लवक प्रकार कार्य | क्लोरोप्लास्ट संरचना संगठन एवं कार्य | Pigments and Chloroplast GK in Hindi

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)


लवक (PLASTID) क्या होते हैं  

लवक (Plastid) बड़े आकार के कोशिकाद्रव्यीय कोशिकांग हैजो कि पादप (Plant cells) एवं कुछ प्रकाश संश्लेषी प्रोटिस्ट्स (Photosynthetic protists) के कोशिकाद्रव्य में बिखरे रहते हैं। प्लास्टिड (Plastids Gk., plastikas moulded or formed) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ए. एफ. डब्ल्यू. शिम्पर (A. F. W. Schimper, 1885) ने किया था।

 

लवकों के प्रकार (Types of Plastids ) 

संरचनावर्णक (Pigments) एवं कार्यों (Functions) के आधार पर वर्णकों को निम्नलिखित दो समूहों में वर्गीकृत किया गया है- 

(A) अवर्णी लवक या ल्यूकोप्लास्टिड्स (Leucoplastids ) एवं 

(B) वर्णी लवक या क्रोमोप्लास्टिड्स (Chromoplastids) । 


उपर्युक्त सभी वर्णकों का वर्गीकरण अग्र प्रकार से किया गया है- 

अवणीलवक (Leucoplastids ) (Gk., leuko = white, plustos = formed) 

वर्णकविहीन (Pigmentless) लवकों को ल्यूकोप्लास्टिड कहा जाता है। ये लवक प्रायः भूमिगत तनोंजड़ोंभ्रूणीय कोशिकाओंलैंगिक कोशिकाओं तथा प्रविभाजी कोशिकाओं में पाये जाते हैं। इनका मुख्य कार्य भोज्य पदार्थों का संग्रहण है। संगृहीत पदार्थों कहलाते हैं। 

ये की प्रकृति के आधार पर ये तीन प्रकार के होते हैं- 

1. एमाइलोप्लास्टिड्स (Amyloplastids ) 

  • स्टार्च का संग्रहण करने वाले प्लास्टिड्स एमाइलोप्लास्टिड भूणपोष (Endosperm ), संग्राहक ट्यूबर (Storage tubers) एवं बीजपत्रों (Cotyledons) में पाये जाते हैं।

 

2. इलायोप्लास्टिड (Elaioplastids) 

  • वसा एवं तेलों का संग्रहण करने वाले प्लास्टिड को इलायोप्लास्टिड कहते हैं। ये एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री बीजों में पाये जाते हैं। 

3. ऐल्यूरोप्लास्टिड (Aleuroplastids ) - 

  • प्रोटीन का संग्रहण करने वाले ल्यूकोप्लास्टिड को ऐल्यूरोप्लास्टिड कहते हैं। ये मुख्यत: बीजों के भ्रूणपोष में पाये जाते हैं।

 

वर्णी लवक (Chromoplastids) (Gk., chromo= coloured, plastos = formed) 

ये रंगीन वर्णक होते हैंजो ऐसी पादप कोशिकाओं में पाये कि प्रकाश अनावरित जैसे- पत्तियाँ (Leaves) एवं पुष्प (Flowers) आदि, वर्णी लवकों का निर्माण दो प्रकार से होता है-  

(i) अन्य वर्णकों (Pigments), जैसे- टमाटर एवं लाल मिर्च में लाल वर्णक लाइकोपीन (Lycopene) के द्वारा क्लोरोफिल प्रतिस्थापन से।

 

(ii) अवर्णी लवकों (Leucoplastids ) में कुछ वर्णकोंजैसे-कैरोटीन (Carotene) के निर्माण से वर्णी लवकों में विभिन्न प्रकार के वर्णक (Pigments) पाये जाते हैंजो कि प्रकाश-संलेश्षण क्रिया द्वारा भोज्य पदार्थों का निर्माण करते हैं।

 

लवकों के प्रकार (Types of chromoplastids ) 

वर्णीलवक निम्न प्रकार के होते हैं-

1. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) (Gk., chlor green, plastos = formed) 

