Madhya Pradesh ki Pramukh boliyan evam Lok natya {मध्य प्रदेश की बोलियाँ एवं लोकनाट्य}

मध्य प्रदेश की बोलियाँ एवं लोकनाट्य

मध्य प्रदेश लोक नाट्य MP KE PRAMUKH LOK NATYA


1. माचा: मालवा अंचल का एक प्रमुख लोकनाट्य है, माचा का जन्म स्थान उज्जैन है। 
2. राई स्वंग: (बुंदेलखण्ड) स्वांग का शाब्दिक अर्थ है, ‘अभिनय‘। यह जन्म एवं उत्सव के समय किया जाजा है। 
3. पण्डवानी: (मूलतः छत्तीसगढ़) शहडोल, अनूपपुर, बालाघाट में देखने को मिलता है।
4. काठी: निमाड़ अंचल में प्रचलित है। यह देव उठनी ग्यारस से आरम्भ होता है और एक माह चलता है।
5. नौटंकी: मूलतः उत्तर प्रदेश का लोकनाट्य है, पर म.प्र के बुंदेलखण्ड)एवं बघेलखण्ड में इसका प्रचलन है।
6. ढोला मारू की कथा: यह लोकनाट्य म.प्र. के राजस्थान से जुड़े सीमा क्षेत्र में प्रचलित है।


अन्य प्रमुख लोक नाट्य  MP KE LOK NATYA

छाहुर: बघेलखण्ड का लोकनृत्य।
गम्मत: निमाड़ का पारम्परिक लोकनाट्य।
अखाड़ा: बुन्देलखण्ड।
तेजाजी की कथा: मालवा।
रासलीला: निमाड़।
लकड़बग्घा: आदिवासियों का लोकनाट्य।


म.प्र. की बोलियाँ MP KI PRAMUKH BOLIYAN


1. बुन्देलखण्डी - अशोकनगर दतिया, गुना, शिवपुरी, मुरैना, सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट आदि।
2. निमाड़ी - बुरहानपुर, खण्डवा, खरगौन, धार देवास, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर।
3. बघेलखण्डी - रीवा, सतना, शहडोल, एवं उमरिया।
4. मालवी - सीहोर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, झाबुआ, उज्जैन, देवास, इंदौर आदि।
5. बृजभाषा  - भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, आदि।
6. कोरकू - बैतूल, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, खरगौर आदि।
7. भीली - रतलाम, धार, झाबुआ, खरगौन एवं अलीराजपुर।
8. गौंडी - बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मण्डला, डिंडोरी, होशंगाबाद 

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