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पर्यटन एवं साहित्यक संस्कृति मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन

  • प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने की दिशा में किये जा रहे सुनियोजित प्रयासों के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था में यह एक बड़ा भागीदार बनने जा रहा है। पर्यटन सुविधाओं में न केवल वृद्धि की गई, बल्कि व्यावसायिक और तकनीकी दृष्टिकोण के जरिये वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासन लागू करके प्रभावी परिमाण प्राप्त किये जा रहे हैं। केरल, गोवा और राजस्थान पर्यटन के मामले में देश के सबसे अग्रणी प्रदेश हैं, लेकिन इनमें मध्य प्रदेश जैसी विविधता और बहुरंगता नहीं है। इसके बावजूद इन प्रदेशों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन बना हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस विडंबना को दूर कर प्रदेश को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता से रखने के लिए प्रतिबद्ध प्रयास किये हैं। प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को पर्यटन और सत्कार उद्योग में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के ठोस प्रयास किये गये हैं। हैरीटेज होटलों का संचालन निजी क्षेत्र द्वारा किये जाने को बढ़ावा दिया जाना शामिल है। 
  • मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ पर्यटन के विविध रंग बिखरे हैं, जबकि उक्त तीनों राज्यों का पर्यटन एकांगी है। यहाँ हिन्दू, बुद्ध, जैन और इस्लाम धर्मों के अद्वितीय स्मारक तो हैं ही इसे खजुराहो, साँची और भीमबेटका जैसी तीन-तीन विश्व धरोहर होने का गौरव भी प्राप्त है। ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से माण्डू, ग्वालियर, ओरछा, शिवपुरी आदि बेमिसाल हैं। प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से पचमढ़ी, अमरकंटक, और भेड़ाघाट का जवाब ढूँढ़ना मुश्किल है। इसी तरह धार्मिक महत्व के स्थानों की यहाँ कमी नहीं है उज्जैन और ओंकारेश्वर में देश के बारह में से दो ज्योतिर्लिग प्रतिष्ठित हैं। अन्य धार्मिक स्थालों में अमरकंटक, महेश्वर, चित्रकूट और भोजपुर बेजोड़ हैं। कान्हा, बाँधवगढ़, शिवपुरी, पेंच तथा अन्य पाँच राष्ट्रीय उद्यान ऐसे हैं, जहाँ से सौलानी कभी न भूलने वाले अनुभव लेकर लौटते हैं। पचमढ़ी, भोपाल, ओरछा और अमरकंटक में पास्थितिकी (ईको) पर्यटन की असीम संभावनाएँ हैं। 
  • राज्य शासन ने ओरछा, चित्रकूट, मैहर, उज्जैन, ओंकोश्वर और अमरकंटक को पवित्र नगर घोषित किया है। उज्जैन में प्रत्येक 12 वर्ष में लगने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला भी पर्यटकों का विशेष आकर्षण है। ईको पर्यटन विकास बोर्ड गठित करने वाला मध्य प्रदेश देश का इकलौता राज्य है। बोर्ड की पहल पर वन विभाग द्वारा प्रदेश के वनों में ईको पर्यटन की शुरूआत की गई है। घने जंगलों के बीच देलावाड़ी (सीहोर) जंगल एक अद्वितीय कैम्प एवं एक बेजोड़ ईको पर्यटन गंतव्य स्थल के रूप में विकसित किया गया है। अपनी बेजोड़ ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर वन-संपदा और प्राकृतिक सुन्दरता के कारण मध्य प्रदेश अब देश के पर्यटन नक्शे पर तेजी से उभर रहा है।

म.प्र. में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या 
  • देशी पर्यटन - 7250952 - 1,10,40,190 - 1,38,94,500 1,62,49,027 - 
  • विदेशी पर्यटन - 1,63,423 - 1,89,637 - 2,34,204 - 2,49,518 -
  • कुल संख्या - 74,14,375 - 1,12,29,827 - 1,41,28,704 - 1,64,98,545 2.65 करोड़

प्रमुख दुर्ग व किले 
नाम/स्थल - ग्वालियर, दुर्ग 
निर्माणकर्ता - राजा सूरजसेन 
वर्ष/निर्माण काल - 525 ई.
उल्लेखनीय तथ्य - 5 द्वारः आलमगीर दरवाजा, हिन्डोला दरवाजा, गूजरी महल दरवाजा, चतुर्भुज मंदिर दरवाजा और हाथी फौड़ दरवाजा। इसे किलों का रत्नन या जिब्राल्टर ऑफ इण्डिया कहा जाता है। 

नाम/स्थल - धार का किला 
निर्माणकर्ता - सुल्तान मो.तुगलक पुर्निर्माण 
वर्ष/निर्माण काल - 1344 ई. 
उल्लेखनीय तथ्य - किले में खरबूजा महल है। अब्दुल शाह चंगश का मकबरा है।

नाम/स्थल - असीरगढ़ का किला 
निर्माणकर्ता - आसा (अहीर राजा) 
वर्ष/निर्माण काल - 10वीं शताब्दी (संभवतः)
उल्लेखनीय तथ्य - आशा देवी की प्रतिमा व मंदिर स्थित है 11वीं शताब्दी में निर्मित एक प्राचीन शिव मंदिर भी है। 

नाम/स्थल - चंदेरी का किला 
निर्माणकर्ता - प्रतिहार नरेश कीर्तिपाल 
वर्ष/निमार्ण काल - 11वीं शताब्दी 
उल्लेखनीय तथ्य - किले में जौहर कुण्ड, हवा महल, नौखण्डा, तथा खूनी दरवाजा  स्थित है। 

नाम/स्थल - गिन्नौरगढ़ दुर्ग 
निमार्णकर्ता - महाराजा उदयवर्मन
वर्ष/निर्माण काल - 13वीं शताब्दी 
उल्लेखनीय तथ्य - किले के निकटवर्ती क्षेत्र में तोते बहुत पाए जाते है।

नाम/स्थल - (रायसेन दुर्ग से 60 किमी. दूर)
निर्माणकर्ता - राजा राजबंसती 
वर्ष/निमार्ण काल - 16वीं शताब्दी 
उल्लेखनीय तथ्य - दुर्ग में बादल महल, राजा रोहित महल और इत्रदार महल स्थित हैं। यहाँ किले के अंदर एक दरशाह स्थित है। 

नाम/स्थल - बांधवगढ़ का किला (उमरिया स्टेशन से 30 किमी. ) 
निर्माणकर्ता - बघेलखण्ड के राजाओं द्वारा (व्याघ्रदेव)
वर्ष/निमार्ण काल - 14वीं शताब्दी 
उल्लेखनीय तथ्य - सोलहवीं- सत्रहवीं शताब्दी में बघेलखण्ड के राजा विक्रमादित्य ने अपनी राजधानी बांधवगढ़ से रीवा स्थानांतरित की। यहाँ पर शेषशाही तालाब है तथा विष्णु जी का मंदिर है। 

नाम/स्थल - अजयगढ़ का किला, (पन्ना नगर से 34 किमी. दूर उत्तर में)
निमार्णकर्ता - राजा अजयपाल 
वर्ष/निर्माण काल - 18वीं शताब्दी (पुनर्निर्माण)
उल्लेखनीय तथ्य - इसी किले में राजा अमन का महल है। यहाँ पर पत्थर पर नक्काशी की गई है। 

