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भारत सामान्य परिचय,भारत की भौतिक संरचना, भारत की भूगर्भिक संरचना

  • भारत विषुवत रेखा के उत्तरी गोलार्ध मेँ स्थित है। देश का विस्तार उत्तर से दक्षिण तक 3,214 किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम तक 2933 किमी. है।
  • भारत की स्थलीय सीमा की लंबाई 15,200 किलोमीटर तथा मुख्य भूमि की समुद्र तटीय सीमा की लंबाई 61,00 किलोमीटर तथा, लक्षद्वीप समूह और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के समुद्र तट की कुल लंबाई 7516.6 किलोमीटर है।
  • भारत की स्थलीय सीमाएं पश्चिम मेँ अफगानिस्तान व पाकिस्तान को स्पर्श करती हैं जबकि उत्तर मेँ पाकिस्तान, चीन, नेपाल, उत्तर पूर्व मेँ भूटान तथा पूर्व मेँ बांग्लादेश एवं म्यांमार देशों से मिलती हैं।
  • भारत की सबसे लंबी सीमा 4096 किलोमीटर बांग्लादेश से स्पर्श करती है। सबसे छोटी स्थलीय सीमा अफगानिस्तान के साथ है।
  • भारत और पाकिस्तान की सीमा को स्पर्श करने वाले राज्य - जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात हैं। भारत एवं अफगानिस्तान की सीमा को जम्मू कश्मीर स्पर्श करता है।
डूरंड रेखाअफगानिस्तान और पाकिस्तान के मध्य सीमा रेखा (1893 में निर्धारित)
मैकमोहन रेखाभारत-चीन के बीच की सीमा रेखा (1914 में निर्धारित)
रेडक्लिफ रेखाभारत व पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा (1947 में निर्धारित)
  • भारत एवं चीन को स्पर्श करने वाले राज्य जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश हैं।
  • म्यांमार को स्पर्श करने वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड,  मणिपुर और मिजोरम हैं।
  • बांग्लादेश को स्पर्श करने वाले राज्य मिजोरम, त्रिपुरा, असम, मेघालय, एवं पश्चिम बंगाल हैं।
  • नेपाल को स्पर्श करने वाले राज्य, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम हैं।
  • भूटान को स्पर्श करने वाले राज्य सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश हैं।
  • अरब सागर के तट पर स्थित भारतीय राज्य क्रमशः गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तथा केरल हैं, जबकि बंगाल की खाड़ी की तट पर स्थित भारतीय राज्य तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल हैं।
  • गुजरात सबसे अधिक समुद्र तटीय सीमा वाला राज्य है जबकि गोवा की समुद्र तटीय सीमा सबसे छोटी है।
बुर्जिल दर्रापाक अधिकृत कश्मीर और श्रीनगर को जोड़ता है
जोजिला दर्राश्रीनगर को लेह से जोड़ता है
शिपकी लासतलज का गार्ज, हिमाचल प्रदेश और तिब्बत को जोड़ता है
बारा लाचा लाजम्मू कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश को जोड़ता है
नीति एवं लिपूलेख दर्राउत्तराखंड एवं तिब्बत को जोड़ता है
नाथूला एवं जीपलासिक्किम एवं तिब्बत को जोड़ता है
बुमला, टुंगला, बोमडिलाअरुणाचल प्रदेश एवं तिब्बत को जोड़ता है
  • 82°30’ पूर्वी देशांतर रेखा इलाहाबाद नैनी (उत्तर प्रदेश) से होकर गुजरती है।
