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हिन्दी साहित्य स्मरणीय तथ्य- भाग 01

  • अपभ्रंश भाषा में लिखित रामचरित्र पउमचरिउ है।
  • परंपरा, शराणार्थी, अमर बल्लरी कहानी संग्रह अज्ञेय की रचनाएं हैं।
  • जयभारत, विष्णुप्रिया, एवं द्वापर मैथलीशरण गुप्त के काव्यग्रंथ हैं।
  • ग्यारह वर्ष का समय‘ कहानी के लेखक रामचंद्र शुक्ल हैं।
  • ‘कछुआ धरम निबंध चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी‘ का निबंध हैं।
  • देवकीनंदन खत्री का उपन्यास ‘ अनूठी बेगम‘ 1905 में प्रकाशित हुआ।
  • ‘तरूण के स्वप्न‘ एक आत्मकथा है।
  • ‘भाट भाष‘ डिंगल को कहते हैं।
  • कविवचन सुधा पत्रिका का संपादन भारतेन्दू ने किया था।
  • ‘ठलुआ क्लब‘ निबंध संग्रह गुलाब राय की रचना है।
  • लहरों का राजहंस मोहन राकेश की रचना है।
  • वक्रोक्तिजीवितम् के लेखक  आचार्य कुन्तक हैं।
  • हिन्दी साहित्य के इतिहास का सर्वप्रथम ग्रंथ फ्रेंच भाषा में लिखा गया था।
  • रिपब्लिक ग्रंथ के लेखक प्लूटों हैं।
  • त्यागपत्र उपन्यास के लेखक जैनेन्द्र हैं।
  • ‘कैमास वध‘ पृथ्वीराज रासों ग्रंथ का प्रमुख घटनाक्रम है।
  • आर्य परिवार की भाषाओं का वर्गीकरण ध्वनि के आधार पर सर्वप्रथम औस्कोली ने करने का प्रयास किया था।
  • ‘रस सि़द्धांतः स्वरूप और विश्लेषण‘ ग्रंथ के लेखक  डॉ. आनंदप्रकाश दीक्षित हैं।
  • जहां पहला वाक्य उपमेय और दूसरा वाक्य उपमान तथा उनके साधारण धर्मों में बिम्ब प्रतिबिंब का भाव हो वहां दृष्टांत अंलकार होता है।
  • जहां पर प्रत्यय के द्वारा प्रस्तुत में कोई विशेष औचित्य संबंधी चमत्कार उत्पन्न हो जाता है वहां पर प्रत्ययवक्रता होती है।
  • ‘साहित्य लहरी‘ सूरदास की रचना है।
  • ‘पाश्चात्य काव्य शास्त्र इतिहास, सिद्धांत और वाद‘ पुस्तक के लेखक डॉ. भागीरथ मिश्र  हैं।
  • भगवती वर्मा की कहानियां ‘इंस्टालमेंट‘ में संग्रहीत हैं।
  • दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा ‘ मद्रास‘ की स्थापना महात्मा गांधी ने की थी।
  • ‘संदेश रासक‘ खण्ड काव्य है।
  • काव्य विवेक, कविकुल कल्पतरू, काव्यप्रकाश आचार्य चिंतामणि की रचनाएं हैं।
  • अज्ञेय, फा्रयड के मनोविज्ञान से प्रभावित उपन्यासकार हैं।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के उत्तर मध्यकाल को  ‘रीतिकाल कहा  है।
  • रामचरितमानस अवधि भाषा में लिखा गया है।
  • पद्यप्रसून अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔद्य‘ की रचना है।
  • होमर यूनान का महाकवि हे।
  • कविता प्रभावशाली रचना है,जो पाठक या श्रोता के मन पर आनंददायी प्रभाव डालती है। काव्य के संबंध में यहा विचार आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का है।
  • आकाशद्वीप, प्रतिघ्वनि, एवं इंद्रजाल जयशंकर प्रसाद की रचना है।
  • ‘कविता हमारे परिपूर्ण क्षणों की वाणी है‘ यह कथन सुमित्रानंद पंत का है।
  • ‘लाजपत महिमा‘ जीवनी है।
  • मृगावती , कुतुबन की रचना है।
  • पश्चिमी सीमा की ‘मगही‘ भोजपुरी से प्रभावित है।
  • ‘भाषा और समाज‘ ग्रंथ के लेखक रामविलास शर्मा हैं।
  • आर्थर  कानन डायल से प्रभावित उपन्यासकार गोपालदास गहमरी हैं।
  • सेवासदन 1918 में प्रकाशित हुआ।
  • यात्री उपनााम से कविताएं लिखने वाले रचनाकार नागार्जुन थे।
  • आलवार संतो की संख्या 12 थी।
  • प्रियप्रवास खडी बोली में लिखा गया प्रथम महाकाव्य है।
  • संविधान की धारा 120 के अनुसार संसद का कार्य हिन्दी या अंग्रेजी में किया जाता है।
  • ‘प्रकृति के सुकुमार‘ कवि सुमित्रानंदन पंत का कहा जाता है।
  • ‘हिन्दी नवरत्न‘ के लेखक मिश्रबंधु हैं।
  • रामदहिन मिश्र कृृत ‘काव्य विमर्श‘ का प्रकाशन 1951 में हुआ था।
  • उत्साह आचार्य रामचंद शुक्ल का निबंध है।
  • रिटोरिक ग्रंथ अरस्तू द्वारा लिखा गया हैं।
  • ‘रूपक रहस्य‘ ग्रंथ के रचियता श्यामसुंदर दास हैं।
  • ‘सौन्दर्यमंलकार‘ आचार्य वामन का कथन है।
  • ‘कलम का मजदूरी‘ जीवनी प्रेमचंद के जीवन पर आधारित रचना है।
  • मसउद हसन खां हरियाणी बोली को मानक हिन्दी खड़ी बोली का आधार मानते हैं।
  • राय देवीप्रसाद ‘पूर्ण‘ ने ‘धारावान‘ शीर्षक से कालिदास के ‘मेघदूत‘ का अत्यंत सरस पद्यबद्ध अनुवाद किया है।
  • साहित्य में प्रयुक्त भाषा के आधार पर नामवर सिंह ने अपभ्रंश के 2 भेद बताये हैं।
  • शब्द की शक्तियां तीन प्रकार की होती हैं।
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