विज्ञापन एजेंसी का स्वरूप या संगठन |Form or organization of advertising agency

विज्ञापन एजेंसी का स्वरूप या संगठन

विज्ञापन एजेंसी का स्वरूप या संगठन |Form or organization of advertising agency
 

विज्ञापन एजेंसी का स्वरूप या संगठन

व्यावसायिक एजेंसी के स्वरूप गठन में निम्नलिखित विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका होती विज्ञापन एजेंसी एक ऐसी संस्था है जो विज्ञापन के आदि से अन्त तक पूरी तरह विज्ञापन से जुड़ी होती है। विज्ञापन एजेंसी का स्वरूप एक अच्छे अस्पताल की तरह होता हैजिस तरह एक अच्छे अस्पताल में रोगियों की सुविधा के लिए अलग-अलग तरह के विशेषज्ञ होते हैंआपरेशन थियेटर होते हैंदवा की दुकान होती हैं। नर्सडाक्टर व अन्य कर्मचारी होते हैं उसी तरह विज्ञापन एजेंसी में भी विज्ञापनकर्ता के विचार को मूर्तरूप देने के लिए विज्ञापन निर्माण है-

 

विशेषज्ञकलाकारामाध्यम विशेषज्ञशोधकर्तानिर्माताविपणनकर्ता आदि सभी होते हैं और यह सब मिलकर विज्ञापन का काम पूरा करते हैं।

 

व्यावसायिक विज्ञापन एजेंसी के गठन में अनेक विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं. -

  • अनुसंधान विभाग 
  • मीडिया विभाग 
  • क्रिएटिव विभाग 
  • ग्राहक सेवा विभाग (क्लाइट सर्विसिंग डिपार्टमेंट) 
  • प्रोडक्शन विभाग 
  • बिलिंगचैकिंग व मॉनिटरिंग विभाग 
  • लेखा विभाग

 

अनुसंधान विभागः 

किसी भी प्रभावी विज्ञापन के निर्माण के लिए शोध की जरूरत होती है। इसीलिए प्रत्येक विज्ञापन एजेंसी अपने यहाँ अलग से रिसर्च विभाग की व्यवस्था करती है। यह विभाग बाजार का सर्वेक्षण करता है। बाजार की ताजा गतिविधियों की जानकारी एकत्र करता है। उपभोक्ता सर्वे भी इस विभाग का कार्य है। यह उत्पाद या सेवा के बारे में उपभोक्ता के व्यवहार और उनके मनोविज्ञान का विश्लेषण करता हैसंभावित उपभोक्ताओं का अनुमान लगाता है। अनुसंधान विभाग की यह जिम्मेदारी होती है कि वह उपभोक्ता और बाजार संबंधी सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं का संग्रह करे। बाजार में चल रही प्रतिस्पर्धा को समझे। यह रिसर्च विभाग न केवल अपनी विज्ञापन एजेंसी के लिए महत्त्वपूर्ण होता हैबल्कि यह उत्पादकों अथवा विज्ञापकों के लिए भी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाकर उनका भी मार्ग निर्देशन करता है। विज्ञापनदाता का उत्पाद कहां बिक सकता है उसके उत्पाद के उपभोक्ता वर्ग में कौन-कौन लोग शामिल हो सकते है उत्पाद की गुणवत्ता को कैसे बढ़ाया जा सकता है किस तरह के नए उत्पाद की योजना बनाई जा सकती है ये सब जानकारियाँ अनुसंधान विभाग उपलब्ध करा सकता है।

 

मीडिया विभाग: 

मीडिया विभाग के दो प्रमुख उप विभाग हैं- मीडिया प्लानिंग और मीडिया ऑपरेशन प्रभावी मीडिया रणनीति के तहत यह विभाग प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में विज्ञापन के लिए स्थान और समय की प्लानिंग शेड्यूलिंग और बुकिंग का दायित्व संभालता है। इस विभाग में दो तरह के लोग होते हैं। मीडिया प्लानर्स और मीडिया बायर्स। इस विभाग में मीडिया प्लानिंग के तहत विज्ञापनदाता को इस बात की जानकारी दी जाती है कि उसके उत्पाद अथवा सेवा के लिए दिए जाने वाले विज्ञापन का बजट क्या होगा और वह कितने लोगों तक पहुंचेगा। मीडिया प्लानिंग विभाग का काम कम बजट में अधिक से अधिक लोगों तक विज्ञापनदाता के उत्पाद या सेवा के विज्ञापन को पहुंचाने की व्यवस्था करना है। मीडिया ऑपरेशन विभाग की देखरेख में यह तय होता है कि विज्ञापन को कब और कहां जारी किया जाए।

 

क्रिएटिव विभागः 

क्रिएटिव विभाग विज्ञापन एजेंसी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है। वह विभाग रचनात्मक कौशल से विज्ञापन की संरचना करके विज्ञापनदाता के अभीष्ट की सिद्धि में अपनी कारगर भूमिका निभाता है। यह विभाग विज्ञापन की संदेश रचना यानी कॉपी तथा 'डिजाइनतैयार करता है।

 

क्रिएटिव विभाग के दो मुख्य उप विभाग होते हैं-

 

  • कॉपी राइटिंग विभाग 
  •  आर्ट विभाग।

 

कॉपी राइटिंग विभाग: 