  • भारत का दक्षिणतम बिंदु इंदिरा प्वाइण ग्रेट निकोबार द्वीप मे अवस्थित है। इंदिरा प्वाइण्ट को पिग्मेलियन प्वाइण्ट, पारसन प्वाइण्ट व लौहचिंग के नाम से भी जाना जाता है तथा भारत की मुख्य भूमि का उत्तरतम बिंदु इंदिरा कोल है जो कि जम्मू कश्मीर मेँ स्थित है।
  • भारत का पश्चिमी बिंदु राजहर सरक्रीक (गुजरात)पूर्वी बिंदु वलागू (अरुणाचल प्रदेश) और मुख्य भूमि की दक्षिणी सीमा कन्याकुमारी (तमिलनाडु) मेँ है।
  • अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह मरकत द्वीप (एमराल्ड आईलैंड) के नाम से प्रसिद्ध है।
  • लक्षद्वीप समूह में लक्काद्वीप, मिनीकाय और अमीनीदीव प्रमुख हैं।
  • पांडिचेरी (पुदुचेरी) केंद्र शासित क्षेत्र के अंतर्गत माहे (केरल) कराईकल (तमिलनाडु) यमन (आंध्र प्रदेश) स्थित हैं।
  • भारत और चीन के बीच की सीमा को मैकमोहन रेखा, जो कि अरुणाचल प्रदेश के साथ चीन की सीमा से स्पर्श करती है। भारत और पाकिस्तान के बीच रेडक्लिफ रेखा एवं पाक जल डमरु मध्य श्रीलंका को भारत से पृथक करती है तथा ग्रेट चैनल इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप और ग्रेट निकोबार द्वीप को पृथक करता है।
  • देश मेँ सर्वाधिक जिलो की संख्या उत्तर प्रदेश (75) में है, तहसीलोँ की सर्वाधिक संख्या आंध्र प्रदेश राज्य (1125 - तेलंगाना बनने से पूर्व) मेँ है।
  • देश मेँ नगरो की सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश राज्य मेँ है, गावों की सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश राज्य 1,07,452 मेँ है।
  • भारत की सबसे लंबी स्थलीय सीमा 4096.7 किमीं बांग्लादेश को, जबकि सबसे कम स्थलीय सीमा अफगानिस्तान को मात्र 106 किलोमीटर स्पर्श करती है।
  • गृह मंत्रालय, भारत सरकार के वार्षिक प्रतिवेदन 2007-08 के अनुसार भारत के कुल 17 राज्य पड़ोसी देशोँ की सीमा से लगे हैं।
  • भारत के 10 राज्योँ की सीमाएं समुद्र तट से मिलती हैं। सबसे लंबी तट रेखा गुजरात की 1663 किलोमीटर स्पर्श करती है। सबसे छोटी सीमा मात्र 37 किलोमीटर लक्षद्वीप समूह को स्पर्श करती है।
  • भारत की प्रादेशिक समुद्री सीमा या क्षेत्रीय सागर आधार रेखा से 12 समुद्री मील की दूरी तक है, जबकि अविच्छिन्न मंडल या संलग्न क्षेत्र 24 समुद्री मील तक है। इस क्षेत्र मेँ भारत को साफ सफाई, सीमा शुल्क की वसूली और वित्तीय आधार हैं।
  • देश का अनन्य आर्थिक क्षेत्र आधार रेखा से 100 समुद्री मील तक है, जिसमें भारत की वैज्ञानिक अनुसंधान व नये द्वीपों के निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनो के विदोहन की छूट मिली हुई है।
  • देश के लगभग 10.6 % क्षेत्र पर पर्वत, 18.5 % क्षेत्र पर पहाडियां, 27.7 % क्षेत्र पर मैदान है।
  • माउंट एवरेस्ट हिमालय पर्वतमाला की सबसे ऊची श्रृंखला है, जबकि K(गॉडविन ऑस्टिन) काराकोरम पर्वत माला की सबसे ऊंची चोटी है जो पाक अधिकृत कश्मीर मेँ है, अतः कंचनजंघा भारत की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला है।
  • अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वतमाला है।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रायद्वीपीय पठार जी प्रदेश देश का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश है, यह गोंडवाना लैंड का भाग है।
  • सतपुड़ा एवं अजंता की पहाड़ियोँ के बीच के क्षेत्र को रवांडा कहते हैं।
  • मालवा का पठार लावा निर्मित काली मिट्टी से बना है। इस पठार से होकर चंबल, काली सिंहा, पार्वती, बेतवा, माही और निताल नदियां बहती हैं।
  • दक्कन के पठार को महाराष्ट्र पठार भी कहते हैं। यह बेसाल्ट चट्टानोँ से बना है प्रायद्वीप भारत मेँ स्थित सतपुड़ा के दक्षिण मेँ दक्कन पठार का विस्तार है।
  • कर्नाटक पठार से कृष्णा, तुंगभद्रा एवं कावेरी नदियां प्रवाहित होती हैं। मलनाड़ इसका पश्चिमी भाग है।
  • तेलंगाना पठार हैदराबाद एवं सिकंदराबाद मेँ अवस्थित है।
  • नर्मदा एवं ताप्ती नदियों के बीच मेँ सतपुड़ा पर्वत माला स्थित है। इसकी सबसे ऊंची चोटी धूपगढ़ है, जो 1350 मीटर ऊंची है, समीप ही पंचमढ़ी पर्यटक स्थल स्थित है।
  • सतपुड़ा के पश्चिमी भाग को राजपीपला, मध्यवर्ती भाग को महादेव एवं पूर्वी छोर को अमरकंटक कहते हैं।
  • मेघालय का सर्वोच्च शिखर नोकरेक है, मेघालय या शिलांग पठार को भारतीय पठार से अलग करने वाली जलोढ़ प्रदेश की चौड़ी पट्टी गारो-राजमहल विदर है।
  • गुरु शिखर अरावली पर्वत की सबसे ऊँची चोटी है यह 1,722 मीटर ऊंची है। यह राजस्थान राज्य के सिरोही जिले मेँ स्थित है।
  • पश्चिमी घाट को सह्याद्री भी कहते हैं। थालघाट, भोरघाट, पालघाट और शेनकोटा गेप पश्चिमी घाट के दर्रें हैं।
  • कलसुबाई (1,644 मी.) और महाबलेश्वर (1430 मी.) उत्तरी सहयाद्रि की ऊँची पर्वत चोटियां हैं। थालघाट एवं भोरघाट दर्रे इसी भाग मेँ स्थित हैं। गोदावरी, भीमा एवं कृष्णा नदियों का उद्गम उत्तरी सह्याद्री से होता है।
  • कुद्रेमुख (1,892 मी.), पुष्पागिरी (1,714 मी.) मध्य सह्याद्री की कुछ प्रमुख चोटियां हैं। तुंगभद्रा और कावेरी नदियों का उद्गम इसी भाग से होता है।
  • अनाईमुड़ी अन्नामलाई पर्वत श्रेणी का सर्वोच्च शिखर है  एवं यह दक्षिण भारत का भी सर्वोच्च पर्वत शिखर है। दोद्दाबेटा नीलगिरी पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी है।
  • कच्छ प्रायदीप मेँ गिरनार (1,117 मी.) मीटर सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है।
  • कुल्लू घाटी धौलाधार पर्वत श्रेणी तथा वृहत हिमालय के बीच मेँ स्थित है। व्यास नदी इसी काठी से होकर बहती है। कुल्लू घाटी सेब की कृषि के लिए प्रसिद्ध है।
  • पीरपंजाल और बनियाल दर्रे मध्य हिमालय मेँ स्थित हैं। बनियाल दर्रे से होकर जम्मू-कश्मीर मार्ग गुजरता है।
  • बारा लाचा ला दर्रा लेह को कुल्लू मनाली और केलांग से जोड़ता है। बुर्जिल दर्रा गिलगिट को श्रीनगर से, जोजिला दर्रा श्रीनगर लेह मार्ग से होकर गुजरता है।
  • काराकोरम दर्रे द्वारा भारत तथा तारिम बेसिन के बीच संपर्क स्थापित होता है।
