Swatantrata Andolan aur Madhya Pradesh ka Yogdan {मध्य प्रदेश का स्वाधीनता संग्राम में योगदान}

MP in Swantra Andolan

स्वतंत्रता आंदोलन और मध्य प्रदेश

  • देश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 1885 ई. में गठन मुम्बई में किया गया। यह संस्था लोगों में राजनैतिक सचेतना का मार्ग प्रशस्त करने लगी। कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन जो 1886 में कोलकाता में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में संपन्न हुआमध्य भारत के नेताओं में बापूरावदादाकिन खेड़ेगंगाधर चिटनिस व अब्दुल अजीज आदि ने भाग लिया था। जब 1891 ई.  में कांग्रेस का सातवाँ सम्मेलन इस क्षेत्र के भूभाग (नागपुर) में हुआ तब इस क्षेत्र के लोगों में राष्ट्रीय चेतना के प्रति जागरूकता आई। बाल गंगाधर तिलक के प्रभाव में मध्य भारतमालवा आदि क्षेत्रों में गणेश उत्सवशिवाजी उत्सव आदि के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का प्रचार किया जाने लगा। इसी बीच खांडवा से सुबोधसिन्धु व जबलपुर से जबलपुर टाइम्स का प्रकाशन प्रारंभ किया गया। इसके इस राज्य में राष्ट्रीयता के प्रचार क्षेत्र में अभिवृद्ध होने लगी। पं. माखनलाल चतुर्वेदी ने अपने पत्र कर्मवीर के माध्यम से इसके प्रचार में नई दिशा दी। 1899 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में इस राज्य के डॉ. हरिसिंह गौड़ ने नये विभाग तथा प्रशासन को पृथक्-पृथक् रखने की माँग उठायी। 1904 ई. में अंग्रेजी शिक्षा पद्धति का कड़े शब्दों में विरोध किया। 1907 में जबलपुर में एक क्रांतिकारी दल का गठन किया गया। 1923 में जबलपुर सत्यग्रह प्रांरभ हुआ जिसके बाद ही यह संपूर्ण राज्य में इस सत्याग्रह का नेतृत्व देवदास गाँधीराजगोपालाचार्य तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने किया। यहाँ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कारण सुन्दरलाल  को 6 माह की कारावास की सजा दी गईं। जबलपुर के ही सेठ गोविन्ददास व पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में 6 अप्रैल 1930 को नमक सत्याग्रह की शुरूआत की गई। यहीं पर इस वर्ष प्रांरभ हुए जंगल सत्याग्रह का भी श्रीगणेश हुआ। जिसकों सेठ गोविंद दासमाखनलाल चतुर्वेदी व पं. रविशंकर शुक्ल पं. द्वरिका प्रसाद मिश्र व विष्णु दयाल भार्गव आदि नेताओं को गिरफ्तार कर उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया। 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के प्रांरभ हो जाने पर यहीं से गाँधी जी द्वारा व्यक्तिगत अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत की गई।
  • राज्य के सिवनी जिले में 1961 ई. में स्वतंत्रता आंदोलन प्रांरभ हुआ। 1920-20 में इस राज्य में कांग्रेस व खिलाफत आंदोलन की शुरूआत साथ-साथ की गई जिसमें कांग्रेस की बागडोर प्रभाकर डुण्डीराज जटार व खिलाफत का नेतृत्व अब्दुल जब्बार खाँ ने किया। 1923 के नागपुर के झण्डा सत्याग्रह का नेतृत्व महात्मा भगवानदीन एवं पूरनचन्द राका ने किया। नमक सत्याग्रह में इस जिले के दुर्गाशंकर मेहता ने गाँधी चौक पर नमक बनाकर सत्याग्रह की शुरूआत की। यहाँ जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों में सुभाषचन्द्र बोसआचार्य विनोबा भावेपंडित द्वरिका प्रसाद मिश्र शरद चंद्र बोस व एच.वी.कामथ प्रमुख थे।