ये हरे रंग के प्लास्टिड हैंजिसमें क्लोरोफिल (Chlorophyll) पाया जाता है। इसका मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण है। ये गोलाकारअण्डाकार अथवा डिस्कनुमा होते. हैं। प्रत्येक क्लोरोप्लास्ट में लिपिड प्रोटीन एवं क्लोरोफिल के अतिरिक्त DNA व RNA भी पाये जाते हैं। यह उच्चवर्गीय पौधों की पत्तियों एवं शैवालों में पाये जाते हैं।

 

2. फियोप्लास्ट (Phacoplast) (Gk.. phaco dark or brown, plast living)—

यह भूरे रंग का वर्णक हैउदाहरण- फ्यूकोजन्धिन (Fucoxanthin) । यह वर्णक भूरी शैवाल (Brown algae), डाएटम्स (Diatoms) एवं डायनोफ्लैजिलेट्स में अधिकता में पाया जाता है।

 

3. रोडोप्लास्ट (Rhodoplast) (Gk., rhodo = Red, plast = living ) – 

यह लाल रंग का वर्णक हैजो कि लाल शैवालों (Red algae) में पाया जाता है। उदाहरण-फाइकोइरीथिन (Phycoerythrin) 

4. नील हरित क्रोमोप्लास्ट (Blue-green chromoplast) 

ये नीले रंग के वर्णक हैंजो कि नोली- हरी शैवालों (Blue- green algae) में पाये जाते हैं। उदाहरण-c-फाइकोसायनिन एवं c-फाइकोइरीथिन आदि ।

 

क्लोरोप्लास्ट (CHLOROPLAST) 

CHLOROPLAST

लवक प्रकार (PLASTID) क्लोरोप्लास्ट कार्य    (CHLOROPLAST)




क्लोरोप्लास्ट पौधों की हरी पत्तियों एवं हरे भागों में पाये जाने वाले हरे वर्णक होते हैंजो कि सूर्यप्रकाश की सौर ऊर्जा (Solar energy) का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्रिया द्वारा उसे रासायनिक ऊर्जा (Chemical energy) में परिवर्तित करता है। यही ऊर्जा समस्त जीवधारियों के पोषण में उपयोग की जाती है। यह रासायनिक ऊर्जा कार्बनिक भोज्य पदार्थों (Organic food materials) जैसेकार्बोहाइड्रेट्स के रासायनिक ऊर्जा के रूप में उपस्थित होती है। क्लोरोप्लास्ट प्रकाश- संश्लेषण की क्रिया के समय कार्बोहाइड्रेट्स के साथ-साथ O2 गैस भी उत्पन्न करता हैजो कि जीवधारियों के श्वसन में काम है।

 

क्लोरोप्लास्ट का वितरण (Distribution) 

क्लोरोप्लास्ट एक सामान्य लवक होता हैजो कि प्रायः सभी हरे पौधों की कोशिकाओं तथा कुछ प्रोटोजोअन प्रोटिस्टा (Protozoan-protista) में भी पाया जाता है। उदाहरण-युग्लीना (Euglena) | 


क्लोरोप्लास्ट का आकार (Shape) 

उच्चवर्गीय पौधों में क्लोरोप्लास्ट उभयोचल (Biconvex) अथवा अवतलोत्तल (Planoconvex) होते हैं। कुछ पौधों में इनका आकार भिन्न-भिन्न भी होता है।

 

(i) कपनुमा (Cup shaped) — उदाहरण- क्लैमाइडोमोनास (Chlamydomonas ) 

(ii) कुण्डलित (Spital shaped) उदाहरण- स्पाइरोगायरा (Spirogyra)  

(iii) तर्कनुमा (Spindle shaped) उदाहरण ऐन्थोसिरॉस (Anthoceros) 

(iv) तारेनुमा (Star shaped) उदाहरण– जिग्नीमा (Zygnema)

(v) जालिकावत् (Reticulated) उदाहरण – ऊडोगोनियम (Oedogo-nium) 


उच्चवर्गीय पौधों में पाया जाने वाला क्लोरोप्लास्ट डिस्कनुमा (Disk shaped), अण्डाकार (Oval) अथवा वलयाकार (Circular) होता है।

