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उपलब्धि का मूल्यांकन एवं प्रश्नों का निर्माण Evaluation of Achievement


उपलब्धि का मूल्यांकन Evaluation of Achievement
  • छात्र की उपलब्धि का मूल्यांकन सतत् एवं व्यापक रूप से होते रहना चाहिए। इसके लिए कई विधियों को अपनाया जाता है, किन्तु ग्रेडिंग पद्धति का प्रयोग कार्य हेतु बेहतर होता है। 
  • विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों की रिपोर्ट तैयार करते समय समग्र ज्ञान में अप्रत्यक्ष ग्रेडिंग के पाँच बिन्दुओं का प्रयोग किया जा सकता है। 

इन ग्रेडों में अंकों का विवरण इस प्रकार किया जाना चाहिए

  • ग्रेड  परिणाम -  अंक (प्रतिशत में )
  • ए - सर्वोत्कृष्ट - 90 प्रतिशत - 100 प्रतिशत 
  • ए - उत्कृष्ट - 75 प्रतिशत - 89 प्रतिशत 
  • बी - बहुत अच्छा - 56 प्रतिशत - 74 प्रतिशत 
  • सी - अच्छा 35 प्रतिशत - 55 प्रतिशत 
  • डी - औसत - 35 प्रतिशत से कम  
  • बच्चे को ग्रेड उपलब्धि कार्ड में दर्शाया जाना चाहिए, जो प्रतिशतता की उपरोक्त श्रेणी में व्यवहार के सूचक के अनुसार प्रतिशतता पर आधारित हो। इसके  अलावा, शैक्षिक और  शिक्षा से जुडे़ क्षेत्रों और बच्चे की उपलब्धि के स्तर के सम्बन्ध में कुछ टिप्पणियाँ दर्ज की जा सकती है। ये टिप्पणियाँ शिक्षण के क्षेत्र में प्रयास करने के लिए माता-पिता और बच्चे के लिए सहायक होती हैं।
  •  सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन, सतत् निदान, उपचार, प्रोत्साहन और सराहाना करके विद्यार्थी की उपलब्धियों में सुधार लाने के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं। इसके लिए प्रधानाचार्य, अध्यापक और माता-पिता को अभिमुखी और ठोस प्रयास करने होंगे ताकि बच्चे के व्यक्तित्व का चहुँमुखी विकास हो सके । संलग्न रेटिंग मान में विभिन्न ग्रेंडों के रूप में विद्यार्थियों को उचित रूप से रखने में अध्यापक को मदद मिलती है। 

रचनात्मक मूल्यांकन Formative Evaluation
  • रचनात्मक मूल्यांकन फीडबैक मुहैया करता है, जो विद्यार्थी को (शिक्षा प्राप्ति की) त्रुटियों को समझने और उन्हें दूर करने में सहायता देता है। 
  • सैडलर के अनुसार “रचनात्मक मूल्यांकन में फीडबैक और स्व मानीटरन दोनों शामिल होते हैं।” 
  • ब्लैक और विलियम के अनुसार, “ रचनात्मक मूल्यांकन प्रायः इससे अधिक कुछ नहीं होता कि मूल्यांकन बारम्बार किया जाता है और अध्यापन की तरह उसी समय किया जाता है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन को रूपात्मक आकलन भी कहा जाता है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन में कार्य अनुभव, कला-शिक्षा और स्वास्थ्य तथा शारीरिक-शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कार्य निष्पादन का निर्धारण 5 बिन्दू (प्वॉइन्ट) वाले पैमाने जैसे ग्रेड ए, ए, बी, बी, सी, आदि पर किया जाता है, जिसका विवरण रिपोर्ट कार्ड की पिछली ओर दिया जाता है। 

रचनात्मक मूल्यांकन: ग्रेडिंग पैमाना 
अंक  श्रृखला श्रेणी (ग्रेड) श्रेणी बिन्दु (ग्रेड प्वॉइन्ट)

