मध्य प्रदेश के लोग-अनुसूचित जनजातियाँ अनुसूचित जनजाति विशेष पिछड़ी जनजातियाँ {People of Madhya Pradesh}

मध्य प्रदेश के लोग-अनुसूचित जनजातियाँ  अनुसूचित जनजाति  विशेष पिछड़ी जनजातियाँ  {People of Madhya Pradesh}

अनुसूचित जनजातियाँ 
  • अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का सबसे अधिक अनुपात 86.8 प्रतिशत झाबुआ जिले में है। इसके बाद बड़वानी जिला (67.0 प्रतिशत) एवं डिण्डोरी जिले (64.5 प्रतिशत) का स्थान है। भिण्ड जिला अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के आँकड़ों में सबसे अंत में है। जहाँ पर यह अनुपात 0.5 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति का सबसे अधिक अनुपात 24.9 प्रतिशत दतिया जिले में है इसके बाद जाति का सबसे कम अनुपात झाबुआ में केवल 2.8 प्रतिशत है। इसके बाद मण्डला (4.6 प्रतिशत) एवं डिण्डोरी (5.8 प्रतिशत) का स्थान है। स्त्री-पुरूष अनुपात जनगणना 2011 में भिण्ड जिले में सबसे कम स्त्री-पुरूष अनुपात (838) दर्ज किया गया है। इसके बाद मुरैना जिला (839) तथा ग्वालियर जिले (848) का स्थान आता है। 
  • साक्षरता: राज्य की कुल जनसंख्या के संदर्भ में राज्य की साक्षरता दर 70.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि 2001 में मध्य प्रदेश की साक्षरता दर 63.7 प्रतिशत थी। 
  • कार्य सहभागिता दर: राज्य में कार्य सहभागिता दर 42.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जनगणना 2001 में राष्ट्रीय सहभागिता दर 39.1 थी। जनगणना 2001 में डिण्डोरी जिला (57.0 प्रतिशत) सबसे अधिक कार्य सहभागिता दर वाला जिला है सबसे कम कार्य सहभागिता दर वाला जिला भोपाल 32.1 प्रतिशत है। पुरूष कार्य सहभागिता दर जनगणना 2001 में 51.5 प्रतिशत है।

अनुसूचित जनजाति 
  • 1991 से 2001 की जनगणना के बीच राज्य में अनुसूचित जनजाति की  प्रतिशत की दशकीय वृद्धि दर 24.3 आँकी गई। 2001 की जनगणना के अनुसार राज्य में कुल 24 अनुसूचित जनजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई। राज्य की कुल जनजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई। राज्य की कुल जनजातियाँ जनसंख्या में भीलों की उपस्थिति सर्वाधिक 37.7 प्रतिशत है। भीलोंकी जनसंख्या 4,618,068 दर्ज की गई। इसके बाद  
  • गोंडों की जनसंख्या दूसरे क्रम पर आती है। गोंडों की जनसंख्या 4,357,918 है। अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या में उनका प्रतिशत 35.6 है। गोंडों के बाद कोल, कोरकू, सहरिया और बैगा जनजातियों का नंबर आता है। भीलों, गोंडों के साथ कोल, कोरकू, सहरिया और बैगाओं का संकेन्द्रण रीवा होशंगाबाद पूर्व निवाड़, शिवपुरी और शहडोल जिलों के देखा गया। अनूसूचित जनजातियों में प्रति एक हजार पुरूषों के बीच 975 स्त्रियाँ हैं, लेकिन यह अनुपात अनुसूचित जनजातियों के राष्ट्रीय अनुपात 978 से कम है। अनुसूचित जनजातियों में सर्वाधिक स्त्री-पुरूष अनुपात राज्य के बालाघाट जिले में है, जहाँ प्रति एक हजार पुरूषों पर 1050 महिलाएं हैं। मण्डला जिले का अनुपात 1028 सिवनी जिले 1016 है। राज्य में अनुसूचित जनजातियों के बीच 41.2 प्रतिशत साक्षरता दर्ज की गई, 2001 में राष्ट्रीय स्तर पर अजजा के बीच 47.1 प्रतिशत साक्षरता पाई गई। अनुसूचित जनजाति में सर्वाधिक साक्षरता की दर 64.4 प्रतिशत नरसिंहपुर जिले में दर्ज की गई। इसके बाद राज्य के शाजापुर जिले में इस वर्ग में 60.3 और भोपाल जिले में 59.0 प्रतिशत जबकि न्यूनतम 21.1 प्रतिशत श्योपुर जिले में दर्ज की गई। 

मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यतः तीन क्षेत्रों विभक्त किया जा सकता है। ये क्षेत्र हैं मध्य क्षेत्र, चंबल क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र। 
  • 1. मध्य क्षेत्र - गोंड, बैगा, कोल, कोरकू, परधान और भारिया।
  • 2. पश्चिम क्षेत्र - झाबुआ, धार खरगौन, बड़वानी व रतलाम जिलों में भील, भिलाला, बारेला आदि।
  • 3. चंबल क्षेत्र - ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, गुना, श्योपुर और शिवपुरी को समेटने वाले इस क्षेत्र में विशेष पिछड़ी जनजाति सहरिया जनजाति का निवास है। 

विशेष पिछड़ी जनजातियाँ 

प्रदेश में तीन पिछड़ी जनजातियाँ, सहरिया, बैगा और भारिया निवास करती हैं। कुल जनसंख्या 5.51 लाख है। यह कुल जनजातीय जनसंख्या का 4.51 प्रतिशत है।

सहरिया
  • आजीविका के लिए वपोपज संग्रह, जड़ी-बूटियों की खेती और मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। सहरिया खुद अपने आप को खुटिया पटेल कहते हैं। सहरिया शब्द की उत्पत्ति फारसी के सहा शहर से हुई है, जिसका मतलब वन होता है। सहरियों की बसाहट को सहराना कहते हैं। इनके विकास के लिए विकास अभिकरण गठित किए गए हैं। इनके मुख्यालय श्योपुरकलां, शिवपुरी, गुना और ग्वालियर में हैं। 

बैगा
  • सतपुड़ा और मैकाल पर्वत श्रृखंला के बीच बैगा जनसंख्या की भरपूर बसाहट है। मंडला जिले बैगाओं के अस्सी से ज्यादा गाँव हैं, इन्हें बैगा चक कहा जाता है। सामाजिक मामलों में निपटारे के लिए बैगाओं की अपनी परंपरा होती है- 1. मुकद्दम, 2. दीवान, 3. समरथ, 4. कोटवार, 5. दबार। बैगा जनजाति के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा छह बैगा विकास अभिकरण मण्डला, शहडोल, बालाघाट, उमरिया, डिण्डोरी और अनूपपुर जिले में गठित किए गए हैं। 

भारिया
  •  मुख्यतः राज्य के छिंदवाड़ा जिलों में निवास करते हैं। छिंदवाड़ा जिले में तामिया विकास खण्ड के पाताकोट इलाके में इनकी जनसंख्या का पर्याप्त संकेन्द्रण है। भारियाओं के विवाह की चार पद्धतियाँ हैं। यह हैं - 1. मंगनी, 2. लमसेना, 3. राजीबाजी, 4. विधवा विवाह। राज्य शासन द्वारा भारिया जनजाति के विकास के लिए भारिया विकास अभिकरण का गठन किया गया है। इसका मुख्यालय छिंदवाड़ा जिले का तामिया है।  

भील
  •  अपने घरों की दीवारों पर कलात्मक चित्र बनाते हैं। उनकी इस चित्रकला को पिथौरा कहते हैं। 

कोरकू
  • कोरकू चार समूहों में पाए जाते हैं यह हैं- रूमा, पोतडि़या, दुलाप और बोवई। कोरकूओं में विवाह की चार पद्धतियाँ प्रचलित हैं- लमसेना या घर दामाद, 2. चिथोड़ा, 3. राजीबाजी , 4. विधवा या तलाक विवाह ।

कोल
  •  कोलों का पूर्व निवास स्वतंत्रता पूर्व तत्कालीन रीवा राज्य का कुराली इलाका माना जाता है। उनका कोल दहरा नृत्य लोकप्रिय है। 

जनजातीय प्रशासनिक व्यवस्था 
  • अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं और सामाजिक उत्थान की चुनौतीपूर्ण आवश्यकताओं के परिप्रेक्ष्य में आदिवासी विकास विभाग 1962 से कार्य कर रहा हैं आदिवासियों के विकास के महत्व को दृष्टिगत रखते हुए मंत्रिमण्डल में कैबिनेट स्तर आदिम जाति कल्याण विभाग के लिए पृथक मंत्री नियुक्त किया जाता है जो अनुसूचित जनजाति वर्ग के होते हैं। 

