प्रमुख पारिस्थितिकीय अवधारणायें { Important Ecological Concept }

प्रमुख पारिस्थितिकीय अवधारणायें Important Ecological Concept 

इकोटोन Ecotone- दो बायोम के मध्य संक्रमणशील या अति व्यापन का क्षेत्र होता है जिसमें दोनों बायोग के जन्तु या पादप पाये जाते हैं। 

एज प्रभाव Edge Effect- जब दो समुदायों को विभाजित करने वाले इकोटोन की पहचान आसानी से नहीं हो पाती है तो इसे एज प्रभाव कहते हैं। 

चप्पारल Chapparal- यह भूमध्य सागरीय जलवायु क्षेत्र है जहाँ सर्दियों में वर्षा होती है तथा गर्मी शुष्क होती है। यहाँ की वनस्पतियों की पत्तियाँ चौड़ी होती हैं। 

मिर्मिकोफिली Myrmecophily- कुछ विशेष प्रकार की चीटियाँ फलदार वृक्षों में आश्रय लेती हैं और उनकी रक्षा अन्य जन्तुओं से करती हैं। यह परिघटना मिर्मिकोफिली कहलाती है। 

सहजीविता Symbiosis- दो अलग-अलग प्रजातियों में पारस्परिक लाभवर्धक सम्बन्ध, सहजीविता कहलाता है, जैसे लाइकेन में कवल और शैवाल के मध्य तथा दलहनी फसलों तथा राइजोबियम बैक्टीरिया के मध्य के संबंध सहजीविता पर आधारित हैं। 

कृषि पारिस्थितिकी Agreecology- यह कृषि फसलों और उनके वातावरण के मध्य पारस्परिक संबंधों का अध्ययन है। 

बर्फ रेखा Snow Line- भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर वह सीमा जहाँ से आगे जाने पर वृ़क्ष नहीं मिलते केवल बर्फ ही बर्फ ही दिखती है। इस रेखा के बाद केवल घास झाडियां मिलती हैं। 

यूट्रोफिक Eutrophic- तालाब जैसे वे जल क्षेत्र जिसमें पर्याप्त मात्रा में पोषक पदार्थ होते हैं तथा जो पौधों की तीव्र वृद्धि के लिए उपयुक्त होता है, यूट्रोफिक कहलाता है। यहाँ पौधों तथा जल जंतुओं की भरमार होने की घटना यूट्रोफिकेशन कहलाती है। 

अधिपादप Epiphytes- जो दो अलग अलग प्रकार के पौधों को संबंध भोजन आधारित न होकर केवल आवास आधारित होता है तो ऐसे पौधों को अधिपादप कहते हैं। 

लियाना Liana- यह उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों में उगने वाली एक लता है जो वृ़क्ष के तने से लिपटकर वृक्ष के ऊपर तक पहुँच जाती है। 

अनुक्रमण Succession- जब किसी पारिस्थितिकी तंत्र में एक जैव समुदाय का स्थान कालांतर में दूसरे जैव समुदाय द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है तो उसे पारिस्थितिकी अनुक्रमण कहते हैं। 

पारिस्थितिकी चरम- पारिस्थितिकी तंत्र में एक प्रजाति द्वारा दूसरे का अनुक्रमण समय के साथ मंद पड़ जाता है तथा धीरे-धीरे प्रजाति निश्चित स्वरूप प्राप्त कर लेती है जिसमें बदलाव बहुत अल्प होता है, इस दशा को पारिस्थितिकी चरम कहते हैं। 

बेन्थोस Benthos- जल की सबसे निचली सतह अर्थात कीचड़ में रहने वाले सूक्ष्म जीवों को बेन्थोस कहते हैं। 

इडेफोलाजी Edaphology- पौधों के वृद्धि और विकास में मृदा की भूमिका का अध्ययन करने वाले विज्ञान को इडेफोलाजी कहते हैं। 

फेरोमोन Pheromone- कीटों में सम्भोग, रास्ता निर्धारण तथा क्षेत्र निर्धारण के लिए कुछ रसायनों का स्त्राव किया जाता है जिसे फेरोमोन कहते हैं। 

बोरियल Boreal- भारत में पायी जाने वाली 40 प्रतिशत वनस्पति बाहरी है। यह बाहर से लाई गयी वनस्पतियाँ अधिकांशतः मूल रूप से तिब्बत तथा चीन से सम्बन्धित हैं, और बोरियल कहलाती हैं। 

महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावलियाँ Important Ecological Terminologies 

पारिस्थितिकीय निक Ecological Niche- किसी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण व इसको चलाने में जीवधारी ( पौधा या जंतु ) एक निश्चित कार्य करता है और इस तंत्र में प्रत्येक जीवधारी का अपना एक पद होता है। पारिस्थितिकी तंत्र में एक पौधे या जंतु के कार्य को पारिस्थितिकीय निक कहते हैं। 
इसके अंतर्गत जीवधारी के जीवन के लिए आवश्यक सभी भौतिक, रासायनिक कायिकीय जैविक कारक आते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि एक जीव का भोजन माध्यम क्या है, यह जीव दूसरे जीव के लिए प्रयोग होता है तािा इस जीव का अन्य जीवधारियों व निर्जीव वातावरण पर क्या प्रभाव होता है। 

जरायुज Vivipara or Viviparous- जो जंतु अण्डे न देकर सीधे बच्चे जनते हैं उन्हें जरायुज कहते हैं, जैसे मनुष्य, पशु एवं अन्य स्तनधारी। 

अण्डयुज Ovipara or Oviparous- जो जंतु पहले अण्डे देते हैं फिर बाद में अण्डे से बच्चे निकलते हैं, ऐसे जंतुओं को अण्डयुज कहते हैं। 

रात्रिचर Nocturnal Animal- जो जंतु अपने भोजन की तलाश में रात को निकलते हैं उन्हें रात्रिचर कहते हैं। जैसे भेक या टोड तथा शाही आदि। 

दिवाचर Diurnal Animal- जो जंतु दिन में अपने भोजन की तलाश में निकलते हैं तथा रात को विश्राम करते हैं, उन्हें दिवाचर कहते हैं। 

समतापी जंतु Warm Blooded Animals- उन जंतुओं को कहते हैं जिनके शरीर (रूधिर) का ताप हर मौसम में समान रहता है जैसे मनुष्य का पात हमेशा 98.6 फैरनहाइट हमेशा रहता है। सभी पक्षी तथा स्तनधारी (प्रोटोथीरिया को छोड़कर) समतापी होते हैं। 

असमतापीCold Blooded Animal- जिन जंतुओं के शरीर (रूधिर) का ताप वातावरण के ताप के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है उसे असमतापी जंतु कहते हैं। अर्थात् असमतापी जंतुओं के शरीर का ताप गर्मियों में गर्म तथा सर्दियों में सर्द हो जाता है। मतस्य, उभयचर तथा सरीसृप या रेंगकर चलने वाले जंतु असमतापी होते हैं। 

शीत निष्क्रियता Hibernation or Winter Sleep- नवंबर माह में शीतकाल आरंभ होते ही असमतापी जंतुओं जैसे मेढ़क, सॉप, छिपकली आदि के शरीर का ताप वातावरण के ताप के अनुसार घटने लगता है। इस विषम परिस्थिति से बचने के लिए मेढ़क अपनी तुण्ड की सहायता से कीचड़ या गीली मिट्टी में करीब 60 से.मी. तक नीचे घुस कर निष्क्रिय अवस्था में पड़ा रहता है। इस अवस्था को शीत निष्क्रियता कहते हैं। छिपकली, चमदागढ़ आदि दीवारों में शीत निष्क्रियता बिताते हैं। 

फरवरी में लगभग बसंत ऋतु के समय मेढ़क आदि शीति क्रिया का परित्याग कर बाहर आ जाते हैं और पहले की तरह अपना जीवन आरंभ करते हैं। 

ग्रीष्म निष्क्रियता Aestivation or Summer Sleep- गर्मी को मौसम प्रारम्भ होते ही वातावरण के साथ मेढ़क के शरीर का ताप बढने लगता है। इस विषम परिस्थिति से बचने के लिए मेढ़क पुनः जमीन के अन्दर या फूस की तली में छुपकर निष्क्रिय हो जाता है। इस अवस्था को ग्रीष्म निष्क्रियता कहते हैं। 

