मध्यप्रदेश में खेलकूद { Sports in MP }

मध्य प्रदेश मे खेलकूद

मध्यप्रदेश में खेलकूद

मध्य प्रदेश राज्य के प्रमुख स्टेडियम MP Ke Pramukh Stadium-

ऐशबाग स्टेडियम    
रूपसिंह स्टेडियम
नेहरू स्टेडियम
तॉत्या टोपे स्टेडियम
अभय खेल प्रशाल
ऊषा राजे क्रिकेट स्टेडियम
ठाकुर रणमत सिंह स्टेडियम
होलकर स्टेडियम
पं. रविशंकर शुक्ल स्टेडियम
रानीताल क्रिकेट स्टेडियम    
भोपाल
ग्वालियर
इंदौर
भोपाल
इंदौर
इंदौर
रीवा
इंदौर
जबलपुर
जबलपुर

मध्यप्रदेश में खेलकूद MP Sports One Liner Gk
  1. राज्य में खेल गतिविधियों के विकास हेतु बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। 1 अक्टूबर, 1975 को खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय की  स्थापना की गई। यह विभाग अपनी समस्त गतिविधियां मध्य प्रदेश राज्य क्रीड़ा परिषद के निर्देशानुसार करता है।
  2. 1981 में मध्यप्रदेश राज्य क्रीड़ा परिषद  को समाप्त कर  अलग से खेल एवं कल्याण विभाग की स्थापना की गई है।
  3. भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय केन्द्र की स्थापना गौरा गांव भोपाल में की गई है। राज्य खेल प्राधिकरण का अध्यक्ष राज्य सरकार का खेल एवं युवा कल्याण मंत्री होता है।
  4. राज्य में पुरूष हॉकी के राज्य स्तरीय दो प्रमुख संगठन हैं 1. भोपाल हॉकी एसोसिएशन भोपाल तथा 2 मध्यप्रदेश हॉकी एसोसिएशन जबलपुर।
  5. राज्य में महिला हॉकी के राज्य स्तरीय तीन संगठन थे- 1 न्यू मध्यप्रदेश वीमेन्स हॉकी एसोसिएशन भोपाल 2. मध्य भारत महिला हॉकी एसोसिएशन ग्वालियर,  3 महाकौशल महिला हॉकी ऐसोसिएशन जबलपुर  थे, वर्तमान में हॉकी इंडिया एकमात्र संगठन है।
  6. हॉकी मध्यप्रदेश 21 अगस्त 2014 को हॉकी इंडिया का 23वॉ ऐसोसिएट सदस्य  बना है।
  7. मध्यप्रदेश हॉकी ऐसोसिएशन का मुख्यालय प्रदेश के जबलपुर नगर में स्थित है।
  8. भोपाल स्थित तात्या टोपे स्टेडियम में खेल संग्रहालय बनाया गया है।
  9. कृत्रिम घास ( एस्ट्रोटर्फ ) वाल एकमात्र स्टेडियम ऐशबाग भोपाल में स्थित है।
  10. मध्यप्रदेश बैडमिंटन ऐसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1946 में जबलपुर में की गई थी, लेकिन बाद में इसका मुख्यालय इंदौर स्थानांतरित कर दिया गया।
  11. म.प्र. में बैडमिंटन खेल की अधिकारित शुरूआत 19 अक्टूबर 1946 को म.प्र. बैडमिंटन ऐसोसिएशन की स्थापना के साथ हुई, जिसका मुख्यालय जबलपुर बनाया गया था,  जिसे स्थानांतरित कर इंदौर बनाया गया है।
  12. वर्तमान मध्यप्रदेश के पूर्व मध्यप्रदेश के घटक मध्यभारत में 1947 में मध्यभारत बैडमिंटन ऐसोसिएशन की स्थापना हुई, जिसका मुख्यालय ग्वालियर था।
  13. मध्यप्रदेश शासन ने अपनी अपनी खेल नीति 1989 में घोषित की थी और सबसे नवीन खेल नीति 2005 में घोषित की है।
  14. मध्यप्रदेश शासन की 2005 की नवीन खेल नीति में मध्यप्रदेश राज्य क्रीड़ा परिषद को समाप्त कर दिया गया है और उसके स्थान पर राज्य खेल प्राधिकरण अस्तित्व में लाया गया है।