कॉपी राइटिंग विभाग में विज्ञापन के लिए टेक्स्ट और प्रचार के लिए थीम तैयार करने का काम किया जाता है। यह काम कॉपी राइटर करता है। वह अपनी सृजनात्मक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए प्रचार की थीम और विज्ञापन के लिए टेक्स्ट उपलब्ध कराता है। किसी विज्ञापन की हेडलाइनसब लीड कैप्शननारेपंच लाइन आदि कॉपी राइटर द्वारा लिखी जाती हैं। कॉपी लेखक के रचनात्मक कौशल की सफलता इस बात में है कि वह अपनी कल्पनाशीलता और भाव प्रवणता के बल पर उत्पाद की गुणवत्ता और उत्कृष्टता को विज्ञापन की 'कॉपी में कुछ इस तरह उतार दें कि उपभोक्ता के मन में उत्पाद को खरीदने की इच्छा पैदा हो जाए। कॉपी लेखक की विशेषता इस बात में भी है कि वह उत्पाद या सेवा के विज्ञापन संदेश में उत्पाद या सेवा की केंद्रीय विशिष्टता को उभार दे। वह उत्पाद या किसी सेवा के विज्ञापन की 'कॉपी लेखनको आकर्षक नारोंकाव्यात्मक भाषानाटकीय अंदाज आदि के जरिए प्रभावी बना सकता है। इसके लिए वह संबंधित साहित्य की सहायता भी ले सकता है। कॉपी लेखक को विज्ञापन माध्यम का ध्यान रखते हुए विज्ञापन का 'कॉपी लेखनकरना पड़ता है। प्रिंट माध्यम के लिए दिए जानेवाले विज्ञापनों की भाषा-शैली तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में लिये दिए जानेवाले विज्ञापनों की भाषा शैली को कई बार अलग-अलग रखना पड़ता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कॉपी राइटर को इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि वह जिन माध्यमों के लिए लेखन कर रहा है वे निरक्षरों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। कॉपी राइटर को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि विज्ञापन की विषय वस्तु संदेश या नारे पठनीय हों। विज्ञापन को प्रोडक्शन में भेजने से पहले कॉपी लेखक को विज्ञापन को त्रुटि रहित बनाने के लिए संपादन भी करना पड़ता है। टाइप और शब्दों के बारे में वह टाइपोग्राफर्स की मदद ले सकता है।

 

आर्ट विभागः 

विज्ञापन एजेंसी का आर्ट विभाग प्रचार को दृश्य के माध्यम से दिखाने का काम करता है। आर्ट डायरेक्टरविजुलाइजर्सग्राफिक डिजाइनरकंप्यूटर ऑपरेटरविन्यासकार या ले आउट मैन आदि इसी विभाग के अंग होते हैं।

 

आर्ट डायरेक्टर (कला निदेशक): 

आर्ट डायरेक्टर यानी कला निदेशक विज्ञापनदाताओं की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुकूल विज्ञापन का खाका तैयार करता है। आर्ट डायरेक्टर लेखन कलाचित्रकलाफोटोग्राफीमुद्रण कला आदि की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। विज्ञापन के सृजनात्मक पक्षों की दृष्टि से वह विज्ञापनों को कलात्मक स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

विज्ञापन एजेंसी के संगठन की पद्धतियां : 

विज्ञापन एजेंसी के संगठन की तीन पद्धतियां अधिक प्रचलित हैं-

 

1- समूह पद्धति 

2- विभागीय पद्धति 

3- विकेन्द्रीकृत संगठन

 

समूह पद्धति में माध्यम विशेषज्ञकॉपी लेखकशोधकर्ताडिजाइनर आदि सारे विशेषज्ञ एक समूह के रूप में कार्य करते हैं। समूह के प्रत्येक सदस्य का अपना एक विशेष कार्य होता है। एक समूह के पास एक या एक से अधिक कम्पनियों का कार्य हो सकता है। इनसे जुड़े कार्य का पूरा दायित्व उसी समूह का होता है। इसमें टीम वर्क की प्रधानता होती हैं।

 

विभागीय पद्धति में सभी विशेषज्ञ किसी एक समूह के रूप में कार्य नहीं करते बल्कि अपने-अपने विभाग के अन्तर्गत कार्य करते हैं। किसी एक विज्ञापन की निर्माण प्रक्रिया में बारी-बारी से अलग-अलग विभाग के पास भेजा जाता है।

 

विकेन्द्रीकृत संगठन पद्धति में विज्ञापन कार्य अपने और निजी क्षेत्र के अन्य सहयोगियों की पूरा किया जाता है। उदाहरणार्थ विज्ञापन एजेंसी के पास जब काम आता है तो वह सारा मदद से कार्य खुद नहीं करती। वह कॉपी राइटिंग का काम किसी दूसरी संस्था को दे सकती है। लेआऊट का किसी और को । इससे विज्ञापन अधिक बेहतर बन जाते हैं क्योंकि अलग-अलग कंपनियों की विशेषज्ञता अलग-अलग क्षेत्रों में होती है।

 

सामान्यतः एक बड़ी विज्ञापन एजेंसी में कला निदेशककॉपी लेखकक्रिएटिव डायरेक्टरलेखाधिकारीकलाकारशोधकर्ताविपणन विशेषज्ञतकनीकी कर्मचारीमाध्यम विशेषज्ञविज्ञापन निर्माताव्यावसायिक प्रतिनिधि आदि प्रमुख कर्मचारी होते हैं। ये सब एक दूसरे से मिल कर विज्ञापन का निर्माण और उससे प्रसार का काम संचालित करते हैं।

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