समाजवाद के बारे में राम मनोहर लोहिया के विचार

 समाजवाद के बारे में राम मनोहर लोहिया के विचार

समाजवाद के बारे में राम मनोहर लोहिया के विचार


  MPPSC Mains 2018 Question

 

डॉ. लोहिया समाजवादी विचारधारा के उग्र प्रचारक थे वे न मार्क्सवादी थे और न गाँधीवादी। मार्क्सवादी समाजवादी नरेन्द्रदेव तथा जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संगठित थे। 

गाँधीवादी समाजवादी दो गुटों में बँटे थे , एक समाजवादी पं. नेहरू का लोकतन्त्र समाजवाद गुट तथा दूसरा गैर-समाजवादी आचार्य कृपलानी का पक्ष लिए था।

लोहिया ने गाँधी तथा मार्क्स दोनों के अच्छे-अच्छे विचारों को लेकर भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अपना नया 'वाद' बनाया। उनकी विचारधारा को समन्वित विचारधारा कहा जा सकता है। उनकी विचारधारा के विभिन्न दृष्टिकोण इस प्रकार हैं-

 समाजवाद के बारे में राम मनोहर लोहिया के विचार

लोहिया के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का विचार लोहिया भौतिक द्वन्द्ववाद के सिद्धांत को स्वीकार करते हैं, किन्तु कट्टर मार्क्सवादियों की अपेक्षा चेतना को अधिक महत्व देते हैं। उनके मतानुसार एक ऐसे बौद्धिक यन्त्र का निर्माण किया जाए जो कि आत्मा अथवा सामान्य उद्देश्यों तथा पदार्थ अथवा आर्थिक उद्देश्यों के बीच स्वयं सम्बन्ध स्थापित करे। 

वे मार्क्स के साधनों का विरोध करते थे। उनका कहना था कि लेनिन तथा रूसियों ने मार्क्स को बदनाम कर दिया है। उनका कहना था कि मार्क्स व्यक्ति स्वातन्त्र्य पर बहुत जोर देते थे, जबकि साम्यवादियों ने उनका गला घोंट दिया है। प्रो. सूद ने ठीक ही कहा है कि 'साम्यवादियों ने रूसी. नागरिकों को न तो रोटी दी और न स्वतंत्रता यह तो ऐसा  गुनाह है जिसमें कोई इज्जत नहीं ।" लोहिया का समाजवाद संशोधन पर आधारित है । 

 

डॉ. लोहिया मार्क्स के सिद्धांतों को देश- काल के अनुसार संशोधित कर मार्क्स तथा गाँधी के समन्वित भारतीय समाजवाद की रचना करना चाहते थे। उनका कहना, था कि 'रूढ़िवादी तथा संगठित समाजवाद एक मृतक सिद्धांत तथा संगठन है।

यह समाजवाद छ: सूत्री कार्यक्रम पर आधारित था जो इस प्रकार हैं- 

(1) आय तथा व्यय में अधिकाधिक समानता लाई जाए।

(2) इसके लिए राष्ट्रीयकरण एक हल है लेकिन अंतिम हल नहीं। 

(3) विश्व के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जाए। 

(4) वयस्क मताधिकार के आधार पर विश्व संसद बने। 

(5) जनतन्त्रीय राजनीतिक स्वतंत्रता हो, भाषा संगठन की स्वतंत्रता हो। 

(6) व्यक्तियों को व्यक्तित्व तथा सामूहिक स्वतंत्रता का अधिकार हो।

 

समाजवादी दल के अन्य नेताओं में जैसे आचार्य नरेन्द्र देव तथा जयप्रकाश नारायण पर मार्क्सवाद का सबसे अधिक प्रभाव था। उनकी तुलना में लोहिया पर गाँधीवादी विचारधारा का प्रभाव अधिक था। 

एक समाजवादी बुद्धिजीवी के रूप में डॉ. राममनोहर लोहिया ने सूक्ष्म चिंतन तथा मनन किया था। उन्होंने समाजवादी चिन्तन की समस्याओं को एशियाई दृष्टिकोण से देखने का प्रयत्न किया। वे कोरे पंतवादी नहीं थे। उन्होंने कर्म तथा चिन्तन के कारण मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास की समस्या को सदैव ध्यान में रखा।


Q- समाजवाद के बारे में राम मनोहर लोहिया के विचारों को स्पष्ट कीजिए। 

(MPPSC Mains 2018 Paper 4)

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