मध्यप्रदेश की खरिया जनजाति की जानकारी | MP Khariya Tribes Details in Hindi

मध्यप्रदेश की खरिया जनजाति की जानकारी
 (MP Khariya Tribes Details in Hindi)मध्यप्रदेश की खरिया जनजाति की जानकारी | MP Khariya Tribes Details in Hindi


मध्यप्रदेश की खरिया जनजाति की जानकारी

मध्यप्रदेश की खरिया जनजाति   

  • म.प्र. में इनकी जनसंख्या 2429 आंकी गई हैं। जिसका प्रदेश की कुल जनसंख्या का 0.003 प्रतिशत हैं।

 

खरिया जनजाति निवास क्षेत्र 

  • मध्य प्रदेश में खरिया जनजाति की जनसंख्या जिला मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी,  गुना, सागर, दमोह, सतना, रीवा,  शहडोल, सीधी, नीमच, मन्दसौर, उज्जैन, देवास, झाबुआ, धार, इन्दौर,  पश्चिम निमाड़, बड़वानी, पूर्वी निमाड़, , विदिशा, भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, होशगाबाद, जबलपुर, नरसिंहपुर, मण्डला, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट में पायी गई है।

 

खरिया जनजाति गोत्र 

  • इनके प्रमुख गोत्र दुगंदुगं, कीरो, केरकेटा, कांकुल, बारबरला, बरोआ, देमता, वितुम, धान, हाशी, कासी, वागे नाग, सुरनिया, सोरेंगा, इन्तुअर आदि हैं।

 

खरिया जनजाति रहन-सहन 

  • इनके घर मिट्टी के बने होते हैं। घासपूंस या देशी खपरैल का छप्पर होता है। घर में सामान्यतः एक दो कमरे होते हैं। घर का फर्श मिट्टी का होता है, जिसे महिलाएँ गोबर से लीपती हैं। घरेलू सामग्री में अनाज रखने की कोठी, ओढ़ने बिछाने के कपड़े, मिट्टी, एल्यूमोनियम, पीतल के बर्तन, धान कूटने की ओखली, मूसल, अनाज पीसने की चक्की, कृषि उपकरण, बांस की टोकरी, झउवा, सूपा आदि।

 

खरिया जनजाति खान-पान 

  • इस जनजाति का मुख्य भोजन चावल तथा कोदों के चावल का पेज, भात, बासी, उड़द, मूंग, तुवंर की दाल, मौसमी साग सब्जी, जंगली कंदमूल, भाजी आदि हैं। मांसाहार में मछली, बकरा, मुर्गे का मांस खाते हैं।

 

खरिया जनजाति वस्त्र-आभूषण 

  • वस्त्र विन्यास में पुरूष घुटने तक पंछा तथा बंडी, महिलाएँ लुगड़ा पोलका पहनती हैं। महिलाएँ हाथो, पैरों पर गुदना गुदवाती हैं। हाथों में चूड़ियाँ ऐंठी गले में सुरड़ा रूपयामाला, नाक में फुली, कान में खिनवा पहनती हैं। अधिकांश गहने गिलट नकली चांदी तथा चांदी के होते हैं।


खरिया जनजाति तीज-त्यौहार 

  • प्रमुख त्यौहार सरहुल, करमा, सोहराई, फगुआ, नवाखानी, दशहरा आदि हैं।

 

खरिया जनजाति नृत्य 

  • प्रमुख लोक नृत्य सरहुल नृत्य, करमा नृत्य, फाग नृत्य, विवाह के अवसर पर विवाह नाच आदि हैं। लोक गीतों में प्रमुख रूप से विवाह गीत, सरहुल गीत, करमा गीत, फाग गीत भजन है, जो विभिन्न त्यौहारों एवं उत्सवों के अवसर पर गाये जाते हैं। मांदल टिमकी, ढोलक आदि मुख्य वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैैं।


खरिया जनजाति व्यवसाय 

  • खरिया जनजाति का मुख्य व्यवसाय खाद्य संकलन, कृषि उपज संग्रह, कृषि, रस्सी बनाना आदि रहा है। खरिया वर्तमान में भी खाद्य संकलन, जंगली उपज संग्रह पर निर्भर हैं, मुख्य कृषि धान, कोदो, उड़द, मूंग, तुवर आदि हैं।

 

खरिया जनजाति जन्म-संस्कार 

  • प्रसव स्थानीय दायी या परिवार की बुजुर्ग जानकार महिलाएँ कराती हैं। छठे दिन छठी मनायी जाती हैं।

 

खरिया जनजाति विवाह-संस्कार 

  • विवाह हेतु उम्र सामान्यतः लड़को की 13-18 के बीच तथा लड़कियों की 13-16 के बीच मानी जाती हैं। वर पक्ष, वधु पक्ष को सूक के रूप में चावल, दाल, तेल, हल्दी तथा नगद रूपये देते हैं। इस जनजाति में घुसपैठ, सहपलायन, विवाह प्रथा भी प्रचलित हैं। सेवा विवाह, विधवा पुनर्विवाह भी पाया जाता है।

 

खरिया जनजाति मृत्यु संस्कार 

  • मृत्यु होने पर मृतक को दफनाया जाता है। तीसरे दिन घर की साफ-सफाई, मुण्डन व स्नान करते हैं। दसवे दिन दशकरम किया जाता है। मृत्यु भोज दिया जाता है।

 

खरिया जनजाति देवी-देवता 

  • खरिया जनजाति के अपने परम्परागत रूप से पूजे जाने वाले देवी देवता, धरम देवता, ग्राम देवता, धरती माई आदि तथा इसके अतिरिक्त पेड़ पौधे, पहाड़, नाग आदि को भी देवी देवता मानते हैं।

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