 

क्लोरोप्लास्ट  परिमाप  (Size) 

विभिन्न पादप प्रजातियों में क्लोरोप्लास्ट की आमाप भी भिन्न-भिन्न होती है। ये प्राय: 1-3 माइक्रोमीटर  मोटाई (Thickness) तथा 5-10माइक्रोमीटर व्यास (Diameter) वाले होते हैं। सामान्यतः छायादार स्थानों में उगने वाले पौधों के क्लोरोप्लास्ट का आकार बड़ा होता है।

 

 क्लोरोप्लास्ट की संख्या (Number) 

एक पादप प्रजाति की प्रत्येक कोशिका में क्लोरोप्लास्ट की संख्या सामान्यतः स्थिर होती है। उच्चवर्गीय पौधों की प्रत्येक कोशिका में सामान्यतः 20 से 40 क्लोरोप्लास्ट पाये जाते हैं। अरण्ड (Ricinus communis) की पत्ती के प्रति वर्ग मिमी. क्षेत्रफल में लगभग 4,00000 क्लोरोप्लास्ट पाये जाते हैं। शैवालों (Algae) की कोशिकाओं में एक या अधिक बड़े क्लोरोप्लास्ट पाये जाते हैं। 


क्लोरोप्लास्ट लवक की परासंरचना 

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया है कि एक क्लोरोप्लास्ट संरचनात्मक रूप से निम्नलिखित मुख्य दो भागों से मिलकर बना होता है-

 

1. सीमा निर्धारक झिल्ली (Limiting membrane) 

2. स्ट्रोमा (Stroma)


1. सीमा निर्धारक झिल्ली (Limiting membrane) – 

प्रत्येक क्लोरोप्लास्ट के चारों ओर लाइपोप्रोटीन (Lipoprotein) की बनी दोहरी झिल्ली (Double membrane) का आवरण उपस्थित होता है। प्रत्येक झिल्ली की मोटाई 40-60 A तक होती है। इन दोनों झिल्लियों के बीच एक रिक्त स्थान उपस्थित होता हैजिसे पेरिप्लास्टिडियल स्पेस (Periplastidial space) कहते हैंजिसकी चौड़ाई 25-75 A तक होती है।

 

2. स्ट्रोमा (Stroma) 

  • प्लाज्मा झिल्ली के अन्दर प्रोटीन युक्त जलीय पारदर्शी पदार्थ भरा रहता है, जिसे मैट्रिक्स (Matrix) या स्ट्रोमा (Stroma) कहते हैं। स्ट्रोमा में स्टार्च कण एवं ऑस्मोफिलिक बूँदें (Osmophilic droplets) भरी रहती हैं। 
  • उच्चवर्गीय पौधों के स्ट्रोमा में छोटी-छोटी बेलनाकार संरचनाएँ उपस्थित रहती हैंजिन्हें ग्रेना (Grana) कहते हैं। एक क्लोरोप्लास्ट में 40 से 60 ग्रेना पाये जाते हैं। 
  • प्रत्येक ग्रेनम (Granum) में बहुत-सी डिस्क के आकार की झिल्लीनुमा थैलियाँ (Membranous sacs) उपस्थित होती हैंजिन्हें थैलेकॉयड (Thylakoids) कहते हैं। ये थैलेकॉबड्स एक के ऊपर एक चट्टेनुमा व्यवस्थित रहती हैं। एक ग्रेनम में थैलेकॉयड की संख्या 50 तक होती हैं। 
  • सभी ग्रेना आपस में झिल्लीनुमा नलिकाओं (Membranous tubles) के द्वारा जुड़ी रहती हैजिन्हें स्ट्रोमल लॅमिली (Stromal lamellae) या फ्रेट (Frets) या स्ट्रोमा थैलेकॉयड (Stroma thylakoid) कहते हैं। 
  • प्रत्येक क्लोरोप्लास्ट में ग्रेनम के अन्दर क्लोरोफिल उपस्थित रहता है। 
  • क्लोरोप्लास्ट में लिपिड्स व प्रोटीन्स के अतिरिक्त राइबोसोम (70S प्रकार के)विभिन्न प्रकार के एन्जाइम (Enzymes) एवं एक द्विसूत्री वलयाकार DNA (Double stranded circular DNA), RNA तथा स्टार्च कण भी पाये जाते हैं। 
  • प्रकाश संश्लेषण से सम्बन्धित सभी वर्णक एवं इलेक्ट्रॉन वाहक थैलेकॉयड में पाये जाते हैं। 
  • क्लोरोप्लास्ट के थैलेकॉयड की झिल्ली में कुछ छोटे-छोटे कण उपस्थित होते हैंजिन्हें क्वाण्टासोम (Quantasome) कहते हैं। प्रत्येक क्वाण्टासीम में लगभग 230 क्लोरोफिल अणु तथा 48 से 50 कैरोटिनॉइड्स (Carotenoids) पाये जाते हैं। 
  • ये क्वाण्टासोम ही प्रकाश संश्लेषण के समय सूर्य के प्रकाश का अवशोषण करते हैं। इस प्रकारक्वाण्टासोम हो वास्तविक प्रकाश संश्लेषक इकाई (Photosynthetic unit) होते हैं।

