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अनुसूचित जाति (Scheduled Cast in MP), पिछड़ा वर्ग (Backward Class),अल्पसंख्यक (Minority)

अनुसूचित जाति (Scheduled Cast in MP), पिछड़ा वर्ग (Backward Class),अल्पसंख्यक (Minority)

  • प्रदेश में घोषित अनुसूचित जातियों की संख्या 47 है। राज्य की अनुसूचित जाति में स्त्री-पुरूष अनुपात 905 प्रति 1000 पुरूष दर्ज किया गया। भारत संविधान के अनुच्छेद 341 क तहत भारत के राष्ट्रपति के द्वारा अनुसूचित जातियों का निर्धारण किया जाता है। इस संवैधानिक प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति के द्वारा तय किया जाता है कि उस राज्य या राज्य संबंध में किन समुदायों को अनुसूचित जातियाँ समझा जाए। राज्य की अनुसूचित जातियों में सर्वाधिक जनसंख्या पारंपरिक तौर पर चमड़े का व्यवसाय करने वालों (अर्थात् हरिजन) का है। 2001 की जनगणना में इस वर्ग की जनसंख्या 4,498,165 है। राज्य की अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या में इस वर्ग की प्रतिशत का आकार 49.1 प्रतिशत है इसके बाद बलाई समुदाय की प्रतिशत आती है, जो अनुसूचित जाति की कुल प्रतिशत का 12.1 प्रतिशत है। इसके बाद कहार, करेली और भंगी समुदाय की प्रतिशत है। इन पाँचों समुदायों की प्रतिशत राज्य की कुल अनुसूचित जाति की प्रतिशत का 77.9 प्रतिशत होती है। अनुसूचित जातियों में 2001 की जनगणना मं साक्षरता दर 58.6 दर्ज की गई। साक्षरता के स्तर को देखा जाए तो राज्य का बालाघाट जिला सबसे ऊपर आता है। यहाँ अनुसूचित जाति में साक्षरता का प्रतिशत 76.9 है। इसके बाद राज्य के मंडला में साक्षरता का प्रतिशत 76.3 है।  

प्रशासनिक व्यवस्था

  • अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए राज्य में आदिम जाति अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग कार्यरत है। 
  • मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग - राज्य में मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम क्रमांश 25 वर्ष 1995 के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया गया है। 

आयोग के कार्य - आयोग के प्रमुख रूप से निम्रलिखित कार्य हैंः 

  • 1. अनुसूचित जाति के सदस्यों को संविधान के अधीन तथा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन दिए गए संरक्षण के लिए हितग्राही आयोंग के रूप में कार्य करना।
  • 2. कल्याण के लिए बने कार्यक्रमों के समुचित तथा यथा समय कार्यान्वयन की निगरानी करना। 
  • 3. ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करना जो राज्य सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएं। 
  • उपलब्धियाँ - आयोग द्वारा नौ वार्षिक प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत किए जा चुके हैं। 

अनूसूचित जाति उप-योजना 
प्रदेश में अनुसूचित जातियों के विकास को गति देने के उद्देश्य से वर्ष 1979-80 के अनुसूचित जाति उपयोजना की अवधारणा अपनाई गई। उपयोजना का मूल उद्देश्य अनुसूचित जाति शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य, आवास, पोषाहार आदि उपलब्ध कराना है। अनूसूचित जातियों के विकास के लिए बजट में पृथकृ से माँग संख्या -64 विशेष घटक योजना माँग संख्या -15 त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता, माँग संख्या 53 नगरीय निकायों  को वित्तीय सहायता निर्मित की गई है। अनु.जा. कल्याण हेतु निम्न योजनायें संचालित हैंः 
अ. राज्य योजनाएँ 

  • 1. आवासीय संस्थाएँ (मैट्रिक-पूर्व, मैट्रिकोत्तर, आश्रमशाला)
  • 2. उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्रों का संचालन (छात्रावास)
  • 3. उच्चतर माध्यमिक शिक्षा मंडल को परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति, 
  • 4. ऐच्छिक संस्थाओं को शैक्षणिक एवं अन्य कल्याणकारी प्रवृत्ति के लिए अनुदान, 
  • 5. अनुसूचित जाति बस्तियों में एकबत्ती कनेक्शन/स्ट्रीट लाइट विघुत लाइन का विकास, 
  • 6. नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 का क्रियान्वयन (अस्पृश्यता निवारणार्थ कार्यक्रम संचालन)