नाम/स्थल - ओरछा दुर्ग 
निमार्णकर्ता - राजा वीर सिंह बंुदेला 
वर्ष/निर्माण काल - 16वीं शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य - चतुर्भुज मंदिर, राम मंदिर तथा लक्ष्मी नारायण मंदिर इसी किले में है। जहाँगीर महल भी इसी किले में है।

नाम/स्थल - मण्डला का दुर्ग
निर्माणकर्ता - राजा नरेन्द्र शाह (गोंड नरेश)
वर्ष/निमार्ण काल - 16वीं शताब्दी 
उल्लेखनीय तथ्य - मण्डला के किले में राज राजेश्वरी की स्थापना निजाम शाह ने कराई थी।

नाम/स्थल - मंदसौर का किला/मंदसौर 
निर्माणकर्ता - अलाउद्दीन खिलजी  
वर्ष/निर्माण काल - 14वीं शताब्दी 
उल्लेखनीय तथ्य - यहाँ 500 वर्ष पुराना तापेश्वर महादेव का मंदिर है। 

नाम/स्थल - नरवर का किला 
निर्माणकर्ता - राजा नल 
वर्ष/निर्माण काल - शिवपुरी
उल्लेेखनीय तथ्य - इस किले का कछवाहों, तोमरों और जयपुर के राज-घरानों से संबंध रहा है। 

 प्रमुख महल 

महल का नाम - गूजरी महल 
स्थान - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - ग्वालियर दुर्ग स्थित गूजरी महल का निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने अपनी प्रेयसी मृगनयनी के लिए कराया था। 

महल का नाम - मोती महल 
स्थान - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - जीवाजी राव का संुदर महल। यहाँ म.प्र. का ए.जी. ऑफिस था। 

महल का नाम - जय विलास महल 
स्थान - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - जीवाजी राव सिंन्धिया का निवास। यहाँ का संग्रहालय प्रसिद्ध है। यह पाश्चत्य नमूने का बना है। 

महल का नाम - बघेलिन महल 
स्थान - मण्डला 
विशिष्ट तथ्य - मोती महल के पूर्व में 3 किमी. दूर नर्मदा के किनारे निर्मित।

महल का नाम - मदन महल 
स्थान - जबलपुर 
विशिष्ट तथ्य - मदन शाह (गौंड राजा) ने 1200 ई. में निर्मित कराया।

महल का नाम - खरबूजा महल 
स्थान - धार 
विशिष्ट तथ्य - धार के किले में निर्मित इस महल के ऊपर से संपूर्ण नगर दिखाई देता है। 

महल का नाम - राजा रोहित का महल 
स्थान - रायसेन 
विशिष्ट तथ्य - रायसेन दुर्ग में स्थित, राजा राजबसंती द्वारा निर्मित। 

महल का नाम - बादल महल 
स्थान - रायसेन 
विशिष्ट तथ्य - राजबसंती द्वारा निर्मित रायसेन दुर्ग में।

महल का नाम - इत्रदार महल 
स्थान - रायसेन 
विशिष्ट तथ्य - रायसेन दुर्ग में स्थित। 

महल का नाम - हवा महल 
स्थान - मुंगावली स्टेशन से 38 किमी. दूर 
विशिष्ट तथ्य -चंदेरी के किले में स्थिति जिसे प्रतिहार राजा कीर्तिपाल ने 11वीं शताब्दी में बनवाया था। 

महल का नाम - नौखण्डा महल 
स्थान - मुंगावली स्टेशन से 38 किमी. दूर 
विशिष्ट तथ्य - प्रतिहार राजा कीर्तिपाल द्वारा 11वीं शताब्दी में निर्मित।

महल का नाम - राजा अमन महल
स्थान - अजयगढ़ (पन्ना)
विशिष्ट तथ्य - राजा अजयपाल द्वारा निर्मित पत्थर में बारीक सजीव पच्चीकारी।

महल का नाम - जहाँगीर महल 
स्थान - ओरछा 
विशिष्ट तथ्य - जहाँगीर ने ओरछा के दुर्ग में इसका निर्माण करवाया था।

महल का नाम - अशरफी महल 
स्थान - माण्डू 
विशिष्ट तथ्य - यह महल कटोरी की भाँति बना है तथा अफगानों की कला का भव्य नमूना है।

महल का नाम - दाई का महल 
स्थान - माण्डू
विशिष्ट तथ्य - महत्वपूर्ण कलाकृतियों हेतु चर्चित है। 

महल का नाम - रानी रूपमती का महल 
स्थान - माण्डू 
विशिष्ट तथ्य - बाज बहादुर की प्रेयसी रानी रूपमती इस महल से पवित्र नर्मदा के दर्शन करती थी। 

महल का नाम - राम राजा मंदिर 
स्थान - ओरछा 
विशिष्ट तथ्य - राजा वीर सिंह जुदेव के द्वारा निर्मित। 

महल का नाम  - मोती महल 
स्थान - मण्डला 
विशिष्ट तथ्य - बघेलिन महल के पश्चिम में तीन किमी. दूर स्थित है।

दर्शनीय एवं प्राकृतिक स्थल 

स्थल - बेसनगर 
अवस्थिति - विदिशा 
विशिष्ट तथ्य - हेलियोडोरस स्तंभ में गरूड़ ध्यज।

स्थल - उदयपुर 
अविस्थिति - गंजबासौदा 
विशिष्ट तथ्य - नीलकंठेश्वर मंदिर (परमारवंश)।

स्थल - ग्यारसपुर 
अवस्थिति - विदिशा 
विशिष्ट - मालादेवी मंदिर व त्रिपुर सुन्दरी प्रतिमा।

स्थल - बीजा मंडल 
अवस्थिति - विदिशा 
विशिष्ट तथ्य - मुगलकाल में ध्वस्त किया गया।

स्थल - अमरकंटक 
अवस्थिति - पुष्यराजगढ़ तहसील (अनूपपुर)
विशिष्ट तथ्य - लगभग 1057  मीटर ऊँचाई पर स्थित कपिल धारा एवं दुग्ध धारा प्रपात, नर्मदा कुण्ड, माई की बगिया, कबीर चौरा, नव ग्रह मंदिर, जैन मंदिर,आदिनाथ मंदिर, सोन मुढ़ा तथा साई का मंदिर यहीं स्थित है। 2005 में पवित्र नगर घोषित (बॉक्साइड प्राप्ति)। 

स्थल - चित्रकूट (मंदाकिनी तट) 
अवस्थिति - सतना 
विशिष्ट तथ्य - ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने यहीं पर बाल अवतार लिए थे वनवास के समय मर्यादा पुरूषोत्तम राम यहीं पर महर्षि अत्रि व सती अनुसूईया के अतिथि बने। कामदगिरी अनुसुईया आश्रम, भरत कूट तथा हनुमान धारा यहीं स्थित है। 2005 में पवित्र नगर घोषित किया गया (गुप्त गोदावरी नदी है)। यहाँ गधों का मेला लगता है।

स्थल - मैहर 
अवस्थिति - सतना 
विशिष्ट तथ्य - संगीतकार अलाउद्दीन खां की कर्मभूमि तथा शारदा माँ का मंदिर। 2005 में पवित्र नगर घोषित।

स्थल - साँची 
अवस्थिति - रायसेन 
विशिष्ट तथ्य - बौद्ध तीर्थ स्थल। यहाँ तीन स्तूप हैं। बड़ा स्तूप 36.5 मीटर व्यास का है तथा ऊँचाई 16.4 मीटर है। स्तूप को रेलिंग शुंगों ने बनाई।

