Major events in the history of Madhya Pradesh | मध्यप्रदेश के इतिहास की प्रमुख घटनाएं


मध्यप्रदेश के इतिहास की प्रमुख घटनाएं
ऐतिहासिक दृष्टि से मध्यप्रदेश अत्यंत समृद्ध राज्य है। मध्यप्रदेश के इतिहास में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई हैं जिनहोंने प्रदेश के भौगोलिक, राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से प्रभावित किया है। प्रमुख घटनाएं निम्नानुसार हैं-
1. भोपाल राज्य का मध्यप्रदेश में विलय
2 मध्य प्रदेश राज्य का गठन
3 .राज्य पुनर्गठन आयोग 1953
4. राज्य पुनर्गठन विधेयक 2000
5. 1982 में नर्मदा मैन की खोज
6. दिसंबर 1984 भोपाल गैस त्रासदी
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भोपाल राज्य का मध्यप्रदेश में विलय में विलय

1947 में गैर-आधिकारिक बहुमत वाला एक नया मंत्रालय महामहिम द्वारा नियुक्त किया गया था, लेकिन 1948 में महामहिम ने भोपाल को एक अलग इकाई के बनाया जाना प्रस्तावति हुआ। भोपाल राज्य के भारत संघ में, विलय के लिए समझौते पर 30 अप्रैल, 1949 को शासक ने हस्ताक्षर किए थे और राज्य को 1 जून, 1949 को मुख्य आयुक्त के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा ले लिया गया था।
विलय के बाद, भोपाल राज्य को भारतीय संघ के एक भाग राज्य सी राज्य के रूप में बनाया गया था। बाद में 1 नवंबर, 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप, भोपाल सी राज्य या मध्य प्रदेश बन गया। भोपाल जिले को 02-10-1972 में बनाया गया जो राज्य के 45 जिलों में से एक है।
भोपाल राज्य 18 वीं शताब्दी का भारत का एक स्वतंत्र राज्य था, 1818 से 1947 तक भारत की एक रियासत थी, और 1949 से 1956 तक एक भारतीय राज्य था। इसकी राजधानी भोपाल शहर थी।

मध्य प्रदेश राज्य का गठन Formation of Madhya Pradesh state

भारत के केन्द्र में स्थित मध्य प्रदेश चारों सीमाओं से अन्य राज्यों से घिरा हुआ है। अतः मध्य प्रदेश पुर्णतः भू-आवेष्ठित राज्य है। मानवाधिकार आयोग गठित करने तथा मानव विकास रिपोर्ट पेश करने के मामले में देश में मध्यप्रदेश का प्रथम स्थान है।
सर्वप्रथम पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राज्य की मध्यवर्ती  स्थिति को देखते हुए इसे मध्यप्रदेश नाम दिया। औपनिवेशिक काल में इस प्रदेश को सेंण्ट्र इण्डिया के नाम से जाना जाता था, जिसमें सेण्ट्रल प्राविंसेस, बरार, महाकौशल के प्रांत तथा बघेलखण्ड एवं छत्तीसगढ़ रियासतों के कुछ भाग सम्मिलित थे।

राज्य का गठन State formation

स्वतंत्रता उपरांत राज्यों के गठन हेतु सेण्ट्रल इंडिया के प्रदेशों को निम्न चार पृथक राज्यों के रूप में गठित किया गया था-
  1. मध्यप्रदेश
  2. विंध्यप्रदेश
  3. मध्यभारत
  4. भोपाल

मध्यप्रदेश
पूर्व मध्यप्रदेश राज्य का निर्माण सेण्ट्रल प्राविंस और बरार प्रांतों मेें बघेलखण्ड तथा छत्तीसगढ़ की रियासतों को मिलाकर किया गया था। इसकी राजधानी नागपुर बनाकर इसे पार्ट-ए स्टेट राज्यों की श्रेणी में शामिल किया गया।

विंध्य प्रदेश
पार्ट-ए-स्टेट राज्य पूर्व मध्यप्रदेश के उत्तर में स्थित रियासतों को मिलाकर विंध्य प्रदेश का गठन किया। इसे पार्ट-सी स्टेट राज्यों की श्रेणी में रखा गया। रीवा को राजधानी बनाकर विंध्य प्रदेश में 37 रियासतों को सम्मिलित किया गया।