  15. राष्ट्रीय क्रीड़ा परिषद पटियाला के सहायोग से मध्यप्रदेश भोपाल में राज्य स्तरीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान का संचालन किया जा रहा है।
  16. मध्यप्रदेश टेबल टेनिस ऐसोसिएशन की  स्थापना वर्ष 1957 में जबलपुर में हुई थी, जिसका मुख्यालय 1972-73 में इंदौर स्थानांतरति कर दिया गया ।
  17. मध्यप्रदेश का पहला खेल क्लब क्रिकेट का था, जो पारसी क्लब  के नाम से 1890 में स्थापित किया गया था।
  18. मध्यप्रदेश में हॉकी के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे और बैतूल के सासंद बने असलम खान ने टूहेल विथ हॉकी पुस्तक लिखी।
  19. वर्तमान मध्यप्रदेश क्रिकेट ऐसासिएशन का पूर्व नाम होल्कर क्रिकेट ऐसासिएशन था, जो सन 1941 में सी.के. नायडू की अध्यक्षता में महाराजा यशवंत राव होल्कर ने गठित किया था।
  20. मध्यप्रदेश में पहले आवासीय खेलकूद विद्यालय की स्थापना प्रदेश के सीहोर नगर में की गई । जबकि शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय ग्वालियर में है।
  21. मध्यप्रदेश में पहली क्रिकेट प्रतियोगिता डेली शील्ड टूर्नामेंट 1913 में कर्नल डेली के नाम से प्रारंभ हुई थी, जबकि रणजी ट्रॅाफी मध्यप्रदेश में 1934 प्रारंभ हुई।
  22. मध्यप्रदेश में विश्वामित्र खेल पुरस्कार की स्थापना 1994 में की गई। यह पुरस्कार ऐसे खेल प्रशिक्षक को प्रदान किया जाता है जिसने विगत वर्षों में दो खिलाडि़यों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में पदक हासिल करवाया हो।
  23. 1997 में स्थापित मध्यप्रदेश का एकलव्य पुरस्कार 19 वर्ष से कम आयु वर्ग के खिलाड़ी को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है।
  24. राज्य के मूल निवासियों को दिये जाने वाले विक्रम पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1990 में की गई थी।
  25. मध्यप्रदेश शासन का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार विक्रम है जिसके विजेता खिलाड़ी को एक लाख नगद ब्लेजर, टाई, प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र आदि भी दिये जाते हैं।
  26. महिला हॉकी में प्रदेश के खिलाडि़यों को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए ग्वालियर में जुलाई, 2006 में महिला हॉकी एकेडमी की स्थापना की गई।
  27. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 20 कि.मी. की दूरी पर सतगढ़ी में सर्वसुविधा युक्त खेलगॉव निर्मित किया जा रहा है।
  28. सितम्बर 2006 में प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित बड़ी झील के जल क्रीड़ा केन्द्र पर पर देश का पहले सेलिंग स्कूल की स्थापना की गई है।
  29. मलखंब भारत का प्राचीनतम देशी खेल है जिसे मध्यप्रदेश शासन ने राज्य  खेल का दर्जा दिया है।
  30. मध्यप्रदेश के इंदौर शहर को व्यावसायिक राजधानी होने के साथ-साथ खेल राजधानी होने का दर्जा भी प्राप्त है।

