Nano Technology in Hindi नैनो टेक्नोलॉजी नैनो तकनीक का उद्गम Origin of nano technology


 क्या है टेक्नोलॉजी Nano Technology Kya hai

नैनो टेक्नोलॉजी Nano Technologyक्या है टेक्नोलॉजी Nano Technology Kya hai 

नैनो टेक्नोलॉजी परिभाषा

 Nano Technology Paribhasha

  • किसी पदार्थ के वे सुक्ष्मतम कण जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकते हैं, तथा उसमें पदार्थ के समस्त गुण विद्यमान रहते हैं, उसे अणु कहते हैं। इसका व्यास 4 एंगस्ट्राम से 20 एंगस्ट्राम के बीच होता है।
  • एक ही प्रकार के अणु भिन्न-भिन्न प्रकार से जुड़कर अलग प्रकार के पदार्थों का निर्माण कर सकते हैं। जैसे कोयले और हीरे दोनों ही में कार्बन के परमाणु होते हैं, लेकिन दोनों में कार्बन परमाणुओं का विन्यास अलग-अलग होता है।
  • इस प्रकार यदि कोई तकनीक हो जिसके द्वारा हम किसी अणु के परमाणुओें को अपनी इच्छानुसार विन्यास दे सकें तो इच्छित गुण-धर्म वाला पदार्थ प्राप्त कर लेंगे। इसी परिकल्पना को संभव बनाने वाली टेक्नोलॉजी का नामनैनो टेक्नोलॉजीहै।

नैनो टेक्नोलॉजी से क्या किया जा सकता है What can be done with Nano technology

  • नैनो टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके अणुओं और परमाणुओं का एक-एक करके जोड़ा जा सकता है। और इस स्तर पर क्रिकेट की गेंद से लेकर, कार, हवाई जहाज, कम्प्यूटर सभी कुछ मनचाहे पदार्थ द्वारा किसी भी आकार-प्रकार में बनाया जा सकेगा।
  • इस प्रकार निर्मित पदार्थों की क्षमता में भी हजारों गुना वृद्धि की जा सकती है। इस टेक्नालॉजी की मदद से हम एमआईपीएस क्षमता वाले बैक्टीरिया के आकार के कम्प्यूटर से लेकर अरबों लैपटॉप्स की क्षमता युक्त चीनी के कण के आकार के कम्प्यूटर्स का निर्माण किया जा सकता है।
  • ऐसे नैनो बॉटस का निर्माण किया जा सकता है जो हमारे शरीर के ऊतकों में घुसरकर वायरस और कैंसर कोशिकाओं की आण्विक संरचना को पुनर्गठित कर उन्हें निष्क्रिय कर देंगे।

नैनो टेक्नोलॉजी की क्षमता Nanotechnology capability
  • किसी भी पदार्थ के परमाण्विक पैमाने (नैनो स्केल) पर नियंत्रित ढंग से जोड़-तोड़ कर इच्छित पदार्थ प्राप्त कर लेने की विद्या का नाम नैनो टेक्नोलॉजी है।
  • धरती में पायी जाने वाली सभी वस्तुओं की संरचना के मूल में परमाणु है और कई परमाणु मिलकर उस पदार्थ का एक अणु बनाते हैं।
  • किसी भी वस्तु का भौतिक एवं रासायनिक गुण उसकी संरचना में प्रयुक्त परमाणुओं एवं अणुओं के विन्यास पर निर्भर करता है। अतः किसी भी वस्तु के अणुओं एवं परमाणुओं को पुनर्व्यस्थित कर इसे दूसरी वस्तु में आसानी से बदला जा सकता है।
  • कोयले की संरचना में प्रयुक्त कार्बन के परमाणुओं को पुनर्व्यवस्थित कर हीरे में बदला जा सकता है या फिर बालू के परमाणअुओं को पुनर्व्यवस्थित कर और उसमें थोड़ी अशुद्धि मिलाकर कम्प्यूटर की चिप्स में बदला जा सकता है।