  • 91-100 -ए1 - 10.0 
  • 81.90 - ए2 - 9.0
  • 71-80 -बी1- 8.0
  • 61-70 - बी2 - 7.0 
  • 51-60 - सी1 - 6.0
  • 41-50 -सी2 -5.0
  • 33-40 -डी - 4.0
  • 21-32 ई1 - -
  • 00-20 - ई2 --


रचनात्मक मूल्यांकन का कार्यान्वयन  Formative Evaluation

  • रचनात्मक मूल्यांकन का कार्यान्वन शिक्षा प्राप्ति के लक्ष्य, अभिप्राय अथवा परिणाम और इन्हें प्राप्त करने की कसौटियों को पूरा करने में सहयोग देता है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन से अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच गम्भीर बातचीत, जो निरन्तर बनती रहती है और गहराई में जाती है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन के कार्यान्वयन के अन्तर्गत प्रभावकारी फीडबैक समय पर मुहैया किया जाना चाहिए, जो विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में समर्थ बनाती है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन विद्यार्थियों का स्वयं अपनी शिक्षा प्राप्ति में सक्रिय रूप से शामिल होना निर्धारित करता है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन का कार्यान्वयन अध्यापकों द्वारा अपनी अध्यापन की पद्धतियों में संशोधन करके शिक्षा प्राप्ति की निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा किया जाना निर्धारित करता है। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन का उपयोग पाठ्यक्रम के अध्यापन और शिक्षा प्राप्ति को आँकने के लिए किया जाना चाहिए।
  • रचनात्मक मूल्यांकन के अन्तर्गत विद्यालय का यह दावित्व है कि वह विद्यार्थियों को उनके कार्य निष्पादन में सुधार करने में सहायता देने के लिए, शैक्षिक वर्ष के शुरू होने के समय से विद्यार्थियों की शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों का निदान करें और उन्हें समय के उपयुक्त अन्तरालों पर माता-पिता के ध्यान में लाएँ। 
  • विद्यालयों को विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के उपयुक्त उपचारी उपायों की सिफारिश भी देनी चाहिए। इसी प्रकार विशेष रूप से प्रतिभाशाली बच्चों को अतिरिक्त कार्य देकर, प्रतिभा को और बढ़ाने, वाली सामग्री देकर और परामर्श देकर उन्हें और अधिक योग्य बनाया जाना चाहिए।
  • कमचोर और प्रतिभाशाली दोनों प्रकार के बच्चों की सहायता के लिए उन्हें परामर्श देने के लिए कक्षा की समय-सारणी में उपयुक्त व्यवस्था की जानी चाहिए।

रचनात्मक मूल्यांकन योजना 
रचनात्मक निर्धारण पर संकेन्द्रण (फोकस)
विद्यार्थियों के शिक्षा-प्राप्ति के परिणामों और निर्धारण की अपेक्षाओं को बाँटना
स्पष्ट रूप से निर्धारित कसौटियों का उपयोग करना
उदाहरणों और आदरशॉ का उपयोग करें
विशिष्ट फीडबैक और फीड फार्वर्ड दें (जिससे यह सहायता मिलेगी)
विद्यार्थी स्व-निर्धारण करें
विद्यार्थी अपनी प्रगति का विवरण रखें
अध्यापक विद्यार्थी की प्रगति का विवरण रखें 