म.प्र. की प्रमुख खेल संस्थाएँ MP Ki Khel Sansthyen-

खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग
पारसी क्रिकेट क्लब
मध्यप्रदेश बैडमिंटन ऐसोसिएशन
मध्यप्रदेश टेबल टेनिस ऐसोसिएशन
मध्यप्रदेश होल्कर क्रिकेट ऐसो-
महिला हॉकी ऐकेडमी
मध्यप्रदेश खेल संचालनालय
1975 में स्थापना मुख्यालय भोपाल
1890 में स्थापना मुख्यालय इंदौर
1946 में स्थापना वर्तमान मुख्यालय इंदौर
1957 में स्थापना वर्तमान मुख्यालय इंदौर
1941 में स्थापना वर्तमान इंदौर
2006 में स्थापना मुख्यालय ग्वालियर
1975 में स्थापना मुख्यालय भोपाल
मध्यप्रदेश में खेल संगठनों का विकास Khel Sangthano ka MP me Vikash
  • मध्यप्रदेश में क्रिकेट संगठन- प्रदेश में क्रिकेट की शुरूआत 1890 ई. में इंदौर में पारसी क्लब की स्थापना से हुई। वर्ष 1941 में महाराजा यशवंत राव ने कर्नल सी.के. नायडु के नेतृत्व में होल्कर क्रिकेट ऐसोसिएशन की स्थापनाा की। होलकर क्रिकेट ऐसासिएशन ही बाद में मध्य प्रदेश क्रिकेट ऐसासिएश बनी। वर्तमान में यह संगठन राज्य में शीर्ष क्रिकेट संगठन है। यह प्रदेश में विभिन्न अंचलों में रणजी ट्रॉफी हेतु खिलाडि़यों को चयन करता है।
  • मध्यप्रदेश में बैडमिण्टन ऐसोसिएशन- प्रदेश में बैडमिण्टन की शुरूआत वर्ष 1946 में ग्वालियर में बैडमिण्टन ऐसोसिएशन की स्थापना के साथ हुई। वर्तमान में इसका मुख्यालय  इंदौर में है।
  • टेबल टेनिस ऐसोसिएशन- प्रदेश में टेबल टेनिस ऐसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1957 में जबलपुर में हुई। वर्तमान में इंदौर में टेबल टेनिस ऐसोसिएशन का मुख्यालय है।
  • हॉकी- मध्यप्रदेश में हॉकी के विकास में भोपाल वारण्रर्स, भगवन्त क्लब, जीवाजी क्लब, कल्याण मिल क्लब को विशेष योगदान रहा है। ग्वालियर क्षेत्र से हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के अनुज रूपसिंह अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं।  राज्य के नरसिंहपुर में हॉकी का छात्रावास बनाया गया है। इसका एकमात्र उद्देश्य 13 से 18 वर्ष के बीच के आयु के प्रतिभावन खिलाडि़यों को तकनीकी ढंग से प्रशिक्षत कर उन्हें राज्य राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान खिलाडि़यों को भोजन, वस्त्र, आवास, व शिक्षा की निःशुल्क व्यवस्था का प्रावधान है।

