अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (विकलांग) दिवस 2023 : थीम (विषय) महत्व उद्देश्य इतिहास । International Day of Disabled Persons 2023 Theme History

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (विकलांग) दिवस 2023 : थीम (विषय) महत्व उद्देश्य इतिहास 

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (विकलांग) दिवस 2021 : थीम (विषय) महत्व उद्देश्य इतिहास । International Day of Disabled Persons 2021 Theme History

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (विकलांग) दिवस 2021 : थीम (विषय) महत्व उद्देश्य इतिहास -


अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (International Day of Disabled Persons)  कब मनाया जाता है ?


  • प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (International Day of Disabled Persons)  इस दिन को मुख्य रूप से दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।


अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (विकलांग) दिवस पहली बार कब मनाया गया ?

  • वर्ष 1992 में ही संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा 3 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा भी की गयी और तभी से 3 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया जाता है।


विश्व दिव्यांग दिवस ( विश्व विकलांग दिवस 2023 ) की थीम -

  • सभी के लिए एक समावेशी भविष्य का निर्माण: दृढ़ संकल्प के साथ अग्रणी। 2030 विकास एजेंडा पर कार्रवाई करना" है।
  • “Shaping an Inclusive Future for All: Leading with Determination”, an event organized at United Nations at World Expo 2020 Dubai.

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस का उद्देश्य

  • इस दिवस को मनाने का सबसे महत्त्वपूर्ण उद्देश्य अशक्त जनों की अक्षमता के मुद्दों को लेकर समाज में लोगों की जागरूकता, समझ और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है।
  • विकलांग जनों के आत्म-सम्मान, कल्याण और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी सहायता करना।
  • आधुनिक समाज में अशक्त जनों के साथ हो रहे हर प्रकार के भेद-भाव को समाप्त करना।

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (International Day of Disabled Persons) का इतिहास 

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1981 को विकलांग व्यक्तियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया, जिसकी थीम थी पूर्ण भागीदारी और समानता। इस थीम के तहत समाज में विकलांगों को बराबरी का अवसर उपलब्ध कराने और उनके अधिकारो के प्रति उन्हें और अन्य लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया था ताकि विकलांगों को सामान्य नागरिकों के समान ही सामाजिक-आर्थिक विकास का लाभ प्राप्त हो सके।
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1983-1992 के दशक को विकलांगों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक के रूप में घोषित किया गया। 
  • वर्ष 1992 में ही संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा 3 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा भी की गयी और तभी से 3 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया जाता है।


अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (विकलांग) दिवस की थीम (विषय) 


विश्व दिव्यांग दिवस ( विश्व विकलांग दिवस 2021 ) की थीम -

  • सभी के लिए एक समावेशी भविष्य का निर्माण: दृढ़ संकल्प के साथ अग्रणी। 
  • “Shaping an Inclusive Future for All: Leading with Determination”, an event organized at United Nations at World Expo 2020 Dubai.


विश्व दिव्यांग दिवस ( विश्व विकलांग दिवस 2020 ) की थीम -

  • ''बेहतर पुनर्निमाण: कोविड-19 के बाद की दुनिया में विकलांग व्यक्तियों के लिए समावेशी, सुलभ और अनुकूल माहौल हो।'' 


विश्व दिव्यांग दिवस ( विश्व विकलांग दिवस 2020 ) की थीम -

  • आईडीपीडी वर्ष 2019 का विषय "दिव्यांग व्यक्तियों और उनके नेतृत्व की भागीदारी को बढ़ावा देना: 2030 विकास एजेंडा पर कार्रवाई करना" है।
  • (Transformation towards sustainable and resilient society for all) निर्धारित की गई है।


विश्व दिव्यांग दिवस ( विश्व विकलांग दिवस 2018 ) की थीम -

  • आईडीपीडी वर्ष 2018 का विषय "विकलांग व्यक्तियों को सशक्त बनाना तथा उनका समावेश एवं समानता सुनिश्चित करना" है।


विश्व दिव्यांग दिवस ( विश्व विकलांग दिवस 2017 ) की थीम -


  • वर्ष 2017 में इसकी थीम सभी के लिये टिकाऊ और लचीली सामाजिक व्यवस्था की ओर परिवर्तन”   


दिव्यांगता(विकलांगता) का अर्थ क्या है

  • विकलांगता किसी व्यक्ति की वह दशा है जो शारीरिक एवं मानसिक क्षति अथवा अक्षमता के कारण उत्पन्न होती है और उसकी शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं में सामान्य व्यक्तियों की तुलना में बाधा उत्पन्न करती है।
  • निर्योग्यता (Disability) एक व्यापक शब्द है जो किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, ऐन्द्रिक, बौद्धिक विकास में किसी प्रकार की कमी को इंगित करता है। इसके लिए अशक्तता, निःशक्तता, अपंगता, विकलांगता, दिव्यांगता आदि शब्दों का भी प्रयोग किया जाता है।