  • अध्यापक के लिए यह भी जरूरी है कि वह अपनी कक्षा में विभिन्न प्रकार की योग्यताओं वाले विद्यार्थियों से निपटने की कार्यनीतियों का उपयोग करें। सन्दर्भ के लिए, दो इतिवृत्तात्मक अध्ययन अध्याय पाँच में शामिल किए गए हैं। यह उचित होगा कि शैक्षिक वर्ष के दौरान विद्यार्थियों की उनके माता-पिता को विद्यार्थियों की उपलब्धि के स्तर की जानकारी दी जाए, ताकि विद्यार्थियों कार्य निष्पादन को बढ़ाने के लिए उनके सहयोग से उपयुक्त समय पर उपचारी कदम उठाए सकें। 
  • समूचे मूल्यांकन के अन्त बच्चे की सकारात्मक और महत्वपूर्ण उपलब्धियों बारे में कक्षा अध्यापक की वर्णनात्मक अभ्युक्तियाँ होनी चाहिए और अप्रत्यक्ष नकारात्मक मूल्यांकन को बताया जाना चाहिए।
  • रचनात्मक मूल्यांकन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए और विद्यार्थियों को अपने कार्य निष्पादन सुधार करने में समर्थ बनाने के लिए अध्यापकों को अपने अध्यापन के दौरान मूल्यांकन के विभिन्न साधनों का उपयोग करने की आवश्यकता है। 
  • अध्यापकों को चाहिए कि वे रचनात्मक मूल्यांकन की अवधि में निर्धारण के कम-से-कम तीन विभिन्न साधनों का उपयोग करें।   
  • जहाँ तक रचनात्मक मूल्यांकनों का सम्बन्ध है, यह प्रस्ताव है कि विद्यालयों  को अपने मूल्यांकन स्वयं करने चाहिए। 
  • विद्यालयों  को अपने आपको केवल कागज, पेन्सिल वाली परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
  • मूल्यांकन, लिखित और मौखिक दोनों ही प्रकार की परीक्षाओं का होना चाहिए। इसमें परियोजनाएँ/ क्रिया-कलाप/ प्रश्नोत्तरियाँ/ निर्दिष्ट कार्य/ कक्षा-कार्य/ घर का कार्य भी शामिल हो सकता है। परीक्षा से विद्यार्थियों  के मन में भय उत्पन्न नहीं करना चाहिए और इसका स्वरूप ऐसा होना चाहिए कि उन्हें अनौपचारिक तरीके से किया जा सके।

रचनात्मक मूल्यांकन के लिए विशिष्ट सिफारिशें Special Recommendation for Formative Evaluation

  • विद्यार्थी अपना सत्र अप्रैल में शुरू करते हैं और सीबीएसई ने रचनात्मक मूल्यांकन के लिए यह सिफारिश की है कि यह नये सत्र के प्रारम्भ में अप्रैल में शुरू हो।
  • सीबीएसई द्वारा किए गए सिफारिशों में विभिन्न विषयों के बारे में कुछ महीने-वार सुझाव दिए गए हैं। यह सलाह दी गई है कि प्रत्येक अवधि में, विद्यालय रचनात्मक मूल्यांकन के अन्तर्गत विद्यार्थी के कार्य निष्पादन का मूल्यांकन करने के लिए कागज, पेन्सिल परीक्षा का उपयोग एक से अधिक बार न करें। 
  • यह सुझाव दिया गया है कि विज्ञान के मामले में वर्ष में 4 रचनात्मक मूल्यांकनों में से कम-से-कम एक मूल्यांकन प्रयोगों के रूप में हो।
  • गणित में चार मूल्यांकन में से एक मूल्यांकन गणित प्रयोगशाला क्रिया-कलापों का मूल्यांकन होना चाहिए।
  • समाज विज्ञान में 4 में से कम-से-कम 1 मूल्यांकन परियोजनाओं पर आधारित होना चाहिए।
  • भाषाओं में 4 में से कम-से-कम एक मूल्यांकन श्रवण बोध अथवा वार्तालाप के रूप में वार्तालाप करने के कौशल का मूल्यांकन होना चाहिए। 
  • उपरोक्त मार्गनिर्देशों का प्रयोजन यह है कि मूल्यांकन के बहुविध मॉडलों का उपयोग किया जाए, ताकि लिखित परीक्षाओं पर ध्यान के संकेन्द्रण को कम किया जाए। 
  • रचनात्मक मूल्यांकन ग्रेड केवल एक निर्धारण के लिए नहीं हो सकता। यह किसी सारी अवधि में किए गए कार्य का औसत होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक ग्रेड, जो प्रयोगों को दर्शाता है, एक खास अवधि में किए गए प्रयोगों (3-4) का औसत होना चाहिए।