मध्यप्रदेश  के प्रमुख खिलाड़ी MP ke Pramukh Khiladi

  • म.प्र. में क्रिकेट के प्रमुख खिलाड़ी- मुश्ताक अली, सी.के. नायडू , मेजर गलदाले, चन्दू सरवटे, अशोक जगदाले, कीर्ति पटेल, गलरेज अली, राजेश्वरी ढोलकिया, सुबोध सक्सेना, भगवान दास, संजीव राय, अमिताभ विजयवर्गीय, नरेन्द्र हिरवानी, सहैल अंसारी, अभय खुरसिया, आसिफ, विक्रम दुबे।
  • म.प्र. में फुटबॉल के प्रमुख खिलाड़ी- एम्ब्रूस, हफीस अहीर तरसेम, माईल, राजू सैनी, ताराचन्द्र नवाब, नेमीचंद नरेश, गुरूप्रसाद शर्मा, सरायपाली, रामखिलावन शर्मा मानसिंह तैलंग आदि।
  • म.प्र. में हॉकी के प्रमुख खिलाड़ी-  खम्मबन सिंह, गुरूबख्श सिंह, शेर खॉ, लतीफ शकू, बन्ने खा, इस्माइल अब्बासी,  असलम शेर, कमर मिया, यूनुस अली खान, रोजरियो, शंकर, लक्ष्मण, रूपसिंह, नीता डूमरे, मीर रंजन नेगी, वाला पवॉर, अरविन्द लाल, शिवाजी पवॉर, तुलाराम यादव, जलील अहमद नैनपुर, मोहन खुर्शीद, जलालुद्दीन, शहाबुद्दीन , हसन खॉन, समीद दादा आदि।
  • म.प्र. में कुश्ती के प्रमुख खिलाड़ी- विश्वविजयी गामा (दतिया) इमा बख्श, तेजसिंह, विजयसिंह, गोपाल सिंह यादव, पप्पू यादव।
  • म.प्र. में वॉलीबॉल के खिलाड़ी- नईमुद्दीन हन्फी,  योगेश शर्मा, मो. अकरम खॉन, हरिराम जाकड़, कीर्तेश त्रिवेदी, राजेन्द्र राय, दीपक मिश्र, शैलेश तिवारी, राजेश शुक्ल, कु. मधुबाला ठाकुर, कु. रूबीना दयाला, विकास शर्मा ।
  • म.प्र. में टेबल टेनिस के खिलाड़ी- जाले गोदरेज, रीता जैन, स्न्ग्धिा मेहता, कर्म मानिक, पंकज घाघरिया, पंकज सत्पथी, ज्योति मेहता, रिंकू आचार्य।
  • म.प्र. में बैडमिण्टन के खिलाड़ी- बी. एम. तापडि़या, सी.डी. देवरस, एम तॉबे, अशोक सैदा, प्रणव बोस , रमन गुप्ता, पार्थ गांगुली, संजय मिश्रा, सीमा भंडारी, कविता आसना।
  • मध्यप्रदेश में जुड़ो कराटे के खिलाड़ी- दीपक ठाकुर, अनीस मैमन, आरती परौहा, प्रीति अरोरा, भारती तिवारी,  राहुल देव, रेशमा दीयाना, अजय साहु, राजेश दोशी, सईद खॉन आदि।

मध्यप्रदेश खेल नीति – 2005


  • प्रदेश में प्रथम खेल नीति वर्ष 1989 में बनाई गई थी तथा 5 वर्ष पश्चात् उसका मूल्यांकन कर वर्ष 1994 में पुन: नई खेल नीति बनाई गई। इस खेल नीति में प्रदेश के खेलों के विकास के विभिन्न पहलू शामिल थे परन्तु उक्त नीति का कार्यान्वयन सीमित वित्तीय संसाधन होने के कारण पूरी तरह नहीं हुआ है। अत: नीति में निर्धारित उद्धेश्यों और लक्ष्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक था कि इस नीति पर पुन: विचार कर एक ठोस नीति बनाई जाए, जो खेल एवं शारीरिक शिक्षा को शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं की पहचान करने में अधिक सार्थक हो।