स्थल - मुक्तागिरि 
अवस्थिति - बैतूल 
विशिष्ट तथ्य - दिगम्बर जैनियो का पवित्र तीर्थ स्थल। यहाँ 52 मंटिर हैं। 

स्थल - उज्जैन 
अवस्थिति - क्षिप्रा नदी के तट पर बसा है
विशिष्ट तथ्य - महाकालेश्वर मंदिर, जंतर-मंतर चिंतामणि गोपाल जी का मंदिर, संदीपनी आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, भृर्तहरिगुफा। यहाँ पर 12 वर्षो बाद कुंभ मेला लगता है। 2005 में पवित्र नगर घोषित। वेश्या टेकरी स्तूप है, जन्तर मंतर, ज्योतिर्लिंग।

 स्थल - ओंकारेश्वर 
अवस्थिति - खण्डवा (नर्मदा के तट पर)
विशिष्ट तथ्य - मध्यकालीन ब्राह्मण शैली में बना ओंकार मांधाता का मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, 24 अवतार सनमात्रिक मंदिर, गौरी सोमनाथ मंदिर और शंकराचार्य की गुफाएँ हैं। 2005 में पवित्र नगर घोषित। 520 मेगावाट जल विद्युत, केन्द्र, ज्योतिर्लिंग।

स्थल - बावनगजा 
अवस्थिति - बड़वानी से 10 किमी दूर 
विशिष्ट तथ्य - जैन स्थल 15वीं शताब्दी की 72 फीट ऊँची ऋषभदेव मूर्ति।

स्थल - खजुराहो 
अवस्थिति - छतरपुर 
विशिष्ट तथ्य - कंदरिया महादेव मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, आदिनाथ मंदिर, नदी मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, आदि प्रमुख मंदिर हैं। चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए मंदिरो की श्रृखला है। 950-1050 ई. के मध्य निर्मित मंदिर (हवाई सेवा उपलब्ध) (यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है)

स्थल - बांदकपुर 
अवस्थिति - दमोह 
विशिष्ट तथ्य - हिन्दू तीर्थ स्थल।

स्थल - कुंडलपुर 
अवस्थिति - दमोह 
विशिष्ट तथ्य - जैन तीर्थ स्थल।

स्थल - नोहटा (दमोह) 
अवस्थिति - बीना-कटनी रेलमार्ग पर 
विशिष्ट तथ्य - 12वीं शताब्दी में चंदेलों की राजधानी, गुरइया और बेरमा नदियों में संगम पर बसा यह नगर प्राचीन शिवमंदिर और जैन मंदिर के अवशेषों हेतु विख्यात है। 

स्थल - पचमढ़ी (खोजकर्ता फोरसिथ)
अवस्थिति - होशंगाबाद 
विशिष्ट तथ्य - अप्सरा विहार, जटाशंकर, पाण्डव की गुफाएँ, धूपगढ़ चौरागढ़ एवं महादेव पर्वत हैं। सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ 1350 मीटर है। 

 स्थल - बाँधवगढ़
अवस्थिति - उमरिया (शेषशाही मूर्ति) 
विशिष्ट तथ्य - किला व राष्ट्रीय उद्यान 

स्थल - चंदेरी किला 
अवस्थिति - अशोकनगर 
विशिष्ट तथ्य - खूनी दरवाजा, चारों ओर बावडि़याँ व सरोवर, धोवन मठ।

स्थल - पशुपति नाथ मंदिर 
अवस्थिति - मंदसौर सूर्य मंदिर  मंदसौर में है। 
विशिष्ट तथ्य - 1982 में मंदिर का निर्माण।

स्थल -सोनागिरि 
अवस्थिति - दतिया 
विशिष्ट तथ्य - दिगम्बर जैन धर्म से संबंधित 108 मंदिर हैं।

स्थल - गोम्मतगिरि 
अवस्थिति - इंदौर 
विशिष्ट तथ्य  - भगवान बाहुबली की 27 फीट ऊँची खड़गासन प्रतिमा है। 

स्थल - पीताम्बरापीठ 
अवस्थिति - दतिया 
विशिष्ट तथ्य - शक्तिपीठ है।

स्थल - माँडू
अवस्थिति - धार (सिटी ऑफ ज्वाय) 
विशिष्ट तथ्य - जहाज महल, हिंडौला महल, रानी रूपमती का महल, बाजबहादुर महल, अशरफी महल है।

स्थल - भेड़ाघाट प्रपात (18 मीटर)
अवस्थिति - जबलपुर 
विशिष्ट तथ्य - नर्मदा एवं बावन नदी के संगम पर  स्थित यह प्रपात। 
दोनों ओर संगमरमर की चटट्ानों से घिरा हुआ है। भृगु ऋषि ने यहीं तपस्या की थी। बंदरकूदनी और चौसठ यौगनियों के मंदिर है। 

स्थल - चचाई का जलप्रपात 
अवस्थिति - रीवा 
विशिष्ट तथ्य  - 130 मीटर ऊँचा मध्य प्रदेश का सबसे ऊँचा जलप्रपात है। 

स्थल - महेश्वर (महिष्मति) 
अवस्थिति - खरगौन 
विशिष्ट तथ्य - अवंतिका की राजधानी थी। यहाँ पर सहस्त्र धारा प्रपात है, अहिल्याबाई होल्कर ने इसे अपनी राजधानी बनाया। 

स्थल - पावागिरी (ऊन)
अवस्थिति -  (बड़वानी) खरगौन 
विशिष्ट तथ्य - 99 जैन का मंदिर दिगम्बर जैनों का तीर्थ है।

स्थल - पुष्यगिरी 
अवस्थिति - देवास 
विशिष्ट तथ्य - जैनों का तीर्थ स्थल है। 

स्थल - भरहुत स्तूप 
अवस्थिति - सतना 
विशिष्ट तथ्य - बौद्ध स्तूप के साक्ष्य मिले है (मौर्यकाल)।

गुफाएँ

गुफाएँ - मृगेन्द्रनाथ गुफा 
अवस्थिति - रायसेन 
विशिष्ट तथ्य - दुर्लभ रॉक पेंटिंग्स हैं। खोज जुलाई 2009 
(पाटनी गाँव) विदिशा यहाँ पर 20 गुफाएँ हैं। गुफा नं. 1 व 20 जैन धर्म से संबंधित हैं, 

गुफाएँ -उदयगिरी की गुफाएँ (गुप्तकाल)
अवस्थिति - (4वीं शताब्दी)
विशिष्ट तथ्य - जबकि 5 नं. में वराह की विशाल प्रतिमा है।  

गुफाएँ - भृर्तहरि गुफाएँ 
अवस्थिति - उज्जैन 
विशिष्ट तथ्य - परमार वंश के राजाओं ने 11वीं सदी में बनवाया था। गुफाओं में सभी चित्र रंगीन हैं। 

गुफाएँ - बाघ की गुफाएँ 
अवस्थिति - धार 
विशिष्ट तथ्य - 5 गुफाएँ हैं। कलात्मक भित्ति चित्रों से युक्त पाँचवीं से सातवीं सदी में विन्ध्यालय की पहाडि़यों में निर्मित बौद्ध बिहार, बौद्ध चित्र आदि।

गुफाएँ - भीमबेटका की गुफाएँ 
अवस्थिति - अबदुल्लागंज (रायसेन)
विशिष्ट तथ्य - भीमबेटका गुफाओं की खोज वाकणकर ने की थी। भीमबैटका विश्व का सबसे बड़ा गुफा समूह है। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर में सम्मिलित किया है। 