नैनो  असेम्बलर्स Nano Assemblers 

  • नैनो टेक्नोला्ॅजी के विकास के सबसे बड़ी आवश्यकता ऐसे उपकरणों की है जो वांछित वस्तु की संरचना में प्रयुक्त होने वाले अणुओं एवं परमाणुओं को आस पास के उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से पहचान कर सही मात्रा में अलग कर उन्हें नए ढंग से व्यवस्थित कर सकें। चुकिं ये सब कार्य परमाण्विक स्तर पर होते होंगे अतः नैनो असेम्बलर्स भी उसी स्तर के होने चाहिए। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ये अणु-परमाणु किसी भी यौगिक में मजबूत रासायनिक बाण्ड से बंधे रहते हैं। अतः नैनो असेम्बर्स में इतनी क्षमता तथा ऊर्जा होनी चाहिए कि वे वांछित अणुओं या परमाणुओं को उपलब्ध यौगिकों को आसानी से अलग कर सकें।

नैनों विज्ञान के मूलभूत तत्व Basic elements of Nano science

  • जब हम किसी वस्तु के आकार को छोटा करते हैं तो एक स्तर ऐसा भी आता है कि जब उस पदार्थ के गुणधर्म बदल जाते हैं आ्ैर वह स्तर है- परमाणु स्तर ( लगभग 0.2 नैनो मीटर से 100 नैनो मीटर के बीच) इसी को नैनो स्तर कहते हैं।
  • मीटर से नौ गुना छोटे भाग को नैनो मीटर कहते हैं। ( 1 मीटर = 10.9 नैनो मीटर।) इस टेक्नोलॉजी में इन्हीं नैनो मीटर के आकार के परमाणु को एक विशेष प्रकार से व्यवस्थित करते हैं अतएव इस टेक्नोलॉजी को नैनो टैक्नोलॉजी कहा जाता है।
  • नैनों स्तर पर पदार्थ की गुण विशेषताओं में परिवर्तन के दो मुख्य कारण हैं- सापेक्षिक पृष्ठ क्षेत्रफल में वृद्धि तथा क्वांटम प्रभावों का आधिपत्य।

सापेक्षिक पृष्ठ क्षेत्रफल
  • सापेक्षिक पृष्ठ क्षेत्रफल से तात्पर्य सतह-आयतन अनुपात से है। जैसे-जैसे किसी पदार्थ को हम छोटा करते जाते हैं। हमें उसी पदार्थ की नई विशेषताओं का पता चलता है।  लेकिन पदार्थ की ये नई विशेषताएं नैनो स्केल पर ही प्रदर्शित होती हैं। क्योंकि नैनों स्केल पर तल क्षेत्रफल से घनफल (आयतन) का अनुपात बढ़ जाता है, जिससे उसी पदार्थ के यांत्रिक उष्ण, प्रकाशिक तथा उत्प्रेरक  जैसे भौतिक गुण-धर्मों का प्रभाव बदल जाता है।

क्वांटम यांत्रिकी प्रभा
  • जब हम किसी पदार्थ का आकार कम करते-करते उसे 10 नैनो मीटर या उससे  कम तक ला लेते हैं, तो उसी पदार्थ का क्वांटम यांत्रिकी प्रभाव उभरकर सामने जाता है, जहां परम्परागत भौतिक एवं रसायन शास़्त्र के नियम लागू नहीं होते हैं। क्वांटम यांत्रिकी प्रभाव के फलस्वरूप पदार्थ के ऑप्टिकल, चुंबकीय और विद्युतीय विशेषताएं महत्वपूर्ण रूप से बदल जाती हैं।