नीति निर्धारक बिन्दु
(1) अधोसंरचना का विका
  • 1.1 प्रत्येक ग्राम में, पंचायत को कम से कम खो-खो, कबड्डी, कुश्ती एवं व्हॉलीवाल आदि ग्रामीण खेलों के लिए एक खेल मैदान चरणबद्ध तरीके से आगामी 5 वर्षों में तैयार करना होगा।
  • 1.2 आगामी 5 वर्षों में ऐसे जिला मुख्यालय जिनमें परिपूर्ण खेल परिसर नहीं है, उनमें परिपूर्ण खेल परिसर का निर्माण किया जाएगा।
  • 1.3 जहां पर प्राकृतिक संपदा उपलब्ध है वहां पर संसाधनों को विकसित किया जायेगा।
  • 1.4 राज्य के प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा कम से कम 3 प्रचलित खेल विधाओं को चिन्हित कर आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जाएगी। विश्वविद्यालयों के लिए खेलों का चिन्हांकन जिले के लिए खेलों का चिन्हांकन उपलब्ध अधोसंरचना तथा संभावित खिलाड़ियों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया जाए।
  • 1.5 प्रत्येक 5000 से अधिक आबादी वाले गांवों में आगामी पाँच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खेल मैदानों का निर्माण एवं उन खेल मैदानों पर खेल प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जायेगी। प्रदेश के प्रत्येक जिले में 3 खेल मैदान तैयार करने हेतु रू. 30,000/- प्रति मैदान तथा उन मैदानों पर 01 अथवा 02 क्रीड़ा निदेशकों को रू. 600/- प्रतिमाह मानदेय की व्यवस्था राज्य शासन द्वारा अतिरिक्त रूप से उपलब्ध कराई जावेगी।
  • अ. 5000 से अधिक आबादी वाले 381 गांवों में जहॉ स्कूल उपलब्ध है, स्कूल शिक्षा विभाग व्यायाम शिक्षक / संविदा शिक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित करेगा।
  • ब. जिन स्कूलों में व्यायाम शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं उनमें मानदेय पर व्यायाम शिक्षक की नियुक्ति शिक्षक पालक संघ/अन्य व्यवस्था के माध्यम से की जाएगी तथा यह मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग के समन्वय से सुनिश्चित किया जाएगा।
  • 1.6 नई कालोनियों के निर्माण के समय भी खेल मैदान के लिए आवश्यक भूमि अवश्य छोड़ी जाएगी।
  • 1.7 स्कूल शिक्षा विभाग नये स्कूलों को मान्यता तभी दे जबकि उनके पास निर्धारित मापदण्ड का खेल मैदान उपलब्ध हो।

(2) खिलाड़ियों की पहचान एवं प्रशिक्षण
  • 2.1 शालाओं में प्रशिक्षित पी.टी.आई. अथवा योगा शिक्षक की व्यवस्था कार्यरत शिक्षकों को खेल सम्बन्धी प्रशिक्षण देकर स्कूल शिक्षा/आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा समग्र कार्ययोजना बनाकर सुनिश्चित की जावेगी। संबंधित विभाग अपने कार्य के अतिरिक्त खेल गतिविधियां संचालित करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षित शिक्षक को प्रतिमाह राशि रू. 100/- मानदेय के रूप में अपने विभाग के बजट से देने की व्यवस्था करेंगे।
  • 2.3 प्रदेश की युवा प्रतिभाओं के चयन हेतु राज्य स्पोर्ट्स टेलेन्ट सर्च आयोजित करवाई जाएगी, जिसमें चिन्हित खेलों के लिए शारीरिक योग्यता, क्षमता तथा आयु आदि का आंकलन करते हुए संभावित प्रतिभावान खिलाड़ियों का कम उम्र से ही चिन्हांकन किया जायेगा, इस हेतु समस्त विभागों एवं सभी राज्य स्तरीय खेल संघो के सहयोग से चयनित खेलों में "राज्य एकीकृत खेल" आयोजित किये जायेंगे।

(3) राज्य स्तरीय खेल संघ एवं संस्थाएं
  • 3.1 उन्हीं खेल संघों को मान्यता एवं अनुदान प्रदेय होगा, जो निम्न अर्हताएं रखती है :-
  • उनकी जिले स्तर पर इकाईयाँ होनी चाहिए और नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित करती हो।
  • वे भारत सरकार द्वारा मान्य राष्ट्रीय फेडरेशन से अधिकृत/सम्बद्ध हो।
  • र्फम्स एवं सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हो।
  • 3.2 खेल संघों में जिला स्तर पर जिलाध्यक्ष/पुलिस अधीक्षक या उनके द्वारा नामांकित प्रतिनिधि एवं प्रदेश स्तर के खेल संघों में संचालक या उनके द्वारा अधिकृत कोई प्रथम श्रेणी स्तर के अधिकारी सम्मिलित किए जाना चाहिए।
  • 3.3 टीमों के चयन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से चयन समिति में एक उत्कृष्ट ख्याति प्राप्त खिलाड़ी को शासकीय पर्यवेक्षक के रूप में संचालक खेल द्वारा नामांकित किया जाएगा (जिसे मताधिकार नहीं होगा)। कोई भी राज्य स्तरीय खेल संघ जो इस मापदण्ड से सहमत नहीं होगा उसे शासकीय अनुदान/सहायता की पात्रता नहीं होगी।


