मध्यप्रदेश में क्वांटम प्रयोगशाला की स्थापना -मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग-महू (मध्य प्रदेश)।Quantum Lab MP

मध्यप्रदेश में क्वांटम प्रयोगशाला की स्थापना -मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग-महू (मध्य प्रदेश)

मध्यप्रदेश में क्वांटम प्रयोगशाला की स्थापना -मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग-महू (मध्य प्रदेश)।Quantum Lab MP


मध्यप्रदेश में क्वांटम प्रयोगशाला की स्थापना 

  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के सहयोग से भारतीय सेना ने हाल ही में प्रौद्योगिकी के प्रमुख विकासशील क्षेत्र में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के लिए महू (मध्य प्रदेश) के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग- एमसीटीई में क्वांटम प्रयोगशाला की स्थापना की है। थल सेनाध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे को उनकी हाल की महू यात्रा के दौरान इसके बारे में सूचना दी गई थी।

मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग-महू (मध्य प्रदेश)

  • भारतीय सेना ने इसी संस्थान में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केंद्र भी स्थापित किया है, जिससे प्रमुख क्षेत्रों में 140 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं और इसे उद्योग एवं शिक्षाविदों का सक्रिय सहयोग प्राप्त है। 
  • यहां पर अत्याधुनिक साइबर रेंज तथा साइबर सुरक्षा प्रयोगशालाओं के माध्यम से साइबर संघर्ष पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
  • पिछले वर्ष अक्टूबर में विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित एक संगोष्ठी में विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम संचालन में सेना की भागीदारी के लिए विचार किया गया था। तब से ही भारतीय सेना के प्रौद्योगिकी संस्थानों को एआई, क्वांटम और साइबर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा किए गए शोध के लाभ 

  • क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा किए गए शोध अगली पीढ़ी की संचार व्यवस्था तक तेजी से पहुंचने में मदद करेंगे और भारतीय सशस्त्र बलों में क्रिप्टोग्राफी की वर्तमान प्रणाली को पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) में परिवर्तित कर देंगे। क्वांटम की डिस्ट्रब्यूशन, क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी भविष्य के प्रमुख क्षेत्र हैं।


क्वांटम प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी  

  • क्वांटम प्रौद्योगिकीक्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों पर आधारित है जिसे 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में परमाणुओं और प्राथमिक कणों के पैमाने पर प्रकृति का वर्णन करने के लिये विकसित किया गया था।
  • इस क्रांतिकारी तकनीक के पहले चरण ने प्रकाश तथा पदार्थ की अंतःक्रिया सहित भौतिक जगत के बारे में हमारी समझ विकसित करने के लिये आधार प्रदान किया  और लेज़र एवं अर्द्धचालक ट्रांजिस्टर जैसे आविष्कारों को बढ़ावा दिया।
  • वर्तमान में  क्वांटम प्रौद्योगिकी की एक दूसरी क्रांति देखी जा रही है जिसका उद्देश्य कंप्यूटिंग के क्षेत्र में क्वांटम यांत्रिकी के गुणों का प्रयोग करना है।


पारंपरिक और क्वांटम कंप्यूटिंग के बीच अंतर:

 

  • पारंपरिक कंप्यूटिंग सूचनाओं को बिट्सया 1और 0में प्रोसेस किया जाता है, यह प्रणाली पारंपरिक भौतिकी (Classical Physics) का अनुसरण करती है जिसके तहत हमारे कंप्यूटर एक समय में '1' या '0को प्रोसेस कर सकते हैं।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग क्यूबिट्स' (या क्वांटम बिट्स) में गणना करता है। वे क्वांटम यांत्रिकी के गुणों का दोहन करते हैं।
  • इसके तहत , प्रोसेसर में 1 और 0 दोनों अवस्थाएँ एक साथ हो सकती हैं, जिसे क्वांटम सुपरपोज़िशन की अवस्था कहा जाता है।
  • क्वांटम सुपरपोज़िशन में यदि एक क्वांटम कंप्यूटर योजनाबद्ध रूप से काम करता है तो यह एक साथ समानांतर रूप से कार्य कर रहे कई पारंपरिक कंप्यूटरों की नकल कर सकता है।


क्वांटम कंप्यूटिंग के गुण: 