 

भारत में दिव्यांगों के लिए कानून

  • भारतीय संविधान के तहत दिव्यांगजनों का विषय संविधान की 7वीं अनुसूची की राज्य सूची में आता है। भारत सरकार हमेशा से दिव्यांगजनों के व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सक्रिय रही है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 में निःशक्तजनों को लोक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की बात कही गयी है। साथ ही विभिन्न पिछड़े एवं कमजोर तबकों के साथ-साथ विकलांग जनों को एक सुरक्षित सम्मानित और समृद्ध जीवन सुलभ कराने के उद्देश्य से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की स्थापना की गयी है।

 

विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 1995

भारत सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 1995 पारित किया था। इस अधिनियम के दो प्रमुख लक्ष्य थे- 

  • निःशक्त व्यक्तियों की समानता और सम्पूर्ण सहभागिता को स्वीकार और सुनिश्चित करना।
  • उनके आर्थिक और सामाजिक अधिकारों की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना। इसके तहत सरकारी महकमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में दिव्यांगजनों के लिए तीन फीसदी आरक्षण का प्रावधान भी किया गया था।


  • हाल के वर्षों में विकलांगों के प्रति समाज का नजरिया तेजी से बदला है। यह माना जाने लगा है कि यदि विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर तथा प्रभावी पुनर्वास की सुविधा मिले तो वे बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 2006 में दिव्यांग जनों के लिए राष्ट्रीय नीति घोषित की है । 

 

दिव्यांग जनों के लिए राष्ट्रीय नीति

  • दिव्यांग व्यक्तियों को देश के लिए बहुमूल्य मानव संसाधन स्रोत माना गया है।
  • मंत्रालय में दिव्यांगों के लिए मुख्य आयुक्त की नियुक्ति की गई।
  • ये आयुक्त नियमों और आदेशों के उल्लंघन की शिकायतें सुनते हैं।
  • इस नीति के तहत विकलांगता के क्षेत्र में काम करने के लिए सात राष्ट्रीय स्तर के संस्थान खोले गए हैं।
  • इस नीति का उद्देश्य विकलांगता की रोकथाम करना और दिव्यांगजनों के पुनर्वास का उपाय करना, महिला दिव्यांगों को शोषण और दुर्व्यवहार में बचाना और दिव्यांग बच्चों की देखभाल करना।


निःशक्त व्यक्तियों का अधिकार विधेयक, 2016

विकलांगता कानून को व्यापक और विस्तृत रूप देने और दिव्यांगजनों को और सशक्त बनाने के लिए सरकार ने वर्ष 2016 में निःशक्त व्यक्तियों का अधिकार विधेयक, 2016 पारित किया। इस विधेयक ने विकलांग (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्णभागीदारी) अधिनियम 1995 का स्थान लिया। इस कानून के प्रमुख प्रावधान हैं-

 

  • इसके तहत 21 निःशक्तताओं को मान्यता दी गई।
  • इस कानून में मानसिक विकलांगता, मनोवैज्ञानिक विकार, कुष्ठ रोगी मस्तिष्क पक्षाघात (ऑरिज्म) को भी विकलांगता की श्रेणी में रखा गया।
  • इसमें पार्किंसंस रोग और एसिड की वजह से होने वाली विकलांगता को भी शामिल किया गया है।
  • इसमें 6-8 वर्ष तक सभी विकलांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है।
  • इसके तहत विकलांगों को आरक्षण की सीमा तीन फीसदी से बढ़ाकर चार फीसदी की गई है और उच्च शिक्षण संस्थानों में पाँच फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • न्यूनतम 40% विकलांगता के शिकार लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
  • इस विधेयक में विकलांगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के मानकों को भी अपनाया गया है।
  • इस कानून के तहत यदि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर किसी विकलांग जन का मजाक बनाता है या उसे डराता है या उसका अपमान करता है तो उस व्यक्ति को जेल की सजा हो सकती है।
  • इस कानून में प्रावधान है कि देश के हर जिले में विशेष कोर्ट बनाये जायेंगे जो विकलांगजनों के अधिकारों के हनन के मामलों की सुनवाई करेंगे।
  • इस कानून के निर्धारित समय सीमा के अंदर सरकारी और निजी सार्वजनिक इमारतों को विकलांग जनों के लिए सुगम्य बनाये जाने का प्रावधान भी किया गया है।
  • इस तरह दिव्यांग अधिकार कानून, 2016 के जरिये भारत ने यूएनसीआरपीडी (United Nations convention on Rights of Person with Disabilities) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए एक बेहतर कदम उठाया है।

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