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73वें संशोधन अधिनियम, 1993

पंचायती राज 
  • पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम, तालुका और जिला आते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राजव्यवस्था आस्तित्व में रही है। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राजवस्वस्था लागू की गई।
संवैधानिक प्रावधान
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 मेंं राज्यों को पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया है। 1991 में संविधान में 73 वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 करके पंचायत राज संस्था को संवैधानिक मान्यता दे दी गयी हैं-
  • बलवंत राय ंमंहता समिति की सिफारिशें (1957) –
  • अशोक मेहता समिति की सिफारिशें (1977)-
  • ग्राम सभा को ग्राम पंचायत के अधीन किसी भाी समिति की जाँच करने का अधिकार
पंचायती राज पर एक नजर

  • 24 अप्रेैल 1993 भारत में पंचायती राज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मार्गचिन्ह था क्योंकि इसी दिन संविधान (73 वां संशोधन) अधिनियम, 1992 के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओँ को संवैधानिक दर्जा हासिल कराया गया और इस तरह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के स्वप्न को वास्तविकता में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।
73वें संशोधन अधिनियम, 1993 
  • एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्रामं पंचायत, पंचायत समिति या मध्यवर्ती पंचायत तथा जिला पंचायत)
  • ग्राम स्तर परग्राम सभा की स्थापना
  • हर पांच साल में पंच्यातों के नियमित चुनाव
  •  अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों पर आरक्षण
  •  महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों का आरक्षण
  • पंचायतों की निधियों में सुधार के लिए उपाय सुझाने हेतु राज्य वित्त आयोगों का गठन
  • राज्य चुनाव आयोग का गठन
  • 73वां संशोधन अधिनियम पंचायतों को स्वशासन की संस्थाओं के रूप में काम करने हेतु आवश्यक शक्तियाँ और अधिकार प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को अधिकार प्रदान करता है। ये शक्तियां और अधिकार इस प्रकार हो सकतें हैंः
  • संविधान की ग्यारहवीं अनुसीजी में सूचीबध्द 29 विषयों के संबंध में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाँ तैयार करना और उनका निष्पादन करना
  • कर. डयूटीज. टोंल, शुल्क आदि लगाने और उसे वसूल करने का पंचायतों को अधिकार
  • राज्यों द्वारा एकत्र करों, ड्यूटियों, टोल और शुल्कों का पंचायतों को हस्तांतरण
ग्राम सभा

  • ग्राम सभा किसी एक गांव या पंचायत का चुनाव करने वाले गांवों के समूह की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों से मिलकर बनी संस्था है।गतिशील और प्रबुध्द ग्राम सभा पंचायती राज की सफलता के केंद्र में होती है।
इस विभाग  के अंतर्गत संस्थान और संगठन
  • राज्य आजीविका फोरम भोपाल मध्य प्रदेश
  • ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद (नरेगा, मध्यप्रदेश). भोपाल
  • ग्रामीण आजीविका परियोजना भोपाल
  • संजय गाँधी संस्थान. एस.जी.आई.पंचमढ़ी
  • सामाजिक ऑ़डिट
  • जिला पंचायत अशोक नगर

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