मध्य भारत
पूर्व मध्यप्रदेश राज्य के पश्चिम में स्थित 26 रियासतों को मिलाकर मध्य भारत के रूप में पार्ट-बी श्रेणी का एक  नया राज्य बनाया गया। इसी राजधानी छः-छः महीने के लिए ग्वालियर एवं इंदौर बनाई गई।

भोपाल
भोपाल को एक पृथक राज्य बनाकर पार्ट-सी श्रेणी के राज्यों में शामिल किया गया। इसकी राजधानी भोपाल को बनाया गया।

राज्य पुनर्गठन आयोग 1953 State Reorganization Commission 1953

नए राज्यों के गठन की माॅग को देखते हुए 29 दिसम्बर 1953 को राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग के अध्यक्ष सैयद फैजल अली तथा सदस्य पं. हृदयनाथ कुंजरू व डाॅ. के.एम. पाणिक्कर थे। इस आयोग ने राज्यों का पुनर्गठन भाषायी आधार पर करने की सिफारिश की ।

आयोग की सिफारिशों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश की सीमाओं में निम्नलिखित परिवर्तन किए गए-
अकोला, अमरावती, बुल्ढाना, यवतमाल, वर्धा, चांदा, नागपुर तथा भंडारा जिलोें को तत्कालीन मुम्बई राज्य में मिला दिया गया। इसके अतिरिक्त पूर्व मध्यप्रदेश (पार्ट-ए स्टेट का भाग) के भागों को मध्यप्रदेश में शामिल किया गया।
मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील ( सुनैल टप्पा को छोड़कर ) के अतिरिक्त मध्य भारत (पार्ट-बी स्टेट का भाग) राज्य को मध्यप्रदेश में सम्मिलित कर लिया गया । पार्ट-सी स्टेट के राज्य विंध्य प्रदेश को भी मध्यप्रदेश में मिला लिया गया।
राजस्थान के कोटा जिले की सिरोंज तहसील को मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में जोड़ा गया।
            उपरोक्त सीमाओं में परिवर्तन के पश्चात् 1 नवम्बर, 1956 को मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ। नवगठित मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल बनाई गई, जो तत्तकालीन समय में सीहोर जिले की एक तहसील थी। गठन के समय मध्यप्रदेश का कुल क्षेत्रफल 443446 वर्ग किमी था तथा इसमें कुलद 43 जिले शामिल थे। 26 नवंबर,1972 को भोपाल और राजनान्दगांव दो नए जिले बनने के पश्चात जिलों की संख्या 45 हो गई, परन्तु 25 मई 1998 को वी.आर. दुबे आयोग की अनुशंसा पर 10 नए जिलों का गठन किया गया तथा 10 जून, 1998 को सिंहदेव कमेटी की सिफारिशों के आधार पर 6 नए जिलों का गठन किया गया । इस प्रकार 30 जून 1998 तक मध्यप्रदेश में 12 संभाग तथा कुल 61 जिले शामिल थे। एवं प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य था। राज्य गठन के पश्चात पश्चिमी एवं मध्यवर्ती मध्यप्रदेश का अधिक विकास हुआ, क्योंकि पूर्वी मध्यप्रदेश अत्याधिक दुर्गम एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र था।

