्री का पद रिक्त हो गया था। इटली आपेननीनी (Apennine) प्रायद्वीप पर दक्षिणी यूरोप में स्थित है। विदित हो कि मारियो द्रागी ऐसे समय में पदभार संभाल रहे हैं, जब इटली महामारी के कारण गंभीर दबाव का सामना कर रहा है, कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद से इटली में लगभग 93,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है, साथ ही महामारी का इटली की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इसके कारण इटली में उच्च बेरोज़गारी और सार्वजनिक ऋण जैसी स्थिति देखी जा रही है। ऑस्ट्रिया, फ्रांँस, वेटिकन सिटी, सैन मैरिनो, स्लोवेनिया और स्विट्ज़रलैंड के साथ इटली अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करता है। भूमध्यसागर में मौजूद सबसे बड़े द्वीपों में से दो द्वीप यथा- सिसीली और सार्डिनिया इटली से संबद्ध हैं।

रामकृष्‍ण परमहंस

  • 18 फरवरी, 2021 को गृह मंत्री ने रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रामकृष्ण का जन्म 1836 में पश्चिम बंगाल के कामारपुकुर गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था।  12 वर्ष तक गाँव के स्कूल में पढ़ने के बाद रामकृष्ण ने पारंपरिक शिक्षा छोड़ दी और अध्यात्मिक शिक्षा की ओर मुड़ गए। रामकृष्ण ने भारतीय परंपराओं की आधुनिक व्याख्या करते हुए तंत्र, योग और अद्वैत वेदांत के बीच सामंजस्य स्थापित किया। उनकी शिक्षाओं ने कई युवाओं को प्रभावित किया, जिसमें विवेकानंद सबसे प्रमुख माने जाते हैं। वर्ष 1897 में विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के पश्चात् रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस मिशन ने भारत में शिक्षा और लोकोपकारी कार्यों जैसे- आपदाओं में सहायता, चिकित्सा सुविधा, प्राथमिक और उच्च शिक्षा तथा जनजातियों के कल्याण पर बल दिया। वर्ष 1886 में गले के कैंसर के कारण रामकृष्ण की मृत्यु हो गई, किंतु उनकी विरासत आज भी कायम है।

छत्रपति शिवाजी महाराज

  • 19 फरवरी, 2021 को छत्रपति शिवाजी महाराज की 391वीं जयंती मनाई गई। पुणे की जुन्नार तहसील के शिवनेरी किले में जन्मे शिवाजी, भोंसले-मराठा कबीले से थे। उन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की और रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया। उन्होंने सैन्य संगठन, किला वास्तुकला, समाज और राजनीति में क्रांतिकारी परिवर्तन किये। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध तकनीकों का उपयोग करते हुए दुश्मनों के आक्रमण का सामना किया और अपनी सेना का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। महाराष्ट्र के समुद्री तटों की रक्षा के लिये छत्रपति शिवाजी महाराज ने ही आधुनिक युग में भारत की पहली नौसेना का निर्माण किया था। मराठा नौसेना ने जयगढ़, सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग और महाराष्ट्र के तट के साथ-साथ अन्य किलों की रक्षा की। वे एक धर्मनिरपेक्ष राजा था और विभिन्न धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करते थे। राजा के तौर पर छत्रपति शिवाजी ने प्राचीन हिंदू राजनीतिक विचारों और न्यायिक प्रथाओं को पुनर्जीवित किया, साथ ही उन्होंने मराठी भाषा के उपयोग को भी सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया। शिवाजी के पिता शाहजी भोसले ने उन्हें 2,000 सैनिकों की एक सेना सौंपी थी, शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक कुशलता द्वारा अपनी सैन्य क्षमता को 10,000 सैनिकों तक विस्तारित किया। औरंगज़ेब और उनके सेनापति ने शिवाजी की सैन्य कुशलता और रणनीति के कारण उन्हें माउंटेन रैटके नाम से संबोधित किया था, क्योंकि वे मुगल सैनिकों पर हमला करते थे और वापस पहाड़ों पर लौट जाते थे।

नोवाक जोकोविच

  • सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट का पुरुष सिंगल खिताब जीत लिया है। नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में रूस के डेनियल मेदवेदेव को पराजित किया। जोकोविच का जन्म 22 मई, 1987 को बेलग्रेड, सर्बिया में हुआ था। नोवाक जोकोविच ने 4 वर्ष की आयु में टेनिस खेलना शुरू कर दिया था और 13 वर्ष की आयु में वे प्रशिक्षण के लिये जर्मनी चले गए। ज्ञात हो कि नोवाक जोकोविच अब तक कुल 9 ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट्स जीत चुके हैं। ऑस्ट्रेलियन ओपन चार ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट्स में से एक है, अन्य तीन ग्रैंड स्लैम- फ्रेंच ओपन, विंबलडन और यूएस ओपन हैं। इन ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स का संचालन इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) द्वारा किया जाता हैं।

