जैव विविधता की परिभाषा |जैव विविधता सामान्य परिचय

 

जैव विविधता की परिभाषा
जैव विविधता सामान्य परिचय
जैव विविधता की परिभाषा

जीवधारियों और उनके पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंध की पारिस्थितिकी के अलावा एक और कड़ी होती है जिसे जैव विविधता कहते हैं।

जैव विविधता का अर्थ पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विविधता से है। अर्थात् किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों एवं वनस्पतियों की संख्या एवं प्रकारों को जैव विविधता माना जाता है।

हमारे चारों और पाये जाने वाले जीव-जंतु तथा वृक्ष और लताएं यहां तक की सूक्ष्म जीव (विषाणु एवं जीवाणु) भी पारिस्थतिकी का संतुलन बनाये रखते हैं। इस प्रकार वनस्पति एवं जीवों में एक दूसरे पर निर्भरता होती है, जिसका अध्ययन ही जैव विविधता के अंतर्गत होता है।

जैव विविधता की परिभाषा

  • 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन में जैव विविधता की मानक परिभाषा के अनुसार- जैव विविधता समस्त स्रोतों यथा-अंतर क्षेत्रीय, स्थलीय, सागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थितिक तंत्रों के जीवों के मध्य अंतर और साथ ही उन सभी पारिस्थितिक समूह जिनके ये भाग हैं, में पाई जाने वाली विविधता है।
  • जैव विविधता या जैविक विविधता विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रो में पाए जाने सभी जीवोँ के बीच होने वाले परस्पर संबंधों व उनके मध्य होने  वाली प्रक्रियाओं से पारिभाषित  होता है। ष्जैव विविधताष् शब्द एडवर्ड विल्सन नामक वैज्ञानिक के द्धारा प्रतिपादित  किया गया।
  • जैविक विविधता का अर्थ है, सभी स्रोतों से संबंधित जीवों के बीच परिवर्तनशीलता जैसे-स्थलीय, समुद्री और अन्य जलीय पारिस्थितिक तंत्र तथा पारिस्थितिक समूह जिसके वे भाग हैं इसमें प्रजातियों और पारिस्थितिकी प्रणालियों के बीच विविधता शामिल है।
  • जैविक विविधता में एक प्रजाति के अंदर पाई जाने वाली विविधता, विभिन्न जातियों के मध्य विविधता तथा परिस्थितिकीय विविधता सम्मिलित है।

भारत में संदर्भ में जैव विविधता

  • जलवायु एवं स्थलाकृतियों में भिन्नता के कारण भारत जैव-विविधता की दृष्टि से अत्याधिक समृद्ध है तथा विश्व के 10 शीर्ष जलवायु विविधतायुक्त देशों में शामिल है।
  • विश्व के 36 जैव विविधता हाॅटस्पाॅट में से चार भारत में हैं।
  • भारत विश्व के 17 मेगा डायवर्सिटी वाले देशों में भारत को भी सम्मिलत किया गया है।
  • आईयूसीएन के अनुसार भारत का कुल क्षेत्रफल विश्व के कुल भू क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है, जबकि यहां विश्व की अब तक ज्ञात सभी पादप एवं जंतु प्रजातियों का लगभग 7-8 प्रतिशत प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • भारत में लगभग 47500 पादप प्रजातियां पायी जाती हैं जो विश्व के कुल पादप प्रजातियों का लगभग 7 प्रतिशत है। इनमें से भी लगभग 33 प्रतिशत पादप प्रजातियं स्थानिक हैं।
  • भारत में पुष्पीय पादपों की लगभग 15 हजार प्रजातियां पायी जाती है जो विश्व कि पुष्पीय प्रजातियों का लगभग 6 प्रतिशत है। इनमें 1500 पादप प्रजातियां संकटग्रस्त हैं।
  • भारत में लगभग 91 हजार जंतु प्रजातियां पाई जात हैं जो विश्व के जंतु समुदाय का लगभग 6.5 प्रतिशत हैं। इनमें 60 हजार कीट, 2456 मतस्य, 1230 पक्षी, 372 स्तनधरी, 440 से अधिक सरीसपृप तथा 200 उभयचर तथा 500 मोलस्का प्रजातियां पायी जाती हैं।
  • भारत में उच्च पशु विविधता पायी जाती है। यहां मवेशियों की 27 भेड़ों की 440 तथा बकरियों की 22 प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • भारत का कुल क्षेत्रफल 32.87 लाख वर्ग किमी है। जिसके 24.39 भाग पर ही वन पाये जाते हैं। यहां उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन, शीतोष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन तथा शंकुधारी वन पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कंटीली झाड़ियां भी पायी जाती हैं।

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