गुफाएँ - पाण्डव गुफाएँ 
अवस्थिति - पचमढ़ी 
विशिष्ट तथ्य - यहां पर पाण्डवों न अज्ञातवास गुजारा था।

गुफाएँ - मारा की गुफाएँ 
अवस्थिति  - सिंगरौली 
विशिष्ट तथ्य - बौद्ध कालीन गुफाएँ हैं। 

गुफाएँ - शंकराचार्य की गुफाएँ 
अवस्थिति - ओंकारेश्वर खण्डवा 
विशिष्ट तथ्य - शंकराचार्य ने यहाँ शिव आराधना की थी।

समाधि एवं मकबरे 

मकबरे/समाधि - पेशवा बाजीराव की समाधि 
अवस्थिति - खरगौन 
विशिष्ट तथ्य - मुमताज की कब्र, बुरहानपुर 

मकबरे/समाधि - हुशंगशाह का मकबरा 
अवस्थिति - माँडू (धार)
विशिष्ट तथ्य - पर्शियन कला का नमूना है। भारत में संगमरमर की प्रथम इमारत।

मकबरे/समाधि - नवाब हसन सिद्दीक का मकबरा 
अवस्थिति - भोपाल 
विशिष्ट तथ्य - संगमरमर से निर्मित स्थापत्य कला का नमूना । 

मकबरे/समाधि - तानसेन का मकबरा 
अवस्थिति - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - पचपच वर्ग मीटर में फैला यह मकबरा प्रदेश का सबसे बड़ा मकबरा है।

मकबरे/समाधि - गौस मोहम्मद का मकबरा 
अवस्थिति - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - तानसेन  के गुरू और सिद्ध पीर।

मकबरे/समाधि - रानी दुर्गावती की समाधि 
अवस्थिति - बरेला ग्राम (जबलपुर )
विशिष्ट तथ्य - गोंडवाना की प्रसिद्ध शासिका थी।

मकबरे/समाधि - महारानी लक्ष्मीबाई की समाधि 
अवस्थिति - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - 1857 की महत्वपूर्ण वीरांगना थी।

मकबरे/समाधि - महारानी सांख्य राजे सिंधिया 
अवस्थिति - शिवपुरी 
विशिष्ट तथ्य - आगरा के ताजमहल के समान सुंदर इमारत।

मकबरे/समाधि - रानी अवंती बाई की समाधि 
अवस्थिति - मण्डला 
विशिष्ट तथ्य - गढ़ा मण्डला की शासिका थी।

मकबरे/समाधि - झलकारी बाई की समाधि 
अवस्थिति - ग्वालियर 
विशिष्ट तथ्य - रानी लक्ष्मीबाई की सहायिका।

मकबरे/समाधि - गिरधारी बाई की समाधि 
अवस्थिति - मण्डला 
विशिष्ट तथ्य - गढ़ा मण्डला की शासिका रानी अवन्तीबाई की सहायिका थी।

मकबरे/समाधि - अब्दुल्ला शाह चंगल का मकबरा 
अवस्थिति  - धार 
विशिष्ट तथ्य - धार किल में स्थित दिल्ली सल्तनत समकालीन इमारत 

मकबरे/समाधि - बैजू बाबरा की समाधि 
अवस्थिति - चंदेरी 
विशिष्ट तथ्य - संगीतकार।

लोक गायन 

गायन का नाम - चौकडि़या फाग
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बंुदेलखण्ड 
विशेषता - ईश्वरी की रचनाओं का गायन।

गायन का नाम - हरदौल की मनौती 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बंुदेलखण्ड/बघेलखण्ड 
विशेषता - यह वीरता का गीत है।

गायन का नाम - आल्हा 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बंुदेलखण्ड (सम्पूर्ण म.प्र.)
विशेषता - वीर रस प्रधान काव्य।

गायन का नाम - भोलागीत या बंबुलिया 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बुंदेलखण्ड 
विशेषता - वाचिक परंपरा का मधुर गीत।

गायन का नाम - बेरायटा 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बंुदेलखण्ड 
विशेषता - कथा गायन शैली। 

गायन का नाम - दिवारी गायन 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बंुदेलखण्ड 
विशेषता - दोहों पर केन्द्रित।

गायन का नाम - जगदेव का पुवारा 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बुंदेलखण्ड 
विशेषता - भजन शैली का गायन।

गायन का नाम - बसदेवा गायन 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बघेलखण्ड 
विशेषता - कथाओं और गाथाओं का गायन ।

गायन का नाम  - विरहा गायन 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बघेलखण्ड 
विशेषता - सवाल जवाब शैली में गायन।

गायन का नाम - विदेशिया गायन 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बघेलखण्ड 
विशेषता - बिछोह मिलन और अभिलाप का गीत।

गायन का नाम - फाग गायन 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - बघेलखण्ड 
विशेषता - नगाड़ों पर फाग गायन।

गायन का नाम - कलगीतुर्रा 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - निमाड़ 
विशेषता - मृत्युगीत।

गायन का नाम - फाग 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - निमाड़ 
विशेषता - होली के अवसर पर।

गायन का नाम - गरबा 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - निमाड़ 
विशेषता - इसकी तीन शैलियाँ गरबा, और गबलन हैं। 

गायन का नाम - भरथरी 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - मालवा 
विशेषता - नाथ संप्रदाय के लोग चिंकारा पर भरथरी कथा गाते हैं। 

गायन का नाम - सांझागीत 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - मालवा 
विशेषता - मूलतः मालवा की किशोरियों का पारंपरिक गायन।

गायन का नाम - हीड़ गायन 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - मालवा 
विशेषता - श्रावण के महीने में।

गायन का नाम - बरसाती बरता 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - मालवा 
विशेषता - ऋतु कथा गीत, वर्षा ऋतु में गायन ।

गायन का नाम - लावनी 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - मालवा/निमाड़ 
विशेषता - निर्गुणी दार्शनिक गीत।

गायन का नाम - रेलोगीत 
संबद्ध आदिवासी/क्षेत्र - भील तथा कोरकू 
विशेषता - युवक-युवतियों की गीत।

लोकनृत्य
  • 1. बधाई नृत्य: बंुदेलखण्ड में खुशी के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है।
  • 2. सैला नृत्य: सैरा नृत्य गणगौर के उत्सव पर किया जाता है। यह गुजरात में होने वाले डांडिया नृत्य से मिलता है।
  • 3. चटकोरा नृत्य: कोरकू आदिवासियों का नृत्य है। 
  • 4. रीना नृत्य: बैगा तथा गोंड महिलाओं का दीपावली के बाद किया जाने वाला नृत्य हैं। 
  • 5. विलमा नृत्य: बैगा जनजाति में प्रेम प्रसंग पर आधारित है।
  • 6. भगोरिया नृत्य: भीलों द्वारा किया जाने वाला नृत्य है।
  • 7. मटकी नृत्य: मालवा का एकल नृत्य है। 
  • 8. गोचो नृत्य: गोंडों द्वारा किया जाता है।
  • 9. बार नृत्य: कंवर आदिवासियों का नृत्य।
  • 10. लंहगी नृत्य: कंजर, बंजारों एव सहरिया लोगों का नृत्य 
  • 11. परधौनी नृत्य: विवाह के अवसर पर बैगा आदिवासियों द्वारा बारात की अगवानी के समय किया जाता है। 
  • 12. कानड़ा नृत्य: बंुदेलखण्ड में धोबी जाति द्वारा किया जाता है। 
  • 13. बरेदी नृत्य: ग्वाला एवं गुर्जर द्वारा किया जाता है। 
  • 14. सुवा नृत्य: बैगा जनजाति।


