प्रकाश क्या है । प्रकाश के विभिन्न गुण | Prakash Ke Vibhinn Gun | Light Gk in hindi


प्रकाश क्या है what is light?

प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है, जो विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में संचारित होती है, इसका ज्ञान हमें आंखों के द्वारा प्राप्त होता है। प्रकाश की तरंग दैर्ध्य 3900 A°  से 7800 A° के बीच होती है।
    प्रकाश में  तरंग प्रकृति के साथ-साथ कण प्रकृति भी होती है|
  • प्रकाश को कुछ घटनाओं में तरंग तथा कुछ घटनाओं में कण माना जाता है इसे ही प्रकाश की दोहरी प्रकृति कहते हैं
  •  प्रकाश की तरंग प्रकृति के आधार पर परावर्तन, अपवर्तन, प्रकाश का सीधी रेखा में गमन, विवर्तन, व्यतिकरण तथा ध्रुवण को परिभाषित किया जाता है एवं कण प्रकृति के आधार पर प्रकाश विद्युत प्रभाव तथा क्राम्पटन सिद्धांत को परिभाषित किया जाता  है।
  •   प्रकाश की कण प्रकृति के अनुसार प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बंडलों या पैकेटों के रूप में चलता है जिन्हें को फोटान कहते हैं।
  •    प्रकाश के वेग की गणना सबसे पहले रोमन ने की थी
  •  प्रकाश की चाल वायु या निर्वात में सबसे अधिक होती है जो 3×10^8 मीटर प्रति सेकंड है।

विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल -




  • किसी भी माध्यम में प्रकाश की चाल उस माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है, माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होगा प्रकाश की चाल उतनी ही कम होगी।प्र
  • प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में लगभग 499 सेकंड (8 मिनट 19 सेकंड) का समय लगता है।
  • चंद्रमा द्वारा परावर्तित प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 1.28 सेकंड का समय लगता है।

प्रकाश के विभिन्न गुण

परावर्तन 

Reflection

प्रकाश का किसी चिकने पृष्ठ  से टकराकर वापस लौट जाने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
प्रकाश के परावर्तन के दो नियम हैं-

    Reflection of light

1) आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब सभी एक ही समतल में होते हैं 2) आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं।

अपवर्तन Refraction


जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में  प्रवेश करती है तो वह मुड़ जाती हैए  दूसरे माध्यम से गुजरते समय प्रकाश की किरण के मुड़ जाने की घटना को ही प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

    Refraction of Light


विवर्तन Diffraction

यदि प्रकाश के रास्ते में रखी अपारदर्शी वस्तु अत्यंत सूछ्म हो तो प्रकाश सरल रेखा में चलने की अपेक्षा इसके किनारों पर मुड़ने की प्रवृत्ति दिखाता है इस प्रभाव को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं।
Diffraction of Light

प्रकीर्णनScattering 

प्रकाश जब ऐसे माध्यम में प्रवेश करता है जिसमें धूल तथा अन्य पदार्थों के छोटे छोटे कण होते हैं, तो इन कणों के द्वारा प्रकाश का सभी दिशाओं में प्रसारित हो जाना प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाता है।

वर्ण विक्षेपणDispersion

जब सूर्य का प्रकाश प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपवर्तन के पश्चात प्रिज्म के आधार की ओर झुकने के साथ-साथ विभिन्न रंगों के प्रकाश में बँट जाता है, इस प्रकार से प्राप्त रंगों के समूह को वर्णक्रम कहते हैं तथा श्वेत प्रकाश के  अपने अवयवी  रंगों में विभक्त होने की क्रिया को वर्ण विक्षेपण कहते हैं। 
Dispersion of Light

सूर्य के प्रकार से प्राप्त रंगों में बैंगनी रंग का विक्षेपण सबसे अधिक एवं लाल रंग का विक्षेपण सबसे कम होता है।