प्रश्नों का निर्माण Formation of Question
  • बच्चे के ज्ञान, सोच, छवि और भावनाओं का पता लगाने कर सबसे उत्कृष्ट तरीका क्या है शिक्षार्थी का मूल्यांकन उससे प्रश्न पूछकर और उसके सामने समस्याएँ रखकर किया जा सकता है। दिए गए उत्तरों के सम्बन्ध बनाने की क्षमता भी शिक्षण का उचित परीक्षण है। 
  • सकारात्मक मूल्यांकन करने के रूप में अध्यापक शिक्षण के दौरान उसके शिक्षण की जानकारी या बच्चे के सामने आने वाली कठिनाइयों को बच्चे से पूछकर कर सकता है कि बच्चा उनके बारे में क्या सोचता है। 
पूरक प्रकार के प्रश्न
  • पूरक प्रकार के प्रश्नों में विद्यार्थियों को एक शब्द में या कई वाक्यों अथवा अनुच्छेदों में उत्तर देना होता है। इस प्रकार के प्रश्नों को ‘स्वच्छ उत्तर‘ प्रश्न भी कहा जाता है। पूरक प्रकार के प्रश्नों  को चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। निबन्ध प्रकार, संक्षिप्त उत्तर प्रकार, बहुत संक्षिप्त उत्तर प्रकार और खाली स्थान भरने का प्रकार। 

पूरक प्रकार के प्रश्न
लघु उत्तर - बहुत छोटे उत्तर - रिक्त स्थान भरें
निबन्धात्मक प्रश्न 

  • निबन्ध प्रकार के प्रश्न के आशय है ऐसा लिखित उत्तर जो एक या दो पृष्ठों में हो। विद्यार्थियों को इस बात की छूट होती है कि वे उत्तर की शब्दावली, उसकी लम्बाई और उनके संयोजन अपने तरीके से कर सकते हैं। ज्ञान को मापने के लिए प्रयोग किए जाने वाले निबन्ध प्रकार के प्रश्नों के अन्तर किया जाना चाहिए। निबन्ध प्रकार के प्रश्नों का उद्देश्य यह है कि बच्चों का भाषाओं में लिखने का परीक्षण किया जाए। इसे निबन्ध परीक्षा कहा जाता है।                 
  • ऐसे कई प्रकार की योग्याताएँ हो सकती हैं जिनकी अन्य तरीके से नहीं बल्कि निबन्ध प्रकार के प्रश्न पूछकर ही परीक्षा ली जा सकती है। ये  योग्यताएँ इस प्रकार हैं, 
  • अर्जित ज्ञान से संगत सथ्य का चयन करना। 
  • ज्ञान के विभिन्न पहलुओं के बीच उनकी पहचान करना और उनके आपस का सम्बन्ध निर्धारित करना। 
  • एकत्रित की गई सूचना का प्रयोग करके उसके प्रमाण का जायजा लेना। 
  • अनुमान लगाकर सूचनाओं को व्यवस्थित करना, उनका विश्लेषण करना, तथ्यी की व्याख्या करना और अन्य प्रकार की सूचनाएँ एकत्र करना। 
  • दी गई समस्या के बारे में अपने व्यक्तिगत और मूल दृष्टिकोण को व्यक्त करना।
  • तथ्यों, आँकड़ों और उपयुक्त तर्कों से अपने विचार को बनाए रखना। 
  • दी गई स्थिति में उपलब्ध सूचना की पर्याप्तता, यथार्थता और सुसंगतता की जाँच करना। 
  • समस्या और मुद्दे के प्रति आन्तरिक अभिवृत्ति का प्रदर्शन करना।
  • स्थूल और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर समस्या को समझना।
  • दी गई समस्या का समाधान करने के लिए नया दृष्टिकोण बताना, तैयार करना और उसका सुझाव देना।

