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सामान्‍य प्रबंधन,प्रबन्धन के प्रमुख तत्‍व

संगठन के सन्दर्भ में प्रबन्धन (Management) का अर्थ है - उपलब्ध संसाधनों का दक्षतापूर्वक तथा प्रभावपूर्ण तरीके से उपयोग करते हुए लोगों के कार्यों में समन्वय करना ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके।

प्रबन्धन के अन्तर्गत 5 प्रमुख तत्‍व आते है :-
  1. आयोजन (planning)
  2. संगठन-निर्माण (organizing)
  3. स्टाफिंग (staffing)
  4. नेतृत्व करना (leading या directing)
  5. संगठन अथवा पहल का नियंत्रण करना (controlling)।
  • संगठन भले ही बड़ा हो या छोटा, लाभ के लिए हो अथवा गैर-लाभ वाला, सेवा प्रदान करता हो अथवा विनिर्माणकर्ता, प्रबंध सभी के लिए आवश्यक है।
  • प्रबंधन इसलिए आवश्यक है कि व्यक्ति सामूहिक उद्देश्यों की पूर्ति में अपना श्रेष्ठतम योगदान दे सकें।

प्रबंधन की परिभाषाऍं :-
कुछ विशेषज्ञो द्वारा प्रबंधन की परिभाषाएं इस प्रकार है -

  • पूर्वानुमान करना तथा योजना बनाना, संगठन बनाना,आदेश देना, समन्वय करना ही प्रबन्धन है।-- हेनरी फेयोल
  • प्रबंध परिवर्तनशील पर्यावरण में सीमित संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करते हुए संगठन के उद्देश्यों को, प्रभावी ढंग से प्राप्त करने, के लिए दूसरों से मिलकर एवं उनके माध्यम से कार्य करने की प्रक्रिया है। -क्रीटनर
  • प्रबंध यह जानने की कला है कि क्या करना है तथा उसे करने का सर्वोत्तम एवं सुलभ तरीका क्या है।-- एफ.डब्ल्यू.टेलर
प्रबंधन की विशेषताऍं -
प्रबंध एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है-
  • किसी भी संगठन के कुछ मूलाधार उद्देश्य होते हैं जिनके कारण उसका अस्तित्व है। यह उद्देश्य सरल एवं स्पष्ट होने चाहिएँ। प्रत्येक संगठन के उद्देश्य भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए एक फुटकर दुकान का उद्देश्य बिक्री बढ़ाना हो सकता है लेकिन ‘दि स्पास्टिकस सोसाइटी ऑफ इंडिया’ का उद्देश्य विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान करना है। प्रबंध संगठन के विभिन्न लोगों के प्रयत्नों को इन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु एक सूत्र में बाँधता है।
प्रबंध सर्वव्यापी है-
  •  संगठन चाहे आर्थिक हो या सामाजिक या फिर राजनैतिक, प्रबंध की क्रियाएँ सभी में समान हैं। एक पेट्रोल पंप के प्रबंध की भी उतनी ही आवश्यकता है जितनी की एक अस्पताल अथवा एक विद्यालय की है। भारत में प्रबंधकों का जो कार्य है वह यू- एस- ए-, जर्मनी अथवा जापान में भी होगा। वह इन्हें कैसे करते हैं यह भिन्न हो सकता है। यह भिन्नता भी उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज एवं इतिहास की भिन्नता के कारण हो सकती है।
प्रबंध बहुआयामी है-
प्रबंध एक जटिल क्रिया है जिसके तीन प्रमुख परिमाण हैं, जो इस प्रकार हैं-
कार्य का प्रबंध-
  • सभी संगठन किसी न किसी कार्य को करने के लिए होते हैं। कारखाने में किसी उत्पादक का विनिर्माण होता है तो एक वस्त्र भंडार में ग्राहक के किसी आवश्यकता की पूर्ति की जाती है जबकि अस्पताल में एक मरीज का इलाज किया जाता है। प्रबंध इन कार्यों को प्राप्य उद्देश्यों में परिवर्तित कर देता है तथा इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के मार्ग निर्धारित करता है। इनमें सम्मलित हैं-समस्याओं का समाधान, निर्णय लेना, योजनाएँ बनाना, बजट बनाना, दायित्व निश्चित करना एवं अधिकारों का प्रत्यायोजन करना।
लोगों का प्रबंध-
  •  मानव संसाधन अर्थात् लोग किसी भी संगठन की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं। तकनीक में सुधारों के बाद भी लोगों से काम करा लेना आज भी प्रबंधक का प्रमुख कार्य है। लोगों के प्रबंधन के दो पहलू हैं-
  • प्रथम तो यह कर्मचारियों को अलग-अलग आवश्यकताओं एवं व्यवहार वाले व्यक्तियों के रूप में मानकर व्यवहार करता है।
  • दूसरे यह लोगों के साथ उन्हें एक समूह मानकर व्यवहार करता है। प्रबंध लोगों की ताकत को प्रभावी बनाकर एवं उनकी कमजोरी को अप्रसांगिक बनाकर उनसे संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम कराता है।
परिचालन का प्रबंध-
  • संगठन कोई भी क्यों न हो इसका आस्तित्व किसी न किसी मूल उत्पाद अथवा सेवा को प्रदान करने पर टिका होता है। इसके लिए एक ऐसी उत्पादन प्रक्रिया की आवश्यकता होती है जो आगत माल को उपभोग के लिए आवश्यक निर्गत में बदलने के लिए आगत माल एवं तकनीक के प्रवाह को व्यवस्थित करती है। यह कार्य के प्रबंध एवं लोगों के प्रबंध दोनो से जुड़ी होती है।
