पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और भूडायनेमो |Earth's magnetic field and geodynamo

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और भूडायनेमो Earth's magnetic field and geodynamo

 

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और भूडायनेमो |Earth's magnetic field and geodynamo

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और भूडायनेमो

पिछले अनुभाग में आपने पृथ्वी के आंतरिक तापमान के साथ ही गर्मी के संचालन और संवहन और इसके प्रभाव के बारे में अध्ययन किया है। इस अनुभाग में आईए देखें कि क्रोड और प्रावार में संवहन कैसे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करता है। 


  • भूचुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र है जो अपने आंतरिक क्रोड से जहां यह सौर हवा (solar wind) से मिलती है वहाँ तक विस्तृत है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता है क्योंकि यह पृथ्वी के बाह्य क्रोड में पिघले हुये लौह मिश्र धातुओं की गति से उत्पन्न होता है जिसे 'भूडायनेमो' (geodynamo) भी कहा जाता है। 


  • भूडायनेमो सिद्धांत बताता है कि पृथ्वी के बाहरी केंद्र में पिघला हुआ लोहा और निकल एक संचालन द्रव बनाते हैं। इस द्रवीय क्रोड मेंसंवहन धाराएं उत्पन्न होती हैं। जैसे-जैसे पृथ्वी घूमती हैद्रवीय बाह्य क्रोड भी घूर्णन करता हैजिससे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण होता है। ये धाराएं तारों द्वारा वाहित विद्युतीय धाराओं की तरह काम करती हैं और पूरी प्रणाली एक विशाल डायनेमो की तरह काम करती है। यह वो डायनेमो है जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को लगातार पुनसृजित करता है। 


  • यह चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी से बाहर की ओर हजारों किलोमीटर तक विस्तृत है और पृथ्वी के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाता है जो सूर्य की सौर हवा को विक्षेपित (deflect) करता है। इस सुरक्षात्मक परत की अनुपस्थिति में सौर हवा पृथ्वी के वायुमंडल को धीरे-धीरे क्षीण कर देगी जिससे पृथ्वी लगभग निर्जीव हो जाएगी।

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