निबन्धात्मक प्रश्नों को तैयार करना To Form Essay type Question

  • निबन्धात्मक  प्रकार  के प्रश्नों का आरम्भ सामान्यतः चर्चा, व्याख्या, मूल परिभाषा, तुलनात्मक व विश्लेषण से होता है। निबन्ध प्रकार के प्रश्न अच्छे होते हैं। उनका समूह छोटा व समय सीमा के अन्तर्गत परीक्षा के लिए तैयार किया जाता ये लिखित अभिव्यक्ति के लिए भी उचित होते हैं।
  • कुछ सामान्य प्रश्न इस प्रकार हैं
  • रेतीली मिट्टी जल को क्यों नहीं रोकती हैं (प्रश्नात्मक)
  • चार ज्ञानेन्द्रियों के नाम बताइए एवं उनके बारे में संक्षेप में लिखिए (कथनात्मक)
  • गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है। 
  • दूसरे उदाहरण 
  • रूजवेल्ट द्वारा 1932 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव जीतने के कारण बताइए और इस प्रश्न में समावेशन कर इसे इस प्रकार बनाया जा सकता है। 
  • रूजवेल्ट का राष्ट्रपति का चुनाव जीतने का महत्वपूर्ण कारण था हूवर की 
  • अलोकप्रियता। क्या आप सहमत हैं अपना स्तर स्पष्ट करें। 
  • इनमें पहला प्रश्न रटे-रटाए उत्तर पर बल देता हैं, जबकि दूसरा प्रश्न अपेक्षित विचारों, विश्लेषण एवं मूल्यांकन सबको महत्व देता है। 

लघु उत्तरीय प्रश्न Short Answer Type Question

  • निबन्धात्मक प्रश्नों में वस्तुनिष्ठता और विश्वसनीयता की कमी होती है। इसलिए निबन्ध प्रकार के प्रश्नों में सक्षिप्त सार-संक्षेप और स्पष्टता नहीं होती है। 
  • केन्दीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (ब्ज्म्ज्) सक्सेस मास्टर 
  • लघु प्रश्न-उत्तर दो चरम स्थितियों के मध्य मार्ग है। शिक्षक एवं छात्र यदि इनके प्रारूप को भली-भाँति समझ लें, तो वस्तुनिष्ठ और निबन्ध दोनों ही प्रकार के प्रश्न लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न के उदाहरण

  • संसार के सात अजूबों में से पिरामिड को अजूबे के रूप में क्यों माना गया। (प्रश्नात्मक)
  • पौधे और जानवरों में चार अन्तर बताइए (कथानात्मक)
  • लघु उत्तरीय प्रश्न के सन्दर्भ में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता पड़ती है
  • लघु प्रश्नों का प्रयोग वार्षिक/यूनिट परीक्षाओं में किया जा सकता है।
  • लगभग सभी वस्तुनिष्ठ अध्ययनों में इसका प्रयोग किया जा सकता है।
  • यह छात्रों में सही तथ्यों के संगठन और समझने के विकास में सहायता करता है।
  • इस प्रकार के प्रश्नों की अपेक्षा  अधिक वस्तुनिष्ठता और विश्वसनीयता होती है। 
  • इस तरह के प्रश्न अधिक-से-अधिक पाठ्यक्रम को शामिल करने में सहायता करेंगे क्योंकि कुछ निबन्धात्मक प्रश्नों के स्थान पर अधिक लघु प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इससे प्रश्न-पत्र की वैद्यता में भी सुधार आएगा।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न Very Short Answer Type Question

