सिविल सेवा के लिए बुनियादी मूल्य |नोलन समिति के सुझाव | Ethics Notes in Hindi For UPSC


सिविल सेवा के लिए बुनियादी मूल्य (Foundational Values for Civil Service)

सिविल सेवा के लिए बुनियादी मूल्य |नोलन समिति के सुझाव | Ethics Notes in Hindi For UPSC


 सिविल सेवा के आधारभूत मूल्य क्या हैं 

  • सिविल सेवा के आधारभूत मूल्य वे हैं, जो सिविल सेवा के आदर्शों एवं लक्ष्यों की ओर बढ़ने और उन्हें साकारित करने में सहायक होते हैं एवं मार्गनिर्देशक का काम करते हैं, जैसे- सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता आदि। 
  • एक सफल सिविल सेवक बनने के लिए केवल संबंधित क्षमता और योग्यता का होना ही आवश्यक नहीं है, बल्कि उसे सिविल सेवा के बुनियादी मूल्यों से भी युक्त होना चाहिए। ये बुनियादी या आधारभूत मूल्य ही क्षमताओं और योग्यताओं को एक निश्चित दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ने हेतु निर्देशित करते हैं, मार्गदर्शन देते हैं। 
  • उदाहरणस्वरूप- हो सकता है कि मिस्टर 'A' में सिविल सेवा में चयन होने की अभिक्षमता हो परंतु वह प्रशासनिक मूल्यों से रहित हो। ऐसी स्थिति में वह सिविल सेवा को अपनी आजीविका पूर्ति और स्वार्थ पूर्ति का साधन मात्र मान लेगा। दूसरी ओर मिस्टर 'B' में ईमानदारी, सहिष्णुता, करुणा आदि हो, परंतु उसमें सिविल सेवा में चयनित होने की वर्तमानकालीन योग्यता न हो। ऐसी स्थिति में ईमानदारी आदि के होते हुए भी सिविल सेवक के रूप में कर्त्तव्य-संपादन का स्वप्न साकारित नहीं कर पायेगा। 
  • स्पष्ट है कि एक सिविल सेवक में अभिक्षमता के साथ-साथ उसमें आधारभूत प्रशासनिक मूल्यों का होना भी आवश्यक है, तभी वह उत्तरदायित्वबोध करते हुए पारदर्शितापूर्ण तरीके से अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक एवं प्रभावी तरीके से संपन्न करेगा।

 

नोलन समिति के सुझावों का वर्णन 

 सार्वजनिक जीवन के तत्व Principle of Public Life ( Nolan Committee)

1. निःस्वार्थनिष्ठता (Selflessness)

  • सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों (लोकपदाधिकारी) को केवल सार्वजनिक हित (लोकहित) को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। अपने परिवार और अपने मित्रों के लिए वित्तीय या अन्य भौतिक लाभ प्राप्त करने के लिए निर्णय नहीं लेना चाहिए। (निर्णय लेने का आधार समुचित हो)

 

2. सत्यनिष्ठता (Integrity)

  • सार्वजनिक पद धारण करने वाले लोगों को चाहिए कि वे अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में बाहरी लोगों या संगठनों के वित्तीय या अन्य कृतज्ञताओं के प्रभाव में नहीं आएं।

 

3. वस्तुनिष्ठता (Objectivity)

  • सार्वजनिक कार्यों को संपादित करते समय जैसे- सार्वजनिक नियुक्तियाँ, संविदाएं या लोगों को पुरस्कारों और लाभों के लिए संस्तुति करते समय सार्वजनिक पदाधिकारी को योग्यता आधार पर चयन करना के चाहिए।

 

4. जवाबदेहिता (Accountability)

  • सार्वजनिक पद पर आसीन पदाधिकारियों को अपने निर्णय और कार्यों के लिए जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और इस मामले में उपयुक्त जांच के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

5. खुलापन (Openness)

  • सरकारी पदाधिकारी को अपने सभी निर्णयों और कार्यवाहियों के संबंध में खुलापन होना चाहिए। उन्हें अपने निर्णयों के लिए कारणों का उल्लेख करना चाहिए और किसी सूचना पर तभी रोक लगानी चाहिए जब व्यापक जन हित में ऐसा करना आवश्यक हो । 6. ईमानदारी (Honesty): सरकारी पदाधिकारी व्यक्तियों का यह कर्तव्य है कि वे अपने सार्वजनिक कर्त्तव्यों के संदर्भ में अपने निजी हितों की घोषणा करें। कर्त्तव्यों एवं निजी हितों के बीच विरोध की स्थिति में उसे समाधान के वे कदम उठाने चाहिए जिससे सार्वजनिक हितों की रक्षा हो सके।

 

7. नेतृत्व (Leadership)

  • सरकारी पदाधिकारियों को उपरोक्त मूलभूत तत्वों को बढ़ावा एवं समर्थन करते हुए स्वयं को एक आदर्श उदाहरण के रूप में विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

 

नोलन समिति के उपरोक्त सुझावों से यह स्पष्ट है कि शासन में नैतिकता तभी आयेगी जब लोक सेवकों में उपरोक्त मूल्य व्यवहार के स्तर पर अभिव्यक्त हों, उनके क्रियाकलाप इन मूल्यों से संचालित हों। केवल नियमों और कानूनों के होने मात्र से लोक सेवा के आदर्श को प्राप्त नहीं किया जा सकता बल्कि ऐसे मूल्यों का धारण भी आवश्यक है ताकि निर्णय एवं कार्य करते वक्त अधिकारी नैतिकता का आदर्श उपस्थित कर सकें।


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