कौटिल्य के अनुसार प्रशासनिक विभागाध्यक्ष |According to Kautilya, Administrative head of the department

कौटिल्य के अनुसार प्रशासनिक विभागाध्यक्ष 

कौटिल्य के अनुसार प्रशासनिक विभागाध्यक्ष |According to Kautilya, Administrative head of the department


कौटिल्य ने प्रशासन का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। उसने विभिन्न विभागों के अध्यक्षों का वर्णन  इस प्रकार किया है:

1.कोषाध्यक्ष

  • कोषाध्यक्ष राजकोष का स्वामी होता है। वह कोष को सम्पन्न रखता है । वह विभिन्न विशेषज्ञों की अनुमति से कोष में विभिन्न रत्नों, आभूषणों को भी रखता है।

 

2.सीताध्यक्ष

  • राज्य में कृषि से प्राप्त अनाज के रूप कर के संग्रहण का जिम्मेदार होता है। यह इन अनाजों का भंडारण करता है। यह कृषि का जानकार भी होता है।

 

3.पठ्याध्यक्ष

  • पठ्याध्यक्ष एक महत्वपूर्ण अधिकारी होता है। यह राज्य में क्रय विक्रय वाली वस्तुओं की व्यवस्था करता है।


4.आयुधागाराध्यक्ष

  • आयुधगार का अध्यक्ष युद्ध एवं अस्त्र शस्त्र संबंधी चीजों की व्यवस्था करता है।

 

5.पोतवाध्यक्ष

  • पोतवाध्यक्ष के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। वह समस्त नापतौल की व्यवस्था का जिम्मेदार होता है।

 

6.शुल्काध्यक्ष

  • यह वह पदाधिकारी होता है जो राज्य की समस्त शुल्क या चुंगी की व्यवस्था पर नियन्त्रण रखता है।


7.सूत्राध्यक्ष

  • यह वह पदाधिकारी होता है जो सूत संबधी समस्त व्यवसाय का निर्धारण करता है । यह सूत,रस्सी आदि की निगरानी करता है।

 

8.सुराध्यक्ष

  • यह आबकारी विभाग का प्रमुख होता है। यह समस्त मादक पदार्थों जैसे भांग, गांजा, शराब आदि पर नियन्त्रण रखता है।

 

9.सूनाध्यक्ष

  • सूनाध्यक्ष के पास वधशाला की जिम्मेदारी होती है। यह पशुओं, मछलियों, पक्षिओं तथा जंगली जानवरों की निगरानी करता है ।

 

10.मुद्राध्यक्ष

  •  यह मुद्रा के निर्माण , संचालन के प्रति जिम्मेदार होता है। इसका दायित्व अत्याधिक महत्वपूर्ण होता है।

 

11.रथाध्यक्ष

  • यह रथ सेना का प्रभारी होता है। यह राज्य की सुरक्षा के लिये प्रभावी रथ सेना के निर्माण के लिये जिम्मेदार होता है।

 

12.अश्वाध्यक्ष

  •  यह घोड़ों की रक्षा के लिये कार्य करता है। वह राज्य में अनेक स्थानों पर घुड़सालों का निर्माण करवाता है। उनके आहार का भी प्रबंध करता है। 

 

13.गजशाला अध्यक्ष

  •  यह हाथियों के सम्पूर्ण प्रबंधन के लिये उत्तरदायी होता है। वह उनकी सुरक्षा लिये जिम्मेदार होता है। 

 

14.गणिकाध्यक्ष

  • इसका कार्य राज्य में गणिकाओं (वेश्याओं) की निगरानी करना होता है।


15.नौकाध्यक्ष

  • नौकाध्यक्ष नौकाओं के निर्माण, नौका मार्गों पर उनके निर्बाध संचालन के लिये जिम्मेदार होता है।

 

16.गोध्यक्ष

यह गोवंश की रक्षा तथा उनके विकास के लिये जिम्मेदार होता है। 


17.सुवर्णाध्यक्ष

  • यह राज्य के अन्दर सोने चांदी के कार्य करने के लिये स्थान बनवाने तथा उनकी निगरानी का कार्य करता है।

 

18.कोष्ठगाराध्यक्ष

  • कोष्ठगाराध्यक्ष राज्य में अनाजों के भंडार की व्यवस्था करता है।

 

19.कुप्याध्यक्ष

  • यह वह पदाधिकारी होता है जो जंगल में उपलब्ध वनस्पितियों एवं अन्य सामग्रियों की रक्षा करता है।



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