अन्य प्रमुख लोक नृत्य 

  • निमाड़ अंचल: गणगौर लोक नृत्य, काठी नृत्य, फेफारिया नृत्य, माडल्या नृत्य, आड़ा-खड़ा, नाच, डण्डा नाच। 
  • मालवा अंचल: मटकी नृत्य, आड़ा-खड़ा, रजवाड़ी नृत्य।
  • बुन्देलखण्ड: राई नृत्य, ढिमरयाई नृत्य, सैला नृत्य, बधाई नृत्य, कानड़ा नृत्य।
  • बघेलखण्ड: बिरहा अथवा अहिराई नृत्य, राई, केमाली नृत्य, कलसा नृत्य, केहरा नृत्य, दादर गीत नृत्य।


लोकगीत 

  • सिंगाजी और दलूजी - निमाड़ - वीरगीत।
  • बम्बुलिया - बुन्देलखण्ड - धार्मिक गीत। 
  • सैर, राहरे, मलारे, गोटे, बिलवाटी, रावले आदि - बुन्देखण्ड - धार्मिक गीत। 
  • आल्हा - सम्पूर्ण मध्य प्रदेश - वीरगति।
  • लावणी - मालवा निमाड़ - निर्गुणी दार्शनिक गीत। 
  • माच - मालवा - लोक नाट्य संगीत।
  • दुल-दुल घोड़ी - सहरिया जनजाति  - ग्वलियर, गुना, शिवपुरी, पर्व त्यौहार, विवाह।
  • लहँगी - सहरिया - रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजारियों का त्यौहार मनाया जाता है। 
  • कोल-दहका नृत्य/गीत - कोल -बघेलखण्ड में कोल स्त्री-पुरूष द्वारा किया जाने वाला नृत्य। 
  • थापटी नृत्य/गीत - कोरकू जनजाति - स्त्री-पुरूषों द्वारा वैशाख महीने में पर्व त्यौहारों पर।
  • भगोरिया/गीत - भील - होली के आठ दिन पूर्व हाट बाजारों में नृत्य करते हैं। 
  • परधोनी नृत्य/गीत - बैगा - बारात की अगवानी के समय खटिया, सूप, कम्बल से  हाथी बनाकर नचाया जाता है। 
  • सैला नृत्य/गीत - गोंड, बैगा, परधान - यह शरद पूर्णिमा से शुरू होता है। स्त्री-पुरूष दोनों नृत्य करते हैं। 


प्रमुख जनजातीय लोक नृत्य 

नृत्य कला            आदिवासी क्षेत्र             विशेषताएँ 
  • गुदमाबाजा  - दुलिया जनजाति  - लोकवाद्य यंत्र हैं। 
  • गरबा डाण्डिया - निमाड़ के बन्जारे - दशहरा के अवसर पर होने वाला नृत्य।
  • बिनाकी - भोपाल के कृषक - बन्जारों के डाण्डिया नृत्य के समान।
  • दादर - बुन्देलखण्ड - उत्सव-सम्बन्धी नृत्य।
  • सुआ (बैगा) - मैकाल पर्वत - लावण्य के लिए प्रसिद्ध समूह में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य।
  • करमा - मण्डला - वर्षा ऋतु के प्रारम्भ तथा समाप्ति पर किया जाने वाला नृत्य।
  • गोंडी - गोंड - फसल/बीज बोते समय सामूहिक नृत्य।
  • गोचों - गोंड - वर्षा हेतु आनुष्ठनिक नृत्य।
  • रीना - गोंड - दीपावली के तुरन्त बाद होने वाला स्त्री नृत्य।
  • गेंडी -गोंड - पाँवों में गेंडिया फंसाकर किया जाने वाला नृत्य। 
  • रागिनी - ग्वालियर - यहाँ की सभी जाति व जनजातियों द्वारा।
  • खम्ब स्वांग - कोरकू - दीपावली के पश्चात् मेघनाद स्तम्भ के पास इसी की स्मृति में।
  • भड़म और सैलम नृत्य - भारिया - विवाह के अवसर पर।


कला एवं संस्कृति 

  • मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद् के द्वारा आदिवासी लोक कला और जन-जीवन पर चौमासा पत्रिका का  हर चौथे माह प्रकाशन किया जाता है। 
  • मध्य प्रदेश तुलसी अकादमी की चित्रकूट शोध संस्थान अन्तर्राष्ट्रीय तुलसी विद्यापीठ के रूप में विकसित किया जा रहा है। 


लोकगीत 
निमाड़ अंचल के लोकगीत 
कलगी तुर्रा, सन्त-सिंगाजी भजन, निरगुणियाँ गायन शैली, मसाण्या अथवा कायाखोज के गीत, फाग गायन, नाथपन्थी गायन, गरबा/गरबी/ गवलन गायन शैली आदि।
कलगी-तुर्रा चांग की थाप पर रात-रात भर गाया जाता है। 
मालवा अंचल के लोकगीत 
भरथरी गायन, निरगुणी भजन गायन, सजा गीत, हीड़ गायन, बरसाती बारता, होली पर फाग, दिवाली पर दीवारी, जन्माष्टमी पर कृष्ण लीला गीत, नवरात्रि में देवी गीत आदि।
बुन्देली लोकगीत 
देवरी गायन, बेरायटा गायन, फाग गायन, भोलागीत अथवा बम्बुलिया, आल्हा गायन आदि।
बघेलखण्ड अंचल के लोकगीत 
फाग गायन, विदेशिया गायन, बिरहा गायन, बसदेवा गायन।

साहित्यिक एवं ललित कला अकादमियाँ

      स्थापना                       मुख्यालय
  • मध्य प्रदेश कला परिषद् - 1952 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् - 1954 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी - 1969 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी - 1976 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश कालिदास अकादमी - 1977 - भोपाल 
  • उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत अकादमी - 1979 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश सिंधी अकादमी - 1983 - भोपाल 
  • अल्लामा इकबाल अदबी अकादमी - 1984 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश संस्कृत अकादमी - 1985 - भोपाल 
  • मध्य प्रदेश तुलसी अकादमी - 1987 - भोपाल 
  • स्वन्त्रता संग्राम स्मारक भवन - 1997 - भोपाल 
  • नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी   -  - भोपाल 


लोक नाट्य 

  • 1. माचा: मालवा अंचल का एक प्रमुख लोकनाट्य है, माचा का जन्म स्थान उज्जैन है। 
  • 2. राई स्वंग: (बुंदेलखण्ड) स्वांग का शाब्दिक अर्थ है, ‘अभिनय‘। यह जन्म एवं उत्सव के समय किया जाजा है। 
  • 3. पण्डवानी: (मूलतः छत्तीसगढ़) शहडोल, अनूपपुर, बालाघाट में देखने को मिलता है।
  • 4. काठी: निमाड़ अंचल में प्रचलित है। यह देव उठनी ग्यारस से आरम्भ होता है और एक माह चलता है।
  • 5. नौटंकी: मूलतः उत्तर प्रदेश का लोकनाट्य है, पर म.प्र के बंुदेलखण्ड एवं बघेलखण्ड में इसका प्रचलन है।
  • 6. ढोला मारू की कथा: यह लोकनाट्य म.प्र. के राजस्थान से जुड़े सीमा क्षेत्र में प्रचलित है।


