यौन उत्पीड़न क्या है | यौन उत्पीड़न के निवारण हेतु कानून एवं पहल| Laws and Initiatives to Prevent Sexual Harassment in Hindi

 यौन उत्पीड़न के निवारण हेतु कानून एवं पहल 
Laws and Initiatives to Prevent Sexual Harassment in Hindi

यौन उत्पीड़न के निवारण हेतु कानून एवं पहल  Laws and Initiatives to Prevent Sexual Harassment in Hindi


यौन उत्पीड़न क्या है ?  'यौन उत्पीडन' से आशय क्या है ?


"किसी भी तरह का भेदभाव, बहिष्कार, अपमानजनक या अनादरपूर्ण टिप्पणी या कथन जो किसी की गोपनीयता और गरिमा का उल्लंघन करता है यह यौनिक उत्पीड़न कहलाता है, वह अनुचित और गैरकानूनी है। यौनिक उत्पीड़न महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ गंभीर अपराध है। यौनिक हिंसा के अंतर्गत ये सभी अनचाहे व्यवहार आते हैं: शारीरिक स्पर्श, यौनिक संवाद, यौन इच्छापूर्ति की माँग या अनुरोध, अश्लील फिल्म या पुस्तक दिखाना, किसी तरह का मौखिक या अमौखिक आचरण जो यौनिक प्रकृति का हो, जिससे आप परेशान होते हैं, आपको चोट पहुंचती है या हीन भावना महसूस करते हैं। "

 

संयुक्त राष्ट्र संघ ने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा में यौनिक हिंसा को प्रमुखता से रखा है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अनुच्छेद 1 में महिला हिंसा की परिभाषा के अंतर्गत-


लिंग आधारित हिंसा का कोई भी कार्य जिसका परिणाम है अथवा जिसमे महिलाओं को शारीरिक, यौनिक या मनोवैज्ञानिक पीड़ा होने की सम्भावना हो और जिसमें निजी या सार्वजानिक क्षेत्र में, धमकी, दबाव या स्वतंत्रता का जबरन हनन करने वाले" कार्यों को रखा गया है।

 

बहुचर्चित विशाखा बनाम राजस्थान राज्य केस के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गयी परिभाषा के अनुसार "यौन भावना से संचालित महिला की इच्छा के विरुद्ध किए गए व्यवहार को यौन प्रताड़ता माना जाएगा"

 

  • यौन उत्पीड़न को समाज में एक ऐसे अपराध के रूप में देखा जाता है जिसे कई कारणों से रिपोर्ट नहीं किया जाता है। अक्सर विभिन्न सांस्कृतिक-सामाजिक-आर्थिक कारणों से पीड़ित महिला या लड़की व उसके परिवार तथा नजदीक के लोग इसे बहुत तवज्जो नहीं देते हैं और सामान्य' घटना मानकर छोड़ देते हैं। इस सन्दर्भ में आवश्यक है कि पीड़िता को आवश्यक भावनात्मक, कानूनी, आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रदान किया जाए।


 यौन उत्पीड़न के निवारण हेतु कानून एवं पहल 

(Laws and Initiatives to Prevent Sexual Harassment in Hindi)


भारतीय दंड संहिता (IPC) के अंतर्गत लैंगिक हिंसा / उत्पीड़न से संबन्धित धाराएँ

 

धारा 166-ए : 

  • यदि कोई लोक सेवक एसिड अटैक, लैंगिक हिंसा तथा बलात्कार के केस में दी गई जानकारी को रेकॉर्ड करने में असफल रहता है तो ऐसे लोक सेवक को 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक के कठोर कारावास तथ जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

धारा 294 

  • दूसरों को परेशान करने के इरादे से की जाने वाली अश्लील हरकतें व गाने। अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर अश्लील हरकत अथवा अश्लील गाने, कविता या शब्दों का प्रयोग करता है तो उसके लिए जुर्माने के साथ, तीन महीने की कैद की सजा या दोनों का प्रावधान किया गया है। 