टॉप डाउन बॉटम अप

  • नैनो स्तर पर पदार्थों को बनाने के लिए मुख्यतः दो प्रकार की तकनीकें प्रयोग में  लाई  जाती हैं-‘टॉप डाउन बॉटम अपटॉप डाउनतकनीक के अंतर्गत वृहद संरचनाओं पर यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा नैनो स्तरीय संरचनाओं की रचना की जाती है। जबकिबॉटम अपतकनीक में आण्विक स्तर पर जैविक और अजैविक संरचना का निर्माण किया जाता है। यहां उल्लेख करना आवश्यक है कि अभी नैनो तकनीक का विकासटॉप डाउनकी अवस्था में है।
  • टॉप डाउन तकनीक के अंतर्गत किसी पदार्थ के छोटे-छोटे टुकड़े को निक्षारण या  प्रेषण द्वारा अपेक्षित आकार में लाया जाता है। जबकि बॉटम अप तकनीक के अंतर्गत लुघुत्तम उप इकाइ जैसे अणु या परमाणु का एक-एक करके जोड़कर बड़ी संरचना बनाई जाती है।

नैनो तकनीक और सूक्ष्म तकनीक में अंतर
  • नैनो तकनीक और सूक्ष्म तकनीक में अंतर यह है कि जहां सूक्ष्म तकनीक नैनो स्तर से बड़ी या छोटी हो सकती है, वहीं नैनो तकनीक केवल नैनो स्तर (1-100 नैनो मीटर) ही कार्य करती है।

नैनो पदार्थ Nano matters
  • जिन पदार्थों के संरचनात्मक घटक 100 नैनो मीटर से भी कम का आयाम रखते हैं, उन्हीं को नैनो पदार्थ कहा जा सकता है। नैनो स्तर पर एकल आयाम रखने वाले पदार्थ एक पतली फिल्म या किसी सतह पर आवरण जैसी परतों के रूप में होते हैं। एकल आयामी नैनों पदार्थों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, रसायन और अभियांत्रिकी जैसे क्षेत्रों में दशकों से किया जा रहा है।
  • नैनों पदार्थ एक आयामी से लेकर बहुआयामी तक बनाए जा सकते हैं। दो आयामी नैनो पदार्थों मेें नैनो तार, कार्बन और अजैविक नैनो ट्यूब शामिल है।
  • वर्षा की बूंदें, कोलाइडर और क्वांटम बिंदु ( अर्द्ध चालक पदार्थों के सूक्ष्म कण) त्रिआयामी नैनों पदार्थ होते हैं।
  • नैनो मीटर के आकार के कणों से निर्मित क्रिस्टलीय पदार्थ भी इसी श्रेणी में आते हैं। नैनों कण प्रकृति में व्यापक रूप से पाए जाते हैं, जैसे फोटोरासायनिक एवं ज्वालामुखी क्रियाशीलता के उत्पादों के रूप में या पौधों एवं शैवालों द्वारा निर्मित उत्पादों के रूप में। वर्तमान में वाहनों के धुएं से भी नैनों कणों का निर्माण होता है।

नैनों पदार्थ की विशेषताओं को प्रभावित करने वाले कारक Factors influencing the characteristics of the substance

  • नैनों पदार्थों में जो विशिष्ट लक्ष  जाते हैं उसके लिए मुख्यतः दो कारक उत्तरदायी हैं- बढ़ा हुआ सापेक्षिक पृष्ठ क्षे़त्रफल और क्वांटम प्रभाव।
  • जैसे-जैसे किसी कण का आकार घटता जाता है, वैसे-वैसे परमाणुओं में एक व्यापक अनुपात भीतर की तुलना में सतह पर जाता है। उदाहरणार्थ- 30  नैनोमीटर आकार के एक कण के 5 प्रतिशत परमाणु, 10 नैनोमीटर आकार के 20 प्रतिशत परमाणु तथा 3 नैनोमीटर आकार के एक कण के 50 प्रतिशत परमाणु सतह पर जाते हैं। इस प्रकार नैनों कणों का पृष्ठ क्षेत्रफल बड़े कणों की तुलना में प्रति इकाई द्रव्यमान स्तर पर अधिक व्यापक होता है। अतः जैसे-जैसे पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ता है, और उत्प्रेरक रसायनिक अभिक्रियायें होती हैं, वैसे-वैसे नैनों कणों से निर्मित कोई पिण्ड उसी पदार्थ के सामान्य पिण्ड की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील हो जाता है। पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़े के साथ-साथ क्वाण्टम प्रभाव भी पदार्थ की विशेषताओं को प्रभावित करना शुरू कर देता है। यह पदार्थ ऑप्टिकल, विद्युतीय, चुम्बकीय व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