अन्य प्रमुख लोक नाट्य 

  • छाहुर: बघेलखण्ड का लोकनृत्य।
  • गम्मत: निमाड़ का पारम्परिक लोकनाट्य।
  • अखाड़ा: बुन्देलखण्ड।
  • तेजाजी की कथा: मालवा।
  • रासलीला: निमाड़।
  • लकड़बग्घा: आदिवासियों का लोकनाट्य।


म.प्र. की बोलियाँ

  • 1. बुन्देलखण्डी - अशोकनगर दतिया, गुना, शिवपुरी, मुरैना, सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट आदि।
  • 2. निमाड़ी - बुरहानपुर, खण्डवा, खरगौन, धार देवास, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर।
  • 3. बघेलखण्डी - रीवा, सतना, शहडोल, एवं उमरिया।
  • 4. मालवी - सीहोर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, झाबुआ, उज्जैन, देवास, इंदौर आदि।
  • 5. बृजभाषा  - भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, आदि।
  • 6. कोरकू - बैतूल, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, खरगौर आदि।
  • 7. भीली - रतलाम, धार, झाबुआ, खरगौन एवं अलीराजपुर।
  • 8. गौंडी - बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मण्डला, डिंडोरी, होशंगाबाद।


मध्य प्रदेश के प्रमुख स्टेडियम 

  • 1. प्रकाश तरण पुष्कार, भोपाल 
  • 2. S A I  क्षेत्रीय स्टेडियम, गोरागाँव भोपाल 
  • 3. तात्या टोपे स्टेडियम, भोपाल - जर्मन ट्रेक सुविधा 
  • 4. ऐशबाग स्टेडियम, भोपाल - एस्टोट्रफ सुविधा 
  • 5. रूपसिंह स्टेडियम, ग्वालियर - दूधिया रोशनी सुविधा 
  • 6. अभय खेल प्रशाल, इंदौर - इंडोर स्टेडियम 
  • 7. नेहरू स्टेडियम, इंदौर - क्रिकेट 
  • 8. ऊषा राजे स्टेडियम, इन्दौर - क्रिकेट 
  • 9. होल्कर स्टेडियम, इंदौर 


साहित्य एवं संस्कृति 

प्राचीन काल के साहित्यकार 
  • ऋषि अगस्त्य (वैदिक काल) सुतीक्षण, शरभंग, महाकवि कालिदास, सोमशंभु, भवभूति, दण्डी, नागर्जुन, मण्डन मिश्र, कवि गंगाधर, पृथ्वीधर, शशिधर,  कविराज ईशान, भास्कर भट्ट, वैद्य श्रीकृष्ण दण्डी, पुरूषदत्त आदि।

मध्यकाल के साहित्यकार 
  • कुम्भनदास, चतुर्भुजदास, दामोदरदास, वक्षी हंसराज, हरिदास स्वामी, गजाधर भट्ट, गोलाचन्द्र मिश्र महाकवि बिहारी, केशवदास (ओरछा), पद्माकर (सागर), कृष्ण भट्ट, कुमार मणि, राजा छत्रसाल, लाल कवि, चिंतामणि, कवि भूषण, गोरे लाल पुरोहित आदि।


राज्य के आधुनिक काल के साहित्यकार 

  • जगन्नाथ प्रसाद, भानु विनायक राव, सुखराम चौबे गुणकर लोचन प्रसाद पाण्डेय, मुकुटधर पाण्डेय, कामता प्रसाद गुरू, रामेश्वर प्रसाद गुरू, माखन लाल चतुर्वेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान, पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र, केशव प्रसाद, पाठक, श्याम कांत पाठक, माधव राव सप्रे , रघुवर प्रसाद द्विवेदी, बाल मुकुन्द त्रिपाठी, बलदेव प्रसाद मिश्र, मातादीन शुक्ल, रामेश्वर शुक्ल ‘ अंचल‘ डॉ. विनय मोहन शर्मा, सेठ गोविन्द दास, ऊषा देवी मिश्रा, डॉ. रामकुमार वर्मा, भवानी प्रसाद मिश्र, गजानन माधव मुक्ति बोध, प्रभाकर माचवे, गिरिजा कुमार माथुर, शिव मंगल सिंह, सुमन, सूर्य नारायण व्यास, हरिकृष्ण प्रेमी, जगन्नाथ प्रसाद मिलिन्द, बाल कवि बैरागी, वीरेन्द्र मिश्र, शरद जोशी, हरिशंकर परसाई, रमेश बख्शी, श्रीकान्त वर्मा, राजेन्द्र अवस्थी, दुष्यन्त कुमार, राम कुमार चतुर्वेदी, देवव्रत जोशी, डॉ. परशुराम विरही, श्री काली प्रसाद भटनागर विरही, मुकुट बिहारी सरोज, विद्यानंदन राजीव, डॉ. प्रभुदयाल अग्निहोत्री, दामोदर शर्मा, भगवान स्वरूप चैतन्य माणिक वर्मा, श्याम सलिल, राजकुमारी रश्मि, कविरत्न पाराशर, राजेन्द्र अनुरागी, ओम प्रभाकर, प्रभाकर श्रोतिय डॉ. महेन्द्र भटनागर, सत्यव्रत अवस्थी, महवीर प्रसाद शर्मा, ज्वाला प्रसाद जोशी, जगदीश प्रसाद स्थापक, मालती जोशी। प्रसून जोशी गीतकार इंदौर ।


उर्दू साहित्यकार 

  • जानिसार अख्तर, जावेद अख्तर, राहत इन्दौरी, कैफ भोपाली, मंजर भोपाली, असद भोपाली, ताज भोपाली, वकील भोपाली, फैज रतलामी, शाहिद कबीर, महमूद नश्तरी, निदा फाजली, सुलेमान ईरानी, हयात हाशमी, शाहिद भोपाली, मकसूद भोपाली, जावेद अंजुम, डॉ. वशीर बद्र आदि।


प्रमुख समारोह 

  • खजुराहो नृत्य समारोह - खजुराहो
  • कालीदास समारोह - उज्जैन 
  • उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत समारोह - मैहर 
  • मालवा उत्सव - इंदौर/उज्जैन 
  • ध्रुपद समारोह - भोपाल  
  • उस्ताद अमीर खाँ समारोह - इंदौर 
  • माखनलाल चतुर्वेदी समारोह - खंडवा 
  • पùाकर समारोह - सागर 
  • सुभद्राकुमारी चौहान समारोह - जबलपुर 
  • ओरछा उत्सव - टीकमगढ़ 
  • निमाड़ उत्सव - खण्डवा, खरगौन
  • लोक रंग समारोह - भोपाल 
  • जनजाति फिल्मी उत्सव - इन्दौर 
  • किशोर कुमार सम्मान समारोह - खण्डवा 
  • तानसेन सम्मान समारोह - ग्वालियर 
  • टेपा समारोह - उज्जैन 


प्रसिद्ध साहित्यकार 

नाम - कालीदास (विक्रमादित्य के राज दरबार के नौ रत्नों में से एक )
जन्म स्थान  - उज्जैन 
रचनांए - ऋतुसंहार, कुमारसंभव, मेघदूत, मालविकाग्निमित्रम्, अभिज्ञान शाकुन्तलम्, विक्रमौर्वशियम।