 

धारा 354 : 

  • यदि कोई स्त्री की लज्जा भंग (Outrage her Modesty) करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करेगा उसे एक वर्ष से पाँच वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

 

धारा 354-ए : 

  • यदि कोई पुरुष किसी स्त्री से शारीरिक संपर्क बनाने संबंधी प्रस्ताव या लैंगिक संबंध बनाने के लिए कोई मांग या अनुरोध या स्त्री की इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य दिखाने या लैंगिक टिप्पणी करने का अपराध करता है तो उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। लैंगिक टिप्पणी के केस में सजा की अवधि एक वर्ष के कठोर कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

 

धारा 354- बी 

  • ऐसा कोई पुरुष जो किसी स्त्री को सार्वजनिक स्थल पर निर्वस्त्र करने या ऐसा करने के लिए किसी स्त्री पर हमला या अपराधिक बल का प्रयोग करता है तो उसे तीन वर्ष से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

धारा 354-सी : 

  • यदि कोई पुरुष किसी स्त्री को जब वो प्राइवेट कार्य (sexual act) में लिप्त हो, देखता है या उसका चित्र खींचता है या उस चित्र को प्रसारित करता है तो प्रथम बार एक वर्ष से तीन वर्ष का कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा और दूसरी या अनेक बार दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष से सात वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

धारा 354-डी : 

  • यदि कोई पुरुष किसी स्त्री से संपर्क बढ़ाने का प्रयास उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध एवं बार बार अनिच्छा प्रदर्शित किए जाने के बावजूद उस स्त्री का पीछा करता है या स्त्री द्वारा ई-मेल, इंटरनेट अथवा किसी अन्य इलैक्ट्रोनिक मीडियम का प्रयोग किए जाने को मॉनिटर करता है या किसी स्त्री को घूरता है या बिना शासन आदेश के उसकी जासूसी करता है तो ऐसे व्यक्ति को प्रथम बार तीन वर्ष का कारावास और जुर्माना या द्वितीय या अनेक बार दोष सिद्ध होने पर पाँच वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

धारा 509- 

  • शब्दों, इशारे, आवाज़ों या किसी आपत्तिजनक वस्तु प्रदर्शन से यदि औरत के सम्मान को ठेस पहुँचती हो तो इसके लिए तीन वर्ष के कारावास तथा जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

बलात्कार संबन्धित कानून व जानकारियां

 

बलात्कार संबन्धित कानून

 

  • किसी भी लड़की या महिला के साथ जबरदस्ती, चालाकी या धोखे से उसकी सहमति के बिना उसके साथ शारीरिक संभोग करना बलात्कार है।

 

  • ऐसे शारीरिक संभोग जो महिला यह समझ कर करती है कि वही पुरुष उसका पति है पर पुरुष को यह पता है कि यह सत्य नहीं है, भी बलात्कार के दायरे में आता है।

 

  • चाहे रजामंदी भी हो फिर भी किसी पागल या कमजोर दिमाग वाली महिला से संभोग करना बलात्कार होगा।

 

  • शराब या नशे की हालत में महिला चाहे रजामंद भी हो उससे संभोग करना बलात्कार है।

 

  • 18 साल से कम उम्र की लड़की की रजामंदी भी हो तो भी उससे संभोग बलात्कार है।

 

  • पति का उसकी पत्नी के साथ शारीरिक संभोग अगर पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम हो तो भी बलात्कार है।

 

  • हिन्दू कानून में अलगाव के दौरान बिना पत्नी की सहमति के संभोग बलात्कार है।

 

  • अगर कोई महिला अपनी मर्ज़ी से किसी भी पुरुष से संभोग करती है तो उसे बलात्कार नहीं कहा जाएगा। लेकिन किसी वेश्या से भी मर्जी के बिना संभोग करना बलात्कार होता है।