  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न वे हैं जिनके द्वारा निश्चित परीक्षा बिन्दु जाना जाता है और वस्तुनिष्ठता को चिहिृत किया जा सकता है। इन प्रश्नों से ज्यादातर विषय-वस्तु के मूल को समझा जा सकता है और अधिक विश्वसनीयता व वैधता को बनाया जा सकता है।
  • अतिलघु उत्तरीय प्रश्नों के अन्तर्गत परीक्षार्थी से शब्द, पदबन्ध अथवा अलंकार और वाक्य पूछकर प्रश्नों के उत्तरों को जाना जा सकता है। इससे उत्तर ए शब्द या एक वाक्य में दिया जा सकता है। इनके उत्तर देने में ज्यादा-से-ज्यादा एक से दो मिनट लगेंगे और आधा से 1 नम्बर दिया जा सकेगा। अति लघु प्रश्नोंत्तरों का प्रयोग सभी विद्यालयी विषयों में किया जा सकता है।

कुछ अति लघु प्रश्नोंत्तरों के उदाहरण नीचे दिए गए हैं
1. रिक्त स्थान पूर्ति प्रकार के प्रश्न यह भाषा ज्ञान में अभिव्यक्ति को जानने में सहायक होगा। प्रश्न का एक  उदाहरण- मैं बहुत परेशान था क्योंकि.............।
2. समानार्थक प्रकार के प्रश्न भाषा में अनुच्छेदों में दिए गए विचार, शब्द, वाक्य, समानार्थक व विलोम शब्दों को चुनने के लिए भी इनका प्रयोग किया जा सकता है।
3. स्थानीय प्रकार के प्रश्न भूगोल में नक्शा कौशल को मापने के लिए इन प्रश्नों का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न का एक उदाहरण नक्शें में सिडनी, क्लाराडो रेगिस्तान दर्शाएँं।
4. रूपान्तरण प्रकार इस प्रकार प्रश्नों का प्रयोग केवल भाषा को जाँचने के लिए होता है। इस तरह के प्रश्नों के द्वारा कथ्य, वाच्य, संश्लेषण व वाक्य-रूपान्तरण आदि को जाँचा जा सकता है। 
चित्रात्मक प्रश्न Diagrammatic Question

  • चित्रात्मक प्रश्नों का निर्माण सामान्यतः प्राथमिक कक्षा के ज्ञान की परख  हेतु किया जाता हैं। 
  • इस  प्रकार के प्रश्नों में दिए गए चित्रों से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। 
  • किसी चित्र के आधार पर यह पूछा जा सकता है कि दिए गए चित्र में व्यक्ति क्या कर रहा है अथवा यह किसकी तस्वीर है अथवा दिए गए व्यक्ति का व्यवसाय क्या हैं

निर्वचनात्मक प्रश्न Interpretative Question
  • निर्वचनात्मक प्रश्नों के चरिए विविध विषयों से सम्बन्धित ज्ञान की परीक्षा ली जाती है।
  • इस  प्रकार के प्रश्नों के जरिए एक ही बार में किसी विषय से सम्बन्धित कई पहलुओं की परीक्षा सम्भव है।

उदाहरण 

  • निर्देश बस की समय-सारणी को पढ़े और नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दें 
  • हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन बस सेवा समय-सारणी 
  •  मार्ग - दिल्ली-वैद्यनाथ - दिल्ली-चम्बा - दिल्ली-धर्मशाला 
  • दिल्ली से जाने का समय 18ः15 20ः00 - 21ः45 
  • दूसरी तरफ से जाने का समय 17ः30 - 14ः00 -19ः30 
  • दूरी (ाउ)539 -626- 513 
  • किराया - 77ः00 -84ः00 -71ः50
  • बस की समय-सारणी की शीर्षक क्या है
  • समय-सारणी में कितने मार्गों की सूची दी गई हैं