  • मध्य-हिमालय के उत्तरी ढालोँ पर पाए जाने वाले घास के छोटे-छोटे मैदानों को मर्ग कहते हैं, जिनमें गुलमर्ग, सोनमर्ग, टंगमर्ग प्रमुख रुप से हैं।
  • बाल्टोरो, बाटुरा, सियाचिन और हिस्पार हिमालय के चार प्रमुख हिमनद हैं। पार हिमालय अथवा तिब्बती हिमालय मेँ लद्दाख, जास्कर, कैलाश काराकोरम पर्वत श्रेणी मेँ शामिल हैं।
  • डाफाबम (4,578 मी.) मिशमी पहाडियोँ तथा सारामती (3,826 मी.) नागा पहाड़ियों की सबसे ऊंची चोटियां हैं।
  • पूर्वी तट के उत्तरी भाग को उत्तरी सरकार तथा दक्षिण भाग को कोरोमंडल तट के नाम से जाना जाता है।
  • चेन्नई से 80 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के नेल्लौर जिले के पुलीकट झील व बर्मिंघन नहर के बीच श्रीहरिकोटा स्थित है।
  • बंगाल की खाड़ी के मुख्य द्वीपों मेँ न्युमूर, गंगासागर, श्रीहरिकोटा, पवन और बैरन प्रमुख हैं। अरब सागर के मुख्य द्वीपों में दीव, गांधोर, एलीफैंटा, मिनीकाय और विलिंगटन मुख्य हैं।
  • अंडमान निकोबार की सबसे ऊंची चोटी सैडल चोटी (738 मी.) है। अंडमान मेँ दो ज्वालामुखी द्वीप हैं - बैरन (भारत का एकमात्र जीवित ज्वालामुखी) एवं नारकोंडम।
  • अंडमान निकोबार द्वीप समूह मेँ कुल 224 द्वीप (अंडमान-205, निकोबार-19) हैं। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह 10° चैनल द्वारा अलग होते हैं।
  • लक्षद्वीप मेँ कुल 25 दीप समूह हैं, जिनमें 11 अधिवासित हैं, लक्षद्वीप समूह का सबसे बडा द्वीप मिनीकाय है। यह 9° चैनल जलधारा द्वारा शेष द्वीपों से अलग होता है, लक्षद्वीप एवं मालद्वीप 8° चैनल जलधारा से परस्पर अलग होते हैं।
  • लक्षद्वीप के ऊपरी भाग को अमीनदीवी कहते हैं, जबकि दक्षिणी भाग को कन्नानोर के नाम से जाना जाता है।
चट्टानोँ का वर्गीकरण
  • भारत मेँ चट्टानोँ के कई उप समूह पाए जाते हैं और कुछ उप समूहोँ को मिलाकर समूह का निर्माण होता है। सामान्यतः भारतीय चट्टानोँ का वर्गीकरण इस प्रकार से है – आर्कियन क्रम की चट्टानेँ, धारवाड़ क्रम की चट्टानेँ, कुडप्पा क्रम की चट्टानेँ, विन्ध्य क्रम की चट्टानेँ, गोंडवाना क्रम की चट्टानेँ, दक्कन ट्रेप टर्शियरी क्रम की चट्टानें।
  • आर्कियन क्रम की चट्टानोँ का निर्माण पृथ्वी के सबसे पहले ठंडे होने पर हुआ। ये रवेदार चट्टानें हैं, जिनमें जीवन का अभाव है। यह नीस, ग्रेनाइट, और शिष्ट प्रकार की हैं। इनका विस्तार कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, छोटा नागपुर का पठार तथा राजस्थान के दक्षिण पूर्वी भाग पर है।
  • धारवाड क्रम की चट्टानोँ के निर्माण के निर्माण आर्कियन क्रम की चट्टानोँ से प्राप्त हुए हैं। यहां रुपांतरित तथा स्तरभ्रष्ट चट्टान है। इनमें जीवाशेष नहीँ पाए जाते हैं। यह प्रायद्वीप एवं वाह्य प्रायद्वीप दोनों मेँ पाई जाती हैं।
  • धारवाड क्रम की चट्टानेँ दक्षिण दक्कन प्रदेश मेँ उत्तरी कर्नाटक से कावेरी घाटी तक (शिमोगा जिले मेँ) पश्चिमी हिमालय की निचली घाटी मेँ मिलती है।
