जिबरेलिन्स खोज प्रभाव एवं अनुप्रयोग |Gibberellins Harmon's Usages in Hindi

जिबरेलिन्स खोज प्रभाव एवं अनुप्रयोग

जिबरेलिन्स खोज प्रभाव एवं अनुप्रयोग

जिबरेलिन्स [GIBBERELLINS] 

जिबरेलिन्स (Gibberellins) ऐसे पादप हॉर्मोन्स हैं जो अखण्ड पौधे (Intact plant) में स्तम्भ की लम्बवत् वृद्धि में बढ़ोत्तरी करते हैं। लेकिन जिबरेलिन्स पृथक् किये गये पादप अंगों की वृद्धि में बढ़ोत्तरी नहीं करते हैं। जिबरेलिन्स द्वारा वृद्धि करने के लिए विभज्योतक कोशिकाओं का होना आवश्यक है।

 

जिबरेलिन्स की खोज (Discovery of Gibberellins) 

जिबरेलिन को खोज सर्वप्रथम जापान के एक वैज्ञानिक कुरोसावा (Kurosawa) ने सन् 1926 में की थी।

जिबरेलिन के प्रकार्यात्मक प्रभाव एवं अनुप्रयोग  

1. तने का दीर्घीकरण (Stem elongation) - 

  • यह हॉर्मोन पर्वों (Internodes) की कोशिकाओं का दीर्घीकरण करता हैजिससे कि पौधों की लम्बाई बढ़ जाती है। इसके प्रभाव से पर्ण आच्छद (Leaf sheath) की असाधारण वृद्धि होती है। पौधों के तनों की लम्बाई में वृद्धि का प्रमुख कारण G.A. द्वारा कोशिका विभाजन (Cell division) तथा कोशिका दीर्घन (Cell elongation) होता है।

 

2. प्रसुप्ति को दूर करना (Breaking of dormancy) – 

  • यह देखा गया है कि इस हॉर्मोन के अनुप्रयोग से आलू के कन्द और पौधों पर शीतकालीन कलियों की प्रसुप्ति दूर हो जाती है।

 

3. अनिषेकफलन (Parthenocarpy) - 

  • टमाटरसेबनाशपाती इत्यादि फलों में अनिषेकफलन जिबरेलिन द्वारा ऑक्जिन की अपेक्षा अधिक सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। 

 

4. आनुवंशिक रूप से बौने पौधों का दीर्घीकरण (Elongation of genetically dwarf plants) –

  •  कुछ पौधों में बौनापन (Dwarfism) मुख्यत: एक जीन (Single gene) में उत्परिवर्तन (Mutation) के कारण होता है। ऐसे जीवों या पौधों को एकल जीन बौना (Single gene dwarfs) कहा जाता है। इन पौधों में बौनेपन का प्रमुख कारण पर्वो (Internodes) का छोटा होना होता है। ऐसे पौधों में जिबरेलिन्स के अनुप्रयोग से उनके पर्वों की लम्बाई में वृद्धि होती है और पौधे की लम्बाई सामान्य पौधों के समान हो जाती है। पर्वों की लम्बाई में जिबरेलिन्स के उपयोग द्वारा वृद्धि कई आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में देखी गई है । उदाहरण – मटर (Pisum sativum), विसिया फेबा (Viciafaba) एवं फेसिओलस मल्टीफ्लोरस (Phaseolus multiflorus)  आदि पौधों के आनुवंशिक बौनेपन को GA 3 के प्रयोग द्वारा दूर किया गया है।

 

5. पुष्पन पर प्रभाव (Effects on flowering) - 

  • जिबरेलिन्स पौधों में पुष्पन क्रिया को प्रेरित करते हैं। जिबरेलिन देने से दीर्घ प्रदीप्तिकालीन पौधे लघु प्रकाश अवधि में भी पुष्पन कर सकते हैं।

 

6. शीत उपचार का प्रतिस्थापन ( Substitution of cold treatment) -

  • कुछ द्विवर्षीय (Biennial) पौधों के पुष्पन के लिए शीतकाल के निम्न तापमान की आवश्यकता होती है। जिबरेलिन देने से इन पौधों को शीतकाल के तापमान की आवश्यकता नहीं होती हैवह केवल एक वर्ष में ही पुष्पन कर लेते हैं।

 

7 बोल्टिंग प्रभाव (Bolting effect)- 

  • कुछ शाकीय पौधे प्रारम्भिक वृद्धि की अवस्था में कायिक वृद्धि (Vegetative growth) के फलस्वरूप रोजेट वृद्धि (Rosette growth) प्रदर्शित करते हैं। ऐसे पौधों में तना छोटा (Short) एवं पत्तियाँ नुकीली होती हैं। छोटे दिन वाली अवधि के समय पौधे रोजेट स्वभाव ही प्रदर्शित करते हैंजबकि बड़े दिन वाली स्थिति (Long day conditions) में तने की लम्बाई में तेजी से वृद्धि होती है तथा अन्त में वह पुष्पीय अक्ष में परिवर्तित हो जाता है। इस क्रिया को ही बोल्टिंग (Bolting) कहते हैं। बोल्टिंग की यह क्रिया छोटे दिन वाली अवधि के दौरान जिबरेलिन (Gibberellin) के उपयोग के द्वारा उत्प्रेरित की जा सकती है। हायोसायमस नाइगर (Hyoscyamus niger) में जिबरेलिन के उपचार के फलस्वरूप बोल्टिंग के फलस्वरूप लम्बे एवं पुष्प उत्पादक पौधे उत्पन्न किये गये हैं। इसी प्रकार बन्दगोभी (Cabbage) जो कि एक द्विवर्षीय पौधा हैप्रथम वर्ष में कायिक वृद्धि प्रदर्शित करता हैजिसके कारण इसकी पत्तियाँ जमीन में फैलकर रोजेट वृद्धि (Rosette growth) प्रदर्शित करती हैं। द्वितीय वर्ष के दौरान इसमें पुष्पक्रम (Inflorescence) निकलता है। इस पौधे में जिबरेलिन का घोल छिड़क देने से प्रथम वर्ष में ही पुष्पक्रम निकल आता है। इस प्रकार जिबरेलिन के इस प्रभाव को ही बोल्टिंग प्रभाव (Bolting effect) कहते हैं। परन्तु जब इन बीजों को जिबरेलिन द्वारा उपचारित कर दिया जाता है तो वे पूर्ण अन्धकार में भी आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। इस प्रकार जिबरेलिन बीजों के अंकुरण को उद्दीपित (Stimulate) करता है।

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