नैनो तकनीक का उद्गम Origin of nano technology

  • 29 दिसंबर 1959 तक नैनो तकनीक या नैनो विज्ञान जैसी कोई परिकल्पना अस्तित्व में नहीं थी। नैनो टेक्टनोलॉजी जैसी तकनीक सबसे पहली बार उस समय प्रकाश में आयी जब 29 दिसम्बर  1959 को प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमेन नेदेयर इज  प्लेंटी ऑफ रूप एट बॉटमनामक व्याख्यान में उन्होंने पहली बार नैनो स्तर पर पदार्थ के गुण और उससे बनने वाली वस्तुओं  के संभावित विषय पर चर्चा की थी। लेकिन फेनमेन ने अपने व्याख्यान में नैनो टेक्नोलॉजी शब्द का प्रयोग नहीं किया था। सबसे पहली बार नैनो टेक्नोलॉजी शब्द का प्रयोग टोकियो विश्वविद्यालय के नोरियो तानीगुजी ने 1974 में किया था। लेकिन नैनो टैक्नोलॉजी को एक  विज्ञान के रूप में स्थापित करने का श्रेय अमेरिका के फोरसाइट नैनोटेक संस्थान के एरिक डेक्सलर को जाता है। नैनो टेक्नॉलाजी पर आधारित इनका प्रसिद्ध दस्तावेजइंजिन ऑफ क्रिएशनः कमिंग नैनो टेक्नोलॉजी 1986 में प्रकाशित हुआ था।

नैनो अभियांत्रित बैटरी Nano controlled battery
  • नैनो अभियंत्रित बैटरी एक अत्यंत हल्की, अत्यंत पतली तथा पूर्णतया लचीली बैटरी है। यह बैटरी भविष्य के गैजेट की ऊर्जा आवश्यकताओं तथा युक्तिपूर्ण डिजाइन बनाने, प्रत्यारोपित किए जा सकने वाले मेडिकल उपकरण तथा परिवहन वाहनों में प्रयुक्त की जा सकेगी। लगभग 300 डिग्री फैरनहाइट से अधिक तथा 100 डिग्री फैरनहाइट से कम ताप पर भी काम करने वाली यह बैटरी पूर्णतः एकीकृत है तथा इसे कागज की तरह छापा जा सकता है। इसको बनाने में भारतीय वैज्ञानिकों का विशेष योगदान है।
  • नैना अभियंत्रित बैटरी अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि यह उच्च ऊर्जा बैटरी तथा उच्च शक्ति युक्त सुपर संधारित्र दोनों रूपों में काम कर सकती है, जो प्रायः विद्युत प्रणालियों में अलग-अलग अवयव होते है। इसकी एक अन्य विशेषता यह भी है मानव रक्त अथवा पसीने से बैटरी को शक्ति प्रदान करने में सक्षम है। इस डिवाइस को लिथियम आयन बैटरी तथा सुपर संधारित्र दोनों तरह से करने के लिए अभियंत्रित किया गया है। इस डिवाइस को लपेटा , घुमाय, मोड़ा, अथवा असंख्य आकारों में काटा जा सकता है। इससे इसकी कार्यकुशलता अथवा मैकेनिकल एकरूपता में कोई कमी नहीं आती।

नैनो बॉट्स या बायोमेम्स

Nano Bots or Biomes ( Bio Micro Electro Mechanical Systems)

  • नैनो बॉट्स या बायोमेम्स जैव माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल प्रोब हैं। जिन पर अभी शेध कार्य चल रहा है। ये भी रोगों की पहचान तथा उनका निदान करने में सक्षम होंगे। इनकी विशेषता यह है कि ये रक्त प्रवाह के साथ परिवहन कर सकते हैं। इस प्रकार बायोमेम्स रोगाणुओं को पकड़ने तथा औषधियों को लक्ष्य तक पंहुचाने में सक्षम होंगे।
  • बायोमेम्स तकनीक पर आधरित एक नैनोबॉट बनाया गया है जो शरीर में आवश्यकतानुसार इन्सुलिन बनाकर रक्त में छोड़ता रहा है। यह लगभग सात नैनो मीटर लम्बा छिद्रयुक्त कैप्सूल है जिसमें पैनक्रियाटिक आइसलेट कोशिकायएं होती हैं। जो इन्सूलिन बनाती रहती हैं। इस प्रकार बायोमेम्स पार्किन्सन रोग के रोगियों के मस्तिष्क में डोपामीन पहंुचा सकते हैं।