  • मध्यवर्ती एवं पूर्वी दक्कन प्रदेश मेँ नागपुर व जबलपुर मेँ सासर श्रेणी, बालाघाट व भटिंडा मेँ चिपली श्रेणी, रीवा, हजारीबाग, आदि में गोंडाराइट श्रेणी तथा विशाखापत्तनम मेँ कूदोराइट श्रेणी नाम से विस्तृत हैं।
  • कुडप्पा क्रम की चट्टानोँ का नामकरण आंध्र प्रदेश के कुडप्पा जिले के नाम पर हुआ, सामान्यतः ये चट्टानें 2 भागों में विभक्त हैं – 1. निचली कुडप्पा चट्टानें, 2. उपरी कुडप्पा चट्टानें।
  • निचली कुडप्पा चट्टानें पापाधानी एवं चेधार श्रेणी प्रमुख चट्टानेँ है, उपरी कुडप्पा चट्टानें कृष्णा व नल्लामलाई श्रेणी की प्रमुख चट्टानें हैं, ये चट्टानें लगभग 22,000 वर्ग किलोमीटर मेँ फैली हैं तथा आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु तथा हिमालय के कुछ क्षेत्रों मेँ स्थित हैं।
  • विंध्यन क्रम की चट्टानोँ का नाम विंध्याचल के नाम पर पडा है। यह परतदार चट्टानेँ हैं तथा इनका निर्माण जल निक्षेपों से हुआ है। यह 5 प्रमुख क्षेत्रोँ मेँ पाई जाती हैं –
  1. सोन नदी की घाटी मेँ इन्हें सेमरी के नाम से पुकारते हैं।
  2. आंध्र प्रदेश के दक्षिणी पश्चिमी भाग मेँ करनूल श्रेणी मेँ पाई जाती हैं।
  3. भीमा नदी घाटी मेँ इन्हें भीमा श्रेणी कहते हैं।
  4. राजस्थान मेँ जोधपुर तथा चित्तौरगढ़ में यह पलनी श्रेणी के रुप मेँ विस्तृत हैं।
  5. उपरी गोदावरी घाटी तथा नर्मदा घाटी के उत्तर मेँ मालवा बुंदेलखंड प्रदेश मेँ इन चट्टानोँ का क्षेत्र विस्तृत है।
  • गोंडवाना क्रम की चट्टानेँ दामोदर नदी घाटी मेँ राजमहल पहाड़ियोँ तक विस्तृत हैं, महानदी की घाटी मेँ महानदी श्रेणी, गोदावरी की सहायक नदियां जैसे – वेनगंगा व वर्धा की घाटियोँ मेँ, प्रायद्वीप भारत के अन्य क्षेत्रोँ मेँ यह कच्छ, काठियावाड़, पश्चिम राजस्थान, मद्रास, गुंटूर, कटक, राजमहेंद्री, विजयवाड़ा, तिरुचिरापल्ली और रामनाथपुरम मेँ मिलती हैं।
  • दक्कन ट्रेप का निर्माण काल अपर क्रिटेशियस से इयोसीन काल तक माना जाता है, प्रायद्वीपीय भारत मेँ ज्वालामुखी विस्फोट के फलस्वरुप दरार उद्गार के रुप मेँ लावा निकला जिसने दक्कन ट्रेप के मुख्य पठार की आकृति को जन्म दिया। दक्कन ट्रेप मुख्यतः बेसाल्ट व डोलोराइट प्रकृति की है। चट्टानें काफी कठोर हैं इनके कटाव के कारण चट्टान चूर्ण  बना है, जिससे काली मिट्टी का निर्माण हुआ है यही मिट्टी कपास मिट्टी या रेगुर मिट्टी भी कहलाती है। दक्कन ट्रेप महाराष्ट्र गुजरात मध्यप्रदेश मेँ फैला है तथा कुछ क्षेत्र झारखंड एवं तमिलनाडु मेँ अवस्थित है।
  • टर्शियरी क्रम की चट्टानोँ का निर्माण इयोसीन युग से लेकर प्लायोसीन युग की अवधि मेँ हुआ है। भारत के लिए इसका अत्यधिक महत्व है क्योंकि इसी काल मेँ भारत ने वर्तमान रुप धारण किया था।
  • टर्शियरी चट्टानेँ वाह्य प्रायद्वीपीय भू-भाग मेँ प्रमुख रुप से पाई जाती हैं। पाकिस्तान मेँ यह बलूचिस्तान के मकरान तट से लेकर सुलेमान किर्थर श्रेणी, हिमालय पर्वत से होती हुई म्यांमार के अराकानयोमा पर्वत श्रेणी तक फैली हैं।

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