स्पेन्सर के कार्यों का शिक्षा पर प्रभाव| Impact of Spencer's work on education

स्पेन्सर के कार्यों का शिक्षा पर प्रभाव

स्पेन्सर के कार्यों का शिक्षा पर प्रभाव|  Impact of Spencer's work on education

 

स्पेन्सर के कार्यों का शिक्षा पर प्रभाव

स्पेन्सर के कार्यों का यूरोप और अमेरिका के विभिन्न देशों पर व्यापक प्रभाव पड़ा। विज्ञान की शिक्षा को इन देशों के पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। फ्रांस में पाठ्यक्रम एवं पाठ्य विषयों में स्पेन्सर के सिद्धान्तों के अनुरूप परिवर्तन किया गया ।

 

संयुक्त राज्य अमेरिका में स्पेन्सर के विचारों को और अधिक उत्साह से अपनाया गया । रूढ़िवादिता का विरोधव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोरस्वालम्बन आदि ने अमेरिका के बुद्धिजीवियों को व्यापक रूप से प्रभावित किया। विषयों का चयन उपयोगिता के आधार पर होने की बात का अमेरिका में व्यापक स्वागत किया गया। इनमें से कई सिद्धान्त प्रसिद्ध अमेरिकी शिक्षाशास्त्री जॉन डीवी ने आनाये। जॉन डीवी का कार्य स्पेन्सर के कार्यों से भी अधिक आगे चला गया अतः स्पेन्सर का अमेरिका पर उतना अधिक प्रभाव नहीं दिखता है जितना वास्तव में पड़ा था।

 

स्पेन्सर के विचारों के अनुरूप इंग्लैंड के विद्यालयों में विज्ञान की शिक्षा पर जोर दिया जाने लगा। 1875 में रॉयल कमीशन ने सुझाव दिया कि विद्यालयों में कम से कम आधा घण्टा तक विज्ञान का शिक्षण होना चाहिए । औद्योगिक समाज ने स्पेन्सर के विचारों को गर्मजोशी से स्वीकार किया ।

 

विज्ञान की शिक्षा पर बलपाठ्यक्रम को जीवन की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना तथा शिक्षा को मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान करना - ये ऐसी उपलब्धियां हैं जिसने शिक्षा के क्षेत्र में हरबर्ट स्पेन्सर को एक महत्वपूर्ण विचारक के रूप में स्थापित कर दिया है।

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