ब. केन्द्र प्रवर्तित मुख्या योजनाएँ 

  • 1. कन्या साक्षरता प्रोत्साहन योजना के योजनांतर्गत कक्षा छह, नौ एवं ग्याहर में प्रवेश लेने पर क्रमशः 500, 1000 एवं 2000 रूपये की राशि छात्राओं को दी जाती है। 
  • 2. छात्रावास एवं आश्रम भवनों का निर्माण।
  • 3. अस्वच्छ धंधों का व्यवसायीकरण।
  • 4. श्रेत्रीय विकास के लिये अनाबद्ध राशि।
  • 5. स्थायी जाति प्रमाण-पत्रों का लेमिनेशन।
  • 6. सैनिक स्कूलों/निजी संस्थाओं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति/जनजाति के विद्यार्थियों के शुल्क की प्रतिपूर्ति।
  • 7. विदेश में उच्च शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता।
  • 8. अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए प्रावीण्य छात्रवृत्ति।
  • 9.  विमुक्त जातियों के छात्र-छात्राओं लिए आश्रम एवं मैट्रिक पूर्व छात्रावासों की स्थापना।
  • 10. अनुसूचित जाति बस्तियों का विकास।  
  • 11. बांछड़ा स्नातकों को अर्थिक सहायता।
  • 12. विधि स्नातकों को आर्थिक सहायता।
  • 13. अनुसूचित जाति राहत योजना नियम, 1979 
  • 14. कन्या विवाह ‘सौभाग्यवती‘ योजना।

पिछड़ा वर्ग (Backward class)

  • मध्य प्रदेश की लगभग आधी से ज्यादा (303.44 लाख) प्रतिशत पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आती है। इस समय राज्य में कोई 91 जातियाँ, उपजातियाँ और समूह पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आते हैं। (कुल प्रतिशत का 50 प्रतिशत) सामान्तः यह जातियाँ सामाजिक, शिक्षा और आर्थिक आधार पर पिछड़ी हुई हैं। महाजन आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर पिछड़ा वर्ग कल्याण संबंधी कार्यक्रमों को संचालित करने के लिये सर्वप्रथम 12 अक्टूबर, 1982 को संचालनालय पिछड़ा वर्ग कल्याण की स्थापना की गई थी। 12 सितंबर, 1915 को राज्य शासन द्वारा पृथक से पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग गठित किया गया। 
कार्यरत संस्थाएँ - पिछड़ा वर्ग हेतु में कार्यरत प्रमुख संस्थाएं हैं- 
  • 1. मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग।
  • 2. मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम।
  • 3. राज्य स्तरीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र 
प्रमुख सुविधाएँ - राज्य में पिछड़ा वर्ग को प्राप्त प्रमुख सुविधाएं हैं- 
  • 1. नौकरियों में आरक्षण (14 प्रतिशत राज्य में)
  • 2. उच्च शिक्षा संस्थाओं में आरक्षण (14 प्रतिशत सीट)
  • 3. मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति (1982 से प्रारंभ)
  • 4. मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति (1988 से प्रारंभ)
  • 5. अन्य योजनाएँ (बंजारा छात्रावास खरगौन)
  • 6. पुरस्कार (रामजी महाजन पुरस्कार में 2 लाख रू. राशि दी जाती है)
अल्पसंख्यक (Minority)
  • वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या में अल्पसंख्यकों का प्रतिशत 8.15 है। राज्य में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग कार्यरत है। इसका गठन 12 दिसंबर, 1995 को पूर्व से कार्यरत पिछड़ा वर्ग संचालनालाय को परिवर्द्धित करते हुए किया गया था।
  • मध्य प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग 
  • मध्य प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1996 के तहत 23 अक्टूबर, 1996 को आयोग का गठन किया है। आयोग का मुख्यालय भोपाल में है। आयोग को दीवानी न्यायालय के अधिकार भी सौंपे गए हैं। 
  • मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड - राज्य की समस्त वक्फ संपत्तियों के अनुरक्षण, नियंत्रण और प्रशासन का कार्य करता है। वक्फ एक्ट, 1995 जनवरी 1996 से लागू हो चुका है। 
  • मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी - अकादमी का मुख्य उद्देश्य उर्दू साहित्य के प्रसार-प्रचार का कार्य करना।
  • मध्य प्रदेश राज्य वक्फ न्यायाधिकरण - न्यायाधिकरण का मुख्यालय भोपाल है।  

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