मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजातियाँ | Anusuchit Janjatiyan MP | Scheduled Tribes in MP

Anusuchit Janjatiyan MP
 Scheduled Tribes in MP

मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजातियाँ Madhya Pradesh Scheduled Tribes

  • संविधान के अनुच्छेद 342(1) में सूचीबद्ध आदिम जातियाँ, अनुसूचित जनजाति कहलाती हैं।
  • संविधान के अनुच्छेद 366(खण्ड 25) में अनुसूचित जनजाति को पारिभाषित किया गया है।
  • अफ्रीका के बाद भारत जनजातियों के मामले में दूसरा स्थान है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनजातियों का प्रतिशत 8.6 है, जबकि म.प्र. में 21.10 प्रतिशत है।
  • मध्यप्रदेश में जनजतियों की सर्वाधिक संख्या और सर्वाधिक प्रकार दोनों है।
  • लगभग 24 प्रमुख जनजातियों सहित कुल 46 जनजातियाँ यहां निवास करती हैं। अपनी उपजातियों समेत इनकी संख्या 90 के लगभग हो जाती है।
  • मध्य प्रदेश में 15316784 जनसंख्या (21.10 प्रतिशत) इन जातियों की है, जो भारत में सर्वाधिक है।

मध्य प्रदेश में जनजातियों का जनसंख्या अनुसार वितरण

  • राज्य के सभी जिलों में जनजातियों का निवास है, यद्यपि उनकी संख्या में अंतर है। 
  • मंडला, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सिंगरौली, जबलपुर, बैतूल, सीधी, खंडवा, सिवनी में पर्याप्त तथा 14 जिलों में अल्पसंख्या (3 लाख से कम) जनजातियों की रही है।
  • म.प्र. के कुल 24 जिले आदिवासी जिलों में शामिल किये जाते है जिनके तहत 152,132 वर्ग.किमी.  क्षेत्रफल है।
  • सर्वाधिक जनजाति 1222814 धार में है जबकि सर्वाधिक प्रतिशत अलीराजपुर (89 प्रतिशत) में है।
  • शेष 21 जिलों में जनजातियाँ बहुत मामूली संख्या में मिलती है।
  • जनजातियों को दो पेटियों झाबुआ से सतपुड़ा तथा मैकल पर्वत से बघेलखण्ड तक भारी संकेन्द्रण है।
  • धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, डिण्डोरी में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी जनजातियों की है।

मध्य प्रदेश में जनजातियों को दिये गये नाम

  • आदिवासी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग- ठक्कर बप्पा
  • अनुसूचित जनजाति शब्द का प्रथम प्रयोग- साइमन कमीशन
  • अनुसूचित जनजाति शब्द का प्रयोग- भारतीय संविधान
  • दलित शब्द का प्रयोग- साइमन कमीशन
  • हरिजन/गिरीजिन शब्द का प्रयोग- महात्मा गांधी
  • पिछड़े हिंदू- जी.एस. धूरिए
  • विलीन मानवता- दास एवं दास
मध्यप्रदेश और भारत की तीन बड़ी जनजातियां

