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पुराना मध्यप्रदेश {Old MP}

  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद किए गए राज्यों के वर्गाीकरण में सी.सी.एण्ड बरार में महाकौशल व छत्तीगढ़ की रियासतें मिलाकर मध्य प्रदेश राज्य का गठन किया गया। इसकी राजधानी नागपुर रखी गई। 1950 में इसका नामकरण मध्य प्रदेश कर इसे भाग ए-राज्यों में शामिल किया गया । नर्मदा, ताप्ती, वर्धा, वेनगंगा यहाँ की प्रमुख नदियाँ थीं। 
  • प्रथम पंचवर्षीय योजना के कार्यान्वित होने के पूर्व यहाँ 35 बड़े व 87 छोटे सिंचाई कार्य चालू किये थे, बालाघाट जिले की मुरम तालाब योजना और छिंदवाड़ा जिले की चीचबंद तालाब योजनाओं का कार्य सन् 1951 के पहले ही समाप्त हो चुका था। संपूर्ण देश में लाख व चमड़ा उत्पादन की दृष्टि से मध्य प्रदेश का आंशिक रूप से एकाधिकार था। लाख मुख्यतः घोंट, पलाश और मुसुम जंगली  वृक्षों से, जो क्रमशः दमोह, गोंदिया और धमतरी में अधिकांशतः पाए जाते थे, काफी मात्रा में एकत्रित की जाती थी। गोंदिया, धमतरी और रायगढ़ के लाख व चमड़े के कारखानों में उससे चमड़ा तैयार किया जाता था। राज्य में लोहा प्राप्ति के मुख्य क्षेत्र जबलपुर और होशंगाबाद (नरसिंहपुर ) जिलों में स्थित थे। मैंग्रीज उत्पादन की दृष्टि से यह राज्य न केवल भारतवर्ष में ही वरन् समस्त विश्व में प्रख्यात था। बाक्साइट के संचय मुख्य जबलपुर जिले की कटनी तहसील में, बालाघाट जिले की बैहर तहसील में पाए जाते थे। चूने का पत्थर निकालने का काम मुख्यतः जबलपुर होता था। टेल्क, जबलपुर, फायर-क्ले जबलपुर जिला व फेल्सपार मुख्यतः छिंदवाड़ा जिले में पाया जाता था। सूती कपड़े का उद्योग पुराने मध्य प्रदेश का सबसे प्रमुख उद्योग माना जाता था। यहाँ इस उद्योग के पनपने का सबसे बड़ा कारण राज्य के विस्तृत कपास क्षेत्र थे। सम्पूर्ण बराड़, बिमाड़ जिला वर्धा जिला, नागपुर जिला, भण्डरा जिले का पूर्वाीय क्षेत्र तथा चांदा जिले का उत्तरी क्षेत्र कपास उत्पादन के लिये प्रसिद्ध था। मध्य प्रदेश के इतिहास में सूती कपड़े की मिलों का स्वर्णिम अध्याय खोलने का श्रेय सर जमशेद जी टाटा को था।  

सीमेंट उद्योग: मध्य प्रदेश का दूसरा प्रमुख उद्योग सीमेंट उद्योग था। 1914 मेें मध्य प्रदेश में कटनी सीमेंट एण्ड इंडस्ट्रियल कंपनी की स्थापना हुई। नेपा मिल्स (निमाड़ जिला) का उत्पादन कार्य भी जनवरी 1955 से प्रारंभ हो गया था। कागज उत्पादन करने वाली यह भारत की एकमात्र एवं प्रथम मिल थी।
सहकारिता - भारतवर्ष में अन्य भागों में जब सहकारिता लोगों के लिए एक पहेली थी, तब मध्य प्रदेश में सहकारी समिति की स्थापना हो चुकी थी। देश में सहकारिता आंदोलन के प्रारंभ होने (25 मार्च, 1904) से दो वर्ष पूर्व ही होशंगाबाद जिले की पिपरिया नामक स्थान पर प्रथम सहकारी समिति की स्थापना हो चुकी थी।
देश की तत्कालीन परिस्थितियों को दृष्टि में रखते हुए मई 1952 को राज्य सरकारों के परामर्श से सामुदायिक विकास योजना स्वीकृत की गई थी।
  • 2 अक्टूबर, 1952 को देश भर में 55 विकास योजनाएँ प्रारंभ की गईं थीं। राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ की गई इस योजना का उद्घाटन 1952 में मध्य प्रदेश में भी, महात्मा गाँधी की जन्मतिथि 2 अक्टूबर से अमरावती, बस्तर, होशंगाबाद व रायपुर में विकास केन्द्रों की स्थापना से हुआ। तत्पश्चात् वर्ष 1953 में 4 और विकास केन्द्र बालाघाट, बुलढाना, जबलपुर और मंडला जिलों में स्थापित किये गये।
  • राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश के आधार पर 1956 में गठित किये गए मध्य प्रदेश राज्य में पुराने मध्य प्रदेश का अधिकांश भाग भी शामिल किया गया था। 
  • देश में भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की माँग स्वतंत्रता से पहले ही शुरू हो चुकी थी। भारत के प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस द्वारा भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का विरोध किया एवं प्रशासनिक सुविधा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की संस्तुति की थी। आयोग की सिफारिशों का तीव्र विरोध हुआ, लेकिन कांग्रेस के जयपुर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू, लल्लभ भाई पटेल एवं पट्टाभिसीतारमैया की की समिति ने दर आयोग के पक्ष में निर्णय दिया, समिति की रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समर्थकों ने आंदोलन तेज कर दिया। माँग के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे तेलुगू पोट्टी श्री रामुल्लू की 52 दिन बाद 15 दिसंबर, 1852 को मौत हो गई। 19 दिसंबर, 1952 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तेलुगू भाषियों के लिए पृथक् आंध्र प्रदेश राज्य के गठन की घोषणा कर दी और 1 अक्टूबर, 1953 को गठित आंध्र प्रदेश भाषा के आधार पर गठित होने वाला देश का पहला राज्य बन गया।
  • अंततः केन्द्र सरकार ने 22 दिसंबर, 1953 को तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग को गठन किया। आयोग के अध्यक्ष न्यामूर्ति फजल अली तथा सदस्य के. एस. पाणिक्कर व हृदयनाथ कुंजरू थे आयोग ने 30 दिसंबर, 1955 को अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी। आयोग की सिफारिशों के आधार पर पार्ट ए.,बी., डी. के वर्गीकरण को समाप्त कर भारतीय संघ को 16 राज्यों व 3 संघ राज्य क्षेत्रों में बाँटा गया। इसमें से एक राज्य मध्य प्रदेश था। इस प्रकार 1 नवंबर, 1956 को नए  आकार में मध्य प्रदेश का पुनः सृजन हुआ। नए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल रखी गई। उसकी भौगोलिक स्थिति 18° से 26°30‘ उत्तरी अक्षांश तथा उत्तरी अक्षांश तथा 74° से 84°30‘ पूर्वी देशांतर थी। इसका क्षेत्रफल 4,43,446 वर्ग किलोमीटर था, जो देश के क्षेत्रफल का सबसे बड़ा राज्य बना। 1956 में मध्य प्रदेश में 43 जिले थे। 1972 में भोपाल और राजनांदगाँव को जिला बनाया गया, इससे जिलों की संख्या 45 हो गई। सिंहदेव व दुबे आयोग की अनुशंसा पर 16 नए जिलों का गठन हुआ, लेकिन 1 नवंबर, 2000 को छत्तीसगढ़ पृथक् राज्य बना और 16 जिले छत्तीसगढ़ का भाग बने। 


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