मन्नथु पद्मनाभन

  • 25 फरवरी, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज सुधारक और भारत केसरी मन्नथु पद्मनाभन को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मन्नथु पद्मनाभन का जन्‍म 02 जनवरी, 1878 को केरल के पेरुन्ना (कोट्टायम ज़िले) में हुआ था। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवनकाल में सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। नायर समुदाय के उत्थान के लिये उन्‍होंने 31 अक्‍तूबर, 1914 को नायर सेवा समाज (NSS) की स्‍थापना की। वर्ष 1924 में पिछड़े समुदायों को प्रसिद्ध वाईकॉम महादेव मंदिर से सटे रास्तों का उपयोग करने की अनुमति देने के लिये उन्होंने सक्रिय रूप से वायकोम सत्याग्रह में हिस्सा लिया। वर्ष 1949 में मन्नथु पद्मनाभन, त्रावणकोर विधानसभा के सदस्य बने। वर्ष 1959 में उन्हें भारत केसरीका खिताब दिया गया था। वहीं वर्ष 1966 में उन्‍हें पद्मभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उनका निधन 25 फरवरी, 1970 को हुआ था।

वीर सावरकर

  • 26 फरवरी, 2021 को वीर दामोदर सावरकर की 54वीं पुण्यतिथि मनाई गई। वीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकरथा। इनका जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के भागुर ग्राम में हुआ था। वीर सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, वकील, लेखक, समाज सुधारक और हिंदुत्व दर्शन के सूत्रधार थे। सावरकर द्वारा वर्ष 1909 में लिखी गई पुस्तक द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस, 1857’ में उन्होंने यह विचार किया कि वर्ष 1857 का भारतीय विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ पहला भारतीय जन विद्रोह था। वर्ष 1910 में सावरकर को क्रांतिकारी समूह इंडिया हाउस के साथ संबंधों के चलते गिरफ्तार किया गया था। सावरकर ने भारतीय राष्ट्रीय काॅन्ग्रेस (INC) और महात्मा गांधी की तीखी आलोचना की, उन्होंने 'भारत छोड़ो आंदोलन' का विरोध किया और बाद में भारत के विभाजन को लेकर काॅन्ग्रेस की स्वीकृति पर आपत्ति जताई। 26 फरवरी, 1966 को सावरकर का निधन हो गया।

गुरु रविदास जयंती

  • 27 फरवरी, 2021 को संत गुरु रविदास की 644वीं जयंती मनाई गई। गुरु रविदास को रैदास और रोहिदास के नाम से भी जाना जाता है। गुरु रविदास 14वीं सदी के संत तथा उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन से संबंधित प्रमुख सुधारकों में से एक थे। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, माघ माह में पूर्णिमा के दिन रविदास जयंती मनाई जाती है। माना जाता है कि गुरु रविदास का जन्म वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में एक मोची परिवार में हुआ था। ईश्वर के प्रति उनकी आस्था और निष्पक्ष धार्मिक कविताओं के कारण उन्हें प्रमुखता मिली। उन्होंने अपना पूरा जीवन जाति व्यवस्था के उन्मूलन के लिये समर्पित कर दिया और ब्राह्मणवादी समाज की धारणा का खुले तौर पर विरोध किया। उनके भक्ति गीतों ने भक्ति आंदोलन पर त्वरित प्रभाव डाला और उनकी लगभग 41 कविताओं को सिखों के धार्मिक ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिबमें शामिल किया गया है, जिन्हें 5वें सिख गुरु अर्जुन देव द्वारा संकलित किया गया था। उन्होंने जन-जन तक यह संदेश प्रसारित किया कि ईश्वर ने मनुष्य को बनाया है, न कि मनुष्य ने ईश्वर को बनाया है’, इसका अर्थ है कि प्रत्येक मनुष्य के जन्म का कारण ईश्वर है और इसलिये पृथ्वी पर सभी एक समान हैं, अतः किसी भी व्यक्ति के साथ जन्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिये।

 

चंद्रशेखर आज़ाद

  • 27 फरवरी, 2021 को भारतीय क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की 90वीं पुण्यतिथि मनाई गई। चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर ज़िले के भाभरा गाँव में हुआ था। अपनी वीरता और नि:स्वार्थता के लिये प्रसिद्ध चंद्रशेखर आज़ाद बहुत कम उम्र में ही भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गए। जब उन्होंने वर्ष 1921 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया उस समय वे मात्र 14 वर्ष के थे। उनके सर्वोच्च नेतृत्व कौशल एवं संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HRA) को हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HRSA) के रूप में पुनर्गठित करने और उसे मज़बूत बनाने में मदद की। असहयोग आंदोलन की वापसी के बाद चंद्रशेखर आज़ाद क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो गए और फिर उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्त्व में 9 अगस्त, 1925 को काकोरी घटना को अंजाम दिया, जिसके बाद वे पुलिस के चंगुल से बच निकलने में कामयाब हो गए। चंद्रशेखर आज़ाद ने 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज़ अफसरों से मुठभेड़ के दौरान स्वयं को गोली मार ली। वर्तमान में अल्फ्रेड पार्क को चंद्रशेखर आज़ाद पार्क के नाम से जाना जाता है।

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