म.प्र.  भारत
भील 46.18 लाख   भील
गोंड 43.57 लाख  गोंड
कोल 11.67 लाख  बैगा

MP जनजातियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • मध्य प्रदेश उन राज्यों में से है, जहाँ अनुच्छेद 167 के तहत जनजाति कल्याणार्थ पृथक मंत्रालय एवं मंत्री अनिवार्य है।
  • म.प्र. में आदिम जाति कल्याण विभाग की स्थापना 1964 में हुई। इस इसका नाम जनजातीय कार्य विभाग हो गया है।
  • राज्य में 2011 में अनुसूचित जनजातियों में साक्षरता 50.6 प्रतिशत (भारत में अ.ज.जा. में 59 प्रतिशत साक्षरता) थी। कल जनजातियों का 92 प्रतिशत भाग 6 जनजातियों- भील, गोंड, कोल, बैगा, सहरिया ओर कोरकू का है।
  • जनजातियों के लिए पंचशील सिद्धांत नेहरू जी ने दिया था।
  • नेहरू ने आदिवासी बोली के लिए देवनागरी का सुझाव दिया था।
  • वेरियन एल्विन -जनजातियों को नेशनल पार्क में रखा जाए।
  • सन् 1960 में गठित प्रथम अनुसूचित क्षेत्र व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष यू.एन. ढेबर थे।
  • जनजातीय विकास हेतु 5वीं पंचवर्षीय योजना में जनजाति उपयोजना प्रारंभ की गई।
  • संविधान का अनुच्छेद 342(1) में अनुसूचित जनजातियों को अधिसूचित किया गया है।
  • म.प्र. मे अनुसूचित जनजातियों का कुल जनसंख्या में प्रतिशत 2011 की जनगणना के अनुसार 21.10 प्रतिशत है।
  • म.प्र. में अनुसूचित जनजातियों की कुल संख्या 46 है।
  • म.प्र. की सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति भील है।
  • भारत की सबसे बड़ी जनजाति गोंड है।
  • म.प्र. की सबसे छोटी जनजाति कमार (सिंधी) है।
  • म.प्र. में अनुसूचति जनजाति के सर्वाधिक प्रतिशत वाला जिला अलीराजपुर है।
  • म.प्र. का पहला जनजातीय रेडि़यो प्रसारण केन्द्र का नाम वन्याहै जो चन्द्रशेखर आजाद नगर में है।
  • इस्लाम धर्म ग्रहण करने वाले भील को तड़वी भील कहा जाता है।
  • भगोरिया हाट होली के अवसर भीलों का सांस्कृतिक उत्सव है।
  • सहरिया जनजाति संग्रहालय श्योपुर में है
  • देश का प्रथम आदिवासी शोध संचार केन्द्र झाबुआ में स्थित है।
  • इंदिरा गांधी जनजातीय विश्व विद्यालय अमरकंटक में है।

मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों का क्षेत्रानुसार वितरण

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की जनजातियाँ
  • शहड़ोल, सीधी, जबलपुर, रीवा, सतना जिलों में कोल माडि़या, अगरिया, पनिका, खैरवार जनजाति के व्यक्ति रहते हैं। इसमें कोल प्रमुख जनजाति है, जो जबलपुर-रीवा-सतना बेल्ट में है।

दक्षिण क्षेत्र की जनजातियाँ
  • इसके अंतर्गत मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल होशंगाबाद जिले आते हैं। यहाँ भारिया, बैगा, गोंड, कोरकू प्रमुख जनजातियां हैं। बैगा जनजाति विशेष रूप से मंडला में भारिया छिंदवाड़ा में तथा कोरकू होेशंगाबाद से लेकर पूर्वी निमाड़ तक मिलते हैं। गोंड यहां की प्रमुख जनजाति है।

पश्चिमी क्षेत्र
  • निमाड़ के चारों जिले खण्डवा, बुरहानपुर, बड़वानी, खरगोन तथा झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम, धार, आदि में भील, भीलाला, जनजातियां विशेष रूप से पायी जाती हैं। झाबुआ, अलीराजपुर, धार में इनका पर्याप्त संकेन्द्रण है।

मध्य प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियाँ

केन्द्र सरकार ने राज्य की 3 जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति घोषित किया है- बैगा, सहरिया, और भारिया।

विशेष पिछड़ी जनजाति घोषित करने के आधार
  1. कृषि में प्रौद्योगिकी का स्तर
  2. साक्षरता का न्यून स्तर
  3. दूरस्थ पिछड़े क्षेत्रों में निवास
  4. स्थित या घटती जनसंख्या

मध्य प्रदेश की जनजातीय जनांकिकी 2011

  • अनुसूचित जनजाति में साक्षरता दर- 50.6 प्रतिशत (सर्वाधिक साक्षर- परधान जनजाति)
  • अनुसूचित जनजाति में लिंगानुपात- 984 (सर्वाधिक बालाघाट 1050)
  • अनुसूचित जनजाति में सर्वाधिक साक्षर जिला- बालाघाट
  • अनुसूचित जनजाति में दशकीय वृद्धि दर- 25.2 प्रतिशत
  • सर्वाधिक एस.टी जनसंख्या वाला जिला- धार (1222814)
  • सर्वाधिक एस.टी प्रतिशत वाला जिला- अलीराजपुर
  • न्यूनतम जनजाति जनसंख्या वाला जिला- भिण्ड (6.131)
  • न्यूनतम एस.टी के प्रतिशत वाला जिला - भिण्ड

सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले


क्र-
जिला 
जनसंख्या
01
धार 
1222814
02
बड़वानी 
962145
03
झाबुआ 
891818
04
छिंदवाड़ा 
769778
05
बैतूल 
730169


सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले


क्र-
जिला 
प्रतिशत
01
अलीराजपुर
89.0
02
झाबुआ 
67.0
03
बड़वानी 
69.4
04
डिण्डोरी 
64.7
05
मंडला 
57.9

न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले


क्र-
जिला 
जनंसख्या
01
भिण्ड 
6131
02
दतिया 
15061
03
मुरैना 
17030
04
मंदसौर 
33092
05
शाजापुर
37836

न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले


क्र
जिला 
प्रतिशत
01
भिण्ड 
0.4
02
मुरैना 
0.9
03
दतिया 
1.9
04
मंदसौर 
2.5
05
भोपाल 
2.9

सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वृद्धि दर वाले जिले


क्र-
जिला 
प्रतिशत
01
छतरपुर 
42.6
02
शिवपुरी 
42.0
03
बुरहानपुर
36.8
04
अशोकनगर
35.6
05
खंडवा 
34.9

न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या  दशकीय वृद्धि दर वाले जिले


क्र-
जिला 
प्रतिशत
01
मंदसौर 
11.5
02
भिण्ड 
8.8
03
उज्जैन 
8.5
04
शाजापुर 
7.2
05
सागर 
13.0

मध्य प्रदेश की जनजातियाँ Tribes of Madhya Pradesh


जनजाति 
उपजातियां  निवास स्थल
गोंड
 परधानअगरियाओझा,   प्रदेश के सभी जिलों में मुख्यतः
-
नगारची सोलहास
विन्ध्य और सतुपड़ा अंचल में
भील
 बरेलाभिलालापटरियारैथास  धारझाबुआखंडवाखरगोनबुरहानपुरबड़वानी
बैगा बिंझावार, नरोतिया, भतोरिया, नागर, राय, मैना, कठमैना
मंडला, डिण्डोरी, बालाघाट, शहडोल, उमरिया, अनुपपूर
कोरकू मोवासी, रूम, बवारी, बोडोया,
खंडवा, होशंगाबाद, बैतूल, छिंदवाड़ा, देवास
भारिया  भूमिया, भूईहार, पंडा
छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, शहडोल, सीधी, पन्ना
कोल रोतिया, रौतेले
रीवा, सतना, शहड़ोल, सीधी, सिंगरोली, अनुपपुर
माडिया, अबूझमाडि़या, दण्डामी, माडि़या, मेटाकोईतुर
जबलपुर, मंडला, शहडोल पन्ना, छिंदवाड़ा, गुना, शिवपुरी, मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर, दतिया, विदिशा, राजगढ़
सउर -
छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह
अगरिया - मंडला, डिण्डोरी, सीधी, शहडोल 
परधान -
सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, बैतूल
खैरवार -
सीधी, सिंगरौली, अनुपपूर, शहडोल, पन्ना, छतरपुर

जनजाति अनुसंधान संस्थान भोपाल
  • जनजाति के पूर्ण विकास हेतु राज्य सरकार ने 1954 में जनजाति अनुसंधान केन्द्र की स्थापना छिंदवाड़ा में की थी।
  • 1965 में इसका स्थानांतरण भोपाल कर दिया गया।
  • इसका उद्देश्य जनजातियों के जीवन, संस्कृति, आर्थिक तथा शैक्षणिक प्रवृतियों का अध्ययन कर जनजातियों की कार्यशील प्रवृत्तियों का संरक्षण करना।

जनजाति म्यूजियम या संग्रहालय

  • श्री बादलभोई राज्य जनजाति संग्रहालय नाम से एक राज्य जनजाति म्यूजियम छिंदवाड़ा में 1964 में स्थापित किया गया था।

साथीदार अभियान (दापा प्रथा उन्मूलन)
  • झाबुआ जिले की भील-भिलाला जनजातियों में दापा प्रथा प्रचलित है।
  • दापा प्रथा में वधु मूल्य वर पक्ष से लिया जाता है।
  • इस प्रथा को समाप्त करने के लिए साथीदार अभियान (अक्टूबर 2016) से चलाया गया ।

टोटम
  • आदिम जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक जीवन का एक पहलू टोटम या टोटमवाद है
  • टोटम पशु, पक्षी, वृक्ष या अन्य प्राकृतिक वस्तुएं होती हैं। अर्थात टोटम प्रकृतिवादी है। टोटम गोत्र का पहचान चिन्ह होता है।

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.