रिक्त स्थान प्रकार के प्रश्न Filler Type Question
इस प्रकार के प्रश्नों में एक कथन दिया जाता है जिसमें कि एक शब्द या दो शब्दों को उनके स्थान से हटा दिया जाता है और छात्रों को इन रिक्त स्थानों में अपयुक्त शब्द भरने को कहा जाता है। 
इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार है

  • सभी प्राणी ............... प्राप्त करने के लिए सांस लेते हैं। (ऊर्जा)
  • सूफी सन्तों के मकबरे को .......... कहा जाता है। (दरगाह)
  • पृथ्वी के ऊपरी भाग को .......... कहते हैं। (भू-पर्पटी)
  • क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भारत विश्व का ......... सबसे बड़ा देश हैं। (सातवाँ)

वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों के विभिन्न Various form of Objective Question
1. वैकल्पिक उत्तर प्रकार के प्रश्न सत्य/असत्य, सही/गलत एवं हाँ/नहीं।
2. मिलान प्रकार के प्रश्न एकल, दोहरा, कुँजी/जाँच-सूची, साँचा एवं रिक्त स्थान भरना।
3. बहुवैकल्पिक प्रश्न के रूप में एवं अपूर्ण कथन।
वैकल्पिक उत्तर प्रकार के प्रश्न इस तरह के प्रश्नों में छात्रों को विकल्प के रूप में दिए गए दो में से किन्हीं एक सही उत्तर का चयन करना होता है।
विभिन्न प्रकार के वैकल्पिक प्रश्न-उत्तर इस प्रकार हैं
सत्य-असत्य और हाँ-नहीं प्रश्न इस प्रकार के प्रश्नों में एक कथन दिया जाता है और छात्रों को यह बताना होता है कि कथन सत्य है या असत्य। सत्य/असत्य वाले प्रश्न सरलता ले बनाए जा सकते हैं और आसानी से निरीक्षित किए जा सकते हैं। ये विद्यार्थियों की समझ को भती-भाँति विश्वसनीय ढंग से मापते हैं। विशेष रूप से कक्षा में ली जाने वाली परीक्षाओं में।
कथन अगर सत्य है तो ‘स‘ लिखें, यदि असत्य हैं तो लिखें ‘अ‘ लिखें
1. जानवर और पौधे दोनों जीवनपूर्ण हैं।
2. सभी/जानवर छोटे जानवरों को खाते हैं।
सही/गलत प्रकार व हाँ/नहीं प्रकार के प्रश्न सही कथन के समक्ष सही का चिहृ लगाए, गलत के सामने गलत का
1. द्रव का निश्चित आकार नहीं होता।
2. बर्फ पानी से हल्की होती है।
मिलान प्रकार Matching Question
मिलान प्रकार के प्रश्न दो सारणी में होते हैं। शब्द व कथन एक सारणी में दिए जाते हैं, जिनका मिलान दूसरे सारणी में दिए गए उत्तरों से करना होता है।
मिलान प्रकार के प्रश्न नीचे दिए गए हैं
एकल मिलान इस प्रकार के प्रश्नों में दो सारणी दी जाती हैं। बाएँ सारणी में प्रश्न पूछे जाते हैं और दूसरे में उत्तर दिया जाता है। छात्रों से पूछे गए प्रश्नों को मिलान करके उत्तर देना होता है। 
मिलान प्रकार के प्रश्न का उदाहरण
निर्देश
सारणी (क) और सारणी (ख) में दिए गए शब्दों का मिलाने करें (सरल)

सारणी (क)        सारणी  (ख)
सुबह    -       तारे
रात     -      24घण्टे
दिन    -      सूर्य का प्रकाश