नाम - बाणभट्ट (कन्नौज के शासक सोन नदी तट हर्षवर्द्धन के दरबारी )
जन्म स्थान - प्रीतिकूट ग्राम 
रचनाएं - हर्षचरित, कादम्बरी, पार्वती परिणय, चण्डीश्तक, मुकुट ताड़दिक।

नाम - भर्तृहरि 
जन्म स्थान - उज्जैन 
रचनाएं - काव्य पदीप (व्याकरण गं्रथ) महाभाष्य दीपिका, वाक्यपदीय, वाक्यदीय टीका, सुभाषित, मीमांसा भाष्य, वेदान्त सूत्र, वृत्ति शब्द धातु समीक्षा आदि।

 नाम - भवभूति 
जन्म स्थान - पद्मपुर (विदर्भ)
रचनाएं - मालतीमाधव, उत्तररामचरित, महावीरचरित। रतन बावनी, वीर सिंह चरित्र, जहाँगीर जस 
नाम - केशवदास 
जन्म स्थान - ओरछा (टीकमगढ़ )
रचनाएं - चन्द्रिका, रसिक प्रिया, कविप्रिया, विज्ञानगीता, बारहमासा, रामचन्द्रिका व छन्दमाला आदि।

नाम - पद्माकर भट्ट 
जन्म स्थान - सागर 
रचनाएं - पद्माभरण, अलीजाह प्रकाश, प्रबोध पचासा, गंगा लहरी, रामरसायन, ईश्वर पच्चीसी, जगत विनोद, बहादुर विरूदावली आदि।

नाम - भूषण (रीतिकाल) 
जन्म स्थान - ओरछा 
रचनाएं - शिवा बावनी, शिवराज भूषण व छत्रसाल दशक आदि।

नाम - पं. माखनलाल चतुर्वेदी 
जन्म स्थान - बावई (होशंगाबाद) 
रचनाएं - हिमकिरिटनी, हिमतरंगिणी, माता, समर्पण, युग चरण, पुष्य की अभिलाषा, वेणु लो गुंजे धरा।

नाम - सुभद्रा कुमारी चौहान 
जन्म स्थान - इलाहाबाद 
रचनाएं - त्रिधारा, मुकुल (काव्य संग्रह), बिखरे मोती, उन्मादिनी (कहानियाँ), सभा के खेल, सीधे-साधे चित्र (बाल साहित्य)।

नाम - गजानन माधव ‘मुक्ति बोध‘ (प्रयोगवादी कवि)
जन्म स्थान - श्योपुर 
रचनाएं -  कामायनी : एक पुनर्विचार, दिनकर की उर्वशी, नई कविता का आत्मसंघर्ष, नए साहित्य का सौन्दर्य शास्त्र समीक्षा की समस्याएँ, एक साहित्यिक डायरी (आलोचनात्मक गं्रथ), चाँद का मुँह टेढ़ा है, भूरी-भूरी खाक-धूल, चम्बल की छाती, काठ का सपना (कहानी संग्रह), विपात्र (उपन्यास)।

नाम - बालकृष्ण शर्मा ‘ नवीन (छायावादी)
जन्म स्थान - शाजापुर 
रचनाएं - कुमकुम, अपलक, रश्मि रेखा, उर्मिला, प्राणर्पण, हम विषपायी जनम के।

नाम - भवानी प्रसाद मिश्र 
जन्म स्थान - होशंगाबाद 
रचनाएं - गीतफरोश, चकित है दुःख  अंधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख।

नाम - हरिशंकर परसाई 
जन्म स्थान - जमानी गाँव (हरदा)
रचना - हँसते है रोते हैं, जैसे उनके पिता दिन फिरे (कहानी संग्रह), तट की खोज (उपन्यास), तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, सदाचार की ताबीज, पगडडियों का जमाना, शिकायत मुझे भी है (निबंध संग्रह), वैष्णव की फिसलन, तिरछी देखाएँ, ठिठुरता हुआ गणतंत्र, विकलांग श्रद्धा का दौर (व्यंग निबंध संग्रह)।

नाम - शरद जोशी 
जन्म स्थान - उज्जैन 
रचना - रहा किनारे बैठ, किसी बहाने, परिक्रमा, जीप पर सवार इल्लियाँ आदि।

प्रमुख मेले 

नाम - ग्वालियर मेला - समय अवधि - दिसम्बर-जनवरी - स्थान - ग्वालियर 
नाम - ग्वालियर कृषक मेला - समय अवधि - फरवरी - स्थान - पीताम्बरा पीठ 
नाम - उर्स ख्वाजा - समय अवधि - - स्थान - खरतून, दरगाह, ग्वालियर 
नाम - गधों का मेला - समय अवधि - दीपावली के बाद -स्थान - चित्रकूट, सतना 
नाम - बाबा गरीबनाथ - पूरे चैत्र माह तक (मार्च-अप्रैल) - स्थान - अवन्तीपुर बरोडिया (शाजापुर )
नाम  - नागाजी - समय अवधि - पूरे अगहन माह - स्थान - पोरसा गाँव, मुरैना 
नाम - बरमान - समय अवधि - पौष माह में मकर संक्रांति से 13 दिनों तक गाडरवारा तहसील - स्थान (नरसिंहपुर) 
नाम - कुण्डेश्वर - समय अवधि - प्रतिवर्ष शिवरात्रि, मकर संक्रांति व बसंत पंचमी स्थान - टीकमगढ़ जमदार नदी के किनारे 
नाम -सिंगाजी (उज्जैन) - समय अवधि - क्वार माह में - स्थान - पिपल्या गाँव, खरगौन व खातेगाँव 
नाम - बाणगंगा - समय अवधि - फागुन - स्थान - शिवपुरी 
नाम  - जोगेश्वरी देवी  - समय अवधि - चैत्र माह में - स्थान - चंदेरी, अशोकनगर 
नाम - सिंहस्य मेला - समय अवधि - 12 वर्षों में (वैशाख ) - स्थान - उज्जैन (पंचकोशी यात्रा)
नाम - हीरा भूमिया - सयम अवधि -अगस्त-सितम्बर - स्थान - ग्वालियर व गुना 
नाम - कान्हाबाबा - समय अवधि - शिवरात्रि व गुरू पूर्णिमा को - स्थान - सोडलपुर (हरदा)
नाम - बड़ोनी - समय अवधि - शिवरात्रि - स्थान - बड़ोनी में योगेश्वर पहाड़ी पर (दतिया)
नाम - महामृत्युजय - समय अवधि - बसंत पंचमी - स्थान - रीवा 
नाम - सनकुआ -  समय अवधि - कार्तिक पूर्णिमा से 15 दिनों तक - स्थान सेवड़ा नामक कस्बे सनकुआ नामक स्थान पर सिंध नदी के तट पर (दतिया)
नाम - सलकनपुर - समय अवधि - बुधनी (सीहोर)      