वर्षा आरम्भ होते ही मेढ़क ग्रीष्म निष्क्रियता को त्यागकर बाहर आ जाता है तबा गढ्ढो व तालाबों में कूद-कूद कर अपना दैनिक जीवन व प्रजनन क्रिया आरम्भ कर देता है। इसी प्रकार सॉप, छिपकली, चमगादड़ आदि दिन की प्रचण्ड गर्मी से बचने के लिए ठंडे स्थानों में शरण लिए रहते हैं और प्रायः रात को ठंडा होने पर निकलते हैं। 

पारिस्थितिकी से संबंधित आधुनिक शब्दावलियाँ Latest Ecological Terminologies 

हरित मफ्लर Grenn Muffler- सड़कों और रेल की पटरियों के किनारे पौधों तथा झाडि़यों की कई कतारें लगाकर ध्वनि प्रदुषण की गतिविध को कम करने की इस व्यवस्था को हरित मफ्लर कहते हैं। 

जैव सान्द्रण Bio Magnification- अनेक प्रदूषणकारी पदार्थ जैसे डीडीटी आदि सतत् प्रदूषक कहलाते हैं। ये अगर एक बार भी उपयोग में ला लिये जाते है तो लम्बे समय तक हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में बने रहते हैं। इस प्रकार अनेक प्रदूषणकारी पदार्थ हमारी खाद्य श्रृंखलाओं में स्थापित हो जाते हैं। इनके अंतर्गत कीटनाशक आदि आते हैं। इनका सान्द्रण क्रमिक रूप से उच्च पोषण स्तर में बढ़ता जाता है, जिसे जैव सान्द्रण कहते हैं। वनस्पतियों में इनका सान्द्रण सबसे कम तथा तृतीयक उपभोक्ता में सबसे अधिक होता है। 

जैव क्षयकारी प्लास्टिक Biodegradable Plastic- सामान्य प्लास्टिक का अपक्षय या अपघटन सूक्ष्म जीव नहीं करते हैं, पर जब इसका निर्माण निम्न घनत्व की पाली एथिलीन को मण्ड या मॉडी के साथ मिलाकर करते हैं तो मिट्टी में फेंक देने पर दो महीने में इसका जैव अपक्षय हो जाता है और यह मिट्टी में मिल जाता है। 

भोपाल त्रासदी Bhopal Disaster- मिथाइल आइसो साइनेट को भोपाल त्रासदी की संज्ञा से अभिहित किया गया है, क्योंकि 2-3 दिसम्बर 1984 में भोपाल में इस गैस से हजारों लोागों की मौत हो गई थी। 

साइलेन्ट स्प्रिंग Silent Spring- यह रसेल कार्सन के उस उपन्यास का नाम है जिससे पक्षियों पर डीडीटी के प्रभाव का जीवन्त वर्ण किया गया है। इसके छपने के बाद अमेरिकी सरकार ने डीडीटी पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

भूरी बर्फ Grey Snow- यह नार्वे में पाई जाती है। जर्मनी में खनिज क्षेत्र रूर में हुए प्रदूषण के कारण वहाँ की बर्फ भूरी हो गयी है। 

जीन बैंक Gene Bank- यह किसी पादप के जैवीय विविधता से सम्बन्धित सभी प्रकार की प्रजातियों, बीजों, जीनों आदि का संग्रह है। 

जीन पूल Gene Pool- यह किसी प्रजाति की पूरी जनसंख्या के जीनों का उनके एलील्स के साथ समग्रता का घोत्तक है। 

एजेन्ट आरेंज Agent Orange- अमेरिका द्वारा वियतनाम युद्ध में प्रयुक्त किया गय खरपतावार नाशी का नाम है, जिसने वहाँ के जंगलो तथा वनस्पतियों को तबाह किया ही, साथ में मनुष्यों में भी कैंसर और विकलांगता का प्रसार किया। 

हरित लेखा परीक्षण Green Audit- किसी भी संस्थान या औद्योगिकी इकाई की जॉच पड़ताल इसके द्वारा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के उद्देश्य से करना, हरित लेखा परीक्षण कहलाता है। 

इकोचिन्ह Eco mark- भारतीय मानक ब्यूरों द्वारा मिट्टी के घड़े के रूप में स्थापित यह चिन्ह ऐसे उत्पादों के लिए दिया जाता है जिसका उत्पादन और उपयोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए सरकार द्वारा चलाया जा रहा अभियान है। 

इकोक्लब Eco Club- किशोरों में पर्यावरण सरंक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए सरकार द्वारा चलाया जा रहा अभियान है।

No comments

Powered by Blogger.