(4) चिन्हित खेलों को बढ़ावा
  • 4.1 राष्ट्रीय खेलों में किए गए प्रदर्शन, प्राप्त पदकों तथा खेल सुविधाओं की वर्तमान में उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए जीतनेज खेलों पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा, जिसमें एथेलेटिक्स (विशिष्ट स्पर्धाओं में), कुश्ती, खो-खो, कबड्डी, व्हालीबॉल, तैराकी, केनोईंग-क्याकिंग, ताईक्वांडो, जूडो, हॉकी, बास्केटबाल, निशानेबाजी तथा घुड़सवारी शामिल है, इसकी खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा दो वर्ष में समीक्षा की जावेगी। उक्त खेलों में क्षेत्रीय विशिष्टता को दृष्टिगत रखते हुए प्रोत्साहित किए जाने का प्रयास किया जावेगा।
  • 4.2 चिन्हित खेलों का चयन ओलम्पिक, एशियन गेम्स तथा राष्ट्रीय खेलों के पदकों की संख्या के आधिक्य के आधार पर किया जायेगा। इसके साथ चयन करते समय क्षेत्रीय प्राकृतिक तथा मानव संसाधनों एवं अधोसंरचना को मद्देनजर रखा जायेगा। उदाहरणार्थ, नर्मदा, क्षिप्रा नदियों के किनारे तैराकी (इसमें राष्ट्रीय खेलों में कुल मिलाकर 200 से अधिक पदक होते है, केनाईंग-क्याकिंग जिसके 125 पदक होते हैं) इत्यादि।
  • 4.3 आदिवासी क्षेत्रों में कबड्डी, रस्साकसी, तेज दौड़ तथा उँचीकूद, कुश्ती, व्हॉलीवाल तथा धनुविर्द्या जैसे खेलों में अन्तरग्राम पंचायत प्रतियोगिताएं आयोजित की जावेगी। उक्त आयोजन के लिए खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा आदिवासी उपयोजना के अन्तर्गत विभागीय बजट में प्रावधान किया जावेगा।
  • 4.4 प्रदेश के समस्त जिलों में वहां प्रचलित खेलों को चयनित कर कम से कम एक प्रशिक्षक की व्यवस्था संविदा आधार पर की जावे।
  •  

(5) शिक्षा एवं खेलों में सामन्जस्य

  • 5.1 ऐसे खिलाड़ी जो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व करने के कारण उन तिथियों में वाषिर्क परीक्षा में बैठने से चूक गए हो, उनके लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • 5.2 माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं आदिवासी विकास विभाग के स्कूल में एक शारीरिक शिक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए 40 मिनिट का एक खेल पीरियड अनिवार्य किया जाएगा।
  • 5.3 स्कूल शिक्षा एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के स्कूलों में संविदा शिक्षकों की भर्तीमें खेलों में प्रावीण्यता रखते वाले खिलाड़ियों को 5 से 10% तक का प्राप्तांकों में अधिभार देने हेतु विभागीय भतीर् नियमों में आवश्यक संशोधन किए जावेंगे।