  • प्रबंध एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है- प्रबंध प्रक्रिया निरंतर, एकजुट लेकिन पृथक-पृथक कार्यों (नियोजन संगठन, निर्देशन नियुक्तिकरण एवं नियंत्रण) की एक शृंखला है। इन कार्यों को सभी प्रबंधक सदा साथ-साथ ही निष्पादित करते हैं। तुमने ध्यान दिया होगा फैबमार्ट में सुहासिनी एक ही दिन में कई अलग-अलग कार्य करती हैं। किसी दिन तो वह भविष्य में प्रदर्शनी की योजना बनाने पर अधिक समय लगाती हैं तो दूसरे दिन वह कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने में लगी होती हैं। प्रबंधक के कार्यों में कार्यों की शृंखला समंवित है जो निरंतर सक्रिय रहती है।
प्रबंध एक सामूहिक क्रिया है-
  •  संगठन भिन्न-भिन्न आवश्यकता वाले अलग- अलग प्रकार के लोगों का समूह होता है। समूह का प्रत्येक व्यक्ति संगठन में किसी न किसी अलग उद्देश्य को लेकर सम्मिलित होता है लेकिन संगठन के सदस्य के रूप में वह संगठन के समान उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कार्य करते हैं। इसके लिए एक टीम के रूप में कार्य करना होता है एवं व्यक्तिगत प्रयत्नों में समान दिशा में समन्वय की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही आवश्यकताओं एवं अवसरों में परिवर्तन के अनुसार प्रबंध सदस्यों को बढ़ने एवं उनके विकास को संभव बनाता है।
प्रबंध एक गतिशील कार्य है-
  •  प्रबंध एक गतिशील कार्य होता है एवं इसे बदलते पर्यावरण में अपने अनुरूप ढालना होता है। संगठन बाह्य पर्यावरण के संपर्क में आता है जिसमें विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक तत्व सम्मिलित होते हैं सामान्यता के लिए संगठन को, अपने आपको एवं अपने उद्देश्यों को पर्यावरण के अनुरूप बदलना होता है। शायद आप जानते हैं कि फास्टफूड क्षेत्र के विशालकाय संगठन मैकडोनल्स ने भारतीय बाजार में टिके रहने के लिए अपनी खान-पान सूची में भारी परिवर्तन किए।
प्रबंध एक अमूर्त शक्ति है-
  •  प्रबंध एक अमूर्त शक्ति है जो दिखाई नहीं पड़ती लेकिन संगठन के कार्यों के रूप में जिसकी उपस्थिति को अनुभव किया जा सकता है। संगठन में प्रबंध के प्रभाव का भान योजनाओं के अनुसार लक्ष्यों की प्राप्ति, प्रसन्न एवं संतुष्ट कर्मचारी के स्थान पर व्यवस्था के रूप में होता है।
प्रबंधन का महत्‍व –
  • प्रबंध एक सार्वभौमिक क्रिया है जो किसी भी संगठन का अभिन्न अंग है। अब हम उन कुछ कारणों का अध्ययन करेंगे जिसके कारण प्रबंध इतना महत्त्वपूर्ण हो गया है-
  • प्रबंध सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होता है- प्रबंध की आवश्यकता प्रबंध के लिए नहीं बल्कि संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए होती है। प्रबंध का कार्य संगठन के कुल उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत प्रयत्न को समान दिशा देना है।
  • प्रबंध क्षमता में वृद्धि करता है- प्रबंधक का लक्ष्य संगठन की क्रियाओं के श्रेष्ठ नियोजन, संगठन, निदेशन, नियुक्तिकरण एवं नियंत्रण के माध्यम से लागत को कम करना एवं उत्पादकता को बढ़ाना है।
  • प्रबंध गतिशील संगठन का निर्माण करता है- प्रत्येक संगठन का प्रबंध निरंतर बदल रहे पर्यावरण के अंतर्गत करना होता है। सामान्यतः देखा गया है कि किसी भी संगठन में कार्यरत लोग परिवर्तन का विरोध करते हैं क्योंकि इसका अर्थ होता है परिचित, सुरक्षित पर्यावरण से नवीन एवं अधिक चुनौतीपूर्ण पर्यावरण की ओर जाना। प्रबंध लोगों को इन परिवर्तनों को अपनाने में सहायक होता है जिससे कि संगठन अपनी प्रतियोगी श्रेष्ठता को बनाए रखने में सफल रहता है।
  • प्रबंध व्यक्तिगत उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होता है- प्रबंधक अपनी टीम को इस प्रकार से प्रोत्साहित करता है एवं उसका नेतृत्व करता है कि प्रत्येक सदस्य संगठन के कुल उद्देश्यों में योगदान देते हुए व्यक्तिगत उद्देश्यों को प्राप्त करता है। अभिप्रेरणा एवं नेतृत्व के माध्यम से प्रबंध व्यक्तियों को टीम-भावना, सहयोग एवं सामूहिक सफलता के प्रति प्रतिबद्धता के विकास में सहायता प्रदान करता है।
  • प्रबंध समाज के विकास में सहायक होता है- संगठन बहुउद्देश्यीय होता है जो इसके विभिन्न घटकों के उद्देश्यों को पूरा करता है। इन सबको पूरा करने की प्रक्रिया में प्रबंध संगठन के विकास में सहायक होता है तथा इसके माध्यम से समाज के विकास में सहायक होता है। यह श्रेष्ठ गुणवत्ता वाली वस्तु एवं सेवाओं को उपलब्ध कराने, रोजगार के अवसरों को पैदा करने, लोगों के भले के लिए नयी तकनीकों को अपनाने, बुद्धि एवं विकास के रास्ते पर चलने में सहायक होता है।
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