 

क्लोरोप्लास्ट का रासायनिक (Chemical Composition of Chloroplasts) 

रासायनिक संघटन की दृष्टि से क्लोरोप्लास्ट प्रोटीन (35-55%), लिपिड्स (20-30%), कार्बोहाइड्रेट (4-7%), वर्णक (9- 13%) के अलावा अल्प मात्रा में न्यूक्लिक ऐसिडविटामिन और तथा Mg Fe, Cu, Mn, Zn, इत्यादि तत्वों का बना होता है।

 

क्लोरोप्लास्ट में मुख्यत: निम्नलिखित वर्णक पाये जाते हैंजो प्रकाश संश्लेषण जैसे महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं

क्लोरोप्लास्ट के वर्णक 

क्लोरोफिल (Chlorophyll) -

पौधों में कुल आठ प्रकार के पर्णहरिम पाये जाते हैं-पर्णहरिम a, b, c, d, e, बैक्टीरियो क्लोरोफिल a, b तथा बैक्टीरियोविरिडिन । इनमें से क्लोरोफिल 'a' और 'b' सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं और जीवाणुओं को छोड़कर शेष सभी प्रकाश संश्लेषी पौधों में पाये जाते हैंदोनों एकसमान होते हैं। इनमें केवल तृतीय कार्बन परमाणु में अन्तर होता है। पर्णहरिम 'a' में तृतीय कार्बन परमाणु के साथ मेथिल समूह (CH) और पर्णहरिम 'b' में तृतीय कार्बन परमाणु के साथ ऐल्डिहाइड समूह ( CHO) लगा होता है। इन दोनों के मूलानुपाती सूत्र निम्नलिखित हैं- 

पर्णहरिम ‘a’ (Chlorophyll a)—C55H2O5N4Mg एवं पर्णहरिम 'b' (Chlorophyll b)—CssH72 O6N4Mg1 


उच्चवर्गीय पौधों में दोनों साथ-साथ पाये जाते हैं। पर्णहरिम 'b' हमेशा पर्णहरिम 'a' के साथ पाया जाता है। यह अकेला नहीं मिलता। अब यह स्पष्ट रूप से ज्ञात हो गया है कि क्लोरोफिल स्टार्च संग्रहण से सम्बन्धित संरचना है। जिन शैवालों में यह नहीं पाया जाताउनमें खाद्य संग्रहण स्टार्च के रूप में नहीं होता। क्लोरोफिल (Chlorophyll) का प्रत्येक अणु दो भागों से मिलकर बना होता है-

 

(1) पोरफाइरीन शीर्ष (Porphyrin head ) – 

  • यह चार पायरॉल वलयों (Tetrapyrol) से मिलकर बना होता हैजिसके मध्य भाग में Mg+ उपस्थित होता है।

 

