आर्थिक विकास के तत्वों का उल्लेख कीजिए ?|Elements of economic development?

आर्थिक विकास के तत्वों का उल्लेख कीजिए ?

आर्थिक विकास के तत्वों का उल्लेख कीजिए ?|Elements of economic development?
 

आर्थिक विकास के तत्वों का उल्लेख कीजिए ?

उत्तर- 

  • आर्थिक विकास एक जटिल प्रक्रिया है। आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व आर्थिक और अनार्थिक दोनों ही हैं। जहाँ तक आर्थिक तत्वों का सम्बंध है, इनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण पूँजी स्टॉक तथा संचयन की दर, विभिन्न क्षेत्रों में पूँजी उत्पाद अनुपात, जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि दर, कृषि क्षेत्र में आधिक्य तथा भुगतान शेष की स्थिति । अनार्थिक कारकों में महत्वपूर्ण है राजनीतिक स्वतंत्रता (या, दूसरे शब्दों में, औपनिवेशिक शोषण से वृद्धि, न्यायपूर्ण सामाजिक संगठन, तकनीकी ज्ञान की उपलब्धि, भ्रष्टाचार से मुक्ति, सामाजिक व्यवस्था और उपलब्धि, भ्रष्टाचार से मुक्ति, सामान्य बूटियाँ आदि भारी मात्रा में उपलब्ध हैं। इनेक कारण इस राज्य में कागज उद्योग, बीड़ी उद्योग, लुग्दी, हार्ड बोर्ड, चिपबोर्ड, प्लायवुड, कत्था, टेनिन आयुर्वेदिक औषधियों के उद्योगों की अपार सम्भावनाएँ विद्यमान हैं।

 

  • भारत खनिजों पर आधारित खनिज सम्पदा में म.प्र. के सम्पन्न राज्यों में से एक है। भारत में इसका स्थान तीसरा है। इस राज्य में बॉक्साइट भारत के कुल उत्पादन का 44 प्रतिशत, मैगनीज भारत के कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत, लौह अयस्क भारत के कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत कोयला राष्ट्रीय उत्पादन का 35 प्रतिशत उपलब्ध हैं। इनके अतिरिक्त कई उपयोगी खनिज जैसे चूना पत्थर, फायरक्ले, चीनी मिट्टी, ग्रेफाइट, रामरज, गेरू, कोरूण्डम आदि के विशाल भण्डार इस राज्य में हैं। इन उपलब्ध खनिजों पर आधारित लौह-इस्पात उद्योग, एल्युमीनियम उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, रेफ्रेक्टरीज, कोल कायोजनाइजेशन उद्योग और अनेक रासायनिक उद्योग स्थापित होने हेतु पर्याप्त अनुकूल परिस्थितियाँ विद्यमान हैं। 

  • कृषि उपज पर आधारित कृषि उपज भी म.प्र. में स्वयं की आवश्यकता से अधिक होती है। राज्य के क्षेत्र में कृषि की जाती है। यहाँ होने वाली प्रमुख फसलें हैं- गेहूँ, चावल, जुवार, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना, कपास, आदि उद्योग स्थापित हो सकते हैं। अब म.प्र. शासन ने अपनी औद्योगिक नीति के अन्तर्गत व्यापक सुविधाओं की घोषणा की है। जिलों की औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े तथा अविकसित वर्गों में विभाजित किया गया है। पिछड़े जिलों में उद्योग स्थापना हेतु उदार सुविधाएँ प्रदान की जा रही है । फलस्वरूप अब कुछ बड़े उद्योगपतियों ने भी राज्य में अपने उद्योग स्थापित किए हैं तथा कई छोटे-बड़े उद्योग यहाँ खुल गए हैं।

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