 

बलात्कार की सजा

 

  • कोर्ट में अपराध सिद्ध होने पर अपराधी को सात से दस वर्ष की सजा या उम्र कैद हो सकती है।


  • गर्भवती महिला के साथ बलात्कार के लिए दोषी पुरुष को दस वर्ष से अधिक का कठोर कारावास या | आजीवन कारावास तथा जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

  • 12 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ बलात्कार के लिए दोषी पुरुष को दस वर्ष से अधिक के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

 

  • कुछ व्यक्ति जैसे पुलिसकर्मी, सरकारी नौकर व अन्य संस्थाओं में काम करने वाले अगर अपनी निगरानी में रहने वाली महिला के साथ बलात्कार करे तो कम से कम 10 वर्ष से लेकर उम्र कैद की सजा तथा जुर्माना हो सकता है।

 

  • सामूहिक बलात्कार एक से अधिक लोगों द्वारा होता है तो उसकी सजा कम से कम बीस वर्ष का कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना हो सकता है। ये जुर्माना पीड़िता के पुनर्वास और चिकित्सकीय खर्चों के लिए दिया जाएगा।

 

  • अलगाव के दौरान बलात्कार की सजा दो वर्ष से सात वर्ष का कठोर कारावास और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

 

  • बलात्कार का प्रयास करने पर 5 वर्ष की कैद हो सकती है।

 

  • यदि बलात्कार से पीड़िता की मृत्यु या विकृतशील दशा हो जाती है तो ऐसे पुरुष को बीस वर्ष से अधिक के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडित किया जाएगा।

 

  • यदि कोई पुरुष पूर्व में बलात्कार के लिए दंडित किया जा चुका है और फिर से बलात्कार करता है तो ऐसे | व्यक्ति को आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा से दंडित किया जा सकता है. 

 

बलात्कार पीड़िता महिला को क्या करना चाहिए:

 

1- जब तक डॉक्टरी जांच पूरी न हो जाए तन पर पहने हुये कपड़े न तो बदले न ही उन्हें धोएँ।

 

2- खुद अथवा अपने परिजनों व दोस्तों की मदद से तुरंत पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करवाए। पुलिस मदद करने से इंकार या आनाकानी करे तो डॉक्टर से जांच करवाकर उसकी रिपोर्ट ले लें और किसी महिला आयोग या सामाजिक संस्था से मदद लें।

 

3- बलात्कारी का चेहरा या कोई निशानी याद रखनी चाहिए ताकि बाद में पुलिस के समक्ष उसे पहचान सके और पुलिस उस अपराधी को पकड़ सकें।

4- पीड़िता किसी समाजसेवी संस्था या स्थानीय या राष्ट्रीय समाचार पत्र को भी पत्र लिखकर हुई घटना की जानकारी दे सकती है। 


महिलाओं के पुलिस से संबन्धित अधिकार

 

  • पुलिस को महिलाओं को यह बताना होगा कि उन्हें गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है।

 

  • उन्हें उनके जुर्म अथवा अपराध के बारे में बताना होगा। सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि आपके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है बल्कि उन्हें उसके बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। दिन ढलने के बाद किसी भी महिला को गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन में रखना गैर-कानूनी है। किसी महिला को गिरफ्तार करने के लिए केवल एक महिला पुलिस ही अधिकारी है।

 

  • गिरफ्तारी के समय किसी भी प्रकार कि ज़ोर जबरदस्ती करना गैर कानूनी है और पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती। बिना वारंट के पुलिस किसी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती साथ ही महिला को अपने साथ अपने किसी रिश्तेदार अथवा मित्र को ले जाने का अधिकार है। गिरफ्तार किए जाने के 24 घंटे के अंदर महिला को मजिस्ट्रेट के कोर्ट में पेश करना आवश्यक है और बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के 24 घंटे से ज्यादा जेल में रखना गैर कानूनी है।


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