(2) पूँछ (Tail)—

  • यहाँ लम्बी श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉल या पायरॉल (Long chain alcohol or Pyrol) का बना होता हैजो कि शीर्ष के पायरॉल वलय के 7 वें कार्बन के साथ संलग्न होती है। 


(b) कैरोटिनाइड (Carotenoid)- 

हरित लवक में पाये जाने वाले दूसरे महत्वपूर्ण लवक हैंउन्हें दो समूहों में बाँटते हैं-

 

(i) कैरोटिन (Carotins) — 

ये कई रूपों में पाये जाते हैंलेकिन इसका सामान्य सूत्र C40H56 होता है अर्थात् ये केवल और के बने होते हैं।

 

(2) जैन्थोफिल (Xanthophyll) – 

ये भी कई रूपों में पाये जाते हैंलेकिन इसका सामान्य सूत्र C40H56 O2 होता है। कैरोटिनाइड को सहायक वर्णक भी कहते हैंक्योंकि ये प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करके पर्णहरिम को स्थानान्तरित कर देते हैं। ये स्वयं प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित नहीं कर पाते।

 

उपर्युक्त वर्णकों के अलावा हरित लवक में फाइकोबिलिन (Phycobilins) वर्णक भी सहायक वर्णक के रूप में पाया जाता है। फाइकोइरिथिन (Phycoerythrin) और फाइकोसायनिन (Phycocyanin) प्रमुख फाइकोबिलिन वर्णक है। सामान्य अवस्था में पत्तियाँ क्लोरोफिल की अधिकता के कारण हरी दिखती हैंपरन्तु प्रौढ़ पत्तियों में कैरोटिनाइड की अधिकता हो जाती है। इस कारण इनका रंग पीला हो जाता है। 


क्लोरोप्लास्ट के कार्य (Functions of Chloroplast) 

1. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्लोरोफिल का प्रमुख कार्य प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण करना होता है। यह सूर्य प्रकाश की विकिरण ऊर्जा (Radient energy) की उपस्थिति में CO, एवं HO की सहायता से कार्बनिक भोज्य पदार्थजैसे-ग्लूकोज का निर्माण करते हैंजो कि श्वसन क्रिया में ऊर्जा उत्पन्न करने के काम आता है।

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)


 

प्रकाश संश्लेषण दो अवस्थाओं में होता है- 

(i) प्रकाश अभिक्रिया - यह अभिक्रिया ग्रेना में सम्पन्न होती है। 

(ii) अन्धकार अभिक्रिया-यह अभिक्रिया स्ट्रोमा में सम्पन्न होती है।

 

2. क्लोरोप्लास्ट प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के समय वातावरण की CO, का अवशोषण करते हैं तथा अपने अन्दर H20 का प्रकाश- रासायनिक अपघटन करके O2, गैस मुक्त करते हैंजो कि जीवों के श्वसन के काम आती है। इस प्रकारक्लोरोप्लास्ट वातावरण में O2, एवं CO2, की सान्द्रता पर नियन्त्रण रखते हैं। 

3. प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश अभिक्रिया के समय इनमें ADP के फॉस्फोरिलेशन (Phosphorylation) से ATP का निर्माण होता हैं। इसी समय NADP से NADPH, का भी निर्माण होता है। ये ATP एवं NADPH, अन्धकार अभिक्रिया में CO2 के अपचयन के काम आते हैं। 

14. क्लोरोप्लास्ट हरे रंग का वर्णक होता हैअतः यह पत्तियों को हरा रंग प्रदान करता है। 

5. कार्बन स्थिरीकरण (CO- fixation) –C4 पौधों (C4 plants) तथा CAM पौधों में क्लोरोप्लास्ट अत्यधिक मात्रा में CO2, का अवशोषण प्रतिकूल परिस्थितियों में भी करवाकर रखने में सक्षम होती हैजो कि उसमें स्थित फॉस्फोइनॉल पायरुवेट कार्बोक्सिलेज एन्जाइम की उपस्थिति में फॉस्फोएनॉल पायरुविक अम्ल (Phosphoenol pyruric acid) द्वारा ग्रहण किया जाता है।


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