बहू विकल्पात्मक प्रश्न 

  • सभी वस्तुनिष्ठात्मक प्रकार के प्रश्नों में बहुविध चयनात्मक प्रश्न बहुत उपयोगी प्रयोग होते हैं। इस तरह के प्रश्नों में एक अधूरा कथन दिया जाता है और उसके लिए चार/पाँच वैकल्पिक उत्तर दिए होते हैं। विकल्पों में से छात्रों को सही उत्तर देना होता है। 
  • इसमें हुब-वैकल्पिक प्रश्न दो प्रकार के होते हैं
  • प्रश्न रूप (परीक्षण अनुदेशात्मक वस्तुनिष्ठ व्याख्या)
  • (क) इनमें से कौन-सी बीमारी छूत की बीमारी नहीं है
  • (1) चेचक (2) हृदयघात (3)मलेरिया (4) हैजा
  • (ख) अधूरे कथन के रूप में (वस्तुनिष्ठ अनुदेशनात्मक परीक्षण सम्बन्धों की पहचान कीजिए)
  • हृेल और चमगादड़ दोनों में निम्नलिखित बाते समान होता है
  • (1) बाल (2) पंख (3) अंग (4) गर्दन 
  • उपरोक्त प्रश्नों के इस रूप का प्रयोग विभिन्न परीक्षणों और छात्रों द्वारा सफलता प्राप्त करने  के लिए किया जाता है। यदि परीक्षा में विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का प्रयोग किया जाएँ तो यह निश्चित तौर पर वस्तुनिष्ठ  और सन्तोषजनक होगा। दूसरी तरफ विश्वसनीय और विधिमान्य तरीका भी होगा। 


अच्छे प्रश्न की विशेषताएँ 

  • उद्देश्य पर आधारित प्रश्न पूर्वनिर्धारित उद्देश्य पर आधारित होने चाहिए और इन्हें इस तरीके से तैयार किया जाना चाहिए कि इससे उद्देश्य का प्रभावी परीक्षण हो सकें। 
  • अनुदेश अनुदेश के माध्यम से उसे कार्य विशेष सौंपा जाना चाहिए। इस प्रयोजन के लिए समुचित निर्देशात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए और वाक्य संरचना की स्थिति का उल्लेख किया जाना चाहिए।
  • विषय क्षेत्र इसमें उत्तर की सीमा और क्षेत्र (उत्तर की लम्बाई) का उल्लेख किया जाना चाहिए, जो अनुमानित समय और उसके लिए तय अंकों के अुनसार हो। 
  • विषय-वस्तु प्रश्न उसी विषय क्षेत्र के अन्तर्गत होना चाहिए जिसके सम्बन्ध में परीक्षण किया जाना है। 
  • प्रश्न का रूप उस उद्देश्य और विषय-वस्तु पर निर्भर करता है, जिसकी परीक्षा ली जानी है। कतिपय योग्यताओं की परीक्षा देने के लिए कई तरीके बेहतर होते हैं। 
  • भाषा अच्छा प्रश्न स्पष्ट, संक्षिप्त और दुविधारहित भाषा में तैयार किया जाना चाहिए। इसकी भाषा विद्यार्थी की पहुँच में होनी चाहिए।
  • कहिठनाई का स्तर प्रश्न उस विद्यार्थी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए जिससे यह प्रश्न पूछा जाना है। प्रश्न की कठिनता परीक्षा की क्षमता, परीक्षण के विषय-क्षेत्र और उत्तर देने के लिए उपलब्ध समय निर्भर करती है। 
  • शक्ति का  अन्तर अच्छे प्रश्न में मेधावी विद्यार्थियों और अन्य विद्यार्थियों को भी ध्यान में रखा जाता है। 
  • उत्तर की सीमा का क्षेत्र पुनः निर्धारित करना प्रश्न की भाषा इतनी स्टीक और संक्षिप्त होना चाहिए कि उससे सम्भावित उत्तर की सीमा या परिभाषा स्पष्ट हो सके।
  • मूल्यबिन्दु पूरे प्रश्न के लिए और उसके उप-भागों के लिए मूल्यबिन्दु या अंकों का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
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