राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण | National Tiger Conservation Authority

 

National Tiger Conservation Authority


राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण 

NTCA (National Tiger Conservation Authority) 

सरिस्का टाइगर रिजर्व (राजस्थान) से आकस्मिक रूप से कम होते बाघों के मुद्दे पर वर्ष 2005 में पाॅच सदस्यी टाइगर टास्क फोर्स गठित की गई। इसी समिति की अनुशंसा पर पर्यावरण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का गठन किया गया।

सांविधिक  स्थिति बाघ परियोजना के संबंध में निर्देशों को कानूनी प्राधिकार प्रदान करती है और साथ ही संसद के प्रति इसकी जवाबदेही सुनिश्चित करती है।

राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की संरचना

प्राधिकरण का अध्यक्ष केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री होता है। इसके सदस्यों मेे 1 राज्यसभा एक लोकसभा से तथा वन्य जीव सरंक्षण एवं  आदिवासी कल्याण क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं। वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत प्राधिकरण एक सांविधिक निकाय है।

 राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के कार्य Function of NTCA

  • राज्यों की बाघ संरक्षण योजना को स्वीकृति प्रदान करना।
  • बाघ संरक्षण  क्षेत्रों के निकटस्थ क्षेत्रों का नियमन करना तथा खनन एवं पर्यटन के मानक तय करना।
  • प्रत्येक चार वर्ष पश्चात स्वीकृत एवं परिष्कृत विधियों द्वारा बाघों की स्थिति, शिकार, पर्यावास, और सह परभक्षियों के विषय में देशव्यापी मूल्यांकन करना।
  • स्थानीय समुदायों की आजीविका के अवसरों का ध्यान रखना।
  • बाघों की गणना की कैमरा टैप विधि में बाघों के शरीर की धारियों का मिलान किया जाता है, जबकि डीएनए फिंगर प्रिंटिंग में बाघों के मल का उपयोग किया जाता है।

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एम स्ट्राइप्स M-STRIPES

M-STrIPES 

(Monitoring System For Tigers-Intensive Protection and Ecological Status)

म-स्ट्राइप्स माॅनीटरिंग सिस्टम फाॅर टाइगर्स इंटेन्सिव प्रोटेक्शन एंड इकोलाजिकल स्टेटस का शब्द संक्षेपण है जिसमें विशलेषण, मानिचत्र और निष्कर्ष अनुमान हेतु फील्ड प्रोटोकाल तथा कस्टमाइज्ड साॅफ्टवेयर शामिल किये जाते हैं। इसका विकास डब्ल्यू. डब्ल्यू. एफ और जूलाॅजिकल सोसाइटी लंदन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।

इसका लक्ष्य गश्त, नियमित अंतरालों पर मांसाहारी जीवों की प्रवृत्तियों एवं दशा का मूल्यांकन करना, पर्यावास परिवर्तन पर निगरानी रखना तथा मानवीय दबावों का मूल्यांकन आदि करना है।

वैश्विक टाइगर फोरम Global Tiger Forum

वर्ष 1993 में वैश्विक स्तर पर बाघ संरक्षण हेतु दिल्ली में सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें वैश्विक टाइगर फोरम की स्थापना की गई। इसका मुख्य उद्देश्य सभी देशों के परस्पर सहयोग द्वारा बाघों की रखा एवं सरंक्षा को सुनिश्चित करना था।

वैश्विक टाइगर फोरम द्वारा टाइगर वाच कार्यक्रम चलाया जाता है। इसके अतिरिक्त जी.टी.एफ. विश्व के सभी संबंधित राष्ट्रों को तकनीक एवं संस्थागत सहायता भी मुहैंया कराता है।

ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum-GTF)

  • ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) बाघों की रक्षा के लिये इच्छुक देशों द्वारा स्थापित एकमात्र अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय निकाय है।

  • GTF दुनिया के 13 टाइगर रेंज के देशों में वितरित बाघों की शेष 5 उप प्रजातियों को बचाने पर केंद्रित है।

  • GTF का गठन 1993 में नई दिल्ली, भारत में बाघ संरक्षण पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की सिफारिशों पर किया गया था।

  • फोरम की स्थापना के लिये टाइगर रेंज के देशों की पहली बैठक 1994 में हुई थी, जिसमें भारत को अध्यक्ष चुना गया था और अंतरिम सचिवालय बनाने के लिये कहा गया था।

  • 1997 में, GTF एक स्वतंत्र संगठन बना।

  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

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