नाम - रामजी बाबा - समय अवधि - दिसंबर - स्थान - होशंगाबाद 
नाम - मान्धता - समय अवधि - कार्तिक माह का सात दिवसीय मेला (सितम्बर-अक्टूबर)- स्थान - मान्धता  (खण्डवा)
नाम - कालूजी महाराज - समय अवधि - - स्थान  पीपल्या (महेश्वर)
नाम - अमरकंटक - समय अवधि - शिवरात्रि पर - स्थान - अमरकंटक (अनूपपुर)
नाम - जल-बिहारी - समय अवधि - अक्टूबर माह का दस दिवसीय मेला - स्थान - छतरपुर 
नाम  - सोनागिरि - समय अवधि - चैत्र में एकम् से पंचमी तक - स्थान - सोनागिरि (दतिया) 
नाम - शारदा माँ - समय अवधि - - स्थान - मैहर (सतना)
नाम - माघ घोघरा - समय अवधि - शिवरात्रि पर 15 दिनों तक - स्थान - भैरोंनाथ (सिवनी)े
नाम  - रामलीला - समय अवधि - माघ माह में (जनवरी-फरवरी) - स्थान - भांडेर (दतिया)
नाम - नौदेवी मेला - समय अवधि - - स्थान - लहार तहसील का रावतपुरा गाँव (भिण्ड)
नाम - रतनगढ़ - दीपावली की दौज के दिन  स्थान - रतनगढ़ (दतिया)
नाम - रामनवमी - समय अवधि - - स्थान - रानी तालाब रीवा, चित्रकूट, ओरडा, हनुमान ताल, सुसनेर 
नाम - मकर संक्रांति - समय अवधि - - स्थान - भोजपुर (रायसेन)
नाम - मढ़ई - समय अवधि - - स्थान - डिण्डोरी 
नाम -  रहस - समय अवधि - बसंत पंचती - स्थान - गढ़ाकोटा 
नाम - बंादकपुर मेला - समय अवधि - बसंत पंचमी - स्थान - दमोह 
नाम - चाँदी देवी - समय अवधि - - स्थान - घोघरा गाँव (सीधी)
नाम - मांधाता - समय अवधि - कार्तिक - स्थान - ओंकारेश्वर 
नाम - पीर बुधान - समय अवधि - भाद्र माह में एक दिवसीय (अगस्त-सितम्बर) - स्थान -  ग्राम सांवरा (शिवपुरी )
नाम - धामोनी उर्स (बाबा मस्तान शाह वली की दरगाह का मेला ) - समय अवधि - अप्रैल-मई 6 दिनों तक - स्थान - धामोनी (सागर)
नाम - बाबा शाहबुद्दीन ओलिया का उर्स - समय अवधि - फरवरी माह में - स्थान - नीमच 
नाम - बसंत पंचमी - समय अवधि - फरवरी - स्थान - मांढेर 
नाम - बालाजी मेला - समय अवधि - - स्थान - बुरहानपुर  

साहित्य कला एंव संस्कृति से जुड़ी संख्याएँ 

भारत भवन 
स्थापना: 13 फरवरी 1982, वास्तुकार चार्ल्स कोरिया।
उद्देश्य: सृजनात्मक कलाओं के राष्ट्रीय विकास, परिरक्षण, अन्वेषण, प्रसार-प्रचार एवं प्रोत्साहन हेतु भारत भवन न्यास अधिनियम 1982 के अंतर्गत स्थापित किया गया।
प्रमुख गतिविधियाँ: नगर लोक एवं आदिवासी कला के दो बड़े संग्रहालय, व्यावसायिक रंगमंच ‘ रंगमंडल‘, भारतीय भाषाओं का कविता पुस्तकालय और संग्रहालय‘ वागर्थ‘, शास्त्रीय लोक एंव आदिवासी संगीत संग्रहालय ‘ अनहद‘। अन्तः प्रसाद में दो रंगशालाएँ अंतरंग और बहिरंग।
कालिदास अकादमी 
स्थापना: उज्जैन में 1977 में की गई।
उद्देश्य: इसका उद्देश्य कालिदास साहित्य का विश्लेषणात्मक अनुशीलन, विभिन्न कला माध्यमों पर उसके समग्र प्रभवा का आकलन, कालिदास तथा संस्कृत की अन्य गौरवपूर्ण कृतियों का विश्व की भाषाओं में अनुवाद तथा प्रकाशन का कार्य करती है। 
म.प्र. सिन्धी साहित्य अकादमी, भोपाल 
स्थापना: 1983 
उद्देश्य: परिचर्चा, विचार गोष्ठी, व्याख्यान माला, मुशायरा, हिन्दी, सिन्धी, उर्दू, पंजाबी का एक मंच पर कविता, कहानी पाठ, सिन्धी नाट्य प्रस्तुति, लोकगीत, अनुदान, सिन्धी प्रतिनिधि का प्रकाशन, मोनोग्राफ अनुवाद कर्मशालाएँ।
मध्य प्रदेश कला परिषद
स्थापना: 1952 
उद्देश्य: परिषद् राज्य की संगीत, नृत्य, नाटक और ललित कलाओं की राज्य अकादमी के रूप में कार्यरत है। 
मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी भोपाल 
स्थापना: 1976 
उद्देश्य: मध्य प्रदेश मं उर्दू साहित्य के प्रोत्साहन एवं संरक्षण हेतु अदीबों और शायरों, मुशायरा कराने वाला साहित्यिक संस्थाओं को सहयोग प्रदान करना किताबों की छपाई, उर्दू लाइब्रेरियों आदि को आर्थिक सहायता।
पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश 
स्थापना: इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1956 में की गई थी जबकि 1975 से स्थापित राजकीय अभिलेखागार संचालनालय का संविलियन 16 अगस्त 1994 में किया गया।
उद्देश्य: इस संचालनालय का मुख्य कार्य प्रदेश भर में बिखरी पड़ी हुई पुरातत्विक सम्पदा का सर्वेक्षण, चिन्हांकन, संरक्षण, प्रदर्शन एवं अनुसरण करना है। 
रवीन्द्र भवन, भोपाल 
उद्देश्य: भारत के सर्वश्रेष्ठ नाट्य गृहों में से एक है। प्रशासनिक दृष्टि से यह भवन राजभाषा एवं संस्कृति संचालनालय के अंतर्गत कार्यरत है। 
रवीन्द्र भवन में दो रंगमंच हैं। एक सभागृह के भीतर अंतः रंगमंच और दूसरा बाहर  का खुला रंगमंच।
मध्य प्रदेश तुलसी अकादमी भोपाल 
स्थापना: 1987 
उद्देश्य: संस्कार अभियान, मंगलाचरण, लोकमंगल, जनरंजन, लोकयात्रा, तुलसी-उत्सव, तुलसी शोध संस्थान, शोध सर्वे और पाण्डुलिपि संग्रह।
मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल 
स्थापना: अकादमी की स्थापना 1969 में हुई थी।
उद्देश्य: उच्च शिक्षा में माध्यम परिवर्तन के उद्देश्य से स्थापित इस संस्था का कार्य हिन्दी में विश्वविद्यालय पाठयक्रम के लिए पाठ्य एवं संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराना है।
मध्य प्रदेश की साहित्य परिषद, भोपाल 
स्थापना: 1954
उद्देश्य: प्रदेश में हिन्दी साहित्य के प्रोत्साहन संरक्षण हेतु नये रचनात्मक एवं आलोचनात्मक साहित्य का प्रकाशन, साहित्य सम्मेलन, परिचर्चा गोष्ठियाँ।

सृजनपीठ 

प्रदेश की प्रमुख सृजनपीठें इस प्रकार हैंः 
1. निराला सृजनपीठ बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल।
2. प्रेमचन्द सृजनपीठ विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन।
3. मुक्तिबोध सृजनपीठ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर।
4. सुभद्राकुमारी चौहान सृजनपीठ, जबलपुर।
5. बाल साहित्य सृजन शोध पीठ, भोपाल।

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