  • 1922 ई. में राज्य की भोपाल रियासत की सीहोर कोतवाली के सामने विदेशी फेल्ट केप की होली जलाई गई। भोपाल में 1938 ई. में भोपाल राज्य प्रजामण्डल की स्थापना की गईजिनमें मौलाना तरजी मशरिकी को सदर व चतुर नारायण मालवीय को मंत्री के रूप में चुनाजिन्होंने खुले अधिवेशन में नागरिक स्वतंत्रता के माँग संबंधी प्रस्ताव को प्रस्तुत किया।
  • बैतूल जिले के घोड़ा-डोगरी के आदिवासियों ने भी नमक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1930 ई. में जंगल सत्याग्रह के आहृान पर इस अंचल का हरेक आदिवासी ब्रिटिश साम्राज्य को कड़ी चुनौती प्रस्तुत करने के लिए पहाड़ों व जंगलों की ओर साज-ओ-सामान के साथ कूद पड़ा थाजिसका नेतृत्व शाहपुर के निकट स्थित बंजारी सिंह कोरकू द्वारा किया गया।
  • रतलाम में 1920 ई. में कांग्रेस समिति की स्थापना की गई तथा इसके प्रथम अध्यक्ष के रूप में मोहम्मद उमर खान को नामित किया गया। यहाँ से राष्ट्रीय आंदोलन का सूत्रपात स्वामी ज्ञानानंद की प्रेरणा से हुआ। यहाँ पर 1931 ई. में महिला सेवादल तथा 1935 ई. में प्रज्ञा परिषद की स्थापना की गई।
  • झाबुआ जिले में 1934 ई. में प्रजामंडल की सहायता से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कारशराब बंदी व हरिजन उद्धार संबंधी आंदोलन प्रांरभ किये गये जिसमें अँग्रेजी हुकूमत द्वारा इन स्वतंत्रता सेनानियों पर कहर बरसाये गये तथा इन्हें जेल में बंद कर कष्टप्रद यातनाएँ दी गईं इसी वर्ष भोपाल रियासत में मौलाना तर्जी मशरिकी खान व शाकिर अली खान के नेतृत्व में अन्जुमन खुद्दाम-ए-वतन तथा मास्टर लाल सिंहलक्ष्मीनारायण सिंथलडॉजमुना प्रसाद मुखरैयापं. उद्धवदास मेहतापं. चतुर नारायण मालवीय के नेतृत्व में भोपाल राज्य हिन्दू सभा की नींव डाली गयी। इसके फलस्वरूप यहाँ की जनता में स्वतंत्रता आंदोलन हेतु नई चेतना को दिशा मिली। हिन्दू सम्मेलन के लिए मास्टर लाल सिंह लक्ष्मी नारायण सिंघलपं. उद्धवदास मेहता व डॉ. मुखरैया को 1937 में जेल की सजा हुई। 
  • 2 अक्टूबर, 1942 ई. को मंडलेश्वर जेल में बंद क्रांतिकारियों द्वारा रात्रि में मुख्य द्वार का ताला तोड़ दिया गया तथा उनके विरूद्ध विद्रोह का प्रदर्शन किया गया तथा बाद में एक सभा भी आयोजित की गईं। तत्पश्चात् ये लोग अँग्रजी सेना द्वारा पुनः पकड़ लिए गए। जनवरी 1939 में इस राज्य के त्रिपुरी नामक स्थान में राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन सम्पन्न हुआजिनमें महात्मा गाँधी के विरोध के बावजूद भी सुभाष चंद्र बोस को इसका अध्यक्ष चुना गयाजिन्होंने अप्रैल 1939 में इस्तीफा दे दिया। जब देश 15 अगस्त, 1947 ई. को स्वतंत्र हुआ तब मध्य भारत व उसके अंतर्गत की सभी रियासतों को मिलाकर मध्य प्रांत नामक राज्य बना तथा पन्नाछतपुर व रीवा क्षेत्र को मिलाकर विंध्य प्रदेश भोपाल व महाकौशल तथा छत्तीसगढ़ के भूभाग को मिलाकर म.प्र. बनाया गया।

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