Kanha Kisli rashtriya udyan |कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान


कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान

  • यह मंडला एवं बालाघाट जिले में 940 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है। वर्ष 1879 में इसे वन आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।
  • वर्ष 1897 से 1910 तक यह अंग्रेजों का शिकार स्थल था। इसे वर्ष 1933 में अभय वन, 1952 में अभ्यारण तथा 1 जून 1955 को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। इसे वर्ष 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया। यह प्रदेश का प्रथम अभ्यारण, प्रथम उद्यान व प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल प्रथम उद्यान है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान भारत का प्रथम टाइगर रिजर्व है जिसने वर्ष 2017 में अपना शुभंकर भूरसिंह द बारहसिंघा जारी किया। इसका डिजाइन रोहन चक्रवर्ती द्वारा बनाया गया हैं
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत वर्ष 1963-65 में प्रसिद्ध वन्य जीव विशेषज्ञ जॉर्ज स्कॉलर ने वन्य जीव संरक्षण पर कार्य किया था, जिसका उल्लेख जेम्स फोर्सिथ ने अपनी पुस्तक सेंट्रल इंडिया हाई लैण्डस 1860 में किया है।
  • यहां बाघों की सर्वाधिक संख्या पाई जाती है। यहां हालो व बंजर घाटी स्थित है। ब्रांडेर ने अपनी पुस्तक वाइल्ड एनीमल इन सेण्ट्रल इंउिया में बंजर घाटी का वर्णन किया है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में स्थित बामनी दरार को सूर्यास्त पॉइंट के रूप में जाना जाता है , जो कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का सबसे ऊँचा क्षेत्र है, यहाँ बंजर स सपुर्ण नदियां प्रवाहित होती हैं।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में निवासित बैगा जनजाति को भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीनतम जनजाति के रूप में जाना जाता है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बैगा मंगलू के नाम पर सड़क निर्माण भी किया गया है।
  • यहां कृष्ण मृग (काला हिरण) तथा ब्रेडरी प्रजाति का बारहसिंगा पाया जाता है। इस राष्ट्रीय उद्यान में पाये जाने वाले दुर्लभ बारहसिंगा का कान्हा का गहना भी कहा जाता है।
  • इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में शेर, चीतल, छुटरी, नीलगाय, जंगली कुत्ते, सुअर, तेंदुआ, बाहरसिंगा, सांभर (श्याम मृग) कष्णमृग, विशालयकाय  गौर पक्षी तथा सुंदर चिडि़यां (बामसन) आदि वन्य जीव पाये जाते हैं
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में उष्ण कटिबंधीय और शुष्क पर्णपाती वन पाये जाते हैं। यहां का सबसे लोकप्रिय वृक्ष इंडियन घोस्ट ट्री (कुल्लु) भी पर्णपाती क्षेत्र में पाया जाता है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में साल को दो ठूँठ (बिना शाखा वाले) वुक्ष हैं जिन्हें राजा रानी के नाम से जाना जाता है।
  • कान्हा राष्ट्रीय  उद्यान में एक पौराणिक श्रवण ताल मंडला जिले में स्थित है। इसमें लप्सी नामक प्रसिद्ध शिकारी का स्मारक निर्मित किया गया है। वर्ष 1999 में इसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन का पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है जिसमें हवाई पट्टी स्थित है।
  • विश्व बैंक की सहायता से इस उद्यान में पार्क इंटरप्रेटशन योजना प्रारंभ की गई हैं
  • वर्ष 2018 में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से बाघ ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व व नौरादेही अभ्यारण सागर में पुनर्वासित किये गए हैं।

Also Read...

1 comment:

  1. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete

Powered by Blogger.