विभाग के दायित्व 
  • 1. संविधान की पाँचवी अनुसूची के तहत अनुसूचित जनजातियों के प्राप्त अधिकारों और आदिवासी क्षेत्र के हितों के संरक्षण व सवंर्द्धन के लिए प्रहरी (वाचडॉग) के रूप में कार्य करना।
  • 2. आदिवासी उपयोजना तथा विशेष घटक योजना के क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विकास विभागों को बजट आवंटन उपलब्ध कराने हेतु नोडल एजेन्सी के रूप में कार्य करना।
  • 3. आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति के संबंधित अनुसांधन, सर्वेंक्षण मूल्यांकन तथा अध्ययन।
  • 4. विशेष केन्द्रीय सहायता राशि से संचालित योजनाओं का नियोजन एवं अनुश्रवण आदि।

मध्य प्रदेश आदिम जाति मंत्रणा परिषद् 
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत प्रदेश में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण तथा राज्य सरकार को इन वर्गों के हितों के लिए आवश्यक सुझाव देने हेतु मध्य प्रदेश आदि जाति मंत्रणा परिषद् गठित है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री तथा उपाध्यक्ष आदि जाति कल्याण मंत्री होते है।
  • परियोजना  प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजनाएँ
  • मध्य प्रदेश में आदिवासी उप-योजना क्षेत्र अंतर्गत, योजनाओं के निर्माण, बजट प्रबंधक, पर्यवेक्षण, अनुश्रवण तथा संबंधित विभिन्न विकास विभागों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित करने के लिए 26 वृहद् परियोजनाएँ, 30 माडा पॉकेट्स एवं 6 लघु अंचल अस्तित्व में हैं, जिनमें परियोजना प्रशासन अधिकारी पदस्थ हैं। 

विशेष पिछड़ी जनजाति समूह अभिकरण 
  •  भारत सरकार द्वारा मान्य तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया एवं सहरिया मध्य प्रदेश में निवास करती हैं। इन जनजातियों के विकास हेतु योजनाएँ बनाने व क्रियान्वयन हेतु 11 अभिकरण कार्यरत हैं। 

मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद् (मेपसेट) स्थापना एवं उद्देश्य 
  • स्थापना वर्ष 1981 में आदिम जाति वर्ग के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए विभिन्न तकनीकी एवं व्यवसायिक क्षेत्रों में कुशलता के विकास हेतु की गई थी इस संस्था द्वारा मुख्यतः इलेक्ट्रॉनिक, कम्प्यूटर एवं सूचना-प्राद्योगिकी से संबंधित से स्वरोजगारोन्मुख तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन किए जाते हैं।

उद्यमी विकास संस्थान 
  • संस्थान की स्थापना वर्ष 1980 में मध्य प्रदेश शासन आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उपक्रम के रूप में हुई। 
  • मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन- वर्ष 1995-96 में मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग में अध्यक्ष के अलावा दो अशासकीय सदस्य होते हैं। 
आयोग को निम्नानुसार कृत्य सौंपे गये हैं: 
  • 1. अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को संविधान के अधीन तथा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन दिए संरक्षण के लिए आयोग हितग्रहरी के रूप में कार्य करे। 
  • 2. ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करें जो राज्य सरकार द्वारा सौंपे जाएं।
  • 3. किसी दस्तावेज को प्रकट करने और पेश करने की अपेक्षा करना।
  • 4. साक्षी और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए समन निकालना।
आदिवासी उप-योजना 
  • अनुसूचित जनजातियों के सर्वांगीण विकास हेतु पाँचवीं पंचवर्षीय योजनाकाल से आदिवासी उप-योजना की रणनीति अपनाई गई, जनजातियों के विकास हेतु विभिन्न विकास विभागों के माध्यम से आर्थिक विकास, मानव संसाधन विकास, क्षेत्र विकास एवं अन्य विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं । प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र 308245 वर्ग किमी. (30.19 प्रतिशत ) 0.93 लाख वर्ग किमी. आदिवासी उप-योजना क्षेत्र के रूप में चिन्हांकित है। आदिवासी उप-योजना क्षेत्रांतर्गत 31 एकीकृत आदिवासी विकास परियोजनाएँ (26 वृहद, 5 मध्यम) 30 माडा पाकेट तथा 06 लघु अचंल हैं। प्रत्येक एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के लिए परियोजना सलाहकार संगठन मंडल गठित है।

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