व्यतिकरण Interference

जब सामान आवृत्ति व सामान आयाम की दो प्रकाश तरंगे जो मूलतः एक ही प्रकाश स्रोत से किसी माध्यम में एक ही दिशा में गमन करती हैं तो उनके  अध्यारोपण के फलस्वरूप  प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।
व्यतिकरण दो प्रकार का होता है संपोषित व्यतिकरण एवं विनाशी व्यतिकरण।

                                     Interference of light


ध्रुवण Polarization

जब सामान्य प्रकाश को टूरमैलीन क्रिस्टल से गुजारा जाता है तो बाहर निकलने वाले प्रकाश की तरंगों का कंपन केवल एक ही तल  में होता है, जिन प्रकाश तरंगों का कंपन एक ही तल में होता है उस प्रकाश को ध्रुवित प्रकाश कहते हैं और अध्रुवित प्रकाश से ध्रुवित प्रकाश में परिवर्तन की घटना को ध्रुवण कहते हैं।
Polarization of Light

विभिन्न तथ्यVarious facts of light

  •   प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण ही आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।
  • समतल दर्पण के बिना प्रतिबिम्ब सीधा एवं काल्पनिक होता है तथा दर्पण से उतना ही पीछे बनता है, जितनी वस्तु दर्पण से आगे रहती है।
  • अवतल दर्पण से वास्तविक और काल्पनिक दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बन सकते है। वास्तविक    प्रतिबिम्ब बड़ा या छोटा हो सकता है, किन्तु काल्पनिक प्रतिबिम्ब बड़ा होता है।
  • उत्तल दर्पण से हमेशा सीधा, छोटा और काल्पनिक प्रतिबिम्ब बनता है।
  •   अवतल दर्पण का उपयोग दाढ़ी बनाने में, आंख कान एवं नाक के डॉक्टर के द्वारा, गाड़ी की हेडलाइट एवं सर्च लाइट तथा सोलर कुकर में किया जाता है।
  • उत्तल दर्पण का उपयोग वाहन चालक के पास लगने वाले बैक मिरर में किया जाता है।
  •    प्रकाश के अपवर्तन के कारण पानी में डूबी हुई छड़ तिरछी दिखाई देती है, तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं, सूर्योदय के कुछ समय पूर्व एवं सूर्यास्त के कुछ समय बाद तक सूर्य दिखाई देता है, पानी के तल में रखी हुई कोई भी वस्तु अपनी वास्तविक गहराई से ऊपर उठी हुई दिखाई देती है।
  • प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण ही हीरा अत्यधिक चमकीला होता है तथा कांच में आई दरार चमकती हुई दिखाई देती है।
  लेंस के प्रकार
  •   लेंस दो प्रकार के होते हैं - उत्तल लेंस तथा अवतल लेंस 
  •   उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक एवं अवतल लेंस की क्षमता है ऋणात्मक होती है।
  •    लेंस की क्षमता को डायोप्टर में मापा जाता है।
  • ·    इंद्रधनुष प्रकाश के परावर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा अपवर्तन द्वारा वर्ण विक्षेपण का उदाहरण है।
  •      मानव नेत्र की स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेंटीमीटर होती है।
  • ·    निकट दृष्टि दोष से ग्रसित व्यक्ति नजदीक की वस्तु तो देख लेता है परंतु दूर की वस्तु को नहीं देख पाता है, इस दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
  • ·  दूर दृष्टि दोष से ग्रसित व्यक्ति को दूर की वस्तु तो दिखलाई पड़ती है किंतु निकट की वस्तु दिखलाई नहीं पड़ती इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
  • ·   वृद्धावस्था के कारण व्यक्ति को ना तो दूर की ना ही पास की वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है, इस दोष को जरा दृष्टि दोष कहते हैं, इस दोष के निवारण के लिए द्विफोकसी लेंस का प्रयोग किया जाता है।
  • ·   पनडुब्बी के अन्दर से बाहर की वस्तुओं को देखने के लिए पेरिस्कोप का प्रयोग किया।
  • ·        बुनकरों द्वारा विभिन्न प्रकार के रंगीन डिज़ाइन देखने के लिए कैलिडोस्कोप का उपयोग किया जाता है।


No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.