नैनो टॉक्सिकोलॉजी Nano toxicology
  • औषधियों को नैनो टेक्नोलॉजी के अंतर्गत लक्ष्य तक पहंचाने (लक्ष्य कोशिकाओं तक) के लिए संशलिष्ट लाइपोसोम तथा अन्य विषाणु वाहकों का प्रयोग किया जाता है।
  • मुख्य समस्या इन वाहकों की विषाक्तता की है जिसके अध्ययन को नैनो टॉक्सिकोलॉजी कहा जाता है।
  • ऐसे नैनो यंत्र जिन धातुओं अथवा तत्वों में बनते हैं। यथा कार्बन, टाइटेनियम, कैडमियम, गैयिम आदि इनकी विषाक्तता के विषय में अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

माइक्रो एरियल व्हीकल Micro aerial vehicle
  • अमेरिका सेना के इंजीनियर मक्ख्यिों के आकार के छोटे-छोटे उड़ने वो रोबो एम..व्ही. विकसति कर रहे हैं। जो दुश्मन के गढ़ मे जाकर साजिशों का सुराग लाने, वीडि़यो फिल्में बनाने और सूक्ष्म हथियारों से हमले करने में सक्षम होंगे। ये नन्हें जासूस जोखिम भरे अभियानों को सफल करने में सक्षम होंगे।


नैनो मेडिसिन Nano Medicine

नैनो मेडिसिन को आण्विक दवाएं भी कह सकते हैं। इनको निदान हेतु प्रयोग में लाने के लिए आण्विक मशीनों का उपयोग करना पड़ता है। इस प्रकार आण्विक ज्ञान को आण्विक पैमाने पर मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में प्रयोग किया जा सकता है। वर्तमान समय में नैनो मेडिसिन का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग कैंसर के इलाज के लिए हो रहा है। अभी तक यह बीमार लाइलाज रही है लेकिन हाल के वर्षों में  कुछ नवीनतम पद्धतियों पर आधारित उपचार के चलने यदि इसकी पहचान शुरूआत में हो जाए तो इलाज संभव है।

नैनो टेक्नोलॉजी के संभावित खतरे Potential threats to Nano Technology

नैनों कणों की विभिन्न विशेषताओ ( जैसे उच्च पृष्ठ क्रियाशीलता तथा कोश्किा झिल्ली को पार करने की क्षमता) के कारण कई खतरों की संभावना व्यक्त की जा रही है। जिसका स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। नैनो टेक्नोलॉजी की अधिकांश चिंताएं कृत्रिम रूप से विनिर्मित नैनों कणों और नैनों ट्यूबों के संभावित प्रभावों से जुड़ी हैं। क्योंकि ये कण किसी पदार्थ के भीतर या उससे जुड़े होने के बजाय मुक्त होते हैं। इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि  कुछ विनिर्मित नैनो कण समान रसायन के बड़े कणों की तुना में प्रति इकाई द्रव्यमान स्तर पर अधिक विषैले होते हैं।
मानव के अलावा अन्य प्रजातियों पर नैनों कणें के प्रभाव, वायु, जल, मृदा में इनके व्यवहार तथा खाद्य श्रृखंला में सचित होने की इनकी क्षमता के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। इनके पर्यावरण पर प्रभाव के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि अपने बढ़ते हुए पृष्ठ क्षेत्रफल और संभावित वर्द्धित अभिक्रिया क्षमता के कारण ज्वलनशील नैना कण विस्फोट के एक बढ़ते हुए खतरे का कारण बन सकते हैं।

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