राज्य पुनर्गठन विधेयक 2000 State Reorganization Bill 2000

मध्यप्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2000 के तहत 1 नवम्बर, 2000 को मध्यप्रदेश से पृथ्क एक नए राज्य छत्तीसगढ़ की स्थापना की गई। अविभाजित मध्यप्रदेश के 61 जिलों में से पूर्वी मध्यप्रदेश के 16 जिलों को नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में शामिल किया गया। छत्तीसगढ़ के गठन के पश्चात विभाजित मध्यप्रदेश में 9 संभाग एवं 45 जिले शेष रह गए, परन्तु क्षेत्रीय विकास के दृष्टिकोण से नए जिलों की मांग उठने के कारण राज्यसरकार ने 15 अगस्त, 2003 को बोस समिति की सिफारिश पर तीन नए जिले बरुहानपुर, अशोकनगर तथा अनूपपुर क्रमशः खण्डवा, गुना, एवं शहडोल जिलों से अलग करके बनाए।
इसी क्रम में वर्ष 2008 में अलीराजपुर तथा सिंगरौली नाम दो नए जिले क्रमशः झाबुआ, एवं सीधी जिलों से अलग करके बनाए गए। 16 अगस्त, 2013 को शाजापुर की आगर, बड़ौद,सुसनेर, एवं नलखेड़ा तहसीलों को पृािक करके राज्य का 51वाॅ जिला आगर मालवा बनाया गया।  इसी क्रम में टीकमगढ़ जिले की तीन तहसीलों निवाड़ी, ओरछा और पृथ्वीपुर को टीकमगढ़ से पृथक कर एक प्रदेश का 52वाॅ जिला निवाड़ी बनाया गया जो क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे छोटा जिला है। इस प्रकार वर्तमान मध्यप्रदेश में 10 संभाग और 52 जिलें है। जिनका कुल क्षेत्रफल 3,08,252 वर्ग किमी है।

मध्यप्रदेश विधानसभा गठन Madhya Pradesh Legislative Assembly

मध्य प्रदेश गठन के बाद वर्ष 1957 में राज्य में पहले विधानसभा चुनाव हुए। तत्कालीन चुनाव के सीटों पर दोहरे प्रतिनिधि का प्रावधान था, अर्थात् एक सीट से दो विधायक निर्वाचित होते थे। वर्ष 1957 के पहले चुनाव में राज्य में कुल 288 सीटें थी। इस चुनाव में भारतीय कांग्रेस 232 सीटों पर जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इनमें अनुसूचित जाति के लिए 43, अनुसूचित जनजाति के लिए 54 सीटें आरक्षित थीं। वर्ष 1976 में विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़कर 296 हो गई। मध्य प्रदेश विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ राज्य बना तो मध्य प्रदेश के हिस्से में विधानसभा की 230 सीटें आईं। इन 230 सीटों में सामान्य 148 और अनुसूचित जाति के लिए 35 एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 47 आरक्षित हैं। राज्य विधानसभा में एक सदस्य का मनोनयन एंग्लो-इंडियन समुदाय से किया जाता है।


डिस्कवरी ऑफ नर्मदा मैन Discovery of narmada man

भारत का पहला मानव जीवाश्म  भूविज्ञानी अरुण सोनकिया द्वारा डिस्कवरी ऑफ नर्मदा मैन की खोज
5 दिसंबर, 1982 भूविज्ञानी अरुण सोनकिया ने  ने सीहोर जिले बुदनी के हथनोरा गाँव में नर्मदा के तट पर दुनिया के इस हिस्से से सबसे बड़े जीवाश्म को खोजा था। यह भारत का पहला मानव जीवाश्म था। एक आंशिक मानव खोपड़ी टोपी - जिसने भारत को विश्व जीवाश्म मानचित्र पर रखा और उपमहाद्वीप में शुरुआती मनुष्यों की उपस्थिति को साबित किया। इससे पहले, प्रागैतिहासिक पत्थर के उपकरण पूरे भारत में पाए गए थे, लेकिन कोई भी मानव जीवाश्म नहीं मिला था। नर्मदा मनुष्य, जो होमो इरेक्टस से संबंधित है, लगभग 5 से 6 लाख वर्ष पुराना है।

भोपाल गैस त्रासदी Bhopal gas tragedy

 मानव इतिहास की सबसे भयानक औद्योगिक त्रासदी में से एक भोपाल गैस त्रासदी है। 2- 3 दिसंबर 1984 की रात मध्य प्रदेश का भोपाल दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी की चपेट में था। यूनियन कार्बाइड कारपोरेशन की सहायक कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के स्वामित्व वाले कीटनाशक प्लांट में करीब 40 टन मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का फैक्ट्री से रिसाव हुआ ।जिसमें करीब 15000 लोगों की मौत और करीब 500000 अन्य लोग हमेशा के लिए प्रभावित हो गए।