(6) खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और पुरस्कार
  • 6.1 ओलम्पिक एवं एशियन खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों द्वारा पदक अर्जित करने पर विभाग द्वारा व्यक्तिगत विधा एवं दलीय विधा के खिलाड़ियों को उपयुक्ततानुसार पुरस्कार एवं सम्मान के लिए राशि का निर्धारण कर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त किया जावेगा।
  • 6.2 व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश : व्यवसायिक महाविद्यालय जैसे चिकित्सा, इन्जीनियरिंग आदि में ऐसे खिलाड़ियों के लिए जिन्होंने अधिकृत राष्ट्रीय जूनियर/सीनियर स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए विगत तीन वर्षों में स्वर्ण, रजत अथवा कांस्य पदक प्राप्त किया हो, उनकों प्राप्तांकों पर क्रमश: 10, 6 एवं 4 प्रतिशत का अधिभार दिया जावेगा। यह लाभ खिलाड़ी को सिर्फ एक ही बार प्रदान दिया जावेगा। इस उपलब्धि का प्रमाण-पत्र संचालक, खेल एवं युवक कल्याण द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित होना अनिवार्य होगा।
  • 6.3 अन्तर्राष्ट्रीय खेलों जैसे - ओलम्पिक, र्वल्डकप, अधिकृत वर्ल्ड चैम्पियनशिप, एशियन चैम्पियनशिप एवं राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को शासकीय सेवा में उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित कर नियुक्ति दी जावेगी। भविष्य में विक्रम पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ी को आगामी वर्ष से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित कर शासकीय सेवा में नियुक्ति दी जावेगी।
  • 6.4 उत्कृष्ट खिलाड़ी/उनके अभिभावकों की पदस्थापना उन्हीं स्थानों पर यथासम्भव की जावेगी, जहां संबंधित खेल की राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं हो।
  • 6.5 सम्मान निधि प्राप्त खिलाड़ी व अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए खिलाड़ी व विक्रम, विश्वामित्र एवं अर्जुन पुरस्कारों से अलंकृत खिलाड़ियों/प्रशिक्षकों को स्थानीय कार्यक्रमों में विशिष्ट अतिथियों की तरह राष्ट्रीय पर्व एवं मुख्य खेल कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाएगा।
  • 6.6 अन्तराष्ट्रीय/राष्ट्रीय खेलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को शासकीय अधिकारियों के समान उपचार प्रदान किया जावेगा।
  • 6.7 मान्यता प्राप्त अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक प्राप्त करने वाले 55 वर्ष से अधिक आयु के खिलाड़ी को रू. 5,000/- प्रतिमाह सम्मान निधि प्रदान की जावेगी।


(7) खिलाड़ी, प्रशिक्षक, निर्णायक एवं तकनीकी अधिकारियों का प्रशिक्षण एवं विकास
  • 7.1 खेल विभाग द्वारा ऐसे प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों को जिनकी भर्ती खिलाड़ी के आधार पर हुई है अथवा ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जो खेलों के विकास हेतु बेहतर सेवा दे सकते हैं, उन्हें खेल विभाग में प्रतियोगिता के आयोजन/प्रशिक्षण/सहयोग हेतु एक वर्ष में अधिकतम 3 माह के समय तक संबंद्ध किया जा सकेगा। तथापि उनका
  • वेतन उनके मूल विभाग से ही निकलेगा। इसमें विभाग इस बात के लिए बाध्य रहेगा कि ऐसे अधिकारी की सेवायें खेल विभाग को मांग आने पर तत्काल प्रदान करेगा।
  • 7.2 जिला खेल एवं युवक कल्याण अधिकारियों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं यथा कार्यालय एवं उपकरण मुहैया कराते हुये स्वतंत्र कार्यालय स्थापित किये जायेंगे।


(8) खेलों के लिए संसाधनों का सृजन
  • 8.1 क्रीड़ा परिषद को परिवर्तित कर मध्यप्रदेश खेल प्राधिकरण गठित किया जाएगा। ऐसी ही व्यवस्था जिला स्तर पर भी की जावेगी। विभागीय स्टेडियम एवं खेल परिसरों के समुचित स्वायत्ता/स्वामित्व के अन्तर्गत इन संस्थाओं को परिक्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों का नियोजन करना, जैसे- विज्ञापन के होर्डिंग्स, दुकानों का निर्माण, कार्यालयों की व्यवस्था आदि के लिए स्थान उपलब्ध कराने एवं खेल प्रशालों/परिसरों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न स्वरूप के लिए समाज के लिए हितकारी आयोजनों की अनुमति देकर आवश्यक कोष/निधि की व्यवस्था की जा सकेगी।

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