ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट क्या है कौन जारी करता है प्रमुख तथ्य 2026 ?| Global Gender Gap Report 2026
ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट क्या है कौन जारी करता है ?
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा वार्षिक वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट जारी की जाती है, जिसे सर्वप्रथम वर्ष 2006 में शुरू किया गया था। यह विभिन्न देशों में लैंगिक समता का आकलन करती है।
- यह आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता तथा राजनीतिक सशक्तीकरण को मापता है।
- भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर रहा, जिसका समग्र लैंगिक समता स्कोर 64.5% है, जो 69.2% के वैश्विक औसत से कम है।
- शैक्षिक उपलब्धि भारत के सबसे मज़बूत आयामों में से एक है, जिसमें 96.6% समता दर्ज की गई है, जबकि आर्थिक भागीदारी एक प्रमुख कमज़ोरी बनी हुई है, जिसमें समता स्कोर 41.2% है।
- व्यावसायिक और तकनीकी भागीदारी में सुधार के बावजूद, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों के पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 13.1% है, जो नेतृत्व तथा आर्थिक भागीदारी में बनी हुई बाधाओं को दर्शाती है।
ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2026
यह विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी किया जाने वाला एक वार्षिक प्रमुख प्रकाशन है। इसे पहली बार वर्ष 2006 में जारी किया गया था और यह यह आकलन करने के लिये एक वैश्विक मानक के रूप में कार्य करता है कि देश पूर्ण लैंगिक समानता प्राप्त करने के कितने करीब हैं।
यह रिपोर्ट चार प्रमुख आयामों के आधार पर लैंगिक समानता को 0 से 100 (जहाँ 100% का अर्थ पूर्ण समानता है) के पैमाने पर मापती है:
आर्थिक भागीदारी और अवसर:
- यह कार्यबल में महिलाओं के प्रतिशत, समान कार्य के लिये वेतन समानता तथा नेतृत्व/प्रबंधकीय भूमिकाओं में महिलाओं की उपस्थिति को मापता है।
शैक्षिक उपलब्धि:
- यह साक्षरता दर तथा प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में लड़कियों एवं लड़कों के नामांकन अनुपात का आकलन करता है।
स्वास्थ्य और उत्तरजीविता:
- यह जन्म के समय लिंगानुपात (महिला भ्रूण हत्या/कन्या भ्रूण हत्या जैसी समस्याओं को समझने के लिये) तथा स्वस्थ जीवन प्रत्याशा का मूल्यांकन करता है।
राजनीतिक सशक्तीकरण:
यह पिछले 50 वर्षों में संसद, मंत्री स्तर तथा राष्ट्र प्रमुख के पदों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मापता है।
ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट प्रमुख तथ्य
- भारत ने वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2026 में 131वाँ स्थान प्राप्त किया है, जिसमें 64.5% लैंगिक समानता स्कोर दर्ज किया गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद, आर्थिक भागीदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, नेतृत्व और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतराल विद्यमान हैं।
- इस अंतर को कम करने के लिये महिलाओं की कम श्रम बल भागीदारी, अवैतनिक देखभाल कार्य, सुरक्षा और डिजिटल विभाजन जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। इसके साथ ही राजनीतिक प्रतिनिधित्व, लैंगिक उत्तरदायी बजट, देखभाल अवसंरचना, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2026 की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
भारत का प्रदर्शन
- लैंगिक समानता: भारत ने 64.5% का समग्र लैंगिक समानता स्कोर प्राप्त किया है और 145 देशों में 131वाँ स्थान बरकरार रखा है। यद्यपि यह वर्ष 2006 के प्रथम संस्करण की तुलना में 4.3 प्रतिशत अंक का सुधार दर्शाता है, फिर भी भारत 69.2% के वैश्विक औसत से पीछे है।
- राजनीतिक सशक्तीकरण: भारत ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व में 24.5% लैंगिक समानता प्राप्त की है। हालाँकि मंत्री स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 5.9% है, जो वर्ष 2019 में दर्ज 30% के उच्चतम स्तर से काफी कम है।
- आर्थिक भागीदारी: यह एक प्रमुख चुनौती वाला क्षेत्र है, जहाँ महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में श्रम बल में केवल 41.2% समानता प्राप्त की है।
- यद्यपि व्यावसायिक और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वर्ष 2006 के बाद दोगुना होकर 49.9% हो गया है, लेकिन वरिष्ठ नेतृत्व और प्रबंधकीय भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी अभी भी केवल 13.1% है।
- शैक्षिक उपलब्धि: भारत ने 96.6% समानता स्कोर हासिल किया है। देश माध्यमिक और उच्च शिक्षा में लड़कों और लड़कियों के नामांकन के बीच पूर्ण संतुलन बनाए हुए है, जिससे यह दीर्घकालिक रूप से इसके सबसे सफल आयामों में से एक बन गया है।
- स्वास्थ्य और उत्तरजीविता: भारत ने 95.6% समानता स्कोर प्राप्त किया है। यद्यपि समग्र स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है, फिर भी वर्ष 2026 में भारत का जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) वर्ष 2006 की तुलना में लगभग एक प्रतिशत अंक कम है।

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