भोपाल गैस त्रासदी के प्रमुख घटना क्रम
  • 3 दिसंबर 1984 को हादसे की एफ आई आर दर्ज की गई दर्ज की गई आर दर्ज की गई आर दर्ज की गई।
  • 4 दिसंबर 1984 को यूजीसी अध्यक्ष वारेन एंडरसन समेत 9 लोग गिरफ्तार मानव हत्या के आपराधिक केस में यूनियन कार्बाइड का नाम अभियुक्त के रूप में दर्ज किया गया।।
  • फरवरी 1985 में भारत सरकार ने अमेरिका के एक कोर्ट में यूनियन कार्बाइड के खिलाफ 3.3 अरब डालर के मुआवजे का दावा ठोका।
  • 1986 में अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के कोर्ट के जज ने भोपाल गैस कांड से जुड़े सभी केस भारत में ट्रांसफर कर दिए।
  • 1 दिसंबर 1987 को सीबीआई ने वारेन एंडरसन समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
  • फरवरी 1989 में बार बार समन की अनदेखी करने पर एंडरसन के खिलाफ सीजेएम भोपाल ने गैर जमानती वारंट जारी किया। भारत सरकार और यूनियन कार्बाइड ने कोर्ट के बाहर डील किया यूनियन कार्बाइड 470 मिलियन डॉलर का मुआवजा देने को राजी हुआ।
  • फरवरी 1989 में सेटलमेंट से खफा लोगों का विरोध प्रदर्शन दिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।
  • 1992 में भारत सरकार ने 470 मिलियन डालर डालर का कुछ हिस्सा गैस पीड़ितों के बीच आवंटित कर दिया।
  • 1999 में यूनियन कार्बाइड ने अमेरिका स्थित डाउ केमिकल के साथ विलय का ऐलान का ऐलान कर दिया।
  • नवंबर 1999 में इंटरनेशनल पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस ने यूनियन कार्बाइड की बंद फैक्ट्री के अंदर और आसपास मिट्टी भूजल और कुएं आदि का टेस्ट किया और 12 हानिकारक ऑर्गेनिक केमिकल और पारे की मात्रा 60 गुना तक ज्यादा पाई गई।
  • जून 2002 को पीड़ितों ने नई दिल्ली में विरोध का प्रदर्शन शुरू किया जब उन्हें पता चला कि सरकार एंडरसन के खिलाफ आरोप वापस लेने की योजना बना रही है।
  •  19 जुलाई 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बैंक को पीड़ितों को 15 अरब रुपए 15 अरब रुपए को पीड़ितों को 15 अरब रुपए 15 अरब रुपए देने का आदेश दिया। 25 अक्टूबर 2004 को मुआवजा देने में सरकार की नाकामी के खिलाफ पीड़ितों ने ने प्रदर्शन किया।
  • 26 अक्टूबर 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड द्वारा स्वीकारें गए 470 मिलन डालर डालर के मुआवजे की राशि का बचा हुआ हिस्सा पीड़ितों को बांटने के लिए 15 नवंबर की समय सीमा तय की।
  • 7 जून 2010 को अदालत द्वारा यूज यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन चेयरमैन के ताऊ महिंद्रा समेत सभी 8 अभियुक्तों को दोषी ठहरा का सजा सुनाई गई।

भोपाल गैस कांड पर फैसला Decision on Bhopal gas scandal
7 जून 2010 को भोपाल गैस कांड का फैसला सुनाया गया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहन पी तिवारी ने 30 वर्ष की कानूनी लड़ाई के बाद सुनाए गए गए सुनाए गए गए सुनाए गए गए अपने 93 पृष्ठों के फैसले में सभी आठ आरोपियों को दोषी करार दिया । फैसले के तहत यूनियन कार्बाइड इंडिया के पूर्व अध्यक्ष केशव महिंद्रा 85 वर्ष समेत सात दोषियों को दो-दो वर्ष कारावास की सजा मिली और प्रत्येक पर ₹100750 का जुर्माना लगाया गया। आठवें दोषी के तौर पर अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड की भारतीय इकाई पर ₹500000 का जुर्माना लगाया गया। फैसले के कुछ समय बाद ही अदालत ने 25-25 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानत पर सभी 7 दोषियों को जमानत दे दी।
अदालत ने अपने फैसले में यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन चेयरमैन वारेन एंडरसन को पहले ही फरार घोषित किया जा चुका था।

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