स्वयं सहायता समूह का इतिहास या पृष्ठभूमि |Self help group Background | SHG Group History

स्वयं सहायता समूह का इतिहास/ पृष्ठभूमि 
History or Background of Self help group 

स्वयं सहायता समूह  का इतिहास या पृष्ठभूमि |Self help group Background | SHG Group History



स्वयं सहायता समूह सामान्य परिचय SHG Group GK

  • आज विश्व के विभिन्न देशों में जारी लोक प्रशासन में सुधार एवं विकास की प्रक्रिया में नागरिकों के सम्मिलित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है । भागीदारी प्रबंधन के इस निर्माण कार्य में नागरिकों के प्रयास की भी आवश्यकता है। नागरिक एवं सरकार दोनों मिलकर ही विकास की गति को बढ़ा सकते हैं। 
  • विगत कुछ वर्षों में स्वैच्छिक संगठन, विकास के विभिन्न स्तर पर लोक प्रशासन के महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरे है । 
  • एक ही समय में व्यवस्थित कार्य सृजन क्षमता, आधुनिक राज्य में नागरिकता को परिभाषित करने के प्रस्तावित मार्ग को प्रशस्तकर्ता के रूप में इन्हें देखा जाता है।
  • स्वयं सहायता समूह नागरिक समाज, नागरिक चार्टर, स्वैच्छिक समूह जैसे प्रत्यक्ष वैश्वीकरण के आज के दौर में बहुत ही महत्वपूर्ण है । ये देश विकास में उत्प्रेरक एवं वर्धक के रूप में अपना सहयोग प्रदान करते है। ये प्रत्यय मात्र सामाजिक सेवायें सम्पन्न कराने या वितरण करने वाले अभिकरण नहीं है, अपितु विकासात्मक प्रशासन में सहभागी प्रशासन को य्थात रूप देने के लिए आधारभूत संरचनाएँ हैं और प्रशासन को उत्तरदायी बनाने का एक माध्यम है। 
  • विभिन्न प्रकार के कार्यों के करने के लिए ये अभिकरण विभिन्न प्रकार की रणनीति अपनाते है जैसे नीति निर्माण में सहभागिता, सेवाओं का वितरण, मूल्यांकन एवं निगरानी और जनजागृति। अतः इन अभिकरणों का अध्ययन आवश्यक हो जाता है। 

 

स्वयं सहायता समूह पृष्ठभूमि की  SHG Group Ka Itihaas

  • हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जिसमें अधिकांश लोग खेती द्वारा अर्जित आय से ही करते है। बदलते परिवेश में सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर गुजारा करना कठिन हो गया है। यही गुजारा वजह है कि आज हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना चाहता है। 
  • अपने परिवार के आर्थिक स्थिति को ऊँचा उठाने व बच्चों को उचित शिक्षा दिलाने के लिए ग्रामीणों को स्वयं सहायता समूह बनाकर कुछ ऐसे व्यवसायों को अपनाना होगा जिससे के अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाली समय का सदुपयोग कर सकें। 
  • आप उपार्जन के व्यवसाय हैं, जिसमें विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती है, परन्तु कुछ व्यवसाय ऐसे हैं, जिनको प्रशिक्षण लेकर ही प्रारम्भ किया जा सकता है । इन व्यवस्थाओं को प्रारम्भ करने के कुछ ऐसे लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। और इस पूंजीगत निवेश में स्वयं सहायता समूह सहायक साबित होते है। 
  • वैश्विक स्तर पर स्वयं सहायता समूह का प्रारम्भ बंग्लादेश से माना जाता है।
  • बंग्लादेश के चिटगाँव विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर मोहम्मद युनूस को इसका सृजनकर्ता माना जाता है। आपने 1976 में ग्रामीण बैंक नाम की कार्य अनुसंधान परियोजना प्रारम्भ की, जिसमें ग्रामीणों द्वारा छोटी-छोटी बचतों से निधि एकत्रित की जाती थी , जिसे जहरमंदों को ऋण के रूप में प्रदान किया जाता था। 1983 में इस परियोजना को बैंक दर्जा सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से दे दिया। लेकिन इसे देश के केन्द्रीय बैंक, बंग्लादेश बैंक की अनुसूची में सम्मिलित नहीं किया गया। यह ग्रामीण बैंक भूमिहीन, गरीब, मुख्यतः महिलाओं को ऋण प्रदान करता है । 


स्वयं सहायता समूह का भारतीय परिदृश्य SHG Group in India

  • अगर हम स्वयं सहायता समूह को भारतीय परिदृश्य में देखें तो 'माइक्रो-फाइनेन्स' के लिए बैंक एक एजेन्सी के रूप में कार्य करते हैं। 
  • अहमदाबाद में सेवा ( सेल्फ इम्पलाईज ओमेन एसोसियेशन) संस्थापक सदस्य लावेन भाट ने सर्वप्रथम माइक्रो फाइनेन्स की अवधारणा विकसित की। 
  • महाराष्ट्र में अन्नपूर्णा महिला मण्डल और तामिलनाडु कार्यशील महिला मंच, नावार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) द्वारा प्रायोजित समूहों ने सेवा" (सेल्फ इम्पलाईज़ वूमेन एसोसियेशन) के पद चिन्हों पर चलना प्रारम्भ किया। 
  • सेवा निर्धन स्वरोजगार महिला कार्मिकों की ट्रेड यूनियन हैं जो सहयोग धनराशि से एक निधि तैयार करती है। इस निधि का उपयोग जरूरतमंदों को ऋण देने में किया जाता है। 
  • 987 में MYRADA (मैसुर पुनर्वास और विकास एजेन्सी द्वारा क्रेडिट मैनेजमेण्ट ग्रुप) और क्रेडिट मैनेजमेण्ट ग्रुप (CMGS ) को बढ़ावा दिया जाने लगा। 
  • क्रेडिट मैनेजमेण्ट ग्रुप स्वयं सहायता समूह के तरह ही होते है। मैसुर पुनर्वास विकास एजेन्सी (MYRADA) द्वारा विकसित क्रेडिट मैनेजमेण्ट ग्रुप की प्रमुख विशेषताएँ आभीयता, स्वयंसेवा, एकरूपता और 15 से 20 व्यक्तियों की सहायता है। और इसका उद्देश्य महिलाओं में सामाजिक शसक्तीकरण को बढ़ावा देना है। 
  • 1991-92 में बड़े पैमाने पर (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नावार्ड), में स्वयं सहायता समूह बैंक संयोजन कार्यक्रम प्रारम्भ किया। 
  • यह कार्यक्रम आम जनता तक बैंकिंग सुविधा पहुँचाने के मामले में विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम माना जाता है। ) इसी क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने भी सभी राष्ट्रीकृत बैंकों को स्वयं सहायता समूहों के बचत खातों को खोलने की अनुमति प्रदान कर दी। सहायता समूह आन्दोलन की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। 
  • आज नावार्ड, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, भारतीय स्टेट बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जैसे 560 बैंक, आर्थिक विकास महामण्डल (MAVIM), जिला विकास संस्थायें (DRDA), नगर निगम जैसी संस्थायें और 3024 से अधिक गैर- सरकारी संस्थायें, स्वयं सहायता समूह आन्दोलन को बढ़ावा देने में संलग्न हैं।

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