  • क्वांटम कंप्यूटिंग के मूल गुण सुपरपोज़िशन (Superposition), एंटैंगलमेंट (Entanglement) और इंटरफेरेंस (Interference) हैं।

 

अध्यारोपण/सुपरपोज़िशन (Superposition):

  • यह  क्वांटम प्रणाली की एक साथ कई अवस्थाओं में होने की क्षमता को संदर्भित करता है।
  • सुपरपोज़िशन का एक उदाहरण किसी  सिक्के का उछाला जाना है, जो लगातार  बाइनरी अवधारणा  के तहत हेड्स या टेल्स रूप में भूमि पर गिरता है। हालाँकि, जब वह सिक्का मध्य हवा में होता हैतो यह हेड्स  और टेल्स दोनों होता है (जब तक यह जमीन पर न गिर जाए)। माप से पहले इलेक्ट्रॉन क्वांटम सुपरपोज़िशन में होते हैं।

 

 एंटैंगलमेंट (Entanglement): 

 

  • इसका अर्थ है एक जोड़ी (क्यूबिट्स) के दो सदस्य एकल क्वांटम अवस्था में मौजूद होते हैं। किसी एक क्यूबिट की स्थिति को बदलने से तुरंत दूसरे की स्थिति में भी परिवर्तन (एक पूर्वानुमानित तरीके से) होगा। ऐसा तब भी होता है जब वे बहुत अधिक दूरी पर अलग-अलग रखे हों। आइंस्टीन द्वारा इस तरह की घटना को एक्शन एट ए डिस्टेंसका नाम दिया गया।


इंटरफेरेंस (Interference):  

  • क्वांटम इंटरफेरेंस बताता है कि प्राथमिक कण (क्यूबिट्स) किसी भी समय (सुपरपोज़िशन के माध्यम से) एक से अधिक स्थानों पर उपस्थित नहीं हो सकते, लेकिन यह एक व्यक्तिगत कण, जैसे कि फोटॉन (प्रकाश कण) अपने स्वयं के प्रक्षेपवक्र को पार कर अपने मार्ग की दिशा से हस्तक्षेप कर सकता है।


क्वांटम प्रौद्योगिकी का उपयोग:

 

सुरक्षित संचार:

  • चीन ने हाल ही में स्थलीय स्टेशनों और उपग्रहों के बीच सुरक्षित क्वांटम संचार लिंक का प्रदर्शन किया।
  • यह अन्य क्षेत्रों के साथ उपग्रहों, सैन्य और साइबर सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह अपने उपयोगकर्त्ताओं को अकल्पनीय रूप से तीव्र कंप्यूटिंग और सुरक्षित एवं हैकरहित उपग्रह संचार की सुविधा प्रदान करता है।


अनुसंधान:

  • यह गुरुत्वाकर्षण, ब्लैक होल आदि से संबंधित भौतिकी के कुछ मूलभूत प्रश्नों को हल करने में सहायक हो सकता है।
  • इसी तरह, क्वांटम पहल जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (Genome India Project- GIP)  को एक बढ़त प्रदान कर सकती है, जो जीवन विज्ञान, कृषि और चिकित्सा में नई क्षमता को सक्षम करने के लिये 20 संस्थानों का एक साझा प्रयास है।


आपदा प्रबंधन:

  • क्वांटम अनुप्रयोगों से सुनामी, सूखा, भूकंप और बाढ़  का अधिक सटीकता से पूर्वानुमान लगाए जाने की संभावनाएँ हैं।
  • जलवायु परिवर्तन के संबंध में डेटा के संग्रह को क्वांटम तकनीक के माध्यम से बेहतर तरीके से सुव्यवस्थित किया जा सकता है।

औषधि:

  • क्वांटम कंप्यूटिंग नए अणुओं की खोज और संबंधित प्रक्रियाओं में लगने वाली समय-सीमा  (लगभग 10-वर्षों)  को घटाकर कुछ दिनों तक कर सकता है।


औद्योगिक क्रांति4.0 को संवर्द्धित करना:

  • क्वांटम कंप्यूटिंग औद्योगिक क्रांति 4.0 का एक अभिन्न अंग है।
  • यह सफलता औद्योगिक क्रांति4.0 से संबंधित अन्य तकनीकों जैसे-इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स (IoT), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने के लिये शुरु की गई अन्य रणनीतिक पहलों में मददगार होगी। जो भविष्य में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था (Knowledge economy) की नींव रखने में सहायक होगा।

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